Swami Shri Ravi Giri ji

Swami Shri Ravi Giri ji अनन्त श्री विभूषित श्री श्री 1008 श्री सिद्धनाथ पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा

त्रिवेणीं माधवं सोमं भरद्वाजं च वासुकिम्। वन्देऽक्षयवटं शेषं प्रयागं तीर्थनायकम्।।माघ मेला प्रयागराज 2026 के शुभारंभ पर ...
06/01/2026

त्रिवेणीं माधवं सोमं भरद्वाजं च वासुकिम्।
वन्देऽक्षयवटं शेषं प्रयागं तीर्थनायकम्।।
माघ मेला प्रयागराज 2026 के शुभारंभ पर समस्त गूरूमूर्तियों संग तीर्थराज की पंचकोशी परिक्रमा में शामिल हो त्रिवेणी संगम का पूजन इत्यादि कर माघ मेला 2026 का शुभारंभ किया साथ ही श्रद्धालुओं,कल्पवासियों के लिए शुभ मंगल की कामना भगवान श्री सिद्धनाथ महादेव जी से की,
सभी को आशीर्वाद,साधुवाद,ॐ नमों नारायण

श्री राम विवाह की अनंत शुभकामनाएँ,साधुवाद
25/11/2025

श्री राम विवाह की अनंत शुभकामनाएँ,साधुवाद

श्रीमद् भागवत कथा सार—- श्री सद्गुरूदेव भगवान की वाणी **********************************************सदुरुदेव भगवान कहते ...
19/11/2025

श्रीमद् भागवत कथा सार—- श्री सद्गुरूदेव भगवान की वाणी
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सदुरुदेव भगवान कहते है की संसार में दो ही आनंद है:-
1-विषयानन्द और ब्रह्मानंद।विषयों के भोग से जो आनंद मिलता है,वह है विषयानंद है । इसके विपरीत,आँख बंद करके सुषुप्त-अवस्था में अथवा समाधि-अवस्था में जो महापुरुषों को प्राप्त होता है,वह ब्रह्मानंद हैं।
ब्रह्मानंद की अनुभूति कैसे हो?
श्री सदुरूदेव भगवान अपने श्रीमुख से कहते हैं कि ब्रह्मानंद की प्राप्ति हेतु पहले आसान को जीतो जितासन बनो,जो आसान आपको अच्छा लगे उसी आसान को सिद्ध करो जैसे:-व्रजासन,पद्मासन,सुखासन।क्योंकि जबतक आसन सिद्ध नहीं होगा,तब तक शरीर का ध्यान बना रहेगा इसलिए पहले
‘जितासनः’उसके बाद ‘जितश्वासः फिर जितेन्द्रियः
“जितासनो जीतश्वासो जितसंगों जीतेन्द्रियः “
जीतश्वासः—— श्वास का संबंध मन से है श्वास पर जितना नियंत्रण होगा,उतना ही मन भी तुम्हारा शांत होगा।
इसलिए प्राणायम का खूब अभ्यास करना चाहिए
“प्राणायामःपरं बलम्” भगवान ने कहा है प्राणायाम में बड़ा बल है
जितेन्द्रियः——-असंग हो जाओ,असंग होकर ध्यान लगाओ
तभी मनुष्य जीवन जीने का लाभ मिल सकता है

श्री सदगुरूदेव भगवान
महामंडलेश्वर
पूज्यपाद् स्वामी श्री रवि गिरि जी महाराज

श्रीमद् भागवत सार:-पूज्य स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^“भगवता प्रोकतं भागवतम्” जो भगवा...
18/11/2025

श्रीमद् भागवत सार:-पूज्य स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज
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“भगवता प्रोकतं भागवतम्” जो भगवान के गूरू के मुखारविन्द से कहा गया हो वही भागवत है। भागवत में जो श्रीमद् जुड़ा है वही सक्षात भगवती माँ महालक्ष्मी श्री राधा जी ही हैं।
भागवत की कथा चिन्मयी है,अद्भुत हैं।
श्री सद्गुरूदेव भगवान कहते हैं की,संसार में जितने भी ग्रन्थ हैं उन सभी ग्रन्थों में जब उसका समारंभ होता है तो किसी देवी या देवता की स्तुति की जाती है,अपितु दुनिया में एकमात्र ऐसा श्रीमद्भागवत महाग्रन्थ है जिसके आरम्भ में किसी देवी देवता की नहीं केवल सत्य की वंदना की गई है, “सत्यं परं धीमहि”

सत्य का अर्थ श्री कृष्ण है,श्रीमद् भागवत जी में भगवान श्री कृष्ण को सत्य सत्य कहकर ही पुकारा गया है, गोविन्द जब देवकी माँ गर्भ में आये तो सबरे देवताओं ने गोविंद की स्तुति की तो वहाँ भी सत्य सत्य कहकर ही पुकारा
सत्यव्रतं सत्यप्ररं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये ।
सत्यस्य सत्यमृतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं त्वां शरणं प्रपन्नाः।।

इसलिए गुरूदेव भगवान बता रहे हैं की , सत्य ही नारायण है
नारायण ही सत्य है,राम ही सत्य है, कृष्ण ही सत्य है
तुलसी बाबा की चौपाई है……..धर्म न दूसर सत्य सामना
“There is no religion greater than truth”
“श्री गुरुदेव भगवान कहतें है की,जीवन में ज़्यादा से ज्याद सत्य बोलने का संकल्प लें।यही जीवन का सार है,यही जीवन का परमतत्व है।
श्रीमद् भागवत जी में सत्य का ही तो प्रतिपादन है

वेदों का नाम है निगम…निगमकल्पतरोर्गलितं वेदरूपी इस विशाल कल्पतरु का परिपक्व फल श्रीमद्भागवत है।
भागवत रूपी फल में भी शुक्देवरूपी तोते ने चोंच मार दी
शुकमुखादमृतद्रवसयुंतम् यह श्रीमद् भागवत शुक-मुख-विगलित
फल है शुकदेव जी परमहंस है जो जन्म लेते ही प्रवजन्त हो गए
यं प्रव्रजन्तमनुपेतमपेतकृत्यं,जिनका वैराग्य उच्चकोटि का हे की परिस्थिति विपरीत हो तो वैराग्य बहुतों को चढ़ता है पर शुकदेव जी का महाराज का तो सहज व स्वाभाविक वैराग्य है।
जिनका उपनयन-संस्कार भी अभी तक नहीं हुआ परमात्मा जिन्हे दर्शन देने के लिए स्वयं माँ की गर्भ में आ पहुँचे थे। शुकदेव जी विशुद्ध महात्मा है तो सदगुरुदेव भगवान कहते है की ऐसे सर्वभूतहृदयसम्राट श्री शुकदेव जी के पादपाद्मों में हम बारम्बार प्रणाम करते हैं श्री शुकदेव जी ने यह भागवत का सुंदर दीपक प्रज्वलित कर दिया।
प्राणीमात्र का परमधर्म एक ही है-भगवान् के चरणों में प्रेम करना
भगवान से प्रेम तो सब कर रहें हैं,परन्तु जब कोई काम
पड़ता है।भक्ति कैसी हो? “अहैतुकी हेतु रहित निष्काम भक्ति होनी चाहिए ‘’अहैतुकी अप्रतिहता’’
भगवान के प्रति स्वाभाविक प्रीति हो जिस प्रकार सूर्योदय होने पर कमल खिलता है,चन्द्रोदय होने पर कुमुदिनी विकसित होती है,इसका कोई जवाब नहीं उनका स्वभाव है।ऐसी ही प्रभु के प्रति हम सब की सहज प्रीति होवे,स्वार्थभरी प्रीति नहीं।

श्री सद्गुरूदेव भगवान कहते हैं की
भक्ति महारानी के ही दो बेटे है ज्ञान और वैराग्य।जब भगवान में भक्ति सुदृढ़ हो जाएगी,तो परमात्मा के स्वरूप का ज्ञान अपने आप ही हो जाएगा और जगत् से वैराग्य स्वतः हो जाएगा
‘’जनयत्याशु वैराग्यं ज्ञानं च यदहैतुकम्”

पूज्य सद्गुरुदेव भगवान
महामंडलेश्वर
पूज्यपाद् स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज
श्री सिद्धनाथ महादेव मठ मन्दिर
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा,बहराइच
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श्री सिद्धनाथ मन्दिर
Swami Shri Ravi Giri ji

श्रीमद् भागवत कथा माहात्मय सार स्वामी रवि गिरि पूज्य सद्गुरदेव भगवान ने कहा:-श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है।भग...
17/11/2025

श्रीमद् भागवत कथा माहात्मय सार स्वामी रवि गिरि

पूज्य सद्गुरदेव भगवान ने कहा:-श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है।भगवान व्यास-सरीखे भवत्स्वरूप महापुरुष को जिसकी रचना से ही शान्ति मिली;जिसमें सकाम कर्म,निष्काम कर्म,साधन ज्ञान,सिद्धज्ञान,साधन भक्ति,साध्यभक्ति,वैधी भक्ति,प्रेमा भक्ति,मर्यादा मार्ग,अनुग्रह मार्ग,द्वैत,अद्वैत और द्वैताद्वैत आदि सभी का परम रहस्य मधुरता के साथ भरा हुआ है। इसके प्रत्येक अंग से भगवतभावपूर्ण पारमहंस ज्ञान-सुधा-सरिता की बाढ़ रही है-‘यस्मिन् पारमहंस्यमेकममलं ज्ञानं परं गीयते। ' भगवान के मधुरतम प्रेम रस का छलकता हुआ सागर है-श्रीमद्भागवत।परम मधुर भगवद् रस से भरा हुआ है
‘स्वादु-स्वादु पदे-पदे’ ऐसा ग्रंथ बस,यही एक है।श्रीमद् भागवत तो विद्या का भण्डार है ‘विद्या भागवतावधि’

श्री सद्गुरुदेव भगवान ने कथा के माहात्म्य को बताते हुए कहते हैं की,जो व्यक्ति प्रतिदिन भागवत के आधे श्लोक या चौथाई श्लोक का पाठ अथवा श्रवण करता है उसे एक हज़ार गोदान का फल मिलता है”पठेत् शृणोति वा भक्त्या गोसहस्रं फलं लभेत्”

श्री सदुरुदेव ने कहा कि,श्रीमद् भागवत की कथा कभी मनोरंजन की दृष्टि से नहीं सुननी चाहिए।इस दृष्टि से जो लोग कथा सुनते हैं वे अपराध करते हैं,हिंदू वैदिक वाङ्मय का सर्वोत्तम ग्रंथ है।इस भावना से सुनें कि हमारे जीवन में किंचित् परिवर्तन आवे,गोविंद के चरणों में हमारी निष्ठात्मक प्रीति हो,इस भाव से सुनी जाने वाली श्री भागवत कथा ही प्रभावी होती है।

आनंद जो है वो परमात्मा का रूप है।आत्मा के ज्ञान का स्वरूप है आनंद।इसलिए सत् भी श्रीकृष्ण है,चित् भी कृष्ण है और आनंद भी श्री कृष्ण है ।

सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे!
तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: !!
जो विश्व को बनाते हैं,उसका पालन करते हैं उसको लय कर देते है जिनकी कृपा विलासिता से सारा संसार चलता है और-तापत्रय विनाशाय-तीनों प्रकार के तापों(दैहिक,दैविक,भौतिक)को नष्ट करने की जिसमें सामर्थ्य है वो श्री कृष्ण ही हैं।

पूज्य श्री सद्गुरुदेव भगवान ने कहा की…. एक भी व्यक्ति संसार में ऐसा नहीं है,जिसके बारे में हम यह कह सकें वह सुखी है

कोई तन दुःखी,कोई मन दुःखी,कोई धन बिन रहत उदास।
थोड़ा थोड़ा सब दुःखी, सुखी राम के दास
तो भैया धनी तो वही व्यक्ति है जिसके पास राम नाम का धन है गोविंद के नाम का धन है।गोविन्द के नाम का धन जिसने कमा लिया,वही सबसे बड़ा धनी है ।
आध्यात्मिक ताप,आधिदैविक ताप तथा आधिभौतिक ताप तीनों को विनष्ट करने की जिन श्री कृष्ण नाम में शक्ति है ऐसे श्री कृष्ण को हम नमस्कार करते हैं ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

महामंडलेश्वर
स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा

19/10/2025

पूज्य सद्गुरुदेव श्री सिद्धनाथ पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज जी को जन्मदिन की अनन्त शुभकामनाएं...
महादेव आपको सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रखें।

“श्री जगन्नाथ यात्रा”आज के मुख्य समाचार पत्रों में प्रकाशित महाराज जी से जुड़ने के लिए पेज को फ़ॉलो करें
28/06/2025

“श्री जगन्नाथ यात्रा”
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