23/05/2026
भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि जो व्यक्ति आसक्ति से मुक्त होकर और ज्ञान में स्थित होकर यज्ञभाव से कर्म करता है, उसके कर्म उसे बाँधते नहीं हैं। 🙏
ऐसे कर्म धीरे-धीरे विलीन हो जाते हैं और मनुष्य को आंतरिक शांति प्रदान करते हैं।
गीता 4.23 हमें सिखाती है — जब कर्म समर्पण और निष्काम भाव से किए जाते हैं, तब वे साधना बन जाते हैं। 🕉️✨
📖 हर दिन एक श्लोक — आत्मज्ञान की सीख 🙏
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