सनातन हिंदू संसद

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ज्ञान से ब्राह्मण, कर्म से वैश्य, शौर्य से क्षत्रिय, सेवा से शूद्र...
अत: मैं केवल हिन्दू हूँ। 🔱

(📍 जम्बूद्वीप • भारतखण्ड • आर्यावर्त • भारतवर्ष • हिन्दुस्तान) सनातन हिंदू संसद एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संगठन है,
जो भारतीय परंपरा, धर्म और संस्कारों के संरक्षण एवं प्रसार के लिए समर्पित है।
हमारा उद्देश्य समाज में जागरूकता, एकता और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।

चमार कोई नीची जाति नहीँ, बल्कि सनातन धर्म के रक्षक हैं जिन्होंने मुगलोँ का जुल्म सहा मगर धर्म नही त्यागाआप जानकार हैरान ...
26/03/2026

चमार कोई नीची जाति नहीँ, बल्कि सनातन धर्म के रक्षक हैं जिन्होंने मुगलोँ का जुल्म सहा मगर धर्म नही त्यागा

आप जानकार हैरान हो सकते हैं कि भारत में जिस जाति को चमार बोला जाता है वो असल में चंवरवंश की क्षत्रिय जाति है। इतना ही नहीं बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस वंश का उल्लेख है। हिन्दू वर्ण व्यवस्था को क्रूर और भेद भाव बनाने वाले हिन्दू नहीं, बल्कि विदेशी आक्रमणकारी थे!

जब भारत पर तुर्कियों का राज था, उस सदी में इस वंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था, उस समय उनके प्रतापी राजा थे चंवर सेन। इस राज परिवार के वैवाहिक सम्बन्ध बप्पा रावल के वंश के साथ थे। राणा सांगा और उनकी पत्नी झाली रानी ने संत रैदासजी जो कि चंवरवंश के थे, उनको मेवाड़ का राजगुरु बनाया था। वे चित्तोड़ के किले में बाकायदा प्रार्थना करते थे। इस तरह आज के समाज में जिन्हें चमार बुलाया जाता है, उनका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है।

चमार शब्द का उपयोग पहली बार सिकंदर लोदी ने किया था।

ये वो समय था जब हिन्दू संत रविदास का चमत्कार बढ़ने लगा था अत: मुगल शासन घबरा गया। सिकंदर लोदी ने सदना कसाई को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा। वह जानता था कि यदि संत रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दू इस्लाम स्वीकार कर लेंगे।

लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गई, स्वयं सदना कसाई शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सके और संत रविदास की भक्ति से प्रभावित होकर उनका भक्त यानी वैष्णव (हिन्दू) हो गए। उनका नाम सदना कसाई से रामदास हो गया। दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए। जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी ने क्रोधित होकर इनके अनुयायियों को अपमानित करने के लिए पहली बार “चमार” शब्द का उपयोग किया था।

उन्होंने संत रविदास को कारावास में डाल दिया। उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जूती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया। उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए गए लेकिन उन्होंने कहा:-

“वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान। वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार, तिल तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार।”

यातनायें सहने के पश्चात् भी वे अपने वैदिक धर्म पर अडिग रहे और अपने अनुयायियों को विधर्मी होने से बचा लिया। ऐसे थे हमारे महान संत रविदास जिन्होंने धर्म, देश रक्षार्थ सारा जीवन लगा दिया। शीघ्र ही चंवरवंश के वीरों ने दिल्ली को घेर लिया और सिकन्दर लोदी को संत को छोड़ना ही पड़ा।

संत रविदास की मृत्यु चैत्र शुक्ल चतुर्दशी विक्रम संवत १५८४ रविवार के दिन चित्तौड़ में हुई। वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी स्मृति आज भी हमें उनके आदर्शो पर चलने हेतु प्रेरित करती है, आज भी उनका जीवन समाज के लिए प्रासंगिक है।

हमें यह ध्यान रखना होगा की आज के छह सौ वर्ष पहले चमार जाति थी ही नहीं। इतने ज़ुल्म सहने के बाद भी इस वंश के हिन्दुओं ने धर्म और राष्ट्र हित को नहीं त्यागा, गलती हमारे भारतीय समाज में है। आज भारतीय अपने से ज्यादा भरोसा वामपंथियों और अंग्रेजों के लेखन पर करते हैं, उनके कहे झूठ के चलते बस आपस में ही लड़ते रहते हैं। हिन्दू समाज को ऐसे सलीमशाही जूतियाँ चाटने वाले इतिहासकारों और इनके द्वारा फैलाए गये वैमनस्य से अवगत होकर ऊपर उठाना चाहिए l

सत्य तो यह है कि आज हिन्दू समाज अगर कायम है, तो उसमें बहुत बड़ा बलिदान इस वंश के वीरों का है। जिन्होंने नीचे काम करना स्वीकार किया, पर इस्लाम नहीं अपनाया। उस समय या तो आप इस्लाम को अपना सकते थे, या मौत को गले लगा सकते थे या अपने जनपद/प्रदेश से भाग सकते थे, या फिर आप वो काम करने को हामी भर सकते थे जो अन्य लोग नहीं करना चाहते थे।

चंवर वंश के इन वीरों ने पद्दलित होना स्वीकार किया, धर्म बचाने हेतु सुवर पालना स्वीकार किया, लेकिन मुसलमान धर्म स्वीकार नहीं किये।

नोट:- हिन्दू समाज में छुआ छूत, भेद भाव, ऊँच नीच का भाव था ही नहीं, ये सब कुरीतियाँ विदेशी आक्रांता, अंग्रेज कालीन और भाड़े के वामपंथी व् हिन्दू विरोधी इतिहासकारों की देन है।

"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪

जय श्री राम 🙏

हर हर महादेव 🔱🙏🚩

आज के समय में विभिन्न देशों🌎 के बीच चल रहे युद्ध💣 और तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन या मध्य-पूर्व संघर्ष) का असर केवल उन देशों क...
26/03/2026

आज के समय में विभिन्न देशों🌎 के बीच चल रहे युद्ध💣 और तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन या मध्य-पूर्व संघर्ष) का असर केवल उन देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं है। वैश्वीकरण (Globalization)🌍 के इस दौर में एक जगह होने वाली अशांति की लहरें पूरी दुनिया के सामान्य जनजीवन पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं।

इसके प्रभाव सभी क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं।

💰आर्थिक बोझ और महंगाई
युद्ध के कारण सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) बाधित हो जाती है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।

⛽ईंधन की बढ़ती कीमतें: रूस और मध्य-पूर्व कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े स्रोत हैं। युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होती है और अंततः हर चीज की कीमत बढ़ जाती है।

𓌉◯𓇋 खाद्य सुरक्षा: यूक्रेन और रूस को "दुनिया का अनाज का कटोरा" कहा जाता है। युद्ध की वजह से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी के तेल जैसी बुनियादी चीजों की कमी और कीमतों में भारी उछाल आया है। मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव युद्ध की खबरें और अनिश्चितता का माहौल लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

🤦🏻‍♂️भय और चिंता: परमाणु युद्ध की आशंका या तीसरे विश्व युद्ध की चर्चाएं आम लोगों में भविष्य को लेकर असुरक्षा का भाव पैदा करती हैं।

👩🏻‍💻डिजिटल स्ट्रेस: सोशल मीडिया पर युद्ध की विचलित करने वाली तस्वीरें और वीडियो बच्चों और संवेदनशील लोगों के मन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। विस्थापन और शरणार्थी संकट युद्ध से लाखों लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।

🏠मानवीय 👣त्रासदी: बेघर हुए लोग दूसरे देशों में शरण लेते हैं। जिससे वहां के संसाधनों पर दबाव बढ़ता है और कभी-कभी सामाजिक तनाव भी पैदा होता है।

👨‍👩‍👧‍👦परिवारों का बिखराव: कई बार परिवार के सदस्य बिछड़ जाते हैं। जिससे आने वाली पीढ़ियां गहरे सदमे में रहती हैं।

🏗️विकास कार्यों में कमी:
जब देश अपनी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सैन्य साजो-सामान और रक्षा बजट पर खर्च करने लगते हैं। तो इसका असर जनहित के कार्यों पर पड़ता है।

🧑‍🎓शिक्षा और 🩺स्वास्थ्य पर असर: कल्याणकारी योजनाओं का बजट कम कर दिया जाता है। जिससे आम जनता को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित होती हैं।

🌿पर्यावरण की क्षति: युद्ध न केवल इंसानों को मारता है, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का विनाश भी करता है, जिसका खामियाजा पूरी मानवता भुगतती है।

💡निष्कर्ष: युद्ध कभी भी केवल दो सेनाओं के बीच नहीं होता। यह हर उस घर की रसोई, बजट और शांति पर हमला करता है जो युद्ध क्षेत्र से हजारों मील दूर है।

✍️सौजन्य से - सनातन हिंदू संसद।🙏🚩

ब्राह्मणों ने समाज को तोड़ा नही अपितु जोडा🤝 है।🤷‍♂🤝ब्राम्हणों  ने विवाह के समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े दलित को...
07/11/2025

ब्राह्मणों ने समाज को तोड़ा नही अपितु जोडा🤝 है।

🤷‍♂🤝ब्राम्हणों ने विवाह के समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े दलित को जोड़ते हुये अनिवार्य किया कि दलित स्त्री द्वारा बनाये गये चूल्हे पर ही सभी शुभाशुभ कार्य होगें।
इस तरह सबसे पहले दलित को जोडा गया।

🤷‍♂🤝 धोबन के द्वारा दिये गये सुहाग से ही कन्या सुहागन रहेगी इस तरह धोबी को जोड़ा।

🤷‍♂🤝 कुम्हार द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओ के पूजन होगें यह कहते हुये कुम्हार को जोड़ा।

🤷‍♂🤝 मुसहर जाति जो वृक्ष के पत्तों से पत्तल/दोनिया बनाते है यह कहते हुये जोड़ा कि इन्हीं के बनाए गये पत्तल/दोनीयों से देवताओं का पुजन सम्पन्न होगे।

🤷‍♂🤝 कहार जो जल भरते थे यह कहते हुए जोड़ा कि इन्हीं के द्वारा दिये गये जल से देवताओं के पूजन होगा।

🤷‍♂🤝 बिश्वकर्मा जो लकड़ी के कार्य करते थे यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा बनाये गये आसन/चौकी पर ही बैठकर वर-वधू देवताओं का पुजन करेंगे।

🤷‍♂🤝 फिर वह हिन्दु जो किन्हीं कारणों से *मुसलमान*बन गये थे उन्हें जोड़ते हुये कहा गया कि इनके द्वारा सिले हुये वस्त्रों (जामे-जोड़े) को ही पहनकर विवाह सम्पन्न होगें।

🤷‍♂🤝फिर उस हिन्दु से मुस्लिम बनीं औरतों को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा पहनाई गयी चूडियां ही बधू को सौभाग्यवती बनायेगी।

🤷‍♂🤝 धारीकार जो डाल और मौरी को दूल्हे के सर पर रख कर द्वारचार कराया जाता है,को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा बनाये गये उपहारों के बिना देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल सकता।

🤷‍♂🤝 डोम जो गंदगी साफ और मैला ढोने का काम किया करते थे उन्हें यह कहकर जोड़ा गया कि मरणोंपरांत इनके द्वारा ही प्रथम मुखाग्नि दिया जायेगा।

👉इस तरह समाज के सभी वर्ग जब आते थे तो घर कि महिलायें मंगल गीत का गायन करते हुये उनका स्वागत करती है।और पुरस्कार सहित दक्षिणा देकर बिदा करती थी।
ब्राह्मणों का दोष कहाँ है?...हाँ ब्राह्मणों का दोष है कि इन्होंने अपने ऊपर लगाये गये निराधार आरोपों का कभी खंडन नहीं किया, जो ब्राह्मणों के अपमान का कारण बन गया। इस तरह जब समाज के हर वर्ग की उपस्थिति हो जाने के बाद ब्राह्मण नाई से पुछता था कि क्या सभी वर्गो कि उपस्थिति हो गयी है...?
🤙 नाई के हाँ कहने के बाद ही ब्राह्मण मंगल-पाठ प्रारम्भ किया करते हैं।

ब्राह्मणों द्वारा जोड़ने कि इस क्रिया को विदेशी मूल के लोगो ने अपभ्रंश किया।
देश में फैले हुये समाज विरोधी साधुओं और ब्राह्मण विरोधी ताकतों का विरोध करना होगा जो अपनी अज्ञानता को छिपाने के लिये वेद और ब्राह्मण की निन्दा करतेे हुये पूर्ण भौतिकता का आनन्द ले रहे हैं।

30/10/2024

Ayodhya Deepotsav 2024: अयोध्या में 500 वर्ष बाद 'रामलला की मौजूदगी' में दीपोत्सव का भव्य आयोजन

30/10/2024

84 लाख योनियों में भटकने के बाद पटाखे जलाने🔥
का मौका मिलता है इसलिए इस बार दिवाली दिल खोल के मनाए ॥

पटाखे जलाने🔥 से धुआँ🌪 होता है और धुआँ से मच्छर🦟 का खात्मा होता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसे खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है इसलिए दिल खोल के "पटाखे" जलाओ🔥 और देश को डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से छुटकारा दिलाएं

🚩धन्यवाद🙏🏻
🛕जय श्रीराम🏹

84 लाख योनियों में भटकने के बाद पटाखे जलानेका मौका मिलता है इसलिए इस बार दिवाली दिल खोल के मनाए ॥पटाखे जलाने🔥 से धुआँ🌪 ह...
29/10/2024

84 लाख योनियों में भटकने के बाद पटाखे जलाने
का मौका मिलता है इसलिए इस बार दिवाली दिल खोल के मनाए ॥

पटाखे जलाने🔥 से धुआँ🌪 होता है और धुआँ से मच्छर🦟 का खात्मा होता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसे खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है इसलिए दिल खोल के "पटाखे" जलाओ🔥 और देश को डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से छुटकारा दिलाएं

धन्यवाद🙏🏻

29/10/2024

84 लाख योनियों में भटकने के बाद पटाखे जलाने
का मौका मिलता है इसलिए इस बार दिवाली दिल खोल के
मनाए ॥

पटाखे जलाने🔥 से धुआँ🌪 होता है और धुआँ से मच्छर🦟 का खात्मा होता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसे खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है इसलिए दिल खोल के "पटाखे" जलाओ🔥 और देश को डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से छुटकारा दिलाएं

धन्यवाद🙏🏻

बांग्लादेशी हिन्दुओ की हत्या पर :TMC - 0 ट्वीटDMK - 0 ट्वीटAAP - 0 ट्वीटBSP - 0 ट्वीटRJD - 0 ट्वीटMIM - 0 ट्वीटCPI - 0 ट...
09/08/2024

बांग्लादेशी हिन्दुओ की हत्या पर :

TMC - 0 ट्वीट
DMK - 0 ट्वीट
AAP - 0 ट्वीट
BSP - 0 ट्वीट
RJD - 0 ट्वीट
MIM - 0 ट्वीट
CPI - 0 ट्वीट
कांग्रेस पार्टी - 0 ट्वीट
NCP -शरद - 0 ट्वीट
शिवसेना (उद्धव) - 0 ट्वीट
समाजवादी पार्टी - 0 ट्वीट

राहुल गांधी - 0 ट्वीट
असद ओवैसी - 0 ट्वीट
प्रियंका गांधी - 0 ट्वीट
संजय सिंह - 0 ट्वीट
उद्धव ठाकरे - 0 ट्वीट
संजय राउत - 0 ट्वीट
तेजस्वी यादव - 0 ट्वीट
ममता बनर्जी - 0 ट्वीट
अखिलेश यादव - 0 ट्वीट
मल्लिकार्जुन खड़गे - 0 ट्वीट

जबकि इन सब ने गाजा में आतंकियों के मरने पर कई ट्वीट किए थे॥

सलमान खुर्शीद ने कहा, जो बांग्लादेश में हो रहा है वह भारत में भी हो सकता है।सुनो मुल्ले सलमान खुर्शीदभारत में यदि ऐसा हु...
07/08/2024

सलमान खुर्शीद ने कहा, जो बांग्लादेश में हो रहा है वह भारत में भी हो सकता है।

सुनो मुल्ले सलमान खुर्शीद
भारत में यदि ऐसा हुआ तो तुम्हारी सात पुश्तें भी जय श्री राम का नारा लगाते हुए पैदा होगी, ऐसा इतिहास लिखेंगे की पूरा भूगोल बदल दिया जाएगा

यह बांग्लादेश नहीं हिंदुस्तान हैं।
यहां पुलिस और आर्मी हिंदुओं को सुरक्षा नहीं देती बल्कि मुसलमानों को बचाने के लिए लगाना पड़ता है

ध्यान रहे, औकात में ही बोला करो

गजब का धर्म जहॉं खून बहने पर भी मुबारकबात दी जाती है।
17/06/2024

गजब का धर्म जहॉं खून बहने पर भी मुबारकबात दी जाती है।

⚡एक सलाह....अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को तब तक समाप्त कर देना चाहिए जब तक कि 'अल्पसंख्यक' शब्द को संख्यात्मक रूप से ...
10/06/2024

⚡एक सलाह....अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को तब तक समाप्त कर देना चाहिए जब तक कि 'अल्पसंख्यक' शब्द को संख्यात्मक रूप से या कुल जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में परिभाषित नहीं किया जाता।

अभी तक, मानदंड संख्या नहीं, बल्कि धर्म है। हिंदुओं को छोड़कर सभी अल्पसंख्यक हैं/हो सकते हैं।

इस कारण से, छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में संख्यात्मक रूप से अल्पसंख्यक होने के बावजूद, हिंदुओं को उन राज्यों में अल्पसंख्यक मामलों की योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है।

उदाहरण के लिए, लक्षद्वीप में, जहाँ 97% आबादी मुस्लिम है, उन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है और उन्हें अल्पसंख्यक मामलों की योजनाओं का लाभ मिलता है, लेकिन 2% हिंदू आबादी को नहीं मिलता है। कश्मीर में भी यही स्थिति है।

इस पर पहले से ही ध्यान क्यों नहीं दिया गया पता नही ?

पर मोदी 3.0 है तो संभव है।।

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