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08/09/2024

अगर आपकी कुंडली में है एेसा योग तो छोड़ सकता है पति!

विवाह के समय जन्मकुंडली अौर गुण-दोष मिलान तो सर्वश्रेष्ठ होता है। कुछ खास तरह के योगों का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे गृहस्थ जीवन प्रभावित होता है। जानिए कुछ विशेष योगों के बारे में जो प्रभावित कर सकते हैं आपका वैवाहिक जीवन।

किसी स्त्री के विवाह लग्न के प्रथम भाव में चंद्रमा हो तो वह स्त्री अल्पायु होती है। द्वितीय भाव में चंद्रमा हो तो कई पुत्र होते हैं। सप्तम भाव में शुक्र हो तो मृत्यु जैसा फल प्राप्त होता है। चंद्रमा हो तो पति छोड़ देता है।

अष्टम भाव में मंगल होने से रोगिणी रहती है। नवम भाव में चंद्रमा होने से कन्या सन्तान उत्पन्न होती है। दशम भाव में राहु हो तो ऐसी स्त्री विधवा होती है। एकादश भाव में चंद्रमा हो तो धनवान होती है।

विवाह से सोलह दिन के भीतर सम दिनों में या पांचवीं, सातवीं और नौवें दिन में वधू प्रवेश शुभ होता है। सोलह दिन के बाद विषम वर्ष, मास, दिन में वधू प्रवेश शुभ माना गया है। पांच वर्ष के बाद किसी भी समय शुभ दिन में वधू प्रवेश हो सकता है..

ज्‍योतिषशास्‍त्र में बृहस्‍पति ग्रह को देवताओं के गुरु की उपाधि दी गई है। गुरु एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करने म...
02/09/2024

ज्‍योतिषशास्‍त्र में बृहस्‍पति ग्रह को देवताओं के गुरु की उपाधि दी गई है। गुरु एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करने में लगभग एक साल का समय लेते हैं और इस तरह गुरु को सभी 12 राशियों में गोचर करने में 12 वर्ष लग जाते हैं।

बता दें कि इस समय बृहस्‍पति शुक्र की राशि में बैठे हैं। 09 अक्‍टूबर को 10 बजकर 01 मिनट पर गुरु मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे। गुरु के वक्री होने से कुछ राशियों के लोगों को विशेष लाभ होने की संभावना है।

इन राशियों के जातकों को अपार सफलता मिलेगी और इनके पास खूब धन-दौलत रहने वाली है। तो चलिए जानते हैं कि गुरु के वक्री होने पर किन राशियों के लोगों को फायदा मिलेगा ! अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें

#इन राशियों के शुरू होंगे अच्‍छे दिन_

#तुला_राशि

इस राशि के आठवें भाव में गुरु का संचरण होगा। आपके लिए यह समय बहुत भाग्‍यशाली रहने वाला है। लंबे समय से रुके हुए काम अब पूरे हो सकते हैं। आपके जीवन में आ रही चुनौतियां और अड़चनें भी समाप्‍त हो सकती हैं। यदि व्‍यापारियों को अपने क्षेत्र में कोई परेशानी आ रही थी, तो अब उनकी समस्‍याओं का अंत होगा।

व्‍यापारियों को अपने क्षेत्र में अपार सफलता मिलेगी और वे खूब धन कमाएंगे। शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए अच्‍छा समय है। आपकी आर्थिक स्थिति मज़बूत रहेगी। आप अपने खर्चों को पूरा करने के साथ-साथ पैसों की बचत करने में भी कामयाब होंगे।

#मेष_राशि_

मेष राशि के दूसरे भाव में गुरु वक्री होने जा रहे हैं। आपको अपने भाग्‍य का साथ मिलेगा। आपके लिए अचानक धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। यदि आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, तो इस समय आपको नौकरी के बेहतरीन और शानदार अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों के लिए प्रमोशन और वेतन में वृद्धि के योग बन रहे हैं।

व्‍यापारियों को कोई बड़ी डील या प्रोजेक्‍ट मिल सकता है जिससे उन्‍हें मोटा मुनाफा होगा। आपको विदेश यात्रा पर जाने का मौका भी मिल सकता है। विदेश से काम करने वाले लोगों को धन लाभ होगा। आपकी वित्तीय स्थिति अच्‍छी रहेगी। आपको अपनी सेहत को लेकर भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।

#सिंह_राशि_

इस राशि के दसवें भाव में गुरु वक्री होंगे। यदि आपके जीवन में कोई समस्‍या चल रही है, तो अब वह समाप्‍त होगी। आपको काम के सिलसिले में यात्रा पर जाना भी पड़ सकता है। आपके लिए यह यात्रा लाभकारी सिद्ध होगी। जो जातक नौकरी बदलने के बारे में सोच रहे हैं, उन्‍हें अपने प्रयासों में सफलता मिल सकती है।

कार्यक्षेत्र में आपके वरिष्‍ठ अधिकारी आपके काम से प्रसन्‍न होंगे। आपको अपने कार्यस्‍थल पर काम करने में कोई दिक्‍कत नहीं आएगी। व्‍यापारियों को भी खूब मुनाफा होने की उम्‍मीद है। लंबे समय से आपका कोई काम अटका हुआ है, तो अब वह पूरा हो सकता है। संतान की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आपके धन में इज़ाफा होगा और निवेश से भी लाभ कमा सकते हैं। सेहत को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह _

बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा जाता है। गुरु एक आध्यात्मिक ग्रह हैं और इस वजह से उनमें सभी दैवीय गुण मौजूद होते हैं। बृहस्पति की कृपा के बिना किसी भी शुभ चीज़ पर उच्च वर्चस्व और नियंत्रण पाना मुश्किल है।

जिस व्‍यक्‍ति की कुंडली में बृहस्पति मजबूत हो और बृहस्पति जन्म के समय कुंडली में अपनी ही राशि धनु और मीन में स्थित हो, तो उस व्यक्ति को सभी अच्छे गुण और भाग्य आदि की प्राप्ति होती है। यदि बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित हो, तो ये जातक किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। इन्‍हें समाज में अधिक प्रभावशाली लोगों के साथ जुड़ने का मौका मिलता है ।

मार्गी बुध इन राशि के जातकों को देंगे आशीर्वाद, जानें किन जातकों को रहना होगा सावधान_ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि और व...
29/08/2024

मार्गी बुध इन राशि के जातकों को देंगे आशीर्वाद, जानें किन जातकों को रहना होगा सावधान_

ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि और विद्या का कारक माना जाता है, जो कि मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। बुध के मजबूत होने से व्यक्ति अपनी बुद्धि का सही तरीके से प्रयोग करके सही निर्णय लेने में सक्षम होते हैं, जिससे उन्हें सफलता प्राप्त होती है। बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है इसलिए बुध के शुभ प्रभावों में से है कि व्यक्ति का जीवन बहुत ही सुखमय और संसाधनों से भरपूर रहता है। वहीं, बुध कमजोर होने से व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।

ज्योतिष ग्रंथों के मुताबिक सामान्य चाल से चलते हुए बुध वैसे तो एक राशि में 23 दिनों तक ही रहता है। कभी-कभी चाल में बदलाव के चलते एक महीना भी हो जाता है। इसी क्रम में बुध जल्द ही अगस्त माह में बुध कर्क राशि में मार्गी होने जा रहे हैं। इस ख़ास ब्लॉग के माध्यम से जानेंगे अगस्त में कर्क राशि में बुध के मार्गी की ये ज्योतिषीय घटना सभी 12 राशियों को किस तरह से प्रभावित करेगी, ज्योतिष में बुध के मार्गी का क्या महत्व होता है, साथ ही जानेंगे बुध के गोचर के नकारात्मक प्रभावों से बचने के कुछ बेहद सरल और ज्योतिषीय उपायों की जानकारी। लेकिन, इससे पहले जान लेते हैं बुध का कर्क राशि में मार्गी की समयावधि।

बुद्धि और वाणी के कारक ग्रह बुध कर्क राशि में मार्गी 29 अगस्त 2024 की सुबह 09 बजकर 15 मिनट पर होने जा रहा है। मार्गी बुध का प्रभाव सभी 12 राशि के जातकों में देखने को मिलेगा, किसी में सकारात्मक रूप से तो किसी में नकारात्मक रूप से। तो आइए सबसे पहले जानते हैं ज्योतिष में मार्गी ग्रह का क्या अर्थ होता है।

मार्गी ग्रह का अर्थ_

ग्रहों का मार्गी होना एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। जब कोई ग्रह मार्गी होता है, तो इसका अर्थ है कि वह अपने सामान्य, सीधी दिशा में चल रहा होता है। यह स्थिति तब होती है जब ग्रह सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में गति करते हुए पृथ्वी से देखने पर सीधा चलता हुआ प्रतीत होता है। ज्योतिष में, जब ग्रह मार्गी होते हैं, तो उनके सकारात्मक और सामान्य प्रभाव ज्यादा स्पष्ट होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि बुध ग्रह मार्गी है, तो उसके सकारात्मक प्रभाव, वाणी, बुद्धि, त्वचा, गणित और संवाद में देखने को मिलता है। इसी प्रकार, शुक्र ग्रह के मार्गी होने पर प्रेम, सौंदर्य, और वैवाहिक जीवन में संतुलन बना रहता है।

इसके विपरीत, ग्रह के वक्री होने पर, यानी जब वह उल्टी दिशा में चलता हुआ प्रतीत होता है, तो उसके प्रभावों में अवरोध आ सकता है। वक्री ग्रह आमतौर पर अपने क्षेत्र में चुनौतियां और कठिनाइयां लाते हैं। लेकिन जब वही ग्रह मार्गी हो जाता है, तो वह पुनः अपनी पूरी शक्ति और सकारात्मकता के साथ कार्य करता है। मार्गी ग्रहों को नई शुरुआत, कार्यों में प्रगति, और जीवन में सकारात्मक बदलावों के लिए उत्तम माना जाता है। यह समय उन कार्यों को पूरा करने के लिए भी अच्छा होता है जो वक्री काल के दौरान अधूरे रह गए थे ।

सूर्य सम्पूर्ण ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करता है। इसे आकाशगंगा के सभी सितारों का पिता माना जाता है। वैदिक ज्योतिष और हिन...
08/11/2020

सूर्य सम्पूर्ण ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करता है। इसे आकाशगंगा के सभी सितारों का पिता माना जाता है। वैदिक ज्योतिष और हिन्दू धर्मशास्त्र में इसे विशेष महत्व प्रदान की गयी है। जीवन में मौजूद विभिन्न दोषों से छुटकारा पाने के लिए लोगों के द्वारा विभिन्न रूपों से सूर्य की प्रार्थना की जाती है। सूर्य को अर्घ्य या जल अर्पित करना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो पृथ्वी पर निवास करने वाले विभिन्न लोगों के जीवन में असाधारण परिणाम लाता है।

✓✓ #सूर्य_को_अर्घ्य_क्यों_दिया_जाता_है_?

ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करता है तो व्यक्ति का दिन अच्छे तरीके से शुरू होता है। प्राचीन काल में लोग तालाब या नदी में स्नान करते समय अर्घ्य देते थे, लेकिन अब शहरीकरण ने इस प्रथा को पूरी तरह से मिटा दिया है। आज लोग अपने भव्य और आरामदायक बाथरूम में स्नान करना पसंद करते हैं। हालाँकि अर्घ्य देने का आज भी अपना अलग महत्व है क्योंकि यह व्यक्ति की आत्मा और मन को ऊर्जा प्रदान करता है। यदि इस अनुष्ठान को नियमित रूप से किया जाए तो भाग्य आपका साथ कभी नहीं छोड़ेगा। आईये जानते हैं सूर्य को अर्घ्य देने के ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारणों के बारे में।

✓✓ #सूर्य_को_अर्घ्य_देने_का_ज्योतिषीय_महत्व__

ग्रह सूर्य अपने निडर और निर्भीक स्वभाव के लिए जाना जाता है। लिहाजा सूर्य को अर्घ्य देने से इसके ये विशेष गुण व्यक्ति के अंदर भी विद्यमान हो जाते हैं। सूर्य को प्रतिदिन अर्घ्य देने से व्यक्ति अपनी कुंडली में सूर्य की मजबूत स्थिति बना सकता है। प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति अपनी कुंडली में शनि के प्रभाव को भी कम कर सकता है। यदि व्यक्ति विशेष रूप से रोजाना इस नियम का पालन करता है तो इससे उसके जीवन पर पड़ने वाले शनि के हानिकारक प्रभाव अपने आप कम हो जाते हैं । खासतौर से यदि कुंडली पर पड़ने वाले सूर्य की दशा के तहत इस अनुष्ठान को किया जाए तो विनाशकारी परिणामों की अपने आप ही समाप्ति हो जाती है। चन्द्रमा में जल का तत्व निहित होता है और जब व्यक्ति सूर्य को अर्घ्य देता है तो, इन दोनों ग्रहों से बनने वाले शुभ योग स्वयं ही व्यक्ति की कुंडली में सक्रिय हो जाते हैं।

✓✓ #सूर्य_को_अर्घ्य_देने_का_वैज्ञानिक_महत्व__

वैज्ञानिक आधारों पर ऐसा माना गया है कि सूर्य को अर्पित की गयी पानी की एक-एक बूँद एक ऐसे माध्यम के रूप में काम करती है जिससे सूर्य की किरणें शरीर के अंदर प्रवेश करती हैं। शरीर के अंदर सूर्य की किरणें पहुंचने के बाद सात अलग-अलग रंगों का निर्माण करती हैं। ये सात रंग मनुष्य के शरीर में मौजूद सात चक्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारे वातावरण में रहने वाले विभिन्न जीवाणुओं से सुरक्षा प्रदान करती है। सूर्य को प्रतिदिन अर्घ्य देने से व्यक्ति की आँखों की रोशनी भी तेज होती है। सूर्य को अर्घ्य विशेष रूप से सुबह के समय सूर्योदय के वक़्त ही दी जानी चाहिए। नियमित रूप से इस अनुष्ठान को करने से व्यक्ति के शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं क्योंकि सुबह की सूर्य की किरणें व्यक्ति की सेहत को स्वस्थ्य रखने के लिए ऊर्जा प्रदान करती हैं।

✓✓ #सूर्य_को_अर्घ्य देते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान__

🔯अर्घ्य देने के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी को लाल चंदन, सिंदूर और लाल फूल के साथ मिश्रित करना चाहिए।
•🔯अर्घ्य अर्पित करते समय सूर्य की किरणों पर ध्यान दें क्योंकि वे हल्के होने चाहिए ना कि बहुत तेज़।

•🔯प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देते वक़्त सूर्य मंत्र “ॐ सूर्याय नमः” का करीबन ग्यारह बार जाप करें।

•🔯अर्घ्य देने के बाद, सूर्य मुख करके तीन परिक्रमा पूरी करें।

•🔯सूर्य को अर्घ्य देने के लिए केवल तांबे का बर्तन या ग्लास ही प्रयोग करें।

•🔯इस दौरान विशेष रूप से “ॐ आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात् |” गायत्री मंत्र का भी जाप किया जा सकता है।

•🔯चूँकि सूर्य पूर्व दिशा में उगता है इसलिए अर्घ्य भी उसी दिशा में अर्पित किया जाना चाहिये। ये कुंडली में त्रिकोण भाव (1, 5 वां और 9 वां घर) का गठन करता है जिसे व्यक्ति की कुंडली में सबसे ज्यादा लाभदायक माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति को जीवन में विशेष सफलता मिलती है।

🙏ऊपर लिखे हुए लेख में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम आपसे क्षमा प्रार्थी हैं। आपका जीवन तो मंगलमय हो हम आपके सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

📲अपनी कुंडली से संबंधित विशेष जानकारी के लिए नीचे दिए हुए नंबर पर आप अपनी कुंडली का विवरण व्हाट्सएप के माध्यम से भेज सकते हैं और जीवन के सभी कष्ट निवारण का उपाय पा सकते हैं । अपनी सुविधानुसार दक्षिणा प्रदान कर सकते हैं ।

📲संपर्क सूत्र__6386036333 केवल what'sup के लिए

अपने जीवन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान हेतु आप हमसे जुड़ सकते हैं । वैदिक मंत्रों के माध्यम से अपने समस...
21/10/2020

अपने जीवन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान हेतु आप हमसे जुड़ सकते हैं । वैदिक मंत्रों के माध्यम से अपने समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं । और अपने जीवन के सही मूल्यों का आनंद उठा सकते हैं तो देर किस बात की उठाइए अपना मोबाइल भेजिए अपनी समस्या व्हाट्सएप के माध्यम से ।

व्हाट्सएप नंबर __ 6386036333

📶  #जमीन_जायदाद_से_संबंधित_निवेश_में_सफलता  #कैसे_प्राप्त_करें  ?♻️  #जमीन_जायदाद में निवेश करना आज के समय में फायदे का ...
07/10/2020

📶 #जमीन_जायदाद_से_संबंधित_निवेश_में_सफलता #कैसे_प्राप्त_करें ?

♻️ #जमीन_जायदाद में निवेश करना आज के समय में फायदे का व्यापार साबित हो रहा है। प्रॉपर्टी में निवेश के ग्रह नक्षत्रों का संबंध ज्योतिष से बहुत गहरा होता है। किस व्यक्ति को प्रॉपर्टी में निवेश से फायदा होगा, इसका निर्धारण उसकी जन्मपत्री में इस व्यापार से संबंधित ग्रह व भाव के अवलोकन से हो सकता है। प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले इन ग्रहों को जान लेना जरूरी होता है।

♻️जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव से जमीन-जायदाद तथा भू-सम्पत्ति के बारे में विचार किया जाता है। यदि चतुर्थ भाव तथा उसका स्वामी ग्रह शुुभ राशि में, शुभ ग्रह या अपने स्वामी से युत या दृष्ट हो, किसी पाप ग्रह से युत या दृष्ट न हो तो, जमीन संबंधी व्यापार से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। भूमि का कारक ग्रह #मंगल है। अत: कुंडली में चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा मंगल की शुभ स्थिति से भूमि संबंधी व्यापार से फायदा होगा।

🙏🙏 #व्यवसाय से संबंधित किसी भी प्रकार की कोई समस्या आ रही है तो आप हमसे प्रश्न कर सकते हैं ।

♻️भूमि के व्यापार में जमीन का क्रय-विक्रय करना, प्रॉपर्टी में निवेश कर लाभ में बेचना, दलाली के रूप में काम करना तथा कॅालोनाइजर के रूप में स्कीम काटकर बेचना इत्यादि शामिल है, ऐसे सभी व्यापार का उद्देेश्य आय बढ़ाकर धन कमाना होता है। अत: भूमि से संबंधित ग्रहों का शुभ संयोग कुंडली के धन (द्वितीय) तथा आय (एकादश) भाव से भी होना आवश्यक है।

♻️ #चतुर्थ_भाव का स्वामी एवं मंगल उच्च, स्वग्रही अथवा मूल त्रिकोण का होकर शुभ युति में हो तथा धनेश, लाभेश से संबंध बनाए तो प्रॉपर्टी के कारोबार से उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार चतुर्थ भाव का स्वामी धनेश, लाभेश, लग्न अथवा दशम भाव के स्वामी से राशि परिवर्तन करे तो, उस व्यक्ति को भूमि के क्रय-विक्रय से धन लाभ होता है ।

🕉️↔️ऊपर लिखे हुए लेख में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम आपसे क्षमा प्रार्थी हैं। हमारी लेखन में कोई कमी रह गई हो तो आप हम हमें अपनी सुझाव दे सकते हैं । हम आशा करते हैं आप स्वस्थ रहें मस्त रहें।

💠  #क्या_आपकी_कुंडली_में_मौजूद_हैं_किस्मत  #बदलने_वाले_यह_पाँच_राजयोग?कुंडली में कुछ योग राजयोग कहलाते हैं जो हमारे जीवन...
06/08/2020

💠 #क्या_आपकी_कुंडली_में_मौजूद_हैं_किस्मत #बदलने_वाले_यह_पाँच_राजयोग?

कुंडली में कुछ योग राजयोग कहलाते हैं जो हमारे जीवन में सफलता प्रदान करते हैं। ऐसे में आपके मन में सवाल तो अवश्य उठ रहा होगा कि क्या आपकी कुंडली में भी राजयोग है? इन सवालों का जवाब प्राप्त करने में आपकी मदद करते हैं ।

आपकी कुंडली में भी अनेक राजयोग उपस्थित हो सकते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि कौन सा योग आपको फल देने में सक्षम है और कौन सा नहीं? अपने इस सवाल का जवाब जानने के लिए आप हमसे जुड़ कर प्रश्न पूछ सकते हैं।

✅सबसे पहले यह जानते हैं कि #राजयोग किसे कहते हैं?

कुंडली में राजयोग का मतलब कोई राजा बनने से नहीं बल्कि यश, सफलता और समृद्धि के योग से जोड़कर देखा जाता है। राजयोग किसी एक योग का नाम नहीं बल्कि योगों के प्रकार है। जितने ज्‍यादा राजयोग कुण्‍डली में होते हैं उतना ही सफल और समृद्ध व्‍यक्ति जीवन में होता है।

💠 #गजकेसरी_योग__

गजकेसरी योग को वैदिक ज्योतिष में बहुत ही शुभ योगों में से एक माना गया है। गजकेसरी योग जिस व्यक्ति की भी कुंडली में होता है, वह जातक जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में विशेष सफलता अवश्य हासिल करता है। वह धार्मिक, परोपकारी, आज्ञा कारक और दूसरों के हित की परवाह करने वाला होता है और ऐसे लोगों के सामने बड़े-बड़े शत्रु भी टिक नहीं पाते हैं।

✅ #कैसे_बनता_है_कुंडली_में_गजकेसरी_योग ?

अगर बृहस्पति चंद्रमा से केंद्र भाव में अर्थात् प्रथम भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव अथवा दशम भाव में स्थित हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो गजकेसरी योग बनता है। राज योग रिपोर्ट आपकी कुंडली में इस योग की मौजूदगी जानने में आपकी मदद करती है और कुंडली आधारित विस्तृत भविष्यफल प्रदान करती है।

✅ #गजकेसरी_योग_से_मिलने_वाला_फल__

ऐसे लोग दयालु और परोपकारी होते हैं। लोगों से बात करना पसंद होगा। ऐसे लोगों को वेद-पुराणों का भी ज्ञान होता है।

💠 #मालव्य_पंच_महापुरुष_योग__

मालव्य पंच महापुरुष योग कुंडली में बनने वाले महान शुभ एवं राज योगों में से एक होता है। हर कोई इंसान चाहता है कि उसको जीवन में हर तरह की सुख-सुविधा मिले। इसके लिए कुंडली में ऐसे योगों का होना भी आवश्यक है जो उसे सभी भौतिक सुख संसाधनों को उपलब्ध करा सके। यही प्रभाव शुक्र ग्रह द्वारा बनने वाले मालव्य पंच महापुरुष योग का होता है। इसका महत्व यही है कि ऐसा योग व्यक्ति को सौंदर्य और कला का प्रेमी बनाता है।

✅कैसे बनता है कुंडली में #मालव्य_पंच_महापुरुष_योग ?

#मालव्य_पंच_महापुरुष_योग के कुंडली में निर्माण होने का नियम यह है कि शुक्र ग्रह कुंडली के केंद्र भावों में अपनी उच्च राशि, अपनी मूल त्रिकोण राशि या फिर अपनी स्वराशि में स्थित हो।

✅ #मालव्य_पंच_महापुरुष_योग से मिलने वाला फल__
ऐसे इन्सान के जीवन में सद्गुण होता है। ऐसा व्यक्ति देखने में चंद्रमा के समान कांति वाला होता है। ऐसे इंसानों को जीवन में हर प्रकार के भौतिक और सांसारिक सुखों का आनंद मिलता है।

💠 #नीच_भंग_राज_योग__

नीच भंग राज योग ज्योतिष के अनुसार एक ऐसा प्रबल राजयोग होता है जो अगर किसी इंसान की कुंडली में उपस्थित हो तो उसे मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति से निकालकर राजा के समान अतुलनीय धनसंपदा देने में सक्षम होता है। वर्तमान समय में नीच भंग राजयोग काफी प्रभावित करने वाला माना जाता है और इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

✅कैसे बनता है कुंडली में #नीच_भंग_राज_योग?

किसी भी इंसान की कुंडली में नीच भंग राजयोग तब बनता ,है जब कुंडली में कोई नीच ग्रह इस प्रकार विराजमान हो कि उसकी नीच अवस्था समाप्त अर्थात् भंग हो जाए और वह प्रबल रूप से राजयोग कारक ग्रह बन जाए तो वह #नीच_भंग_राजयोग कहलाने लगता है।

✅ #नीच_भंग_राज_योग से मिलने वाले फल__

जिस इंसान की कुंडली में नीच भंग राज योग मौजूद होता है वो राजा के सामान जीवन जीते हैं और उन्हें अखंड लक्ष्मी का भी वरदान प्राप्त होता है। ऐसे इंसान को जीवन में हर सफलता प्राप्त होती है।

💠 #हंस_पंच_महापुरुष_योग___

हंस पंच महापुरुष योग देव गुरु बृहस्पति की विशेष स्थिति के कारण निर्मित होता है। कुंडली में मौजूद यह योग व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार के सुखों की बढ़ोतरी करने वाला होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की गणना समाज के गणमान्य और विद्वान जनों में होती है जिससे उसकी सामाजिक स्थिति मजबूत होती है और लोगों द्वारा से सम्मान मिलता है।

✅कैसे बनता है कुंडली में #हंस_पंच_महापुरुष_योग ?

हंस पंच महापुरुष योग देव गुरु बृहस्पति की विशेष कृपा का द्योतक है। यह योग देव गुरु बृहस्पति की कुंडली के केंद्र भावों में विशेष परिस्थिति में स्थित होने पर बनता है।

✅ #हंस_पंच_महापुरुष_योग से मिलने वाले फल_
ऐसे लोग बेहद भाग्यशाली होते हैं। इस योग में जन्मे जातक में गुणों की अधिकता पाई जाती है और वे अति निपुण होते हैं और हमेशा अच्छे कार्य करने की वजह से नाम कमाते हैं।

💠 #रुचक_पंच_महापुरुष_योग___
रुचक पंच महापुरुष योग व्यक्ति के जीवन में इतनी भव्यता देते हैं कि उसका जीवन महापुरुष के तुल्य हो जाता है। उनके जीवन का कोई सानी नहीं होता और वह जीवन के अनेक क्षेत्रों में ऊंचा उठते हैं और उनका नाम मशहूर हो जाता है।

✅कैसे बनता है कुंडली में #रुचक_पंच_महापुरुष_योग?

यदि मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि अपनी उच्च राशि अथवा मूल त्रिकोण राशि या स्वराशि में स्थित होकर लग्न से केंद्र भाव में स्थित हों तो महापुरुष योग का निर्माण होता है। मंगल से रुचक पंच महापुरुष योग बनता है।

✅ #रुचक_पंच_महापुरुष_योग से मिलने वाले फल __

जिस इन्सान की कुंडली में रुचक पंच महापुरुष योग होता है वो बेहद बलिष्ठ होते हैं, इसके अलावा उनका स्वाभाव भी बेहद अच्छा होता है। ऐसे इन्सान प्रभावशाली होने के साथ-साथ अपने जीवन को मजबूत बनाते हैं, जिससे उसकी एक अलग ही छवि बनती है।

🙏🙏नीचे दिए गए लेकिन किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम आपसे क्षमा प्रार्थी हैं । हम से जुड़े रहने के लिए आप सभी का धन्यवाद ।

🙏🙏हम आशा करते हैं कि आप स्वस्थ होंगे । आपका आने वाला समय शुभ मंगलमय हो । हम आपके सुख समृद्धि की कामना करते हैं ।

↔️ज्योतिष में, किसी जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति जीवन में उसके करियर को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा...
07/06/2020

↔️ज्योतिष में, किसी जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति जीवन में उसके करियर को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुंडली में मौजूद यह ग्रह हमारे करियर को सही दिशा देते हैं और उसे सही राह पर ले जाने में भी मददगार होते हैं।

↔️कुंडली के 12 भावों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। इन नौ ग्रहों में #केतु एक छाया ग्रह है, लेकिन जन्म कुंडली में यह जिस भाव में स्थित होता है, उससे संबंधित क्षेत्र में व्यक्ति पर जीवन भर असर डालता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु, सूर्य एवं चंद्र के परिक्रमा पथों के आपस में काटने के दो बिंदुओं के द्योतक हैं, जो पृथ्वी के सपेक्ष एक दूसरे के विपरीत दिशा में स्थित रहते हैं। चूंकि ये ग्रह कोई खगोलीय पिंड नहीं हैं, इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है

↔️हिन्दू ज्योतिष में #केतु अच्छी व बुरी आध्यात्मिकता एवं पराप्राकृतिक प्रभावों के कार्मिक संग्रह का द्योतक है। यह ग्रह तर्क, बुद्धि, ज्ञान, वैराग्य, कल्पना, अंतर्दृष्टि, मर्मज्ञता, विक्षोभ और अन्य मानसिक गुणों का कारक है।

↔️ऐसा माना जाता है कि केतु अपने भक्त के परिवार को समृद्धि दिलाता है। ज्योतिष गणनाओं के लिए केतु को तटस्थ अथवा नपुंसक ग्रह मानते हैं। यह ग्रह तीन नक्षत्रों का स्वामी है: अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र। यही केतु जन्म कुण्डली में राहु के साथ मिलकर कालसर्प योग की स्थिति बनाता है। #केतु मतान्तर से वृश्चिक व धनु राशि में उच्च का और वृष व मिथुन में नीच राशि में माना जाता होता है। मत्स्य पुराण के अनुसार केतु बहुत-से हैं, उनमें धूमकेतु प्रधान है।

↔️आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कुंडली के अलग-अलग भावों में स्थित होने पर केतु आपके करियर को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है और विभिन्न भावों में स्थित होने पर आप किस प्रकार के कार्य क्षेत्रों का चुनाव कर सकते हैं।

✨✨द्वादश भावों में केतु और करियर से जुड़े फल__

✅ #प्रथम_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्मकुंडली में केतु ग्रह प्रथम भाव में हो तो ऐसा जातक किसी व्यापार में या सेवा क्षेत्र में संतोषजनक उपलब्धि हासिल करता है। वह ज्ञानी, तीव्र स्मरण शक्ति वाला, नीतिज्ञ, भाग्यशाली, स्थूल देह वाला तथा चतुर बुद्धि का होता है। केतु शुभ संबंधों में होने पर व्यक्ति किसी राजनीतिज्ञ का गुप्त चर बन कर धन अर्जित करता है।

✅ #द्वितीय_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी जातक की जन्म कुण्डली के द्वितीय भाव में केतु ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक यात्रा क्षेत्र से जुड़े कार्य व अपने माता पिता एवं गुरुजनों का आज्ञाकारी, अनेक प्रकार के व्यवसायों से धन अर्जित करने वाला, वाहन व चौपाय सम्बंधित व्यापार करता है।

✅ #तृतीय_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में केतु ग्रह तृतीय भाव में स्थित हो तो ऐसा जातक किसी भी काम को करने से पहले आलस करता है। आलस के कारण व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली बहुत बड़ी सफलता को असफलता में बदल लेता है। ऐसे व्यक्ति को अपनी बहनों से अर्थ लाभ एवं व्यापार, व्यवसाय वृद्धि संबंधित सलाह व सहयोग दिलवाता है और अंत में ऐसा जातक अपना व्यापार शुरु कर अपनी अच्छी आजीविका प्रारम्भ करता है।

✅ #चतुर्थ_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में केतु ग्रह चतुर्थ भाव में हो तो ऐसा जातक व्यवसाय के माध्यम से धन कमाने वाला, पशु सेवा से लाभ अर्जित करने वाला, धार्मिक कार्यों में रूचि रखने वाला अथवा गायन एवं संगीत कला में रूचि रखने वाला एवं एक अच्छा वक्ता होता है। परन्तु अक्सर व्यक्ति को सुखों से वंचित रखता है।

✅ #पंचम_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
जन्म कुंडली के पंचम भाव में केतु ग्रह स्थित हो तो ऐसा जात एक अच्छा राज नेता बन कर समाज का सही ढंग से प्रतिनिधित्व करता है। ऐसा जातक कलात्मक होता है और नाट्य, मनोरंजन, संगीत, नृत्य, शेयर बाजार से जुड़ा कार्य करता है। ऐसा व्यक्ति किसी हॉल का मालिक हो सकता है, जो अलग अलग तरह की पार्टी आयोजित कराता हो।

✅ #छठे_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुण्डली के छठे भाव में केतु ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा जातक एक अच्छा समाज सेवक व न्यायधीश, वकील व अपने व्यवसाय के माध्यम से आजीविका चलाने वाले होता है। परन्तु अक्सर रोग व शत्रुओं से परेशान रहता है। ऐसा व्यक्ति अपनी पढ़ाई में गंभीरता रखता है क्योंकि उसे इसी का लाभ मिलता है।

✅ #सप्तम_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में केतु ग्रह स्थित होता है, तो ऐसा पाप वृत्ति में लिप्त, अत्यधिक यौनाचार के कारण बीमार और स्वास्थ्य-सम्बन्धी परेशानियों से ग्रस्त होता है। जीवनसाथी अथवा विपरीत लिंगी जातकों द्वारा धन प्राप्त करता है या विदेशी कार्य करता है। ऐसा व्यक्ति पार्टनरशिप में बिजनेस करें तो लाभ उठा सकता है।

✅ #अष्टम_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में केतु ग्रह अष्टम भाव में हो तो जातक दुर्बल अथवा पुष्ट शरीर वाला और कभी लाभ और कभी हानि पाने वाला होता है अर्थात इन क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसा व्यक्ति धन के रहते हुए भी उसका सुख न पाने वाला और पापकर्म कर अपनी आजीविका प्राप्त करने का विचार रखने वाला हो सकता है। ऐसा जातक मित्रों के साथ मिल कर अपना व्यापार या उनके साथ में व्यापार की योजना बनाता है।

✅ ाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में केतु ग्रह नवमभाव में हो तो जातक दूसरे के धन का उपयोग करने वाला, व्यसनों से रहित, धार्मिक प्रवृत्ति वाला, शास्त्रों का ज्ञाता एवं परोपकारी प्रवृत्ति वाला होता है। दूसरों का सहयोग कर अपना जीवन यापन करता है। ऐसा जातक अक्सर दूसरों की भलाई करने वाले कार्य अथवा समाज सेवा और पूजा-पाठ के कामों से जुड़ा हो सकता है।

✅ ाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
जन्म कुंडली के दशम भाव में केतु ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक परोपकार, धर्मार्थ या सुधारक संस्थान, जेल, शरण और अस्पताल आदि से जुड़ा होता है। इस भाव में बैठे केतु ग्रह के जातक अपराधियों, जासूसों, गुप्त बलों और गुप्त दुश्मनों, भूमिगत जैसे कार्य व मंत्रालय से जुड़ा कार्य करते हैं ।

✅ #एकादश_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
जन्म कुंडली के एकादश भाव में केतु ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक कार्यो को करने मे कुशल, दूसरों के प्रभाव से अपनी इष्ट-पूर्ति करने वाला, दृढ-निश्चयी लेकिन क्षणिक, नीच स्वभाव का, नीच कर्म करने वाला, कष्ट-सहिष्णु, विपरीत लिंगी जातकों के द्वारा कार्य साधन करने वाला और सट्टेबाजी का काम कर के अपनी आजीविका प्राप्त करता है ।

✅ #द्वादश_भाव_में_केतु_ग्रह_का_फल__
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में केतु ग्रह द्वादश भाव में हो तो ऐसा जातक सामाजिक सेवा करने वाला, उद्योग करते रहने पर भी सिद्धि न पाने वाला, परिश्रमी, मूर्ख, चिन्तातुर, मतिमन्द, कपटी तथा नीच वृत्ति वाला होता है। ऐसा जातक का अक्सर विदेशी गमन या विदेश से धन प्राप्ति योग बनता है।

✔️✔️ऊपर दिए गए विवरण से केवल कार्यक्षेत्र और व्यवसाय के संदर्भ में कुंडली के विभिन्न भावों में केतु की स्थिति पर आधारित सामान्य फल का ज्ञान मिलता है। विशेष फल के लिए कुंडली का विवेचन और देश काल तथा पात्र की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत विश्लेषण करना परम आवश्यक है। इस प्रकार आप जान सकते हैं कि जन्म कुंडली के विभिन्न भावों में स्थित केतु आपके कार्य एवं व्यवसाय को अलग-अलग रूपों में प्रभावित करता है।

🙏🙏ऊपर लिखे हुए लेख में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम आपसे क्षमा प्रार्थी हैं आपका जीवन शुभ मंगलमय हो हम आपके सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

 #कुंडली_में_शुक्र_की_स्थिति_का_करियर_पर_प्रभाव__↔️ज्योतिष में शुक्र ग्रह सौरमंडल का सबसे दैदीप्यमान ग्रह है। यह वृष तथा...
22/05/2020

#कुंडली_में_शुक्र_की_स्थिति_का_करियर_पर_प्रभाव__

↔️ज्योतिष में शुक्र ग्रह सौरमंडल का सबसे दैदीप्यमान ग्रह है। यह वृष तथा तुला राशि का स्वामी है तथा तुला राशि में स्थित होने पर विशेष बली रहता है और मीन राशि में उच्च व कन्या राशि में नीच का होता है। शुक्र को पति-पत्नी, प्रेम संबंध, ऐश्वर्य, आनंद आदि का भी कारक ग्रह माना गया है। इसके साथ-साथ किसी भी इंसान के करियर को आकार देने में भी शुक्र का महत्वपूर्ण योगदान होता है ।

↔️अगर कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी है तो जातक का पूरा जीवन भोग, आनंद और ऐश्वर्य के साथ बितता है। शुक्र ग्रह से प्रभावित व्यक्ति सौम्य एवं अत्यंत सुंदर व्यक्तित्व का होता है। शुक्र के विशेष प्रभाव से जातक जीवनभर सुखी रहता है। शुक्र अपने प्रभाव से जातक को मकान और वाहन आदि का भी सुख देता है। सम्पूर्ण भोग विलास की चीजों का क्षेत्राधिकार ग्रहों में शुक्र ग्रह को प्राप्त हैं। शुक्र की चमक एवं शान अन्य ग्रहों से अलग व निराली है। शुक्र की आराधना कर शुक्र को बलवान बनाकर सुख व ऐश्वर्य पाया जा सकता है। शुक्र ग्रह से प्रभावित युवतियाँ सौन्दर्य प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज करती हैं। कुछ ग्रह ऐसे भी होते हैं, जो कुछ दूर तक तो युवतियों का सहयोग करते हैं, लेकिन जैसे ही दूसरे प्रतिभागियों के ग्रह भारी पड़ते हैं, कमजोर ग्रह वाली युवतियां पिछड़ने लगती है। ऐसे में शुक्र ग्रह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

↔️आइए अब जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति की कुंडली में विभिन्न भावों में शुक्र की उपस्थिति किस प्रकार से उसके कार्य क्षेत्र को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।

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✅ #प्रथम_भाव( first house)में शुक्र का फल__

पहले भाव में स्थित शुक्र जातक को कला का शौकीन, संगीत, नृत्‍य और चित्रकला में रूचिपूर्ण कार्य करवाता है और हमेशा राजकार्य में कुछ न कुछ गतिविधि बनाये रखता है। सामान्‍य तौर पर प्रथम भाव में शुक्र भाग्‍य को अच्‍छा बनाता है और अपने जीवन को सुखमय व्यतीत करता है । प्रोफेशनल्स हमारी कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट की एक कॉपी प्राप्त कर सकते हैं और अपने करियर के बारे में अधिक जान सकते हैं ।

✅ #द्वितीय_भाव (second house)में शुक्र का फल_

दूसरे भाव में स्थित शुक्र ग्रह जातक को अधिक धन की प्राप्ति करवाता है। जातक को समृद्ध व जीवनसाथी के साथ व्यापार के लिए प्रेरित करवाता है। जातक दिखने में सुंदर व विलासिता से भरा जीवन बिताते हैं। जातक भव्‍य और सुंदर चीजों, मिष्ठान्न, लोकप्रिय, जौहरी, मिट्टी के सामान से जुड़ा व्यवसाय, कृषि, पशु, कविता पाठ, आदि से जुड़ा हुआ कार्य करवाता है ।

✅ #तृतीय_भाव (Third House) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के तीसरे भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक कृपण, आलसी, चित्रकार, विद्वान तथा यात्रा करने का शौकीन होता है। आध्यात्मिक कर्मों के संचय को भी दर्शाता है व विदेश से जुड़े कारोबार को करता है। साथ ही, ऐसा जातक सोशल मीडिया, मनोरंजन, ऑनलाइन, अन्य उपकरण का व्यापार व कार्य करता है।

✅ #चतुर्थ_भाव(Fourth House) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक निजी जीवन या अफेयर को दर्शाता है। साथ ही जातक छोटे भाई-बहनों से जुड़ कर विदेशी व्यापार को करता है। मीडिया, वस्त्र, फर्नीचर, घर के अंदर की कलात्मक वस्तुएँ, कार, ऑर्किटेक्चर, जमीन, वाहन, घोड़ा, झील, नदी, समुद्र, नाला, तालाब, आदि से सम्बन्धित नौकरी अथवा व्यापार करता है।शादीशुदा जातक अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जानना चाहते हैं या उनके लिए एक आदर्श कैरियर की तलाश में हैं, वो भी हमारी कोग्निएस्ट्रो करियर परामर्श रिपोर्ट (ग्रेड 10 तक) और कोग्निएस्ट्रो करियर परामर्श रिपोर्ट (ग्रेड 12 तक)

✅ #पंचम_भाव(Fifth House) में शुक्र का फल ___

जन्म कुंडली के पंचम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक सामाजिक झुकाव का प्रतिनिधित्व करता है या एक अच्छा राज नेता बनता है। ऐसा जातक कलात्मक कार्यों, नाटक, मनोरंजन, हॉल और पार्टी, रोमांस, प्यार, प्रेम प्रसंग, सिनेमा, मनोरंजन से जुड़ा कार्य और भौतिक सुखों जैसे-खेल, ओपेरा, ड्रामा, संगीत, नृत्य, शेयर बाजार, जुआ, मैच फिक्सिंग और लॉटरी से जुड़ा कार्य करता है।

✅ #छटे_भाव (sixth House) में शुक्र का फल __

जन्म कुंडली के छठा भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक राजनीति, न्यायपालिका की कार्यवाही, देश में सांप्रदायिक सौहार्द्र और श्रमिक संस्थाओं व राष्ट्र रक्षा एवं सेना से जुड़ा कार्य करता है। ऐसा जातक स्वास्थ्य, मेडिकल सेवाएँ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता जैसे- नर्सिंग, दंत चिकित्सक और डॉक्टरी से जुड़ा हुआ कार्य करता है।

✅ #सप्तम_भाव(Seventh House) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के सप्तम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक यदि किसी आध्यात्मिक जीवन से जुड़ा हुआ कार्य करता है। क्रिएटिविटी, ननिहाल पक्ष से जुड़ कर कार्य करता है। संपत्ति या ज़मीन जायदाद से जुड़ा हुआ व्यापार भी ऐसे जातकों को कामयाब बशाता है।

✅ #अष्टम_भाव (Eight house) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के अष्टम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक दीर्घजीवी व कटुभाषी होता है। इसके ऊपर कर्जा चढ़ा रहता है। ऐसा जातक खदान, कोयला, सट्टा व्यापार, लॉटरी, मंत्र, तंत्र, एवं आध्यात्मिक वस्तुओं से जुड़ा हुआ व्यापार व नौकरी करता है ।

✅ ाव (ninth house) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के नवम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक धर्मादि कार्यों जुड़ा कार्य, राजकीय सेवा व खेल कूद से जुड़े हुए कार्य से अपने जीवन में आजीविका को प्राप्त करता है और अपने जीवन को सुखमय तरीके से व्यतीत करता है।

✅ ाव( tenth House) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के दशम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक व्यापार, समृद्धि, सरकार से सम्मान, अधिकारी पद, घुड़सवारी, एथलेटिक्स, समाज सेवा, कृषि, ताकतवर कार्यों, शिक्षण, आदेशात्मक कामों, आदि चीज़ों से जुड़ा कार्य करता है।

✅ #एकादश_भाव (11th house)में शुक्र का फल__

इस भाव में शुक्र ग्रह हो तो ऐसा जातक रत्नों व सफेद वस्तुओं से जुड़ा हुआ कार्य करता है व साथ ही ज्ञान देने वाला, शेयर बाज़ार, संगीत,फिल्मों व वाहन से जुड़ा हुआ कार्य करता है ,अपने मित्रों के साथ जुड़ कर सामाजिक मदद करने वाला होता है व उससे अपने जीवन की आजीविका को प्राप्त करता है और अपने जीवन को सुखमय बना कर जीता है

✅ #द्वादश_भाव (12th house) में शुक्र का फल__

जन्म कुंडली के द्वादश भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक परोपकार, धर्मार्थ या सुधारक संस्थान, जेल, शरण और अस्पताल आदि से जुड़ा होता है। इस भाव में बैठे शुक्र ग्रह के जातक अपराधियों, जासूसों, गुप्त बलों और गुप्त दुश्मनों, भूमिगत जैसे कार्य व मंत्रालय से जुड़ा कार्य करते हैं।

🧭🧭इस प्रकार कुंडली के विभिन्न भावों में स्थित होकर शुक्र ग्रह आपके कार्यक्षेत्र को अलग-अलग रूपों में परिभाषित करता है। उपरोक्त दिए हुए फल केवल सामान्य प्रकृति के हैं। व्यक्तिगत विश्लेषण व्यक्ति विशेष की कुंडली पर आधारित होता है तथा देश, काल और पात्र के सिद्धांत के आधार पर भिन्न हो सकता है।

ऊपर लिखे लेख में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम आपसे क्षमा प्रार्थी हैं । आपका जीवन शुभ मंगलमय हो। हम आपके सुख समृद्धि की कामना करते हैं । कुंडली से संबंधित विशेष जानकारी के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं ।

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