Kalika Mata mandir Kanda Bageshwar

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कांडा के कालिका मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। पूर्व में यहां पंचबलि होती थी लेकिन अब नारियल आदि का चढ़ावा चढ़ता है। कहते हैं काल के
आतंक से निजात दिलाने के लिए शंकराचार्य ने मंदिर बनवाया था।

Jai ma Kali हे मां काली तुझे मैं प्रणाम करता हूंतेरे चरण स्पर्श कर मैं तेरी वंदना करता हूं।बंदना करते हुए एक विनती करता ...
29/05/2026

Jai ma Kali
हे मां काली तुझे मैं प्रणाम करता हूं
तेरे चरण स्पर्श कर मैं तेरी वंदना करता हूं।
बंदना करते हुए एक विनती करता हूं
हे मां मुझे तू अपने घर में चाहिए
मेरे तन मन धन वचन में चाहिए
अपने आस में चाहिए और सांस में चाहिए
हर पल अपने पास में चाहिए
अपनी रात में चाहिए और दिन में चाहिए
अपने दिल की हर एक बात में चाहिेए
दिल की हर एक धड़कन में चाहिए
अपने भक्ति की तड़पन में चाहिए
अपनी नेत्रों में चाहिए
अपने हरेक क्षेत्रों में चाहिए
अपनी रक्षा में चाहिए
और पढ़ाई वाली कक्षा में चाहिए
पढ़ाई में तेरा आशीर्वाद चाहिए
जीवन की सफलता में बस तेरा साथ चाहिए
हे मां काली तू मुझे मां के रूप में चाहिए
मेरे जीवन की हर एक छांव और धूप में चाहिए

हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा ...
19/03/2026

हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है. साथ ही इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापना भी की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है और मन की अशांति से मुक्ति मिलती है.

उत्तराखंड अपनी सभ्यता और संस्कृति के लिए ना केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। उत्तराखंड को 'देवभूमि' के ना...
15/03/2026

उत्तराखंड अपनी सभ्यता और संस्कृति के लिए ना केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। उत्तराखंड को 'देवभूमि' के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखंड में कई लोकपर्व और त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन एक त्योहार ऐसा भी है, जिसे चैत्र संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इस त्योहार को 'फूलदेई' के नाम से जाना जाता है।
बसंत ऋतु के स्वागत के तौर पर भी फूलदेई पर्व मनाया जाता है
इस पर्व को कुमाऊं में 'फूलदेई'और गढ़वाल में 'फूल संक्रांति' कहते हैं
यह लोकपर्व बताता है कि प्रकृति के बिना इंसान का कोई वजूद नहीं
कहा जाता है यहां प्रकृति इंसानों से बात करती है। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं, मिट्टी की सौंधी खुशबू, झरने की संगीतमय धुन और चिड़ियों की चहचहाहट, इंसानों को अहसास दिलाती है कि प्रकृति के बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं है। दुर्गम पहाड़ों पर बने शिवालय और मां भगवती के मंदिर बताते हैं कि इंसान कितनी भी तरक्की कर लें, लेकिन ईश्वर के आशीर्वाद के बिना इस सृष्टि का कोई मोल नहीं है। उत्तराखंड के पहाड़ों की सैर पर जाने वाला हर शख्स बस यहीं का होकर रहना चाहता है। लेकिन घर गृहस्थी की जिम्मेदारियां उसे दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की ओर खींचकर ले आती है। हम समझ सकते हैं आप पहाड़ को कितना मिस करते हैं, इसलिए आपको समय-समय पर पहाड़ के त्योहारों से रूबरू करवाते रहते हैं।

कान्हा की पिचकारी और राधा की साड़ी,खुशियों के रंग से, आओ रंगे दुनिया सारी|पकवानों के भीड़ और रंग-बिरंगी थाली,मुबारख हो आ...
01/03/2026

कान्हा की पिचकारी और राधा की साड़ी,
खुशियों के रंग से, आओ रंगे दुनिया सारी|
पकवानों के भीड़ और रंग-बिरंगी थाली,
मुबारख हो आपको यह होली हमारी|

Happy holi ..होली की हार्दिक शुभकामनाएँ , जो आपके दिल को खुशियों से भर दें। मुझे आशा है कि होली के दौरान रंग बिखेरते हुए...
28/02/2026

Happy holi ..होली की हार्दिक शुभकामनाएँ , जो आपके दिल को खुशियों से भर दें। मुझे आशा है कि होली के दौरान रंग बिखेरते हुए आपको असीम आनंद मिलेगा। आपकी होली रंगीन और अनोखी हो! होली की मधुर ध्वनि आपके मन को शांति से भर दे और होली के जीवंत रंग आपके जीवन में अपार उमंग भर दें।

Happy Holi to all devotees of ma Kali
28/02/2026

Happy Holi to all devotees of ma Kali

सातूं आठूं पर्व में महादेव शिव को जीजा और माँ गौरी को दीदी के रूप में पूजने की है परम्परा हैसातूं आठूं का अर्थ है सप्तमी...
26/08/2024

सातूं आठूं पर्व में महादेव शिव को जीजा और माँ गौरी को दीदी के रूप में पूजने की है परम्परा है
सातूं आठूं का अर्थ है सप्तमी और अष्टमी का त्यौहार। भगवान शिव को और माँ पार्वती को अपने साथ दीदी और जीजा के रिश्ते में बांध कर यह त्यौहार मनाया जाता है। यही इस त्यौहार की सबसे बड़ी विशेषता है। कहते हैं ,जब दीदी गौरा( पार्वती ) जीजा मैशर (महेश्वर यानि महादेव ) से नाराज होकर अपने मायके आ जाती है ,तब महादेव उनको वापस ले जाने ससुराल आते है। दीदी गौरा की विदाई और भिनज्यू यानि जीजाजी मैशर की सेवा के रूप में यह त्यौहार मनाया जाता है। यह त्योहार कुमाऊं सीमांत में सातूं आठूं के नाम से तथा ,नेपाल में गौरा महेश्वर के नाम से मनाया जाता है। इस लोक पर्व को गमारा पर्व भी कहा जाता है।

घी संक्रांति त्योहार उत्तराखंड में मनाया जाता है। इसे घी त्योहार, घ्यू त्यार, घु संक्रांति और ओग्लिया के नाम से भी जाना ...
16/08/2024

घी संक्रांति त्योहार उत्तराखंड में मनाया जाता है। इसे घी त्योहार, घ्यू त्यार, घु संक्रांति और ओग्लिया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घी खाने का विशेष महत्व माना जाता है। चलिए जानते हैं घी संक्रांति कैसे मनाई जाती है।

इस साल घी संक्रांति 16 अगस्त को मनाई जा रही है। ये एक मौसमी त्योहार है जिसे किसानों और पशुपालकों द्वाका धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बेदू रोटी को मक्खन या घी के साथ खाने का रिवाज है। इस दिन किसान अपने गांव के देवता को गेबे, दही, घी, मक्खन आदि को ओलग अर्पित करते हैं। बता दें ये त्योहार मुख्य रूप से उत्तराखंड में मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस त्योहार का महत्व।

20/06/2024

*योग एक स्वस्थ और शांतिमय जीवन शैली की ओर एक अद्वितीय कदम है ।*

योग हमारे शारीरिक,मानसिक और आध्यात्मिक तंत्र को सन्तुलित कर शरीर और मस्तिष्क में एक सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करता है।

आज भारतवर्ष अपनी संस्कृति को संजोकर पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है,आज विश्व में अनेकों देश हमारी योग संस्कृति की महत्ता को स्वीकार कर, स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग को अपना रहें हैं।

03/06/2024

भौतिकता के निर्बल चक्षु से देख नहीं पाते है
हम शब्दों की नहीं भावनाओं को दर्शाते है,
जब जब आस्था कमजोर पड़ती है,मंदिर चले आते है,

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263642

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