24/07/2026
क्या आप जानते हैं? भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि जो व्यक्ति इन्द्रियों के विषयों और कर्मों में आसक्त नहीं रहता और सभी सांसारिक संकल्पों का त्याग कर देता है, वही वास्तव में योग में स्थित कहलाता है।
न ह्यसन्न्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन ।
यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते ।
सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥
अर्थात, जो व्यक्ति इन्द्रिय-विषयों और कर्मों में आसक्ति छोड़कर सभी सांसारिक इच्छाओं और संकल्पों का त्याग कर देता है, वही वास्तव में योगारूढ़ अर्थात योग में स्थित कहलाता है। 🕉️✨
श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 — ध्यान योग, श्लोक 4।
अगर आपको श्रीमद्भगवद् गीता का यह ज्ञान पसंद आए, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें 🙏
https://www.youtube.com/?sub_confirmation=1
, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,