27/02/2026
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुह! 🕌🤲
मैं हूँ मस्जिद बिलाल चक... हाँ वही जो पहले जामा मस्जिद चक के नाम से जानी जाती थी।
आज मैं अपने नए नाम और नई खूबसूरत शक्ल में आपके सामने हाजिर हूँ। माशाअल्लाह!
पहले मेरी दीवारों में जगह बहुत कम थी। नमाज़ी भाइयों को बाहर खड़े होना पड़ता था, तंग होकर नमाज़ पढ़ते थे। दिल चाहता था कि सबको सुकून से जगह मिले, लेकिन मुमकिन नहीं था।
फिर अल्लाह के फज़्ल से 2022 में मुझे शहीद करके दोबारा बनाया गया। अब मैं बहुत बड़ी, खूबसूरत और रूहानी सुकून से भरी हुई हूँ। मेरी छत ऊँची है, फर्श चौड़ा है, रोशनी है, हवा है, और सबसे बढ़कर अल्लाह की रहमत है।
अब मेरा नाम है मस्जिद बिलाल चक – हज़रत बिलाल रज़ि. की याद में, जिनकी अज़ान दिल को छू जाती थी।
और हाँ, ये फेसबुक पेज भी अब मेरा नया नाम ले चुका है – Masjid Bilal Chak। पुराना नाम बदल दिया गया है ताकि सबको पता चले कि अब मैं नई पहचान के साथ हूँ।
मैं आप सबको दिल से दावत देती हूँ:
मेरे अंदर पाबंदी से नमाज़ पढ़िए
अपने बच्चों को यहाँ लाइए
मुझे अपनी इबादतगाह बनाइए
और अल्लाह से दुआ कीजिए कि ये जगह क़यामत तक क़ायम रहे
अल्लाह तआला आप सबको अपनी रहमतों से नवाज़े,
आप सबकी नमाज़ें क़बूल फरमाए, और इस गाँव को हमेशा ईमान व अमन से भरपूर रखे। आमीन या रब्बल आलमीन!
अगर आप मेरे साथ हैं, तो कमेंट में "अल्लाहु अकबर" या "माशाअल्लाह" लिखकर बताइए,
और इस पोस्ट को ज़रूर शेयर कीजिए ताकि सब जान सकें कि हमारी मस्जिद अब मस्जिद बिलाल चक है! ❤️🕌
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