14/12/2019
यह बहुत हिम्मत वाली होती है, यह न होती तो इस्लामी एम्पायर ध्वस्त हो जाता जंगे तबूक में। जब मुसलमानो का राइट विंग तबूक के मैदान में पिछड़ रहा था और सलीबी सेना का मुकाबला करने से क़ासिर था तो पीछे महिला खेमे में यह बेलन लेकर निकल गयी , जो मुसलमान जंग छोडते दिखता वहीं एक बेलन उसको पड़ता और चेतावनी दे दी जाती ( लोक गीत से) कि
"तुम छोड़ जाओगे हमे,
हमे इन सलीबियो के लिए,
जो तुम्हारी अज़वाजो को
ले जाएंगे दासी बनाते हुए,
तुम्हारी रानियों को,
फिर क्या मुँह दिखाओगे हमे
और खुद को भी,
और इस दुनिया को क्या खुद को रुसवा करोगे"
ऐसे गीत और बेलनों ने फिर मुसलमानो के हार्मोन जगा दिए। फिर क्या था तबूक में सैफुल्लाह खालिद बिन वलीद के नेतृत्व ( जो अपने flanking टुकड़ी के साथ तीनो विंग को समय समय पर मदद कर रहे थे) में मुसलमानो ने उस वक़्त की सुपर पावर यानी बिंज़ाइनतीन सल्तनत को हिला डाला कि फारस से लड़ते लड़ते यह अरबी कैसे हम पर मुसल्लत हो गए।
आज इस्लाम जो भी है, इन्ही बहनो और माताओं की वजह से है आज यह फिर कंधे से कंधे मिलाए हुए है, आज यह फिर नेतृत्व की हालत में है। आज यह फिर वही लोक गीत गा रही है
मेरी प्यारी बहनों के लिए दिल से सलाम,
मेरी प्यारी माओ के लिए दिल से सलाम
मेरी प्यारी बेटियों के लिए दिल से सलाम
डॉ अब्दुल सलाम, सलामती वाले