25/11/2025
अयोध्या में धर्मध्वजा का ऐतिहासिक आगमन — 191 फीट शिखर पर प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ध्वजारोहण, परंपरा को लेकर शंकराचार्य की आपत्ति से नई बहस तेज
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर के शिखर के लिए निर्मित दिव्य धर्मध्वजा अब अपने गंतव्य पर पहुँच चुकी है। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के 191 फीट ऊँचे शिखर पर इस धर्मध्वजा का ध्वजारोहण करने वाले हैं, जिसे लेकर पूरे देश की भावनाएँ प्रबल रूप से जुड़ी हुई हैं। यह क्षण करोड़ों राम भक्तों के लिए श्रद्धा, उत्साह और इतिहास के एक नए अध्याय का प्रतीक बनने जा रहा है।
हालाँकि इस आयोजन के बीच शंकराचार्यों को आमंत्रित न किए जाने पर उठे मतभेदों ने आध्यात्मिक विमर्श को भी जन्म दिया है।
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कार्यक्रम की विधि पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शास्त्रीय परंपराओं में ‘ध्वजारोहण’ का उल्लेख नहीं मिलता, अक्षरशः शिखर की प्रतिष्ठा अनिवार्य होती है। उनका कथन था कि जब शास्त्रसम्मत विधान नहीं दिखता, तब समारोह में सम्मिलित होना उचित नहीं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जगन्नाथपुरी और द्वारका में ध्वज परिवर्तन की परंपरा है, लेकिन शिखर पर चढ़कर इस प्रकार ध्वजा फहराने का स्वरूप पूर्व में नहीं देखा गया। इस दृष्टिकोण के साथ उन्होंने आयोजन के तौर-तरीकों पर अपनी प्रतिष्ठित असहमति दर्ज कराई है।
इसके विपरीत, राम मंदिर ट्रस्ट ने उन 100 प्रमुख दानदाताओं को आमंत्रित किया है जिनका मंदिर निर्माण में योगदान 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक रहा है।
साथ ही लखनऊ, अयोध्या और आसपास के 25 जिलों के किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है, जिससे यह भव्य आयोजन सामाजिक सहभागिता और समर्पण का प्रतीक भी बन सके।
धर्मध्वजा की निर्मिति — समर्पण और शिल्पकला की अद्वितीय मिसाल
धर्मध्वजा स्वयं दिव्यता और भारतीय शिल्प विरासत का अनुपम स्वरूप लिए हुए है।
गुजरात के 6 अनुभवी कारीगरों ने इसे लगातार 25 दिनों की मेहनत से तैयार किया है।
इसकी लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट है।
केसरिया आभा में सुसज्जित त्रिस्तरीय ध्वज पर सूर्यदेव, ‘ॐ’, और कोविदार वृक्ष के प्रतीक अंकित हैं।
पैराशूट फैब्रिक, रेशमी धागे और उच्च क्षमता वाली नायलॉन डोरी इसे मजबूती और दीर्घायु प्रदान करते हैं।
ध्वजदंड पर लगाया गया विशेष घूमने वाला चैंबर और बॉल बेयरिंग सिस्टम तेज हवाओं में भी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
यह ध्वज न केवल भौतिक रूप से भव्य है, बल्कि विश्वास, ऊर्जा और भारतीय अध्यात्म की निरंतरता का भी प्रतीक है।
सुरक्षा और व्यवस्था — भक्तों से संयम की अपील
ट्रस्ट ने 25 नवंबर को आम श्रद्धालुओं से अयोध्या न आने की विनम्र अपील की है।
मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की गरिमा को देखते हुए उस दिन रामलला के दर्शन सामान्य भक्तों के लिए बंद रहेंगे।
23 नवंबर की रात से भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है, जो 26 नवंबर की आधी रात तक जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का हेलिकॉप्टर साकेत महाविद्यालय में उतरेगा, जहाँ से वे सड़क मार्ग से मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे।
सेना और SPG सुरक्षा दल लगातार तैयारियों और समीक्षा में जुटे हैं, तथा 23 नवंबर को हेलिकॉप्टर द्वारा विस्तृत हवाई सर्वेक्षण भी किया गया है, जिसमें मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
राम मंदिर में धर्मध्वजा का यह ऐतिहासिक ध्वजारोहण एक ओर आस्था का परम पर्व है, तो दूसरी ओर परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के बीच संवाद का भी द्योतक बन गया है।
देश की निगाहें 25 नवंबर पर टिकी हैं — जब विश्वास, कला, सामाजिक भागीदारी और भारत की आध्यात्मिक विरासत एक ही क्षण में रेखांकित होंगी।