02/09/2026
शीर्षक: "70 साल सत्ता में रहे, फिर स्कूल क्यों नहीं सुधरे?"
— शिक्षा व्यवस्था पर सोनम वांगचुक का बड़ा बयानदेश के जाने-माने शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है। एक हालिया पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने देश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के लिए किसी एक दल को नहीं, बल्कि आजादी के बाद से शासन करने वाली सरकारों की दशकों पुरानी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
दशकों की अनदेखी का नतीजासोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के सरकारी स्कूलों की मौजूदा खस्ता हालत पिछले 10-12 वर्षों में नहीं हुई है, बल्कि यह समस्या आजादी के बाद से ही लगातार चली आ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी देश में करीब 70 सालों तक अलग-अलग रूपों में सत्ता में रही, लेकिन गरीब बच्चों की प्राथमिक शिक्षा की बुनियाद को वैसा ठोस सुधार नहीं मिल सका जिसकी जरूरत थी।सिर्फ मौजूदा सरकार को दोष देना राजनीतिवांगचुक का मानना है कि वर्तमान समय में शिक्षा से जुड़ी हर समस्या का ठीकरा केवल मौजूदा सरकार पर फोड़ना विशुद्ध राजनीति है। उन्होंने कहा कि वह सभी राजनीतिक व्यवस्थाओं की कमियों पर अपनी नाराजगी रखते हैं, लेकिन सुधार के लिए सबसे लंबा समय मिलने के बावजूद बुनियादी शिक्षा प्रणाली को मजबूत न कर पाना पिछली व्यवस्थाओं की एक बड़ी नाकामी रही है।...
'विकसित भारत' की राह में शिक्षा ही आधारअपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक समाज के सबसे पिछड़े और गरीब वर्ग के बच्चों को बेहतरीन प्राथमिक शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक देश 'विकसित भारत' बनने का सपना कैसे पूरा कर सकता है? उनके अनुसार, वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब शिक्षा सुधारों को दलीय राजनीति से ऊपर उठकर एक राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा जाए।आपकी इस पर क्या राय है? देश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे ज्यादा जवाबदेही किसकी होनी चाहिए? कमेंट सेक्शन में अपने विचार जरूर साझा करें।.......
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