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may you all be happy always

22/08/2026

22/08/2026

क्यों नहीं पूछते सवाल
ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई ने जब पहली लड़कियों की पाठशाला खोली थी,
तो सिर्फ किताबें नहीं खोली थीं…
समाज की बंद आँखें खोलने की कोशिश की थी।
पत्थर, गाली, बहिष्कार—सब सहकर भी उन्होंने कहा था:
“ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।”
बाबासाहेब अंबेडकर ने शिक्षा को सिर्फ डिग्री नहीं,
आजादी का रास्ता बनाया।
उन्होंने कहा था—
“शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो।”
क्योंकि वे जानते थे—
किताब के बिना कोई भी जंजीर नहीं टूटती।
आज भी जब शिक्षा की बात करने पर लाठियाँ पड़ती हैं,
तो याद आता है—
फुले और बाबासाहेब की मेहनत सिर्फ उनके समय के लिए नहीं थी।
वह आज भी जारी है…
हर उस आवाज़ में, जो कहती है—
“हर बच्चा पढ़े, चाहे उसका नाम कुछ भी हो।”
उनकी लड़ाई अधूरी नहीं हुई।
वह हर बार नए रूप में लौटती है।
और हमारा फर्ज है—
उस लड़ाई को आगे बढ़ाना,
न कि चुप रह जाना।

22/08/2026

इस गांव की पूरी जानकारी साझा करें कितने लोग किस जाति से हैं और किनके बच्चे कौनसे स्कूल में जाते है पक्का यहां दलितों के साथ भेदभाव किया जा रहा है जब 1 करोड़ का इस्तेमाल मंदिर बनाना में किया गया तो क्यों नहीं पूछते सवाल
ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई ने जब पहली लड़कियों की पाठशाला खोली थी,
तो सिर्फ किताबें नहीं खोली थीं…
समाज की बंद आँखें खोलने की कोशिश की थी।
पत्थर, गाली, बहिष्कार—सब सहकर भी उन्होंने कहा था:
“ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।”
बाबासाहेब अंबेडकर ने शिक्षा को सिर्फ डिग्री नहीं,
आजादी का रास्ता बनाया।
उन्होंने कहा था—
“शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो।”
क्योंकि वे जानते थे—
किताब के बिना कोई भी जंजीर नहीं टूटती।
आज भी जब शिक्षा की बात करने पर लाठियाँ पड़ती हैं,
तो याद आता है—
फुले और बाबासाहेब की मेहनत सिर्फ उनके समय के लिए नहीं थी।
वह आज भी जारी है…
हर उस आवाज़ में, जो कहती है—
“हर बच्चा पढ़े, चाहे उसका नाम कुछ भी हो।”
उनकी लड़ाई अधूरी नहीं हुई।
वह हर बार नए रूप में लौटती है।
और हमारा फर्ज है—
उस लड़ाई को आगे बढ़ाना,
न कि चुप रह जाना।

22/08/2026

ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई ने जब पहली लड़कियों की पाठशाला खोली थी,
तो सिर्फ किताबें नहीं खोली थीं…
समाज की बंद आँखें खोलने की कोशिश की थी।
पत्थर, गाली, बहिष्कार—सब सहकर भी उन्होंने कहा था:
“ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।”
बाबासाहेब अंबेडकर ने शिक्षा को सिर्फ डिग्री नहीं,
आजादी का रास्ता बनाया।
उन्होंने कहा था—
“शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो।”
क्योंकि वे जानते थे—
किताब के बिना कोई भी जंजीर नहीं टूटती।
आज भी जब शिक्षा की बात करने पर लाठियाँ पड़ती हैं,
तो याद आता है—
फुले और बाबासाहेब की मेहनत सिर्फ उनके समय के लिए नहीं थी।
वह आज भी जारी है…
हर उस आवाज़ में, जो कहती है—
“हर बच्चा पढ़े, चाहे उसका नाम कुछ भी हो।”
उनकी लड़ाई अधूरी नहीं हुई।
वह हर बार नए रूप में लौटती है।
और हमारा फर्ज है—
उस लड़ाई को आगे बढ़ाना,
न कि चुप रह जाना।

21/08/2026
21/08/2026

जब राजनीति धर्म जाति पर हो सकती हैं तो अब राजनीति स्कूल हॉस्पिटल पर होगी जब ही देश में सुधार होगा
किसी को भी स्कूल ठीक करो मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहिए ये सबसे ज्यादा जरूरी मुद्दा है हर देशवासी का🙏

20/08/2026

😂

ध्यान दे
20/08/2026

ध्यान दे

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