Shri Vedic Gau Dham

Shri Vedic Gau Dham Shri Vedic Gaw Dham is started by The Vedic Prabhat Foundation with a view of serving the Gaumata wit Its a trust for cows in India.

16/10/2021

बलियाग कार्तिक मास कल्पवास शिविर 2021
🌹🌹🌹🌹*कार्यक्रम दर्पण*🌹🌹🌹🌹

16/10/2021

बलियाग कार्तिक मास कल्पवास शिविर 2021
21 अक्तूबर से 19 नवम्बर 2021 पर्यन्त
धर्मानुरागी देवियो-सज्जनो !
बलियाग भूमि मे पूज्य महाराजश्री के सानिध्य मे कार्तिक मास कल्पवास शिविर एवं विविध पर्व, उत्सवो का मास पर्यन्त आयोजनो मे आपकी उपस्थिति निवेदित है।

10/09/2021

द वैदिक प्रभात फाउंडेशन
के तत्वावधान में आयोजित नेत्र चिकित्सा शिविर
11/ सितम्बर/ 2021
समय: प्रात 9:00 से 4:00 बजे तक
स्थान: साहू भवन, नया चौक जापलिनगंज, बलिया
डाक्टर अभिषेक गुप्ता
MBBS (MS)

01/06/2020

This One pic is going viral on social media .. some confused Hindus dont understand ....Jezus is not becoming HINDU, these images are to show "sameness" and to ..FOOL Hindus so that they can convert easily

04/05/2020
03/05/2020
02/05/2020

गाय शांति से गौशाला मे रहती थी, बारिश में गाय ने कुत्ते को शरण दे दी। समय के साथ सांप बिच्छू सूअर गधा भी गौशाला मे शरण लेते गए।
संख्या अधिक हो जाने से सबको कष्ट होने लगा तो सारे शरणार्थी मिल कर फैसला करते हैं कि सबसे ज्यादा जगह तो गाय ही घेरे है तो क्यों न इस गाय को ही भगा दें

21/02/2020

स्वदेशिकस्यैव च नामकीर्तनम्
भवेदनन्तस्यशिवस्य कीर्तनम् |
स्वदेशिकस्यैव च नामचिन्तनम्
भवेदनन्तस्यशिवस्य नामचिन्तनम् ||

09/11/2019

श्रीराम इस राष्ट्र के प्राणतत्व हैं। भारत की भोर का प्रथम स्वर हैं - राम। जो राष्ट्र का मंगल करे, वही राम है। जो लोकमंगल की कामना करे, वही राम है। जहां नीति और धर्म है, वहां श्रीराम हैं।

संयम, शांति, सौहार्द, सांप्रदायिक-एकता एवं समन्वय ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है ! श्रीराम साक्षात धर्म विग्रह हैं ! अतः हम परस्पर प्रीति एवं एकात्मता के दिव्य भाव में स्थिर रहें ..!
माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय से अभिभूत हैं !
"रामो राजमणिः सदा विजयते, रामं रमेशं भजे ..."।

#राम_मंदिर

08/11/2019

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आपके घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखने लगता है। तुलसी का पौधा ऐसा है जो आपको पहले ही बता देगा कि आप पर या आपके घर परिवार को किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार माना जाए तो ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है। क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नही होता। अगर ज्योतिष की माने तो ऐसा बुध के कारण होता है। बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़ पौधों का कारक ग्रह माना जाता है।

बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है। अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा उत्तरोत्तर बढ़ता रहता है। बुध के प्रभाव से पौधे में फल फूल लगने लगते हैं।प्रतिदिन चार पत्तियां तुलसी की सुबह खाली पेट ग्रहण करने से मधुमेह, रक्त विकार, वात, पित्त आदि दोष दूर होने लगते है मां तुलसी के समीप आसन लगा कर यदि कुछ समय हेतु प्रतिदिन बैठा जाये तो श्वास के रोग अस्थमा आदि से जल्दी छुटकारा मिलता है.

घर में तुलसी के पौधे की उपस्थिति एक वैद्य समान तो है ही यह वास्तु के दोष भी दूर करने में सक्षम है हमारें शास्त्र इस के गुणों से भरे पड़े है जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आती है यह तुलसी.... कभी सोचा है कि मामूली सी दिखने वाली यह तुलसी हमारे घर या भवन के समस्त दोष को दूर कर हमारे जीवन को निरोग एवम सुखमय बनाने में सक्षम है माता के समान सुख प्रदान करने वाली तुलसी का वास्तु शास्त्र में विशेष स्थान है हम ऐसे समाज में निवास करते है कि सस्ती वस्तुएं एवम सुलभ सामग्री को शान के विपरीत समझने लगे है महंगी चीजों को हम अपनी प्रतिष्ठा मानते है कुछ भी हो तुलसी का स्थान हमारे शास्त्रों में पूज्यनीय देवी के रूप में है तुलसी को मां शब्द से अलंकृत कर हम नित्य इसकी पूजा आराधना भी करते है इसके गुणों को आधुनिक रसायन शास्त्र भी मानता है इसकी हवा तथा स्पर्श एवम इसका भोग दीर्घ आयु तथा स्वास्थ्य विशेष रूप से वातावरण को शुद्ध करने में सक्षम होता है शास्त्रानुसार तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधे मिलते है उनमें श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी मुख्य रूप से विद्यमान है सबके गुण अलग अलग है शरीर में नाक कान वायु कफ ज्वर खांसी और दिल की बिमारिओं पर खास प्रभाव डालती है.

वास्तु दोष को दूर करने के लिए तुलसी के पौधे अग्नि कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व से लेकर वायव्य उत्तर-पश्चिम तक के खाली स्थान में लगा सकते है यदि खाली जमीन ना हो तो गमलों में भी तुलसी को स्थान दे कर सम्मानित किया जा सकता है.

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