Shree Santosh Baba Dham

Shree Santosh Baba Dham अनंत कोटि ब्रह्मांड के नायक, योगीराज, तपस्वियों के शिरोमणि, परम पूज्य सद्गुरु, श्री श्री संतोष राम ब्रह्मचारी जी महाराज की जय 🙏🙏🙏

With Yourpainmechanic – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
25/04/2026

With Yourpainmechanic – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

🌸 षष्ठी दिन – माँ कात्यायनी पूजा विधि🙏 महत्वमाँ कात्यायनी को शक्ति और साहस की देवी माना जाता हैये दुष्टों का विनाश करती ...
23/03/2026

🌸 षष्ठी दिन – माँ कात्यायनी पूजा विधि
🙏 महत्व
माँ कात्यायनी को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है
ये दुष्टों का विनाश करती हैं
विवाह में आ रही बाधाएँ दूर करती हैं
🙏🙏🙏🙏🙏

🌸 🪔 पूजा विधि
स्नान कर स्वच्छ/लाल वस्त्र पहनें
माँ कात्यायनी की फोटो/मूर्ति स्थापित करें
दीपक और धूप जलाएं
लाल फूल अर्पित करें 🌺
शहद (हनी) का भोग लगाएं 🍯
मंत्र जाप करें 👇

👉 ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

दुर्गा चालीसा/आरती करें🌷🌹🌺🌸🌼

🔱 जय माता दी ❤️

🌺 माँ कात्यायनी 🌺
🔥 शक्ति और साहस की देवी

🙏 ॐ देवी कात्यायन्यै नमः🙏

✨ हर बाधा को दूर करने वाली माँ
🌷🌹🌺🌸🌼

🌸 सप्तमी – माँ कालरात्रि पूजा विधि🙏 माँ कालरात्रि का महत्वमाँ कालरात्रि को दुष्टों का विनाश करने वाली माना जाता हैये भय,...
22/03/2026

🌸 सप्तमी – माँ कालरात्रि पूजा विधि
🙏 माँ कालरात्रि का महत्व
माँ कालरात्रि को दुष्टों का विनाश करने वाली माना जाता है
ये भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करती हैं
इनकी पूजा से साहस, सुरक्षा और सफलता मिलती है🌷🌹🌺

🪔 पूजा सामग्री
लाल/नीले फूल 🌺
धूप, दीप 🪔
रोली, चावल
गुड़ और मिठाई 🍯
नारियल
लौंग, कपूर🌺
🌺🌺🌺🌺🌺
🕉️ पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
पूजा स्थान को साफ करें
माँ कालरात्रि की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
दीपक और धूप जलाएं
रोली-चावल से तिलक करें
फूल अर्पित करें
गुड़ का भोग लगाएं
मंत्र जाप करें 👇

👉 ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

दुर्गा सप्तशती/चालीसा का पाठ करें
अंत में आरती करें
🌺🌺🌺🌺🌺
🔥 विशेष बात
इस दिन रात्रि में पूजा करना भी शुभ माना जाता है
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है
🙏🙏🙏🙏🙏

🌸 चतुर्थ दिन – माँ कूष्मांडा पूजा विधि🙏 माँ कूष्मांडा का महत्वमाँ कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता हैये सूर्य मंड...
21/03/2026

🌸 चतुर्थ दिन – माँ कूष्मांडा पूजा विधि
🙏 माँ कूष्मांडा का महत्व
माँ कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है
ये सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं
इनकी पूजा से स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि मिलती है🌺

🪔 पूजा सामग्री
फूल (गेंदे/लाल फूल) 🌼
धूप, दीप 🪔
रोली, चावल
फल और मिठाई 🍎
मालपुआ (विशेष भोग) 🍯
गंगाजल
🌺🌸🌼

🕉️ पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
पूजा स्थान को साफ करें
माँ कूष्मांडा की फोटो/मूर्ति स्थापित करें
दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें
रोली-चावल से तिलक करें
फूल और फल चढ़ाएं
माँ को मालपुआ का भोग लगाएं
मंत्र जाप करें 👇

👉 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः

दुर्गा चालीसा/कथा पढ़ें
अंत में आरती करें🌷🌹🌺

🍯 भोग का महत्व
इस दिन मालपुआ चढ़ाना शुभ माना जाता है
इससे माँ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि देती हैं🌺🌸🌼

✨ लाभ
रोगों से मुक्ति 🏥
धन और समृद्धि 💰
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏

19/03/2026

🙏 2. रोज़ाना पूजा विधि (9 दिन)

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें

माँ दुर्गा की मूर्ति या फोटो के सामने दीपक जलाएं

फूल, फल और भोग चढ़ाएं

दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें

“ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप करें

आरती करें
🙏🙏🙏🙏🙏

चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का बहुत शुभ समय माना जाता है। इस दौरान माँ दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। य...
19/03/2026

चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का बहुत शुभ समय माना जाता है। इस दौरान माँ दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। यहाँ पूरे विधि-विधान को विस्तार से समझाया गया है:

🌸 चैत्र नवरात्रि 2026 – पूजा विधि (विस्तार से)
🗓️ कब से शुरू होती है?

चैत्र नवरात्रि आमतौर पर मार्च–अप्रैल में आती है

इसी दिन से हिंदू नववर्ष (नया कैलेंडर) भी शुरू होता है

🪔 1. कलश स्थापना (घट स्थापना) – पहला दिन
आवश्यक सामग्री:

मिट्टी का बर्तन (जौ बोने के लिए)

जौ (बार्ली)

कलश (घड़ा)

आम के पत्ते

नारियल

लाल कपड़ा

रोली, चावल, फूल, दीपक

विधि:

सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें

मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं

उसके ऊपर पानी से भरा कलश रखें

कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखें (लाल कपड़े में लपेटकर)

माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए संकल्प लें

14/03/2026

आज का पंचांग – 14 मार्च 2026 (शनिवार)

तिथि
• कृष्ण पक्ष दशमी – सुबह 08:10 बजे तक
• इसके बाद एकादशी तिथि शुरू
नक्षत्र
• उत्तराषाढ़ा नक्षत्र – 15 मार्च सुबह तक
योग
• वरीयान योग – सुबह 10:43 बजे तक, उसके बाद परिघ योग
करण
• विष्टि – सुबह 08:10 बजे तक
• बव – रात 08:48 बजे तक
सूर्योदय / सूर्यास्त
• 🌅 सूर्योदय: 06:32 AM
• 🌇 सूर्यास्त: 06:29 PM
चंद्रमा की स्थिति
• सुबह 09:33 बजे तक धनु राशि, उसके बाद मकर राशि
⏰ आज के शुभ मुहूर्त
• ब्रह्म मुहूर्त: 04:57 AM – 05:45 AM
• अभिजीत मुहूर्त: 12:07 PM – 12:55 PM
• अमृत काल: 09:56 PM – 11:40 PM
अशुभ समय
• राहुकाल: 09:31 AM – 11:01 AM
• यमगंड: 02:00 PM – 03:30 PM
• गुलिक काल: 06:32 AM – 08:02 AM
🙏 आज का दिन मेहनत और अनुशासन के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में है, जो सफलता और स्थिरता का संकेत देता है 🙏

15/01/2026

*सब तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार*:

गंगा सागर मेला भारत के प्राचीनतम एवं पवित्र धार्मिक मेलों में से एक है। यह मेला पश्चिम बंगाल के गंगासागर नामक स्थान पर आयोजित होता है, जहाँ पवित्र गंगा नदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है। इस संगम को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के पावन दिन यहाँ स्नान, दान और पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी भाव को व्यक्त करती यह प्रसिद्ध बानी प्रचलित है—

“सब तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार।”

गंगा सागर मेले का संबंध कपिल मुनि और राजा सगर की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार राजा सगर के 60,000 पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। बाद में उनके वंशज राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर माता गंगा को पृथ्वी पर अवतरित किया, जिनके पावन जल से सगर पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई। माना जाता है कि यह दिव्य घटना इसी गंगासागर स्थल पर घटित हुई थी। इसीलिए यह स्थान युगों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

ऐतिहासिक दृष्टि से गंगा सागर मेला हजारों वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है। इसका उल्लेख विभिन्न पुराणों एवं धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। विद्वानों के अनुसार यह मेला 1500–2000 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है, जबकि धार्मिक परंपराएँ इसे और भी पुरातन मानती हैं। समय के साथ इसकी महत्ता और विस्तार निरंतर बढ़ता गया।

यह मेला प्रतिवर्ष 14 या 15 जनवरी (मकर संक्रांति) को लगता है, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस शुभ अवसर पर लाखों श्रद्धालु गंगासागर में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं और कपिल मुनि के मंदिर में दर्शन करते हैं। इस आध्यात्मिक भावना को दर्शाती एक और भावपूर्ण बानी इस प्रकार है—

“जहाँ गंगा सागर से मिल जाए,
वहीं जीवन का उद्धार हो जाए।”

आज गंगा सागर मेला कुंभ मेले के बाद भारत का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का सजीव प्रतीक है।

Address

Asansole
Asansol
713336

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shree Santosh Baba Dham posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category