Parwana

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Parwana Parwana is a mid sized village located in the district of Samastipur in the state of Bihar in India.

It has a population of about 3478 persons living in around 684 households.

25/09/2018

एससी-एसटी एक्ट में आरोपी के क्या हैं कानूनी अधिकार,आरोपी कैसे करें अपना बचाव
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एससी-एसटी एक्ट क्या हैं?
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सबसे पहले तो यह समझें कि एससी-एसटी एक्ट क्या हैं? SC/ST Act को 11 सितम्बर 1989 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया था। यह नियम पूरे भारत में 30 जनवरी 1990 से लागू किया गया। यह अधिनियम उस हर एक व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नही हैं तथा वह व्यक्ति इस वर्ग के सदस्यों का उत्पीड़न करता हैं। इस अधिनियम में 5 अध्याय एवं 23 धाराएँ हैं।

यहाँ गौर करने वाली बात यह हैं कि इसमें प्रत्येक धारा के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान हैं। SC / ST Act के तहत अपराधों के लियें दोषी व्यक्ति को 6 माह से लेकर 5 साल या इससे भी ज़्यादा की सजा के साथ अर्थदण्ड (फाइन) का भी प्रावधान हैं। क्रूरतापूर्ण हत्या के अपराध के लिए मृत्युदण्ड की सजा हैं।

एससी-एसटी एक्ट लगने पर क्या हैं आरोपी के कानूनी अधिकार
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सबसे पहले सम्बंधित थाने से यह जानकारी ले कि एससी-एसटी एक्ट की कौन सी धारा के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई हैं। अगर उन दर्ज धाराओं में सात साल से कम की सजा हैं तो उनमें बिना नोटिस के गिरफ्तारी नहीं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन किया जाएगा।

क्या है अरनेश कुमार मामले में दिशानिर्देश
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सुप्रीम कोर्ट ने अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दो जुलाई 2014 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि सीआरपीसी की धारा 41(1) के तहत जिन मामलों में अभियुक्त की गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है, ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी अभियुक्त को एक नोटिस भेजकर तलब करेगा। यदि अभियुक्त नोटिस का अनुपालन करता है तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी की अनिवार्यता का कारण दर्ज नहीं करता। और यह मजिस्ट्रेट के परीक्षण का विषय होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का पालन एससी-एसटी एक्ट में भी किया जायेगा।

हाल में एक याचिका न्यायमूर्ति अजय लाम्बा व न्यायमूर्ति संजय हरकौली की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए पेश हुई। यह याचिका गोण्डा के राजेश मिश्रा ने दाखिल की थी। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण पर संशोधित अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी गई थी। साथ ही विवेचना के दौरान याची की गिरफ्तारी न किए जाने की भी मांग की गई थी। संसद ने अधिनियम में संशोधन 17 अगस्त 2018 को पास किया था और राजेश मिश्रा के खिलाफ एफआईआर इसी संशोधित अधिनियम के तहत दर्ज हुई थी।

न्यायालय ने मिश्रा की याचिका को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि प्राथमिकी में जो धाराएं लगी हैं, उनमें सजा सात साल तक की ही है। लिहाजा गिरफ्तारी से पूर्व अरनेश कुमार मामले में दिए दिशानिर्देशों का पालन किया जाए। इसका मतलब हैं कि अगर सात साल से कम की सजा वाली धाराएं लगी हैं तो पहले तो आपको पुलिस गिरफ्तार नही करेगी और अगर फिर भी कर लेती हैं तो आप कोर्ट से तुरन्त जमानत ले सकते हैं। इसमे धारा अग्रिम जमानत के साथ धारा 482 का लाभ लेते हुए पुलिस कारवाई रुकवाने का भी प्रावधान हैं।

एससी-एसटी एक्ट फर्जी पाए जाने पर पीड़ित के अधिकार
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अदालत में झूठा बयान देना या पुलिस के सामने झूठे एफआईआर दर्ज कराने के मामले में कानून में ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त प्रावधान है। जो ST/SC एक्ट के तहत झूठा मामला पाए जाने पर भी लागू होता हैं। ऐसे मामलों में आईपीसी की धारा-182 के तहत केस दर्ज किया जाता है। किसी भी मामले में झूठा केस दर्ज कराने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा-182 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर छह महीने तक कैद का प्रावधान किया गया है। आप आईपीसी की धारा-193 का भी उपयोग उक्त शख्स के खिलाफ कर सकते है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक कैद का प्रावधान है। ऐसा झूठा बयान जिससे कि किसी शख्स को उम्रकैद तक हो सकती हो तो वैसे मामले में आईपीसी की धारा-195 के तहत केस दर्ज किया जाता है। इन धाराओं के बाद आप मानहानि का दावा भी दीवानी अदालत में कर सकते हैं और मुआवजा हासिल कर सकते हैं।

एससी-एसटी एक्ट में एक आखिरी झूठ यह फैलाया जा रहा हैं कि इस मामले में इंवेस्टिगेटिंग अफसर (IO) और मामले की सुनवाई करने वाला जज दलित होंगे, जो कि सरासर झूठ हैं।

25/01/2018

मिथिला में कोई भी काम करने से पहले दस किस्म के "महानुभाव" से सलाह लेने की संस्कृति रही है. गांव के भोज से लेकर महानगर के मैथिली आयोजन तक यही स्थिति नजर आती है. शुरुआत में जो बैठकें होती हैं उनमें सबसे पहले बखेड़ा करने वालों को बुलाया जाता है, ताकि उनका मुंह बंद किया जा सके. वरना ये बखेड़ा करने वाले कब किस मुद्दे पर आपके काम को खारिज कर दिया जायेगा कहना मुश्किल है...

वस्तुतः यहां काम करने की संस्कृति ही नहीं है. बैठकर इंतजार करने की संस्कृति है. किसी ने कुछ किया नहीं कि उसकी टांग खिंचाई शुरू... हमेशा काम करने वाला ही कटघड़े में नजर आता है. जो कुछ नहीं करता, केवल बखेड़ा करता है, वह महान माना जाता है. दरअसल यही असली ब्राह्मणवाद है, इसे चुनौती देने और काम की संस्कृति को आगे बढ़ाने की जरूरत है. हां, इसके लिए "महानुभाव" को दरकिनार करके चलना पड़ेगा .

अब सिर्फ काम औऱ काम करने की जरूरत है. बखेड़ावादी तो अपना काम करते रहेंगे !

History Of  "CHAURCHAN"-----------------------------------In Mithilanchal, worshipping Chandrama on this day was started...
25/08/2017

History Of "CHAURCHAN"
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In Mithilanchal, worshipping Chandrama on this day was started by Hemangad Thakur, the king of Mithila. He was going to Delhi to get back his kingdom taken over by the Moghal Emperor. On his way he found people throwing stones at the Chandrama and prayed to Chandrama to help him in getting back his kingdom. He did get back his kingdom and then onwards saw to it that Chandrama is worshipped on this day.

The pooja of "Rohini sahit Chaturthi Chandra" is performed after day-long fasting by gents/ladies in evening when the Chandrama is visible as well as when Chauth tithi is prevailing. Panch-devata, Vishuna/Gauri are also worshipped.Specialties include Dahi in new earthen pots, cookies including Pedakia, poori and fruits in bamboo dalia. Ashtdal Aripan is used for the pooja which is drawn in the courtyard under open sky and facing west.

14/11/2016

!! सामाचकेवा !!

एक चुगलखोर व्यक्ति राजा कृष्ण से कहता है कि तुम्हारी पुत्री साम्बवती चरित्रहीन है. उसने वृंदावन से गुजरते वक्त एक ऋषि के साथ संभोग किया है. कृष्ण अपनी पुत्री के बारे में यह खबर सुनकर गुस्से में आग-बबूला हो जाते हैं. वे यह पता करने की भी कोशिश नहीं करते कि इस बात में कितनी सच्चाई है. वे तत्काल अपनी पुत्री और उस ऋषि को शाप देते हैं कि दोनों मैना में बदल जाये. पुत्री मैना बन जाती है तो उसके पति चक्रवाक को भी वियोग सहा नहीं जाता है. वह भी मैना का रूप धर लेता है. उसे अपनी पत्नी पर पूरा भरोसा है. वह नहीं मानता कि उसकी पत्नी उसे धोखा दे सकती है.
अब तीन प्राणी चिड़िया में बदल गये हैं. यह देख कर उस युवती का भाई साम्ब परेशान हो जाता है. वह तय करता है कि इन लोगों को पक्षी योनि से मुक्ति दिलाये. वह अपने पिता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करता है कि ये तीनों लोग निर्दोष हैं. वह इन तीनों को फिर से मनुष्य बनाने के लिए तपस्या करता है. पिता को मनाता है, तब पिता तीनों को शाप मुक्त करते हैं. अहा, क्या कथा है? यह #सामाचकेवा लोकपर्व की कथा है, जिसका आज विसर्जन होना है.
.. और बहनें अपने भाई के इस त्याग का बदला चुकाने के लिए हर साल #सामाचकेवा का पर्व मनाती हैं. वे मिट्टी की चिड़िया बनाती हैं, गीत गाते हुए उन्हें रोज खेतों में(वृंदावन में) चराने ले जाती हैं. आखिरी रोज कार्तिक पूर्णिमा के दिन इनका विसर्जन करती हैं, बहनें चुगलखोर चुगला की दाढ़ी में आग लगा देती हैं और भाइयों से कहती हैं कि मिट्टी की बनी चिड़ियों को तोड़ दें ताकि सामा, उसके पति चक्रवाक(चकेवा) और शापित ऋषि फिर से मानव रूप में आ सकें. कोसी और मिथिलांचल के इलाके में इस पर्व को लेकर काफी उल्लास रहता है. आज रात के वक्त लड़कियां और महिलाएं खेतों में जाकर खूब गीत गायेंगे और भाइयों का शुक्रिया अदा करेंगे. इन गीतों में जिस भाई का नाम आता है वह अह्लादित हो जाता है.

गाँव केर हथनी, चल्नहि अप्पन दूल्हा खोजे !!
15/07/2016

गाँव केर हथनी, चल्नहि अप्पन दूल्हा खोजे !!

प्राचीन कालक संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपक विस्तृत वर्णन छैक। श्रीमद्भागवत महापुराण में रस के समूह रासक वर्णन अछ...
18/03/2016

प्राचीन कालक संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपक विस्तृत वर्णन छैक। श्रीमद्भागवत महापुराण में रस के समूह रासक वर्णन अछि। अन्य रचना में 'रंग' नामक उत्सव केर वर्णन अछि जाहिमे हर्ष के प्रियदर्शिका वा रत्नावली आ कालिदास के कुमारसंभवम् आ मालविकाग्निमित्रम् शामिल अछि। कालिदास रचित ऋतुसंहार में पूरा एक सर्ग 'वसन्तोत्सव' के अर्पित अछि। भारवि, माघ आ अन्य कतेको संस्कृत कवीे वसन्त केर खूब चर्चा कयने छथि। चंद बरदाई द्वारा रचित हिंदी के पहिल महाकाव्य पृथ्वीराज रासो में होलीक वर्णन छैक। भक्तिकाल आ रीतिकाल के हिन्दी साहित्य में होली आ फागुन मासक विशिष्ट महत्व रहल छैक। आदिकालीन कवि विद्यापति सँ ल भक्तिकालीन सूरदास, रहीम, रसखान, पद्माकर, जायसी, मीराबाई, कबीर आ रीतिकालीन बिहारी, केशव, घनानंद आदि अनेक कवि के ई विषय प्रिय रहल छैन्ह। महाकवि सूरदास वसन्त आ होली पर 78 पद लिखने छथि। पद्माकर जी सेहो होली विषयक प्रचुर रचना कयने छथि। एहि विषय के माध्यम सँ कवी सब जतय एक दिस नितान्त लौकिक नायक नायिका के बीच खेलायल गेल अनुराग आ प्रीतक होली वर्णन केलनि अछि, ओतहि राधा कृष्ण के बीच खेलायल गेल प्रेम आ शृंगार रस सँ भरल होली के माध्यम सँ सगुण साकार भक्तिमय प्रेम आ निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेमक निष्पादन क देंने छथि। सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो आ बहादुर शाह ज़फ़र सन मुस्लिम संप्रदाय के पालन करय वाला सब सेहो होली पर सुंदर सूंदर रचना कयने छथि जे आई तक जन सामान्य में लोकप्रिय अछि।आधुनिक हिंदी कहानी सब म प्रेमचंद केर राजा हरदोल, प्रभु जोशी के अलग अलग तीलियाँ, तेजेंद्र शर्मा के एक बार फिर होली, ओम प्रकाश अवस्थीक होली मंगलमय हो आ स्वदेश राणा के होली में होली के अलग अलग रूप देखबाक लेल भेटैत अछि।

03/10/2015

किया मनाओल जैत अछि जितिया पावैन (05 oct 2015) ?

माय आश्विन मासक कृष्ण पक्ष केर अष्टमी तिथि के भगवान् जीमूतवाहनक पूजा कय अपन संतानक लेल आशीर्वाद माँगैत छथि| विवाहित स्त्री पुत्रक कामनाक लेल भगवान् जीमूतवाहनक प्रदोष काल में पूजा करैत छथि | भगवान् जीमूतवाहनक पूजा धूपकाठी,चौर आ फूलक संग कयल जैत अछि|चीलहोइर आ सियारिनक प्रतिमा बालू या गाय केर गोबर सँ बनाओल जैत छैक आ प्रतिमा के माथ पर सिंदूर लगाओल जैत अछि |

माय अपन पुत्रक आयु , परिवारक भलाई के लेल उपास शुरू करैत छथि | ओ सम्पूर्ण निष्ठा आ अनुष्ठानक द्वारा अपन पुत्रक लेल आशीर्वाद आ आयुक लेल भगवान् जिमुतवाहन सँ प्रार्थना छथि | उपास पूरा कयलाक पश्चात माय ब्राम्हणी के भोजन करा दक्षिणा दैत छथि | कतोहु कतोहु त ब्राम्हणी के भोजनक बदला ‘सीधहे’ द दल जैत छैक | सीधहा के रूप में अरवा चौर , राहरिक वा खेरहिक दैल , आलू , परोर , कोबी , भाँटा , नून , तरकारीक मशाला आ सरिसो केर तेल ब्राम्हणी के देल जैत अछि| ई पावैन मायक द्वारा अपन संतानक प्रति असीम स्नेह आ प्रेम के देखबैत अछि |

01/10/2015

सैंया देख लिया बहुत तेरी सरदारी रे, अबकी हमरी बारी रे ना...
अपन भविष्य, अपन हाथ में। बाद में व्यवस्था के गरियाबै सँ बढियां जे मतदान अवश्य करब। बढियां मौका अछि। यदि नूतन - प्रयोग करु...तँ बड्ड सुन्नर ! ओना, परवाना के लोग तँ राजनितिक रुप सँ परिपक्व होयते छथि।

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