Online Pooja & Astro Services/ऑनलाइन पूजा एवं ज्योतिष सेवा

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Online Pooja & Astro Services/ऑनलाइन पूजा एवं ज्योतिष सेवा Trusted Online Puja Services

01/09/2025

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30/05/2025

1. ॐ तारिण्यै नमः।
2. ॐ तरलायै नमः।
3. ॐ तन्व्यै नमः।
4. ॐ तारायै नमः।
5. ॐ तरुणवल्लर्यै नमः।
6. ॐ तीररूपायै नमः।
7. ॐ तर्यै नमः।
8. ॐ श्यामायै नमः।
9. ॐ तनुक्षीणपयोधरायै नमः।
10. ॐ तुरीयायै नमः।
11. ॐ तरुणायै नमः।
12. ॐ तीव्रगमनायै नमः।
13. ॐ नीलवाहिन्यै नमः।
14. ॐ उग्रतारायै नमः।
15. ॐ जयायै नमः।
16. ॐ चण्ड्यै नमः।
17. ॐ श्रीमदेकजटाशिरायै नमः।
18. ॐ तरुण्यै नमः।
19. ॐ शाम्भव्यै नमः।
20. ॐ छिन्नभालायै नमः।
21. ॐ भद्रतारिण्यै नमः ।
22. ॐ उग्रायै नमः।
23. ॐ उग्रप्रभायै नमः।
24. ॐ नीलायै नमः।
25. ॐ कृष्णायै नमः।
26. ॐ नीलसरस्वत्यै नमः।
27. ॐ द्वितीयायै नमः।
28. ॐ शोभनायै नमः।
29. ॐ नित्यायै नमः।
30. ॐ नवीनायै नमः।
31. ॐ नित्यनूतनायै नमः।
32. ॐ चण्डिकायै नमः।
33. ॐ विजयाराध्यायै नमः।
34. ॐ देव्यै नमः।
35. ॐ गगनवाहिन्यै नमः।
36. ॐ अट्टहास्यायै नमः।
37. ॐ करालास्यायै नमः।
38. ॐ चरास्यायै नमः।
39. ॐ अदितिपूजितायै नमः।
40. ॐ सगुणायै नमः।
41. ॐ असगुणायै नमः।
42. ॐ आराध्यायै नमः।
43. ॐ हरीन्द्रदेवपूजितायै नमः।
44. ॐ रक्तप्रियायै नमः।
45. ॐ रक्ताक्ष्यै नमः।
46. ॐ रुधिरास्यविभूषितायै नमः।
47. ॐ बलिप्रियायै नमः।
48. ॐ बलिरतायै नमः।
49. ॐ दुर्धायै नमः।
50. ॐ बलवत्यै नमः।
51. ॐ बलायै नमः।
52. ॐ बलप्रियायै नमः।
53. ॐ बलरतायै नमः।
54. ॐ बलरामप्रपूजितायै नमः।
55. ॐ ऊर्ध्वकेशेश्वर्यै नमः।
56. ॐ केशायै नमः।
57. ॐ केशवायै नमः।
58. ॐ सविभूषितायै नमः।
59. ॐ पद्ममालायै नमः।
60. ॐ पद्माक्ष्यै नमः।
61. ॐ कामाख्यायै नमः।
62. ॐ गिरिनन्दिन्यै नमः।
63. ॐ दक्षिणायै नमः।
64. ॐ दक्षायै नमः।
65. ॐ दक्षजायै नमः।
66. ॐ दक्षिणेरतायै नमः।
67. ॐ वज्रपुष्पप्रियायै नमः।
68. ॐ रक्तप्रियायै नमः।
69. ॐ कुसुमभूषितायै नमः।
70. ॐ माहेश्वर्यै नमः।
71. ॐ महादेवप्रियायै नमः।
72. ॐ पञ्चविभूषितायै नमः।
73. ॐ इडायै नमः।
74. ॐ पिङ्गलायै नमः।
75. ॐ सुषुम्णाप्राणरूपिण्यै नमः।
76. ॐ गान्धार्यै नमः।
77. ॐ पञ्चम्यै नमः।
78. ॐ पञ्चाननादिपरिपूजितायै नमः।
79. ॐ तथ्यविद्यायै नमः।
80. ॐ तथ्यरूपायै नमः।
81. ॐ तथ्यमार्गानुसारिण्यै नमः।
82. ॐ तत्त्वरूपायै नमः।
83. ॐ तत्त्वप्रियायै नमः।
84. ॐ तत्त्वज्ञानात्मिकायै नमः।
85. ॐ अनघायै नमः।
86. ॐ ताण्डवाचारसन्तुष्टायै नमः।
87. ॐ ताण्डवप्रियकारिण्यै नमः।
88. ॐ तालदानरतायै नमः।
89. ॐ क्रूरतापिन्यै नमः।
90. ॐ तरणिप्रभायै नमः।
91. ॐ त्रपायुक्तायै नमः।
92. ॐ त्रपामुक्तायै नमः।
93. ॐ तर्पितायै नमः।
94. ॐ तृप्तिकारिण्यै नमः।
95. ॐ तारुण्यभावसन्तुष्टायै नमः।
96. ॐ शक्तिभक्तानुरागिन्यै नमः।
97. ॐ शिवासक्तायै नमः।
98. ॐ शिवरत्यै नमः।
99. ॐ शिवभक्तिपरायणायै नमः।
100. ॐ ताम्रद्युत्यै नमः।
101. ॐ ताम्ररागायै नमः।
102. ॐ ताम्रपात्रप्रभोजिन्यै नमः।
103. ॐ बलभद्रप्रेमरतायै नमः।
104. ॐ बलिभुजे नमः।
105. ॐ बलिकल्पिन्यै नमः।
106. ॐ रामरूपायै नमः।
107. ॐ रामशक्त्यै नमः।
108. ॐ रामरूपानुकारिण्यै नमः।

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे । मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥ भावार्थ :हे देवि ! आप मुझे बुद्धि...
27/04/2025

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे ।
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :
हे देवि ! आप मुझे बुद्धि दें, कीर्ति दें, कवित्वशक्ति दें और मेरी मूढता का नाश करें । आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला ।
मूढ़ता हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :
आप मूर्खों की मूर्खता का नाश करती हैं और भक्तों के लिये भक्तवत्सला हैं । हे देवि ! आप मेरी मूढ़ता को हरें और मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

सौम्यक्रोधधरे रुपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते ।
सृष्टिरुपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :
सौम्य क्रोध धारण करनेवाली, उत्तम विग्रहवाली, प्रचण्ड स्वरूपवाली हे देवि ! आपको नमस्कार है । हे सृष्टिस्वरूपिणि आपको नमस्कार है । आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

घोररुपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि ।
भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥

भावार्थ :
भयानक रूपवाली, घोर निनाद करनेवाली, सभी शत्रुओं को भयभीत करनेवाली तथा भक्तों को वर प्रदान करनेवाली है देवि ! आप मुझ शरणागत की रक्षा करें ।

नमो देवी महाविद्ये नमामि चरणौ तव ।
सदा ज्ञानप्रकाशं में देहि सर्वार्थदे शिवे ॥

भावार्थ :
हे देवि ! आपको नमस्कार है । हे महाविद्ये ! में आपके चरणों में बार-बार नमन करता हूँ । सर्वार्थदायिनी शिवे ! आप मुझे सदा ज्ञानरूपी प्रकाश प्रदान कीजिये ।

विद्या त्वमेव ननु बुद्धिमतां नराणां शक्तिस्त्वमेव किल शक्तिमतां सदैव । त्वं कीर्तिकान्तिकमलामलतुष्टिरूपा मुक्तिप्रदा विरतिरेव मनुष्यलोके ॥

भावार्थ :
आप निश्चय ही सदा से बुद्धिमान् पुरुषों की विद्या तथा शक्तिशाली पुरुषों की शक्ति हैं । आप कीर्ति, कान्ति, लक्ष्मी तथा निर्मल तुष्टिस्वरूपा हैं और इस मनुष्य लोक में आप ही मोक्ष प्रदान करने वाली विरक्तिस्वरूपा हैं

श्री हनुमत्सहस्रनाम स्तोत्रश्री हनुमत् सहस्रनाम स्तोत्र का माहात्म्य:-श्री हनुमत् सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ से उत्कृष्ट बल...
06/03/2025

श्री हनुमत्सहस्रनाम स्तोत्र

श्री हनुमत् सहस्रनाम स्तोत्र का माहात्म्य:-

श्री हनुमत् सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ से उत्कृष्ट बल,अपरिमित बुद्धि एवं पराविद्या की प्राप्ति होती है।
समस्त गृह क्लेशों का निस्तारण हो जाता है।
भूत, प्रेत, एवं अन्य प्रकार के अरिष्टों का विनाश होता ।
इसके पाठ के प्रभाव से के मानवीय गुणों में अभिरुचि का उदय होता है तथा पापों से निवृत्ति होती है।
इस पाठ से विशेष रूप से आत्मशान्ति मिलती है तथा अन्त: करण में निर्मलता की प्राप्ति होती है।
धन-धान्य की अभिवृद्धि होती है तथा साधक का मानसिक तनाव कम होता है।

अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत के समान कान्तियुक्त शरीर वाले दैत्यरूपी वन को ध्वंस करने वाले, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्रीरघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्रीहनुमान् जी हैं। श्रीहनुमान जी महराज एकादश रुद्रावतार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। श्री हनुमान जी महराज की विधिवत् आराधना एवं अर्चना करने के लिए श्रीहनुमत् सहस्रनाम स्तोत्र सर्वोत्तम है। हनुमान जी श्री राम जी के अनन्य भक्त हैं। हनुमान जी सर्वदा राम भक्ति में ही लीन रहते हैं । ये ज्ञानियों में अग्रगण्य हैं अर्थात् मेधाशक्ति बहुत ही प्रखर है। जो साधक हनुमत् सहस्रनाम का पाठ विधिवत् करता है या किसी ब्राह्मण द्वारा कराता है, उसके फलस्वरूप हनुमान जी की कृपा से उस साधक की भी मेधा प्रखर हो जाती है, तथा समस्त अरिष्टों से निवृत्ति हो जाती है। भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है तथा समस्त मनोकामनाएं हनुमत् स्तवन् से शीघ्र ही परिपूर्ण हो जाती हैं। हनुमत् आराधना करने से शनि ग्रह जनित कष्टों से भी निवृत्ति होती है। कलियुग में श्री हनुमानजी महाराज प्रत्यक्ष देवता हैं। जहां भी राम कथा होती है वहां निश्चित ही विराजमान रहते हैं। यह स्तोत्र मन्त्र महार्णव में पूर्वखण्ड के नवम तरङ्ग में श्रीरामचन्द्र जी द्वारा कही गयी है
http://bit.ly/4in9bGi

  🙏🌺🌼
17/02/2025

🙏🌺🌼

09/02/2025

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानी

वशीकरण तिलक
19/12/2024

वशीकरण तिलक

संगठन में ही शक्ति है!सनातन' शब्द का अर्थ है, 'शाश्वत' या 'सदा बना रहने वाला'!
05/11/2024

संगठन में ही शक्ति है!
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दुर्गा सप्तसती अनुष्ठान बुक करें मात्र 5100/-Book Only In 5100/-
29/09/2024

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