Shyam Shalona

Shyam Shalona हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे l हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरि बोल

11/04/2026

*तृणादपि सुनीचेन तरोरिव सहिष्णुना -*
महाप्रभु जी ने बताया कि - तिनके से भी निम्न होकर वृक्ष के समान सहनशील होकर स्वयं सम्मान की इच्छा न रखते हुए दूसरों को सम्मान देते हुए सदैव हरि कीर्तन करना चाहिए।
आगे बताते हैं कि नाम सूत्र में इसे श्लोक की माला हर भक्त को गले में पहनने चाहिए ऐसा न करने से नाम कीर्तन का फल आसानी से प्राप्त नहीं होगा। श्रीमन्महाप्रभु ने श्री रूप गोस्वामीपाद की शिक्षा के प्रसंग में वैष्णव निन्दादि अपराध की मत्त हाथी के साथ तुलना की है। अत्यंत कोमल भक्ति कल्पलता को यह मत हाथी जड़ समेत उखाड़ कर नष्ट कर देता है। इसलिए दैन्य की बाड़ लगा कर इस भक्ति लता की रक्षा करना है। साधक का दैन्य भक्ति के प्रबल अवरोधक नाम अपराध को बाहर करके चित्त को निरपराध बनाए रखता है।
इस तृणादपि सुनीचेन श्लोक का पाठ करके महाप्रभु ने विश्व के नाम साधकों को चरम दैन्य साधना की ओर संकेत किया है।
राधे राधे

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