17/11/2025
श्रीमद् भागवत कथा माहात्मय सार स्वामी रवि गिरि
पूज्य सद्गुरदेव भगवान ने कहा:-श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है।भगवान व्यास-सरीखे भवत्स्वरूप महापुरुष को जिसकी रचना से ही शान्ति मिली;जिसमें सकाम कर्म,निष्काम कर्म,साधन ज्ञान,सिद्धज्ञान,साधन भक्ति,साध्यभक्ति,वैधी भक्ति,प्रेमा भक्ति,मर्यादा मार्ग,अनुग्रह मार्ग,द्वैत,अद्वैत और द्वैताद्वैत आदि सभी का परम रहस्य मधुरता के साथ भरा हुआ है। इसके प्रत्येक अंग से भगवतभावपूर्ण पारमहंस ज्ञान-सुधा-सरिता की बाढ़ रही है-‘यस्मिन् पारमहंस्यमेकममलं ज्ञानं परं गीयते। ' भगवान के मधुरतम प्रेम रस का छलकता हुआ सागर है-श्रीमद्भागवत।परम मधुर भगवद् रस से भरा हुआ है
‘स्वादु-स्वादु पदे-पदे’ ऐसा ग्रंथ बस,यही एक है।श्रीमद् भागवत तो विद्या का भण्डार है ‘विद्या भागवतावधि’
श्री सद्गुरुदेव भगवान ने कथा के माहात्म्य को बताते हुए कहते हैं की,जो व्यक्ति प्रतिदिन भागवत के आधे श्लोक या चौथाई श्लोक का पाठ अथवा श्रवण करता है उसे एक हज़ार गोदान का फल मिलता है”पठेत् शृणोति वा भक्त्या गोसहस्रं फलं लभेत्”
श्री सदुरुदेव ने कहा कि,श्रीमद् भागवत की कथा कभी मनोरंजन की दृष्टि से नहीं सुननी चाहिए।इस दृष्टि से जो लोग कथा सुनते हैं वे अपराध करते हैं,हिंदू वैदिक वाङ्मय का सर्वोत्तम ग्रंथ है।इस भावना से सुनें कि हमारे जीवन में किंचित् परिवर्तन आवे,गोविंद के चरणों में हमारी निष्ठात्मक प्रीति हो,इस भाव से सुनी जाने वाली श्री भागवत कथा ही प्रभावी होती है।
आनंद जो है वो परमात्मा का रूप है।आत्मा के ज्ञान का स्वरूप है आनंद।इसलिए सत् भी श्रीकृष्ण है,चित् भी कृष्ण है और आनंद भी श्री कृष्ण है ।
सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे!
तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: !!
जो विश्व को बनाते हैं,उसका पालन करते हैं उसको लय कर देते है जिनकी कृपा विलासिता से सारा संसार चलता है और-तापत्रय विनाशाय-तीनों प्रकार के तापों(दैहिक,दैविक,भौतिक)को नष्ट करने की जिसमें सामर्थ्य है वो श्री कृष्ण ही हैं।
पूज्य श्री सद्गुरुदेव भगवान ने कहा की…. एक भी व्यक्ति संसार में ऐसा नहीं है,जिसके बारे में हम यह कह सकें वह सुखी है
कोई तन दुःखी,कोई मन दुःखी,कोई धन बिन रहत उदास।
थोड़ा थोड़ा सब दुःखी, सुखी राम के दास
तो भैया धनी तो वही व्यक्ति है जिसके पास राम नाम का धन है गोविंद के नाम का धन है।गोविन्द के नाम का धन जिसने कमा लिया,वही सबसे बड़ा धनी है ।
आध्यात्मिक ताप,आधिदैविक ताप तथा आधिभौतिक ताप तीनों को विनष्ट करने की जिन श्री कृष्ण नाम में शक्ति है ऐसे श्री कृष्ण को हम नमस्कार करते हैं ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
महामंडलेश्वर
स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा