22/02/2026
आप भी जूठा खाते या खिलाते हैं?
साथ जिएंगे, साथ मरेंगे... इसलिए खाते भी हैं साथ और पीते भी हैं एक ही बोतल से - अपनापन दिखाने का यह अच्छा तरीका है लेकिन क्या हाइजीन के लिहाज से जूठा खाना सही है? जानते हैं:
क्या साथ खाने से प्यार बढ़ता है? क्या जूठा पानी पीना ज्यादा करीब होने की निशानी है? ये सब सच हो या न हो, लेकिन यह सच है कि ऐसा करने से कोई बीमार हो सकता है, इन्फेक्शन फैल सकता है। चाहे वह बच्चा हो, बुज़ुर्ग हो, महिला हो या फिर अडल्ट। यह रिस्क किसी को कम या ज्यादा हो सकता है, लेकिन खतरा तो है। ऐसी कौन-सी स्थितियां होती हैं जब जूठा खाना ज्यादा रिस्की नहीं होता और कब-कब यह बहुत रिस्की हो जाता है? बेहतरीन डॉक्टरों से बातकर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती
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प्यार को वक्त दें, जूठन नहीं
कई बार घर में या सफर में दो लोग कोई एक फल शेयर कर लेते हैं। ऐसा अक्सर पति-पत्नी या पार्टनर तो ज़रूर करते हैं। यह प्यार के लिहाज से अच्छा हो सकता है, लेकिन हाइजीन के लिहाज से सही नहीं। इसलिए जब नई शादी हुई हो या पार्टनर से नई-नई जान-पहचान हुई हो तो एक ही फल को मुंह लगाकर खाने से बचें। कई बार हनीमून पर भी लोग ऐसा करते हैं। ऐसे में कोई एक पार्टनर बीमार हो सकता है। इसलिए जब पहचान पुरानी हो जाए, दोनों के शरीर में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया की भी आपस में पहचान हो जाए, साथ ही - दोनों के शरीर में एक-दूसरे के वायरस, बैक्टीरिया आदि के खिलाफ इम्यूनिटी बन जाए तो हो सकता है कि एक ही फल को मुंह लगाकर खाने से बीमारी न फैले।
किसे कहते हैं जूठा?
जिस भोजन या पानी को कोई व्यक्ति पहले खा-पी चुका हो, चम्मच/गिलास मुंह से लगा चुका हो और वही चीज़ कोई दूसरा खाए उसे 'जूठा' कहते हैं। असल में जब कोई शख्स किसी खाने या पानी को अपने मुंह से लगाता है तो उसकी लार यानी सलाइवा उस भोजन या बर्तन में मिल जाती है। उस लार में सामान्य बैक्टीरिया (जो हर किसी के मुंह में मौज़ूद रहते हैं), वायरस, फंगस या पैरासाइट भी हो सकते हैं। ये हमारे मुंह में करोड़ों की संख्या में होते हैं। इनमें से ज्यादातर नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कुछ से बहुत नुकसान हो सकता है। वहीं जब किसी शख्स को इन्फेक्शन हो जाए तो वही लार बीमारी फैलाने का जरिया बन सकती है। इसलिए कमज़ोर इम्यूनिटी वालों को किसी का जूठा खाना खाने से मना किया जाता है।
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मामले से समझें
शेयरिंग का सही तरीका
ऋषभ 5वीं क्लास में पढ़ता है। पढ़ने में अच्छा है। दूसरों से घुलने-मिलने वाला बच्चा है। वह स्कूल से छुट्टी नहीं करना चाहता, लेकिन अक्सर उसे छुट्टी लेनी पड़ती है क्योंकि बार-बार सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी परेशानी हो जाती हैं। कई बार डायरिया भी। इन वजहों से ऋषभ के पैरंट्स को डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कुछ दिन दवा खाने के बाद वह ठीक होता है। पिछले दिनों जब ऋषभ और उनके पैरंट्स डॉक्टर के पास गए तो बातों-बातों में पता चला कि ऋषभ की दोस्ती बड़ी पक्की है। वह अपना लंच हमेशा दोस्तों से शेयर करता है। उसके कई फ्रेंड्स तो उसके लंच बॉक्स से चीजें उठाकर खा लेते हैं। डॉक्टर ने जब ये बातें सुनी तो ऋषभ से कहा कि शेयर करना अच्छी बात है। यह हमारी सोसायटी के लिए भी बढ़िया है। सभी को फूड शेयर करना चाहिए। लेकिन मुझे यह बताओ कि तुम्हारे लंच बॉक्स से तुम्हारे फ्रेंड्स सीधे हाथों से उठाकर खा लेते हैं? क्या वे तुम्हारी चम्मच से ही खा लेते हैं? इस पर ऋषभ ने 'हां' में सिर हिलाया और यह भी बताया कि मैं भी उनके लंच बॉक्स से ऐसे ही खाता हूं। तब डॉक्टर ने कहा कि आगे से खाना शेयर करना लेकिन लंच बॉक्स से सीधे उठाकर खाने से तुम भी बचना और उन्हें भी रोकना। इसके लिए तुम उनके लंच बॉक्स में थोड़ा खाना या फ्रूट्स रख देना। वे भी तुम्हारे लंच बॉक्स में ही खाना रखें। फिर डॉक्टर ने पूछा कि क्या तुम पानी भी शेयर करते हो? ऋषभ ने फिर 'हां' कहा। इस पर डॉक्टर ने कहा कि खाना शेयर करने से ज्यादा रिस्की है पानी की बोतल या गिलास शेयर करना। फिर डॉक्टर ने ऋषभ के पैरंट्स को बताया कि इस उम्र में बच्चों की इम्यूनिटी विकसित हो रही होती है। कुछ बच्चों की इम्यूनिटी ज्यादा कमज़ोर हो सकती है। कोई बैक्टीरिया या वायरस जो एक बच्चे की उंगलियों या फिर मुंह में मौजूद है, हो सकता है कि उनका शरीर उसके खिलाफ इम्यूनिटी बना चुका हो, लेकिन जब वही दूसरे बच्चों के शरीर में पहुंचता है तो उन्हें बीमार कर सकता है। जैसे ऋषभ के केस में अभी शरीर इम्यूनिटी विकसित नहीं कर पाया है। इसलिए उसे बार-बार इन्फेक्शन हो जाता है। पैरंट्स ने पूछा कि क्या यह बात किसी अडल्ट पर भी लागू होती है? डॉक्टर ने कहा कि अडल्ट की इम्यूनिटी अमूमन विकसित हो चुकी होती है। फिर भी बुजुर्ग और बीमार लोगों को इस तरह की शेयरिंग से ज़रूर बचना चाहिए। अगर फैमिली में बुजुर्ग, बच्चे और बीमार न हों तो अमूमन पूरी फैमिली की एक ही तरह की इम्यूनिटी बन जाती है। वे साथ में खाएं तो कम बीमार पड़ते हैं। लेकिन आमतौर पर पानी की बोतल, गिलास आदि घर पर भी जूठा शेयर करने से बचना चाहिए, वहीं स्कूल में तो इस तरह से जूठा पानी बिलकुल नहीं पीना चाहिए।
हमारी संस्कृति में साथ खाने, एक-दूसरे का जूठा खाने की मनाही नहीं है। लेकिन सेहत के लिहाज से जूठा यानी किसी के मुंह से लगा हुआ खाना या पानी शेयर करना कई बार जोखिम भरा हो सकता है। लोग इसे सच्चे प्यार की निशानी भी कह देते हैं। वैसे अगर एक ही परिवार के लोग, जैसे- पति-पत्नी या पैरंट्स और उनके बच्चे साथ में खाते हैं तो इसलिए परेशानी नहीं होती क्योंकि बीमारी फैलाने वाला वायरस, बैक्टीरिया भी अमूमन परिवार का ही हिस्सा हो जाता है। साथ ही परिवार के हर शख्स के शरीर में अमूमन इनके खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो चुकी होती है। हां, जब कोई घर में कहीं बाहर से आता है तो मुमकिन है कि वह कोई नया वायरस या बैक्टीरिया लेकर आए। इसलिए बाहर से आने पर अपने हाथों-पैरों आदि को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। फिर भी परिवार में भी ध्यान रखें कि किसी बच्चे, बुजुर्ग या बीमार को जूठा नहीं खिलाना है।
यह है ऑफिस हाइजीन का हिस्सा
हम खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करते हैं लेकिन खाना शेयर करते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। मान लें कि एक ही प्लेट में 3-4 लोग खा रहे हैं। उनमें से अगर 1 को छोड़कर बाकी सभी लोगों ने हाथ धोए हैं तो भी सभी में इन्फेक्शन फैलने का खतरा रहेगा। फूड शेयरिंग खासकर ऑफिस आदि में जहां लोग एक-दूसरे की फूड हैबिट्स, मसालों आदि के बारे में ज्यादा नहीं जानते। वहां जब वे खाना शेयर करते हैं तो यह खतरा रहता है कि कोई शख्स ऐसा मसाला खा ले जो उसके शरीर में एलर्जी पैदा करता हो। ऐसे में एलर्जी के लक्षण दिख सकते हैं। ऐसा अमूमन मिर्च और गरम मसालों के साथ होता है। इसके अलावा और भी कई दिक्कतें पैदा सकती हैं। जैसे एक ही प्लेट में कोई बड़ा और बच्चा साथ-साथ खा रहे हैं या फिर दो ऐसे लोग खा रहे हैं जिनकी खाने की स्पीड कम या ज्यादा है। ऐसे में यह मुमकिन है कि किसी एक को ज्यादा खाना मिले और किसी को कम। वहीं साथ खाने में कई बार खाने की मात्रा का अंदाज़ा भी नहीं होता। आमतौर पर साथ खाते हुए लोग ज्यादा भी खा लेते हैं।
क्या पानी खाने से ज्यादा रिस्की है?
यह सच है कि खाने की तुलना में जूठा पानी कई बार ज्यादा रिस्की हो जाता है। इसकी वजह है कि जब हम गिलास या बोतल को मुंह से लगाते हैं तो लार से इनका सीधा संपर्क हो जाता है। वहीं अगर पानी गुनगुना है तो रिस्क कम हो सकता है, लेकिन सामान्य या ठंडे पानी में रिस्क ज्यादा रहता है। दूसरी तरफ, पानी में वायरस और बैक्टीरिया के लिए खुद को खत्म होने से बचाना ज्यादा आसान होता है या फिर यह कहें कि पानी इनके सर्वाइव करने के लिए ज्यादा बेहतर माध्यम है। इसलिए इन्फेक्शन फैलने के मामले अक्सर स्कूलों में, ट्रेवलिंग के दौरान जूठा पानी, पानी की बोतल आदि शेयर करने से सामने आते हैं।
खाना कैसा है यह भी देखें
जूठा खाने का जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि उस शख्स को कौन-सी बीमारी है। दूसरी अहम बात है कि फूड सॉलिड या लिक्विड है और कितना गर्म है? साथ ही इसकी मात्रा पर भी इन्फेक्शन निर्भर कर सकता है। अगर भोजन की मात्रा कम है तो मुमकिन है कि कम मात्रा में वायरस या बैक्टीरिया दूसरे शख्स के शरीर में पहुंचा हो जिसमें वायरल या बैक्टीरियल लोड कम होता है। ऐसे में मुमकिन है कि दूसरे शख्स का शरीर बीमारी से लड़ ले।
जूठा खाने-पीने से ये-ये इन्फेक्शन
वायरल इन्फेक्शन: इनमें सर्दी-जुकाम, फ्लू, कोरोना, हर्पीज़ आदि शामिल हैं। ये सबसे कॉमन बीमारियां हैं। ये अमूमन कमज़ोर इम्यूनिटी वालों को ज्यादा परेशान करती हैं। इसलिए घर में अगर कोई बच्चा या बड़ा बार-बार बीमार पड़ता हो तो इन बातों का ध्यान भी ज़रूर रखें।
बैक्टीरियल इन्फेक्शन: टाइफाइड, फूड पॉइज़निंग, स्किन इन्फेक्शन (फंगल) आदि। यह अमूमन खराब खाने, गंदे पानी आदि की वजह से फैलते हैं। अगर किसी के मुंह या हाथों में इन्फेक्शन है तो वह भी फैल सकता है। यहां इम्यूनिटी फैक्टर भी बहुत अहम है। जूठे खाने से दांतों में कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया भी फैल सकते हैं, मसूड़ों का इन्फेक्शन हो सकता है।
एक्सपर्ट पैनल
-डॉ. संजय राय, प्रफेसर कम्यूनिटी मेडिसिन, AIIMS
-डॉ. अंशुल वार्ष्णेय, सीनियर कंसल्टेंट, फिजिशन
-डॉ. प्रसन्ना भट्ट, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स
-डॉ. चंद्रकांत लहारिया, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन
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