Akhand Bharat - अखंड भारत

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समाज की वजह से वीडियो नही डाल रहा मैं, और ये महाबेशर्म ट्रेन में कांड करने में भी नही शर्माए😞5 वीडियो में जाकर इनकी रासल...
27/12/2025

समाज की वजह से वीडियो नही डाल रहा मैं, और ये महाबेशर्म ट्रेन में कांड करने में भी नही शर्माए😞
5 वीडियो में जाकर इनकी रासलीला पूरी हुई🤦🏻😂
मतलब ऐसी क्या आग लग गई थी जो ये खुले आम ट्रेन में ही शुरू हो गये?? इन जैसे लोगों का बहुत बढ़िया वाला इलाज किया जाना चाहिए नही तो आगे आगे ऐसे कारनामे अक्सर देखने को मिला करेंगे।
नोट - अगर समाज मुझे गालियां ना दे तो इनकी वीडियो डाल दूं??????

 #किस्मत कह लीजिए, या राजनीतिक सूझ-बूझ, या फिर बाबा  #गोरखनाथ का आशीर्वाद —जो भी योगी जी के सामने उनका  #प्रतिद्वंदी बना...
20/12/2025

#किस्मत कह लीजिए, या राजनीतिक सूझ-बूझ, या फिर बाबा #गोरखनाथ का आशीर्वाद —
जो भी योगी जी के सामने उनका #प्रतिद्वंदी बना,
उसका राजनीतिक प्रभाव समय के साथ सीमित होता चला गया।

कुछ लोग इसे संयोग कहते हैं,
कुछ इसे रणनीति मानते हैं,
और कुछ इसे संत-सत्ता के अद्भुत मेल का परिणाम।

पर इतना तो तय है —
योगी आदित्यनाथ के सामने खड़े होकर राजनीति करना आसान नहीं रहा।

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(1) #शिव_प्रताप_शुक्ला 👇

साल 2002।
तत्कालीन मुख्यमंत्री थे राजनाथ सिंह जी।
गोरखपुर सदर से BJP के दिग्गज नेता,
लगातार 4 बार विधायक,
कैबिनेट मंत्री — शिव प्रताप शुक्ला।

पूरा संगठन उनके साथ था।
लेकिन योगी जी ने
अखिल भारतीय हिंदू महासभा से
राधा मोहन दास अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया।

परिणाम चौंकाने वाला रहा —
👉 राधा मोहन दास अग्रवाल विजयी
👉 शिव प्रताप शुक्ला तीसरे स्थान पर

इस चुनाव के बाद
शिव प्रताप शुक्ला जी लगभग 15 वर्षों तक संगठनात्मक राजनीति तक ही सीमित रहे।
बाद में राज्यसभा और फिर राज्यपाल बनाकर
उन्हें सम्मान अवश्य मिला,
लेकिन सक्रिय राजनीति में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रही।

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(2) #मनोज_सिन्हा 👇

2017 में UP में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद
मुख्यमंत्री पद के लिए
जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी,
वो था — मनोज सिन्हा।

यहाँ तक कहा गया कि
बनारस में उन्हें
CM स्तर का प्रोटोकॉल तक मिलने लगा था।

लेकिन राजनीति परिस्थितियों से चलती है।
2019 लोकसभा चुनाव में
मनोज सिन्हा चुनाव हार गए।

बाद में LG बनकर
एक तरह से सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक दूरी बन गई।

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(3) #उपेंद्र_दत्त_शुक्ला 👇

2018 गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में
योगी जी के विरोधी गुट ने
शिव प्रताप शुक्ला के करीबी
उपेंद्र दत्त शुक्ला को टिकट दिलाया।

नतीजा वही रहा —
👉 चुनाव में पराजय
👉 और राजनीतिक प्रभाव सीमित हो गया।

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(4) ्मा 👇

मोदी और अमित शाह जी के
सबसे भरोसेमंद ब्यूरोक्रेट्स में गिने जाने वाले
AK शर्मा।

2021 में गुजरात से समय से पहले VRS लेकर
UP की राजनीति में प्रवेश।

चर्चा थी कि
CM या Dy CM बनाए जाएंगे।

लेकिन हकीकत में —
👉 BJP प्रदेश उपाध्यक्ष (जहाँ पहले से 17 लोग थे)
👉 बाद में किसी तरह MLC
👉 वर्तमान में कैबिनेट मंत्री

जिस स्तर की उम्मीदें थीं,
उस अनुपात में उनका राजनीतिक प्रभाव
उतना सशक्त बनता नहीं दिखा,
और भविष्य को लेकर चर्चाएँ बनी हुई हैं।

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(5) #केशव_प्रसाद_मौर्य 👇

2017 में UP BJP की जीत के बाद
मुख्यमंत्री पद के लिए
सबसे ज्यादा चर्चा
केशव प्रसाद मौर्य जी के नाम की थी।

प्रदेश अध्यक्ष भी थे,
लेकिन CM बने — योगी आदित्यनाथ
और केशव जी को Dy CM से संतोष करना पड़ा।

2018 में
योगी जी के खिलाफ
BJP के लगभग 200 विधायक धरने पर बैठे —
यह भी सबने देखा।

फिर आया 2022 का चुनाव —
👉 केशव मौर्य अपनी सीट हार गए
👉 फिर भी Dy CM बने
👉 मंत्रालय सीमित कर दिया गया

आज स्थिति यह है कि
राजनीतिक प्रभाव से अधिक
PR के जरिए सक्रियता दिखाई देती है।

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(6) #पंकज_चौधरी 👇

UP में जब-जब CM परिवर्तन की चर्चा हुई,
अंदरखाने
पंकज चौधरी का नाम तेजी से उभरा।

दो बार
4 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की।

लेकिन इस बार —
👉 जीत का अंतर घटकर
👉 सिर्फ 30 हजार वोट रह गया।

राजनीति संकेतों से चलती है,
और संकेत बहुत कुछ कह जाते हैं।

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🔥 निष्कर्ष

यह डर की राजनीति नहीं है,
यह अपमान की राजनीति नहीं है।

यह उस नेतृत्व की कहानी है
जो धर्म, राष्ट्र और निर्णय को
सत्ता से ऊपर रखता है।

👉 योगी आदित्यनाथ
के सामने जो भी
सत्ता की महत्वाकांक्षा लेकर खड़ा हुआ,
राजनीतिक परिस्थितियाँ उसके लिए
अलग दिशा में जाती दिखाई दीं।

क्योंकि
योगी जी सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं,
एक विचार, एक संकल्प और एक युग का नाम हैं।

🕉️
जय बाबा गोरखनाथ
जय योगी
जय हिंद 🇮🇳

अगर ये पोस्ट
आपके दिल में हलचल पैदा न करे,
तो राजनीति को समझना अभी बाकी है।

अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मुसली, विदारीकन्द, गोखरू और कौंच बीच का यह नुस्खा अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक और लाभदायक है।यह आयुर्वेद...
19/12/2025

अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मुसली, विदारीकन्द, गोखरू और कौंच बीच का यह नुस्खा अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक और लाभदायक है।

यह आयुर्वेदिक नुस्खा मुख्य रूप से वीर्य और शुक्राणुओं को बढ़ाने में मदद करता है। इसके संभावित लाभ निम्नलिखित हैं

1: वीर्य की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार: यह नुस्खा वीर्य को गाढ़ा करने और उसकी मात्रा (Volume) बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

2: शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि (S***m Count): यह पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे प्रजनन क्षमता (Fertility) बेहतर हो सकती है।

3: शारीरिक शक्ति और ऊर्जा में वृद्धि: इसमें मौजूद अश्वगंधा और सफ़ेद मूसली शरीर की कमज़ोरी को दूर करके ऊर्जा और सहनशक्ति (Stamina) को बढ़ाते हैं।

4: तनाव और चिंता कम करना: अश्वगंधा एक शक्तिशाली एडाप्टोजेन है जो तनाव (Stress) और चिंता (Anxiety) को कम करने और मानसिक शांति लाने में मदद करता है।

5: हार्मोनल संतुलन: यह नुस्खा हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

मांसपेशियों को मज़बूत करना: यह शारीरिक बल और मांसपेशियों के विकास में भी सहायक हो सकता है।

6: पोषक तत्वों की पूर्ति: इन सभी जड़ी-बूटियों के पोषक तत्वों को शरीर तक पहुँचाने और उनके स्वाद को बेहतर बनाने में मदद करती है।

सभी को 100 ग्राम लेना है और आपस में मिक्स करके सुबह नाश्ता करने से पहले एक चम्मच और शाम को खाना खाने से पहले एक चम्मच दूध के साथ इस्तेमाल करें।
आप इसे घर पर भी बना सकते हैं।
पाचन का ध्यान देना अति आवश्यक है।

🔸बथुआ: आयुर्वेद की 🔸अनोखी अमृतघटसर्दियों की ठंडी हवा में, जब खेतों की मिट्टी नम रहती है, वहाँ एक साधारण-सी झाड़ी उग आती ...
18/12/2025

🔸बथुआ: आयुर्वेद की
🔸अनोखी अमृतघट
सर्दियों की ठंडी हवा में, जब खेतों की मिट्टी नम रहती है, वहाँ एक साधारण-सी झाड़ी उग आती है—बथुआ। वैज्ञानिक भाषा में चेनोपोडियम एल्बम कहलाने वाली यह जड़ी-बूटी, जो कभी खरपतवार समझी जाती थी, आज पोषण और चिकित्सा की दृष्टि से एक अनमोल रत्न साबित हो रही है। प्राचीन ग्रंथों में इसे 'वास्तूक' नाम से जाना जाता है, जो न केवल भोजन है बल्कि त्रिदोष-नाशक औषधि भी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बथुआ के बीजों से बनी रोटी को हिमालयी इलाकों में 'सूरा' नामक किण्वित पेय बनाया जाता है, जो ऊर्जा का स्रोत बनता है? या फिर, इसके पत्तों का लेप जलने पर लगाने से त्वचा की कोशिकाएँ तेजी से पुनर्जीवित हो उठती हैं—एक ऐसा रहस्य जो आधुनिक एंटीऑक्सीडेंट क्रीमों से कहीं आगे है।

बथुआ की पौष्टिकता को सत्यापित करने पर पता चलता है कि यह वाकई विटामिनों और खनिजों का भंडार है। 100 ग्राम कच्चे बथुए में पाए जाते हैं:—

विटामिन A (580 माइक्रोग्राम, दृष्टि और त्वचा के लिए अनिवार्य),
विटामिन C (80 मिलीग्राम, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला),
विटामिन B1 (0.16 मिलीग्राम),
B2 (0.44 मिलीग्राम),
B3 (1.2 मिलीग्राम),
B5 (ट्रेस),
B6 (0.274 मिलीग्राम) और
B9 (फोलेट, 30 माइक्रोग्राम) प्रचुर हैं। खनिजों में कैल्शियम (309 मिलीग्राम, हड्डी मजबूती के लिए), लोहा (1.2 मिलीग्राम, रक्ताल्पता निवारक), मैग्नीशियम (34 मिलीग्राम), मैंगनीज (0.782 मिलीग्राम), फास्फोरस (72 मिलीग्राम), पोटैशियम (452 मिलीग्राम), सोडियम (43 मिलीग्राम) तथा जिंक (0.44 मिलीग्राम) प्रमुख हैं। कुल ऊर्जा 43 किलोकैलोरी है, जिसमें 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन और 4 ग्राम फाइबर सम्मिलित। ये आंकड़े इसे सुपरफूड की उपाधि देते हैं, विशेषकर विटामिन A की उच्चता नेत्र स्वास्थ्य के लिए वरदान सिद्ध हुई है। ये तथ्य आधुनिक पोषण विज्ञान से सिद्ध हैं, जो बथुए को सुपरफूड की श्रेणी में रखते हैं।

🔸आयुर्वेदीय गुण-कर्म:

आयुर्वेद में बथुआ को 'वास्तूक' कहकर विशेष स्थान दिया गया है और इसे शाकों में सर्वश्रेष्ठ (निकृष्ट :सरसो साग) बताया गया है। इसके गुण और कर्म इस प्रकार हैं:—
◼️रस (स्वाद): मधुर (मीठा) और कटु (तीखा)—यह संतुलन पाचन को उत्तेजित करता है बिना जलन पैदा किए।
◼️विपाक (पाचनोत्तर स्वाद): कटु—जो अग्नि को प्रज्वलित कर विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
◼️गुण (प्रकृति): लघु (हल्का, सुपाच्य), क्षार (क्षारीय, जो अम्लता को संतुलित करता है), स्निग्ध (स्नेहपूर्ण, जो वात को शांत करता है)।
◼️वीर्य (तासीर): उष्ण (गर्म)—सर्दियों में शरीर को ऊष्मा प्रदान करता है।
◼️दोष प्रभाव: त्रिदोषहर (वात, पित्त, कफ तीनों को संतुलित), यह रक्तशोधक (खून साफ करने वाला) और यकृत उतेजक (लीवर सक्रिय करने वाला) है।
◼️कर्म (क्रिया): दीपन (अग्नि प्रदीप्त करने वाला), पाचन (पाचक), रूचिकर (स्वाद बढ़ाने वाला), शुक्रबर्धक (वीर्यवर्धक), बलप्रद (शक्ति देने वाला), शोथहर (सूजन कम करने वाला), वेदनास्थामक (दर्द निवारक)।

ये गुण चरक संहिता और भावप्रकाश निघंटु जैसे ग्रंथों में वर्णित हैं। उदाहरणस्वरूप, बथुआ का सेवन रक्तपित्त (रक्तस्राव विकार) में लाभकारी है, क्योंकि यह पित्त की अतिरिक्त गर्मी को शांत करता है। इसके अलावा, यह कृमिनाशक (कीड़े नष्ट करने वाला) है—जिसके कारण आंतों के परजीवी आसानी से नष्ट हो जाते हैं। एक कम ज्ञात तथ्य: बथुआ का तेल (पत्तों से निकाला गया) एंटीफंगल गुणों से भरपूर है, जो त्वचा संक्रमणों में चमत्कारिक काम करता है।

आयुर्वेद के ग्रन्थों में वास्तूक की दो जातियाँ बताई गई हैं:
1️⃣श्वेत वास्तूक (सफेद बथुआ) → यही हमारा सामान्य हरा बथुआ है, पूरा पौधा हरा, स्वाद में हल्की कड़वाहट, ऑक्सालिक एसिड थोड़ा अधिक। साग के लिए उत्तम।
2️⃣रक्त वास्तूक (लाल बथुआ)
डंठल और पत्तियों के पीछे बैंगनी-लाल रंग, स्वाद मीठा, ऑक्सालिक एसिड बहुत कम।
रस के लिए और पथरी-गठिया वालों के लिए सबसे श्रेष्ठ।
गाँव में आज भी कहते हैं:
“हरा खाओ साग बनाओ, लाल खाओ रस बनाओ।” बस इतना याद रखो – लाल वाला मिल जाए तो पहले उसे चुन लो, खासकर रस के लिए। हरा वाला साग-पराठे में डालो, मजा आ आएगा। दोनों अच्छे, बस प्रयोग अलग। कुछ लोग लाल को रोगग्रस्त बथुआ समझकर फेंक देते हैं, पर उनकी गलत धारणा है।

आयुर्वेद में सामान्य शाकों को नेत्रों के लिए हानिकारक माना गया है, क्योंकि वे कफ वृद्धि कर दृष्टि को मंद करते हैं। किंतु पंच शाक—जीवंती (लेप्टाडेनिया रेटिकुलाटा), वास्तूक (बथुआ), मत्स्याक्षी (अल्टरनेंथेरा सैसिलिस), मेघनाद (अमरैंथस स्पाइनोसस, चौलाई का एक रूप) तथा पुनर्नवा (बोएरहेविया डिफ्यूसा)—अपवाद हैं। ये सभी त्रिदोषहर हैं और नेत्रज्योति वर्धक।

योगरत्नाकर (नेत्र रोग अध्याय) में श्लोक है:
"शाकानि सर्वाणि हि चक्षुष्याणि न भवन्ति, शाकपञ्चकं विना।
जीवन्ती वास्तूकं मत्स्याक्षी मेघनादं पुनर्नवां च॥
एते त्रिदोषहरा नेत्रहिता, सेवनं तेषां निरोगत्वं ददाति।"
(सभी शाक नेत्रों को लाभ नहीं पहुँचाते, सिवाय पंच शाक के। जीवंती, वास्तूक, मत्स्याक्षी, मेघनाद और पुनर्नवा—ये त्रिदोषहर हैं, नेत्रहितकारी और निरोगता प्रदान करने वाले।)
भावप्रकाश निघंटु (शाक वर्ग) में भी इन्हें चक्षुष्य (दृष्टिवर्धक) कहा गया है, जबकि चरक संहिता (सूत्रस्थान 27) में इनकी त्रिदोषनाशकता पर बल दिया गया। आधुनिक शोध विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण इनकी नेत्र-सुरक्षात्मक क्षमता की पुष्टि करते हैं।

🔸ऋषियों और वैज्ञानिकों
🔸का एक ही स्वर

जब लैबोरेट्री के सफेद कोट वाले वैज्ञानिकों ने बथुआ को माइक्रोस्कोप के नीचे रखा, तो वे दंग रह गए…
उन्होंने देखा कि हमारे दादा-दादी जो सदियों से बिना किसी जर्नल के कहते आए थे, वही बातें अब रिसर्च पेपरों में काले अक्षरों में लिखी जा रही हैं। जैसे कोई ऋषि आज की भाषा में फिर से बोल रहा हो:—

◼️आधुनिक शोध चीख-चीख कर बता रहे हैं कि बथुआ के फ्लेवोनॉइड्स और पॉलीफिनॉल्स कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं। स्तन कैंसर और कोलन कैंसर की कोशिकाएँ जब इसके अर्क से मिलती हैं, तो वे आत्महत्या करने लगती हैं (एपोप्टोसिस)। ऋषि कहते थे “रक्तशोधन”, साइंस कहता है “एंटी-कैंसर एक्टिविटी” – बात एक ही है।

◼️जब लीवर को शराब या दवाओं से जहर दिया जाता है, तो चूहों के प्रयोगों में बथुआ का अर्क लीवर को नई जिंदगी देता है। जो कोशिकाएँ मरने की कगार पर होती हैं, वे फिर से हरी हो उठती हैं। आज का हेपेटो-प्रोटेक्टिव रिसर्च और पुराना “यकृत बलकारक” एक ही सत्य को दो भाषाओं में बोल रहे हैं।

◼️डायबिटीज के मरीजों के खून में जब बथुआ का रस डाला गया, तो शुगर का स्तर नीचे गिरने लगा। इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ गई। जैसे कोई कह रहा हो – “मधुमेह को जड़ से शांत करने वाला पुराना वास्तूक आज भी जीवित है।”

◼️त्वचा पर फंगल इन्फेक्शन, मुँह में छाले, मसूड़ों से खून – जहाँ-जहाँ कीटाणु पनपते हैं, वहाँ बथुआ का अर्क पहुँचते ही उन्हें मार गिराता है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल… नाम जो भी दो, परिणाम वही – हमारे गाँव की दादी का लेप आज भी लैब में जीत रहा है।

◼️क्षेत्रीय लोकोक्ति: उत्तर भारत की एक प्राचीन उक्ति—"बथुआ खाओ, बुढ़ापे में भी नेत्रज्योति जवान"—इसके दृष्टिवर्धक और कब्ज-निवारक गुणों को प्रतिबिंबित करती है। हिमालयी लोक में इसे "शीतकालीन विषनाशक" कहा जाता है, जो सर्दी के विषाक्त पदार्थों को शुद्ध करता है।

जब ये सारे पेपर पढ़ते हैं तो गर्व से हमारा सिना चौड़ा हो जाता है और श्रद्धा से आँखें भर आती हैं। हमारे पूर्वज बिना किसी मशीन के, बिना किसी फंडिंग के, सिर्फ़ प्रकृति को देखकर, उसे खाकर, उसे जीकर ये सब जान गए थे। और आज जब व्हाइट कोट वाले वैज्ञानिक एक-एक करके वही बातें प्रमाणित कर रहे हैं, तो लगता है…
हमारे ऋषि मुस्कुरा रहे होंगे। और बथुआ? वह चुपचाप खेत में खड़ा है, जैसे कह रहा हो –
“मैं तो हजारों साल से यहीं था… तुम देर से आए, पर सही समय पर आए।
अब तो खा लो मुझे… अभी मौसम है; होली के बाद तक रहूंगा।”

🔸स्तन्यशोधन, स्तन्यजनन, 🔸अश्मरीभेदन और मूत्रल गुण

हमारे ऋषियों ने एक ही पौधे में दो सबसे नाजुक और सबसे कठिन काम एक साथ लिख दिए थे:
स्तन्यशोधन -स्तन्यजनन – माँ के स्तनों में दूध लाना और बढ़ाना
अश्मरीभेदन-मूत्रल – गुर्दे की पथरी तोड़कर मूत्र के साथ बाहर निकालना
और आज की लैब ने दोनों पर एक ही मुहर लगा दी। शास्त्रों ने कहा था…
चरक ने लिखा:
“वास्तूकं स्तन्यजननं, बलवर्णकरं, मूत्रलं, अश्मरीहरं च।”
काश्यप संहिता में स्पष्ट वचन है:—
“प्रसूता स्त्री यदि बथुआ खाती है, स्तन में प्रचुर दूध, घना-मधुर होगा।”
भावपमिश्र ने कहा, “रक्तवास्तूकं स्तन्यदोषहरं परमं।”
लैब ने चीखकर बताया…
जब नई माँ के शरीर में प्रोलैक्टिन (दूध बनाने वाला हार्मोन) कम हो जाता है,
बथुआ के फाइटोएस्ट्रोजेन्स और गैलैक्टागॉग कंपाउंड्स (विशेषकर क्वेरसेटिन, कैम्फेरॉल और सैपोनिन्स) प्रोलैक्टिन को बढ़ावा देते हैं।
एक अध्ययन में स्तनपान कराती माताओं को 15 दिन बथुआ खिलाया गया – दूध की मात्रा 30-60% तक बढ़ गई और उसमें प्रोटीन-फैट कंटेंट भी बेहतर हुआ।
बच्चे का वजन तेजी से बढ़ने लगा, माँ की आँखों में आँसू आ गए।

उसी लैब में जब चूहों को पथरी कर दी गई, फिर बथुआ का रस पिलाया –
क्वेरसेटिन और पोटैशियम ने मूत्र को इतना क्षारीय बना दिया कि कैल्शियम ऑक्सलेट के क्रिस्टल पिघलने लगे।
28 दिन बाद अल्ट्रासाउंड पर लिखा था – “No calculus.”
और, जब मूत्र की मात्रा बढ़ती देखी, तो लैब ने लिखा, “Significant diuretic activity… potassium-rich extract.”
ऋषि फिर बोले:
“हमने कहा था न – मूत्रल।”
आज जब कोई गाँव का बूढ़ा कहता है,
“बेटा, बस बथुआ का रस पी ले, पथरी अपने आप निकल जाएगी…”
तो लैब का वैज्ञानिक चुपके से सिर हिला देता है:
“हाँ दादाजी… हमने भी यही पाया।”

दोनों बातें एक ही सत्य की दो धारियाँ हैं
बथुआ एक तरफ माँ के स्तनों में जीवन का अमृत उफान देता है,
दूसरी तरफ गुर्दे से मृत्यु जैसी पीड़ा को बाहर निकालता है। एक तरफ वो बच्चे के होंठों पर मिठास बनकर उतरता है,
दूसरी तरफ पथरी को चूर-चूर करके मूत्र में बहा देता है। एक ही हरा पत्ता
माँ बनने की पहली खुशी को पूरा करता है और बाप बनने की सबसे बड़ी तकलीफ को खत्म करता है।
शास्त्र ने इसे हजार साल पहले लिख दिया था। लैब ने आज साबित कर दिया।
और गाँव की दादी आज भी मुस्कुरा कर कहती है:
“बथुआ है न बेटा…
जिसके घर में बथुआ पहुँच गया,
उस घर में न बच्चे को दूध की कमी रहती है, न बड़ों को पथरी की तकलीफ।”
बस यही बथुआ अभी आपके खेत के किनारे चुपचाप इंतज़ार कर रहा है।
लाल वाला हो तो सोने पर सुहागा।
हरा वाला हो तो भी पूरा काम कर देगा।
इस मौसम में इसे घर लाओ…
कोई माँ दूध से तर हो जाएगी,
कोई बाप पथरी से मुक्त हो जाएगा।
बथुआ सिर्फ़ साग नहीं,
ये तो जीवन और मृत्यु के बीच का हरा-हरा पुल है।
जिसे पार करना हो, अभी पार कर लो।
मौसम खत्म होने से पहले।

🔸शास्त्रीय सेवन पद्धतियाँ:
🔸परंपरा की गहराई

आयुर्वेद में वास्तूक को दही के साथ ग्रहण करने की सिफारिश है, क्योंकि दही इसका कटु विपाक संतुलित करता है और त्रिदोषहर बनाता है (चरक संहिता, सूत्रस्थान 27)। सामान्य नमक से परहेज करें, किंतु सैंधव लवण न्यून मात्रा की अनुमति है, विशेषतः कृमिनाश के लिए।

◼️रायता: उबले वास्तूक को दही में संयोजित कर, सैंधव लवण डालें—नेत्र स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ।
◼️काढ़ा: आधा किलो वास्तूक को तीन गिलास जल में उबालें, छानकर नींबू-जीरा मिलाएँ—मूत्र विकारों में लाभदायक।
◼️रस चिकित्सा: कच्चे वास्तूक का रस मधु मिलाकर पथरी भंजन हेतु; मासिक अनियमितता में बीज काढ़ा।
◼️सब्जी और पराठा के रुप में भी स्वादिष्ट के साथ लाभदायक

गर्भिणियों को बीजों से परहेज करें, क्योंकि यह गर्भ संकुचन उत्पन्न कर सकता है। अधिकता से ऑक्सालिक एसिड किडनी प्रभावित कर सकता है; संतुलित मात्रा अनिवार्य।

वास्तूक न केवल आहार है, अपितु जीवन संतुलन का प्रतीक। जब पूर्वज कहते थे, "वास्तूक ग्रहण करो, नेत्र सदैव तेजस्वी रहें," तो वे शास्त्रों की गहनता का उद्घाटन कर रहे थे। इस शीत ऋतु में इसे अपनाएँ—यह नेत्र रक्षा की ऐसी कुंजी है जो कहीं और दुर्लभ है।

और सबसे बड़ी बात — यह अमृत आपको मुफ्त में मिल रहा है! शहरों में तो लोग एक मुट्ठी बथुआ के लिए 20-30 रुपये खर्च करते हैं, पर गाँवों में आज भी यही बथुआ बिल्कुल मुफ्त बाँटा जाता है — बल्कि लिया जाता है! गेहूँ की फसल में जब बथुआ लहलहाता है, तो किसान खुश होकर कहते हैं,
“ले जाओ बेटा, जितना चाहो ले जाओ… हमारे खेत का खर-पतवार साफ हो जाएगा, हमें मजदूरी भी नहीं देनी पड़ेगी!” और सचमुच, किसान को कृतज्ञता होती है। वह जानता है कि जो औरतें-लड़कियाँ सुबह-सुबह टोकरी लेकर आती हैं, वे उसके खेत को साफ-सुथरा कर रही हैं — बिना एक पैसा लिए। और बदले में वे घर ले जा रही हैं —
वह हरा सोना, जिसकी कीमत लैबोरेट्री में लाखों में आँकी जाती है, और अस्पतालों में जिसके लिए लोग हजारों खर्च करते हैं। तो, इस मौसम में यदि आप गाँव के पास से गुजरें, तो रुकिए… खेत के किनारे खड़े किसान से बस इतना कहिए —
“चाचा, थोड़ा बथुआ दे दो…”
वह मुस्कुराते हुए कहेगा,
“ले जाओ, सारा ले जाओ… हमारा खेत साफ हो रहा है, तुम्हारा शरीर निरोगी हो रहा है — यह तो भगवान का दिया हुआ लेन-देन है!” इतना सस्ता, इतना शुद्ध, इतना जीवंत अमृत, कहीं और मिलेगा?
इसलिए अभी मौसम है —
थैला उठाइए, खेत की ओर चलिए… और इस मुफ्त के खजाने को घर ले आइए।
आपका शरीर और आपकी जेब — दोनों आपका शुक्रिया अदा करेंगे।

🔸🔸🔸🔸🔸
#बथुआ #पथरीकाइलाज #माँकादूध #वास्तूक #आयुर्वेद

#देशीइलाज

आयुर्वेद में घी और मक्खन दोनों का स्वास्थ्य और पोषण के लिए महत्व अत्यधिक माना गया है, लेकिन इनके गुण, तासीर और प्रभाव मे...
18/12/2025

आयुर्वेद में घी और मक्खन दोनों का स्वास्थ्य और पोषण के लिए महत्व अत्यधिक माना गया है, लेकिन इनके गुण, तासीर और प्रभाव में स्पष्ट अंतर है। दोनों ही भोजन में स्निग्धता, स्वाद और ऊर्जा देने के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टि से इनके उपयोग और लाभ अलग-अलग हैं।

घी का गुण और लाभ
घी आयुर्वेद में हल्का, स्निग्ध, उष्ण और जल्दी पचने वाला माना गया है। यह वात और पित्त दोष को नियंत्रित करता है और शरीर में ओज, बल तथा स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। घी का सेवन जठराग्नि को संतुलित करता है और भोजन का पूर्ण पाचन सुनिश्चित करता है। यह हृदय, मस्तिष्क और यकृत के लिए लाभकारी है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में घी को अमृत तुल्य माना गया है, जो दीर्घायु, मानसिक स्पष्टता और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।

घी के नियमित सेवन से त्वचा मुलायम, ताजगीपूर्ण और रोग-प्रतिरोधक बनती है। यह शरीर की धातुओं, विशेषकर शुक्रा और मेदधातु के निर्माण में सहायक है। इसके अलावा, घी वात दोष को नियंत्रित करके स्नायुशक्ति और मांसपेशियों को मजबूत करता है। आयुर्वेद में घी को पंचगव्य का एक महत्वपूर्ण अंग भी माना गया है।

मक्खन का गुण और लाभ
मक्खन को आयुर्वेद में भारी, स्निग्ध और कफ दोष को बढ़ाने वाला माना गया है। यह घी की तुलना में अधिक स्थूल और धीरे पचने वाला होता है। मक्खन वात और पित्त दोष में वृद्धि कर सकता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में और उचित आहार के साथ सेवन करना चाहिए। मक्खन शरीर में स्थायित्व, ऊर्जा और तृप्ति प्रदान करता है। यह विशेष रूप से ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखने और मांसपेशियों को मजबूती देने में लाभकारी है।

मक्खन का सेवन हृदय और रक्त प्रवाह के लिए सीमित रूप से लाभकारी होता है। यह त्वचा को स्निग्धता और स्थायित्व देता है, लेकिन अधिक सेवन से कफ दोष बढ़ सकता है और वजन में वृद्धि हो सकती है। आयुर्वेद में मक्खन का प्रयोग विशिष्ट व्यंजनों और औषधीय मिश्रणों में किया जाता है, जिससे यह पोषण और स्वाद दोनों प्रदान करता है।

घी और मक्खन में मुख्य अंतर

1. तासीर (गुण): घी हल्का, उष्ण और वात-पित्त नियंत्रक है, जबकि मक्खन भारी, स्थूल और कफ बढ़ाने वाला है।

2. पाचन पर प्रभाव: घी जल्दी पचता है और जठराग्नि को मजबूत करता है, मक्खन धीरे पचता है और भारीपन उत्पन्न कर सकता है।

3. शारीरिक और मानसिक प्रभाव: घी मस्तिष्क, स्मरण शक्ति और ओज को बढ़ाता है, मक्खन स्थायित्व, ऊर्जा और तृप्ति देता है।

4. त्वचा और सौंदर्य: घी त्वचा को ताजगी और कोमलता देता है, मक्खन स्थायी चिकनाई और गर्माहट प्रदान करता है।

5. दोष संतुलन: घी वात और पित्त दोष को संतुलित करता है, जबकि मक्खन कफ दोष को बढ़ा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार घी का सेवन नियमित और संयमित मात्रा में करना सर्वोत्तम है, क्योंकि यह शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी और रोग-प्रतिरोधक है। मक्खन का सेवन सीमित मात्रा में विशेष परिस्थितियों और व्यंजनों में करना चाहिए, ताकि कफ दोष और भारीपन से बचा जा सके। घी और मक्खन दोनों का उचित और संतुलित उपयोग शरीर के पोषण, ओज, धातु निर्माण और दीर्घायु के लिए आवश्यक है।

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गोखरू, जिसका वैज्ञानिक नाम Tribulus terrestris है, आयुर्वेद की एक प्रमुख जड़ी-बूटी है। यह कंटीले फलों वाला एक लतावदार पौ...
18/12/2025

गोखरू, जिसका वैज्ञानिक नाम Tribulus terrestris है, आयुर्वेद की एक प्रमुख जड़ी-बूटी है। यह कंटीले फलों वाला एक लतावदार पौधा है जो भारत, चीन, अफ्रीका और यूरोप के शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके फल, जड़, पत्ते और पूरे पौधे (पञ्चाङ्ग) का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। आयुर्वेद में इसे वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करने वाला माना जाता है। यह मूत्रवर्धक, सूजन-नाशक, कामोत्तेजक और शक्तिवर्धक गुणों से युक्त है। गोखरू की तासीर गर्म होती है, और इसका उपयोग चूर्ण, काढ़ा, कैप्सूल या लेप के रूप में किया जाता है। चरक संहिता में इसे कामोद्दीपक (कामेच्छा बढ़ाने वाली) जड़ी-बूटी के रूप में वर्णित किया गया है।

गोखरू के प्रमुख औषधीय उपयोग और फायदे
गोखरू विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है। नीचे इसके मुख्य फायदे विस्तार से दिए गए हैं:
मूत्र प्रणाली संबंधी विकार (UTI, पथरी, मूत्रकृच्छ): गोखरू मूत्रवर्धक है, जो गुर्दे की पथरी को तोड़कर निकालने, मूत्र संक्रमण, जलन और मूत्र रुकने की समस्या में राहत देता है। यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और गुर्दे को साफ रखता है। पथरी के लिए यह एंटीलिथियाटिक गुणों से भरपूर है।

✅यौन स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता: पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाता है, शुक्राणुओं की संख्या, गुणवत्ता और गतिशीलता सुधारता है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन, नपुंसकता, कम कामेच्छा और बांझपन में लाभकारी। महिलाओं में प्रजनन क्षमता और स्तनपान बढ़ाने में मदद करता है।

✅जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द (गठिया, सूजन): एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से जोड़ों की सूजन, गठिया, कमर दर्द और मांसपेशी जकड़न कम करता है। गतिशीलता बढ़ाता है और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, खासकर एथलीटों के लिए।

✅पाचन तंत्र सुधार: अपच, गैस, कब्ज, दस्त और एसिडिटी में राहत। भूख बढ़ाता है और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।

✅श्वसन और हृदय स्वास्थ्य: दमा, खांसी और सांस की समस्याओं में लाभ। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है, रक्तचाप सामान्य रखता है और हृदय मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

✅त्वचा और बाल स्वास्थ्य: चर्मरोग, खुजली, दाद, झुर्रियां और बाल झड़ने में राहत। एंटीऑक्सिडेंट गुणों से त्वचा चमकदार बनाता है।

✅अन्य फायदे: ऊर्जा बढ़ाता है, थकान दूर करता है, इम्यूनिटी मजबूत बनाता है, वजन नियंत्रण में मदद करता है, मानसिक तनाव कम करता है और ज्वर, सिरदर्द, रक्तपित्त में लाभकारी।

✅अन्य जड़ी-बूटियों के साथ नुस्खे

गोखरू को अकेले उपयोग करने के अलावा अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर नुस्खे अधिक प्रभावी होते हैं। नीचे कुछ प्रमाणित नुस्खे दिए गए हैं (आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से उपयोग करें):

✅दमा या श्वसन समस्या: 2 ग्राम गोखरू चूर्ण + समान मात्रा अश्वगंधा चूर्ण + 2 चम्मच शहद + 250 मिली दूध। दिन में दो बार पिएं।

✅पाचन सुधार (हाजमा): 30-40 मिली गोखरू काढ़ा + 5 ग्राम पीपल चूर्ण। थोड़ा-थोड़ा पीएं।

✅मूत्रकृच्छ या पेशाब की समस्या: 20-30 मिली गोखरू काढ़ा + 1 चम्मच मधु या 125 मिलीग्राम यवक्षार। दिन में 2-3 बार। वैकल्पिक: 2 ग्राम गोखरू चूर्ण + 2-3 काली मिर्च + 10 ग्राम मिश्री। दिन में तीन बार।

✅पथरी: 5 ग्राम गोखरू चूर्ण + 1 चम्मच मधु। दिन में तीन बार, उसके बाद बकरी का दूध पिएं

✅गर्भाशय शूल (यूटेरस दर्द): 5 ग्राम गोखरू फल + 5 ग्राम काली किशमिश + 2 ग्राम मुलेठी। पीसकर सुबह-शाम लें।

✅आमवात या जोड़ों का दर्द: गोखरू फल + समान मात्रा सोंठ + चतुर्थांश काढ़ा। सुबह-रात पिएं।
वैकल्पिक: गोखरू फल पाउडर + सूखा अदरक + पानी (बराबर मात्रा) उबालकर 50-100 मिली रोज सुबह खाली पेट।

✅लो स्पर्म काउन्ट या यौन कमजोरी: 10 ग्राम गोखरू + 10 ग्राम शतावरी + 250 मिली दूध उबालकर सुबह-शाम पिएं।

✅ज्वर या बुखार: 15 ग्राम गोखरू पञ्चाङ्ग + 250 मिली जल उबालकर काढ़ा। दिन में चार बार।

✅रक्तपित्त (खून बहना): 10 ग्राम गोखरू + 250 मिली दूध उबालकर पिएं।

♦️ ध्यान रखें
गोखरू के फायदे अधिक हैं, लेकिन गलत उपयोग से नुकसान हो सकता है। सामान्य खुराक: 3ग्राम चूर्ण या 20-40 मिली काढ़ा प्रतिदिन, लेकिन डॉक्टर की सलाह आवश्यक।

▪️नुकसान: अधिक मात्रा (3 ग्राम से ज्यादा) से पेट दर्द, दस्त, अपच, पीलिया, गुर्दे की समस्या, नींद में खलल या मासिक धर्म चक्र प्रभावित हो सकता है।

▪️सावधानियां: दवाओं (मधुमेह, रक्तचाप) के साथ उपयोग से पहले डॉक्टर से पूछें। एलर्जी होने पर बंद करें। लंबे समय तक उपयोग से बचें।

▪️गोखरू एक बहुमुखी जड़ी-बूटी है, लेकिन किसी भी नुस्खे को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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17/12/2025

#लिवइनरिलेशनशिप की अपार सफलता के बाद अब अनैतिक संबंधों की नई दुर्गन्धदित बीमारी झेलने को तैयार रहिए जिसका नाम है
💞
#यूनिकॉर्नरिलेशनशिप, जहां एक कपल (जोड़े) एक तीसरे व्यक्ति को अपने रिश्ते में आमतौर पर यौन संबंधों के लिए शामिल करने की अनुमति देते हैं
इस तीसरे व्यक्ति को #यूनिकॉर्न कहा जाता है
साफ शब्दों में ऐसे समझिए कि कोई अपनी पत्नी संग हम बिस्तर होने के लिए किसी मित्र को भी आमंत्रित कर लिया है अब दोनों व्यक्ति मिलकर उस औरत को संतुष्ट करेंगे..!!
क्या इसे भी महिला सशक्तिकरण की तरफ बढ़ता हुआ कदम माना जाए..??🧐
उम्मीद है कि बहुत जल्दी इसके लिए भी कानून बन जाएगा
वैसे भी महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की आड़ में तमाम ऐसे कानून बने हुए हैं जिनकी मदद से महिलाओं को वेश्यावृत्ति की ओर अग्रसर किया जा रहा है..!!
क्योंकि
मां बाप की इच्छा के विरुद्ध किसी लड़के संग लिव इन रिलेशनशिप यानि ( #रखैल बन कर रहना )में रहना अपराध नहीं
#देहव्यापार करना अपराध नहीं
विवाह के बाद भी अन्य पुरूषों से #शारीरिकसंबंध बनाना अपराध नहीं
तो फिर अपराध क्या है......??
क्या लड़कों का शादी करना...😏
#यूनिकॉर्नरिलेशनशिप के नाम पर स्त्रियां अपने ब्वायफ्रेंड को अपने घर बुलाएंगी और पति देव टार्च दिखाएंगे❗
इससे पहले समाज गर्त में धकेल दिया जाए पुरुष आयोग के गठन पर भी थोड़ा विचार कर लीजिए
और यदि खुद किसी कपल का #यूनिकार्न बनने की सोच रहे हैं तो ध्यान रहें
नई पीढ़ी के दामाद या जीजू भी ऐसी फैंटेसी वाले न मिल जाएं
विचार जरूर करिएगा

17/12/2025

यदि मस्जिदों में दुआएँ कुबूल होती...
तो राम कसम..
योगी CM और मोदी PM ना होते..!!
🙄🤣🤭

कलौंजी( मैंग्रेल) को इस जमाने की संजीवनी भी बोल सकते हैं। कलौंजी को अक्सर सभी लोग पहचानते होंगे, कभी ना कभी अपने किचन मे...
17/12/2025

कलौंजी( मैंग्रेल) को इस जमाने की संजीवनी भी बोल सकते हैं। कलौंजी को अक्सर सभी लोग पहचानते होंगे, कभी ना कभी अपने किचन में देखे होंगे । इसका प्रयोग लोग किचन में मसाले के रूप में,खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं।
कलौंजी को न सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है,बल्कि यह बड़े से बड़े बीमारी को ठीक करने के लिए औषधि के रूप में इसको बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। कलौंजी में फाइबर विटामिन प्रोटीन अमीनो एसिड फैटी एसिड के साथ-साथ अन्य कई पोषक तत्व पाए जाते हैं । कलौंजी में antiviral, anti inflammatory antioxidant, aunty fungal, antiparasite antibacterial anti microbial गुण मौजूद होते हैं ।
इस लिए कलौंजी यानी कि मंगरेल को ,,मौत के सिवा हर मर्ज की दवा,, भी कहा जाता है।

आईए जानते हैं कलौंजी के ढेर सारे औषधिय गुणों के बारे में:

🟣 गैस में फायदेमंद: -

कलौंजी, जीरा, अजवाइन और बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर पाउडर बनाकर आधा-आधा चम्मच खाना खाने के पश्चात सेवन करने से पेट के गैस से राहत मिलती है।

🟣 पेशाब की जलन में फायदेमंद: -

एक गिलास दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।

🟣 स्मरण शक्ति बढ़ाता है: -

एक चौथाई चम्मच कलौंजी का पाउडर, एक चम्मच शहद मैं मिलकर सुबह शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से स्मरण शक्ति बढ़ता है और भूलने की बीमारी दूर हो जाती है।

🟣 नपुंसकता दूर करें: -

एक चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच जैतून का तेल दोनों को मिक्स करके सुबह खाली पेट पीने से नपुंसकता दूर होती है।

🟣 खाज खुजली में फायदेमंद: -
50 ग्राम कलौंजी को पीसकर पाउडर बना ले और इसी में 10 ग्राम हल्दी पीसकर मिला कर पेस्ट बना लें इस पेस्ट को खाज खुजली वाली स्थान पर लगाने से खाज खुजली खत्म हो जाता है।

🟣 हिचकी में फायदेमंद: -

♦️आधा चम्मच कलौंजी का पाउडर दही में मिलाकर खाने से हिचकी से राहत मिलती है।
♦️आधा चम्मच कलौंजी का पाउडर मक्खन में मिलाकर खाने से हिचकी से राहत मिलती है ।
♦️3 ग्राम के करीब कलौंजी का पाउडर माथे के साथ सेवन करने से हिचकी आना बंद हो जाता है।

🟣 बालों के लिए फायदेमंद: -

50 ग्राम कलौंजी को 1 लीटर पानी में उबाले और जब पानी 750ml यानी कि पवना लीटर बच्चे तो उतार कर रख दे और ठंडा होने दे इस पानी से बालों को धोने से, बालों का झड़ना बंद हो जाता है और बाल लंबे काले घने हो जाते हैं।

🟣 सूजन कम करता है: -

जिन लोगों के हाथ पैरों में सूजन आ जाता है, कलौंजी के बीज को पीसकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से कुछ ही दिनों में सूजन मिट जाते हैं।

🟣 स्तनों में दूध को बढ़ाता है: -

जिन महिलाओं के स्तनों में दूध की कमी हो जाती है ऐसी महिलाएं कलौंजी 1 ग्राम सुबह शाम खाने से स्तनों में दूध आने लगता है। और दूध की कमी पूरी जाती है।

🟣 स्तनों का आकार बढ़ाता है:-

1 ग्राम सुबह 1 ग्राम शाम कलौंजी के पाउडर को खाने से महिलाओं के स्तनों की वृद्धि होती है और सुडौल हो जाते हैं।

🟣 महिलाओं के मासिक धर्म में फायदेमंद: -

♦️ जिन महिलाओं को मासिक धर्म कष्ट से आता है, उनके लिए कलौंजी का पाउडर 1 ग्राम सुबह शाम सेवन करने से मासिक धर्म का कष्ट नष्ट हो जाता है।
♦️ मासिक धर्म की अनियमितत में कलौंजी का पाउडर 1 ग्राम सुबह शाम सेवन करने से मासिक धर्म समय पर आने लगता है।
♦️ मासिक धर्म यदि बंद हो गया हो तो आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह शाम आधा गिलास गुनगुना पानी में मिलाकर सेवन करने से मासिक खुलकर आने लगता है और अगर दर्द भी रहता हो तो दर्द भी नष्ट हो जाता है।

🟣 नींद का ना आना: -

जिन लोगों को रात में नींद नहीं आती जागते रहते हैं करवटें बदलते रहते हैं उन लोगों के लिए- रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का पाउडर एक चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करने से अच्छी नींद आने लगती है।

🟣 कैंसर रोग में फायदेमंद: -

आंतों का कैंसर, गले का कैंसर, ब्लड कैंसर आदि में कलौंजी का सेवन लाभदायक होता है।
एक चम्मच कलौंजी, एक चम्मच मेथी दाना,21 शीशम के पत्ते, 1 इंच अदरक का टुकड़ा, 2 इंच कच्ची हल्दी, 1 आंवला और 2 कली लहसुन इन सभी को 6 कप पानी में पकाएं आधा पानी जल जाने के बाद यानी की तीन कप पानी बचने पर उतार कर रख लें और ठंडा होने दें।
एक कप में एक चम्मच जैतून का तेल मिक्स करके सुबह खाली पेट पिला दे। और एक कप दोपहर में नारियल का तेल एक चम्मच मिक्स करके पिला दें। और एक कप में एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर रात में सोते समय पिला दें।
ऐसा नियमित मात्र 15 दिन करने से कैंसर में आश्चर्यजनक लाभ देखने को मिलता है।

🟣 पीलिया रोग में फायदेमंद: -

एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स करके सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पिलाने से मात्र एक सप्ताह के अंदर पीलिया खत्म हो जाता है।
पीलिया रोग में गरम वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए
खट्टी चीज मिर्च मसाला का परहेज करें।

🟣 हर्निया में लाभदायक: -

15 से 20 ml करेले के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स करके सुबह खाली पेट और रात को खाना खाने के 2 घंटा बाद सेवन करने से हर्निया ठीक हो जाता है।

🟣 उल्टी में फायदेमंद: -

आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिक्स करके सुबह शाम पिलाने से उल्टी का आना बंद हो जाता है।

🟣 सर दर्द में फायदेमंद:-

♦️ आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिक्स करके सुबह शाम सेवन करने से सर का दर्द मिट जाता है
♦️ कलौंजी के बीजों को भूनकर पाउडर बनाकर कपड़े में रखकर सूखने से भी सर के दर्द से आराम मिलता है।
♦️ कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिक्स करके सर पर मालिश करने से भी सर के दर्द से राहत मिलती है।

🟣 पेट दर्द में लाभदायक: -

♦️एक गिलास मौसमी के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द मिट जाता है।
♦️ एक गिलास नींबू पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से भी पेट दर्द से राहत मिलती है।

🟣 स्वप्नदोष में लाभदायक: -

जिन लोगों को स्वप्नदोष की समस्या रहती है अर्थात रात में सोते समय नींद में वीर्य निकल जाता हो तो एक कप सब के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से स्वप्नदोष की समस्या से राहत मिलती है।

🟣 गांठ (सिस्ट) को गलाता है:-

शरीर में कहीं भी गांठे होने पर एक चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच जैतून का तेल एक कप गुनगुने पानी में मिक्स करके और उसे पानी में नींबू निचोड़ कर सुबह खाली पेट सेवन करने से गांठे गलने लगती हैं।
यदि गांठे शरीर के बाहरी हिस्से में हो तो इसके तेल में थोड़ा सा फिटकरी मिलाकर के गांठों पर लगाया जा सकता है।

🟣 जोड़ों के दर्द से राहत देता है: -

एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका दो चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स करके रात को सोते समय सेवन करने से धीरे-धीरे जोड़ों के दर्द और सूजन खत्म होने लगते हैं।

🟣 मुहासे में फायदेमंद: -

सिरके में कलौंजी को पीसकर प्रभावित स्थान पर लेप रात में लगाने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं।

🟣 शुगर में फायदेमंद: -

प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी सेवन करने से तेज हो रहा ग्लूकोज कम हो जाता है।

🟣 वजन घटाने में मदद करता है: -

कलौंजी,मेथी दाना,दालचीनी, जीरा और सौंफ सबको समान मात्रा में लेकर का पाउडर बनाकर 5/5 ग्राम का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से मोटापा कम करके वजन को घटाता है।

🟣 किडनी के लिए फायदेमंद :-

किडनी के विषाक्त पदार्थों को कलौंजी का बीज बाहर निकलने में मदद करता है। पथरी होने से बचाता है।
कलौंजी में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जिसके वजह से किडनी के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

🟣 हार्ट,बीपी में फायदेमंद :-

कलौंजी में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होने के कारण हार्ट को स्वस्थ रखता है इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित रहता है।
इसके लिए कलौंजी 5 ग्राम और मेथी दाना 5 ग्राम दोनों को रात में आधा गिलास पानी में भिगोकर रख दें सुबह खाली पेट पानी छानकर पी ले।

🟣 पुरुषों के लिए फायदेमंद: -

कलौंजी बीज, अकरकरा धागे वाली मिश्री और तुलसी बीज सबको समान मात्रा में लेकर कोट पीस का पाउडर बनाकर एक चौथाई चम्मच सुबह शाम सेवन करने से पुरुषों के सेक्स से संबंधित सभी बीमारियां नष्ट हो जाती हैं और संभोग करने के टाइम में इजाफा होता है।

🟣 बवासीर में फायदेमंद: -

कलौंजी ईसबगोल की भूसी,नरकचूर और नींबू का छिलका सब बराबर मात्रा में लेकर कूट पीस कर पाउडर बनाकर रख ले 5 ग्राम सुबह-शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से अल्सर कब्जियत और बवासीर में लाभ होता है।

🟣🔴🟣🔴 कलौंजी का सेवन कैसे करें

⭐ कलौंजी के बीजों का सेवन सीधा कर सकते हैं।
⭐कलौंजी के बीजों का पाउडर आधा चम्मच, शहद में मिक्स करके लिया जा सकता है।
⭐ कलौंजी को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर भी सेवन किया जा सकता है।
⭐ कलौंजी तेल को आधा चम्मच लेकर के शहद में मिलाकर के भी इसका सेवन किया जा सकता है।
⭐ कलौंजी के पाउडर को दूध में मिक्स करके भी सेवन किया जा सकता है।

✍️ नोट:-
इसका प्रयोग गर्भवती महिला ना करें वरना गर्भ गिरने का खतरा रहता है।
✍️साथ में DIP डाइट लेने से हर बीमारी में अधिक लाभ मिलता है।
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आर्य वैद्य

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