History Of Hinduism

History Of Hinduism knowing oldest and greatest civilization of sanatan dharm.
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तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर सच में बहुत अद्भुत जगह है, समुद्र किनारे बना यह मंदिर मन को अलग ही शांति देता है, मान्यता है कि ...
29/05/2026

तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर सच में बहुत अद्भुत जगह है, समुद्र किनारे बना यह मंदिर मन को अलग ही शांति देता है, मान्यता है कि भगवान मुरुगन ने यहीं पर सूरपद्मन नाम के असुर का वध किया था।

मंदिर की भव्यता, समुद्र की लहरें और वहाँ का भक्तिमय वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है,यहाँ आकर ऐसा लगता है जैसे मन को सुकून और नई ऊर्जा मिल गई हो।

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29/10/2025

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Yeah..... 'The #स्त्री ' ❤️🚴‍♀️

Pic credit





10/09/2023

ब्रह्माजी का अपनी पुत्री से विवाह का असली सच क्या है यह आज भी शोध का विषय है। इस पर विचार किए जाने की जरूरत है। भारतीय पौराणिक इतिहास में ब्रह्मा का नाम महत्वपूर्ण रूप से प्रकट होता है, जबकि प्रचलित समाज में विष्णु और शिव को उनसे श्रेष्ठ माना गया है। कालांतर में ब्रह्मा को हाशिए पर धकेल दिए जाने के कई कारणों में से एक है सावित्री का शाप और दूसरा कारण यह कि ब्रह्मांड की थाह लेने के लिए जब भगवान सदाशिव ने विष्णु और ब्रह्मा को भेजा तो ब्रह्मा ने वापस लौटकर सदाशिव से असत्य वचन कहा था।

*हालांकि प्रचलित समाज में यह धारणा फैली है कि ब्रह्मा ने उनकी पुत्री सरस्वती के साथ विवाह किया था इसलिए उन्हें नहीं पूजा जाता। अब यह कितना सच यह यह तो शोध का विषय है। कुछ विद्वान इसे भ्रांत धारण मानकर खारिज करते हैं। हालांकि सचाई यह भी है कि पुराणों में एक जगह उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मा की पत्नी विद्या की देवी सरस्वती उनकी पुत्री नहीं थीं। उनकी एक पुत्री का नाम भी सरस्वती था जिसके चलते यह भ्रम उत्पन्न हुआ।

*पौराणिक मान्यता अनुसार ब्रह्मा की पुत्री सरस्वती का विवाह भगवान विष्णु से हुआ था, जबकि ब्रह्मा की पत्नी सरस्वती अपरा विद्या की देवी थीं जिनकी माता का नाम महालक्ष्मी था और जिनके भाई का नाम विष्णु था। विष्णु ने जिस 'लक्ष्मी' नाम की देवी से विवाह किया था, वे भृगु ऋषि की पुत्री थीं।

*माना जाता है कि ब्रह्माजी की 5 पत्नियां थीं- सावित्री, गायत्री, श्रद्धा, मेधा और सरस्वती। इसमें सावित्री और सरस्वती का उल्लेख अधिकतर जगहों पर मिलता है। यह भी मान्यता है कि पुष्कर में यज्ञ के दौरान सावित्री के अनुपस्थित होने की स्थित में ब्रह्मा ने वेदों की ज्ञाता विद्वान स्त्री गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया था। इससे सावित्री ने रुष्ट होकर ब्रह्मा को जगत में नहीं पूजे जाने का शाप दे दिया था। गुर्जर इतिहाकार के जानकार मानते हैं कि गायत्री माता एक गुर्जर महिला थी।

इस तस्वीर में लोहे की रॉड पर बिना किसी आसन के जो वयोवृद्ध ज्ञानवृद्ध सन्यासी बैठे हैं, क्या आप इन्हें जानते हैं..??ये है...
26/08/2023

इस तस्वीर में लोहे की रॉड पर बिना किसी आसन के जो वयोवृद्ध ज्ञानवृद्ध सन्यासी बैठे हैं, क्या आप इन्हें जानते हैं..??

ये हैं सनातन धर्म के हृदय सम्राट.. हिन्दु धर्म में ज्ञान का सबसे बड़ा दिव्य ज्योतिपुंज..ऐसे युग पुरुष, जिनसे आधुनिक युग के सर्वोच्च वैधानिक संगठनो, संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व बैंक तक ने मार्गदर्शन प्राप्त किया है। ऐसे अवतरित पुरुष जिन्होंने वैदिक गणित आदि विषयो पर अनेक ग्रन्थ लिख दिए हैं.. जिनसे इसरो, नासा के वैज्ञानिक, यूनिवर्सिटी आदि के संशोधक-प्राध्यापक भी ज्ञान प्राप्त करते हैं। जी हाँ ये हैं– ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री निश्चलानंद सरस्वतीजी महाराज..आपने ऐसे अनेक तथाकथित कथावाचकों, स्वयंभू गुरुओं, स्वयम्भू सन्तों को देखा होगा, जो अनेक सेवक/सुविधा लेकर घूमते हैं। उन्होंने कहीं विराजना हो तो सुंदर से सुंदर आसन, आवागमन के लिए हवाईजहाज तक उनके लिये लगा दिया जाते है। परन्तु ये स्वामीजी कितने विलक्षण हैं! किसी रेलवे स्टेशन का चित्र है। ट्रेन आने में समय होगा। लगभग 80 वर्ष की आयु के स्वामी श्री जगद्गुरु पुरी शंकराचार्य महाराज जी को खड़े रहने में थोड़ी दिक्कत है तो लोहे की रॉड पर ही बैठ गये..क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे सन्त किसके लिए जीवन जी रहे हैं? इन्हें अपने लिए किस चीज की चाह होगी? गेरुआ वस्त्र और खड़ाऊं ही इन्हें पहनने के लिये चाहिये। किसी अन्य चीज की अभिलाषा नहीं। इतनी आयु में भी अभी वैदिक गणित आदि विषय पर ग्रन्थ लिख रहे हैं। तो क्या इन्हें उचित सम्मान देना हमारा दायित्व नहीं है? क्या हम भारतवासी ऐसे सन्तों के ऋणी नहीं हैं? तो हम इनके लिये क्या कर रहे हैं? यदि हम वास्तव में धर्म, राष्ट्र और संस्कृति को बचाना चाहते हैं तो हमें ऐसे पूज्यचरण महापुरूष की की शरण आना ही होगा...

जय श्रीराम, जय सनातन धर्म, जय गोविंदा ✨🙏🕉️💖

यह कोई साधारण महिलाएं नही हैं ये है ISRO की वैज्ञानिक.... तन पर साड़ी, माथे पर कुंकुम और गले में मंगलसूत्र पहने ये महिला...
24/08/2023

यह कोई साधारण महिलाएं नही हैं ये है ISRO की वैज्ञानिक.... तन पर साड़ी, माथे पर कुंकुम और गले में मंगलसूत्र पहने ये महिलाएं कोई आम घरेलू महिलाएं नहीं बल्कि इसरो की वैज्ञानिक हैं जिन्होंने हाल में ही #चंद्रयान_3 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। महिलाओं की आजादी के नाम पर पिछले कुछ सालों में टी-शर्ट, जींस और बरमूडा पहनने का चलन आम हो गया है, जिसका खोखलापन इन दक्षिण भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने दिखाया है। इन्हीं वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों चंद्रयान के प्रक्षेपण से पहले बालाजी के दर्शन किये थे. यह तस्वीर इस बात का अच्छा उदाहरण है कि संस्कृति कभी भी प्रौद्योगिकी के आड़े नहीं आती.... दूसरी ओर, कुछ लोग अल्प ज्ञानी होते हुए खुद को बहुत बड़ा वैज्ञानिक होने का दिखावा करते रहते है...परन्तु वास्तव में ऐसे लोगों को विज्ञान का सामान्य ज्ञान भी नहीं होता...
जय हिंद 🇮🇳
These are not ordinary women, they are ISRO scientists.... Wearing saree on body, kumkum on forehead and mangalsutra around neck, these women are not ordinary household women but ISRO scientists who successfully launched recently. In the name of women's freedom, the practice of wearing T-shirts, jeans and Bermudas has become common in the last few years, the hollowness of which has been shown by these South Indian women scientists. These same scientists had seen Balaji before the launch of Chandrayaan last days. This picture is a good example of the fact that culture never comes in the way of technology.... On the other hand, some people pretend to be great scientists while being little knowledgeable... But in reality such people Science doesn't even have common sense...
Jai Hind 🇮🇳

गर्व का क्षण..आखिर इंतजार पूरा हुआ। 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदें पूरी हुईं। चन्द्रयान ने चाँद पर भारत का नाम हमेशा क...
24/08/2023

गर्व का क्षण..आखिर इंतजार पूरा हुआ। 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदें पूरी हुईं। चन्द्रयान ने चाँद पर भारत का नाम हमेशा के लिए लिख दिया है। भारत चंद्रमा के दक्षिण पोल पर पहुँचने वाला पहला देश बना है।इस ऐतिहासिक उपलब्धि में इसरो की वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक डॉ. ऋतु करिधल श्रीवास्तव की प्रमुख भूमिका रही। चन्द्रयान 3 की सफलता की सभी वैज्ञानिकों को और पूरे भारत को कोटि-कोटि बधाई।

तुर्की के इन खंडहरों में हनुमानजी की मूर्ति भी मिली है यह तुर्की की 12,000 वर्ष पुरानी सभ्यता के खंडहर बताए जा रहे है , ...
12/08/2023

तुर्की के इन खंडहरों में हनुमानजी की मूर्ति भी मिली है
यह तुर्की की 12,000 वर्ष पुरानी सभ्यता के खंडहर बताए जा रहे है , जिसका नाश आज के कोई 5500-6000 वर्ष पूर्व हो गया था Göbeklitepe के उन खंडहरों में हिन्दू देवी देवताओं ( हनुमान, नृसिंहः ) आदि की मूर्तियां भी मिली है, जो इस बात का प्रमाण है, की सनातन धर्म के अलावा अन्य दूसरा सत्य है ही नही, अन्य सभी पंथ है,भरम हैआप खुद भी गूगल कर सकते है..

जय श्रीराम, जय बजरंगबली, जय गोविंदा ✨🙏💖🕉️

The idol of Hanumanji has also been found in these ruins of Türkiye.
These are said to be the ruins of 12,000 years old civilization of Turkey, which was destroyed some 5500-6000 years ago. Statues of Hindu deities (Hanuman, Narasimha) etc. have also been found in those ruins of Göbeklitepe, which proves this fact. It is proof that there is no other truth other than Sanatan Dharma, all other sects are illusions, you can google yourself..

Jai Shriram, Jai Bajrangbali, Jai Govinda ✨🙏💖🕉️

ज्ञानवापी में मिला 1800 साल पुराना त्रिशूल! इस्लाम के जन्म से 400 वर्ष पूर्व बनाया गया।1800 year old Trishul found in Gy...
06/08/2023

ज्ञानवापी में मिला 1800 साल पुराना त्रिशूल!

इस्लाम के जन्म से 400 वर्ष पूर्व बनाया गया।

1800 year old Trishul found in Gyanvapi.

Made 400 years before the birth of Islam.

वैदिक घड़ी...देखिये, जानिए और समझिए कि भारत के सभी वस्तुओं को कैसे-कैसे साजिशN नष्ट किया गया, पूरा अवश्य पढ़ें....1.  12...
03/08/2023

वैदिक घड़ी...देखिये, जानिए और समझिए कि भारत के सभी वस्तुओं को कैसे-कैसे साजिशN नष्ट किया गया, पूरा अवश्य पढ़ें....

1. 12:00 बजने के स्थान पर आदित्या: लिखा हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं.
अंशुमान,अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु।

2. 1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है, इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है।
एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति

3. 2:00 बजने की स्थान पर अश्विनौ लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।

4. 3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं।
सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण।

5. 4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेदा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं।
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

6. 5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं। अपान, समान, प्राण, उदान और व्यान।

7. 6:00 बजने के स्थान पर षड्र्सा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं।
मधुर, अमल, लवण, कटु, तिक्त और कसाय।

8. 7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षय: लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं।
कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ।

9. 8:00 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धिय: लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है। अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व और वशित्व।

10. 9:00 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं। पद्म, महापद्म, नील, शंख, मुकुंद, नंद, मकर, कच्छप, खर्व।

11. 10:00 बजने के स्थान पर दशदिशः लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, नैऋत्य, वायव्य, आग्नेय, आकाश, पाताल।

12. 1:00 बजने के स्थान पर रुद्रा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं। कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव।

सनातन धर्म में प्रत्येक वस्तु कुछ न कुछ अवश्य सिखाती है..जय सनातन धर्म ✨🕉️ जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🙏💖

हर शुभ कार्य से पहले क्यों बनाया जाता है स्वास्तिक? जानिए इसका कारण और रहस्य... स्वास्तिक को प्राचीन काल से ही भारतीय सं...
01/08/2023

हर शुभ कार्य से पहले क्यों बनाया जाता है स्वास्तिक? जानिए इसका कारण और रहस्य...

स्वास्तिक को प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में अच्छाई और शुभता का प्रतीक माना जाता रहा है। हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वास्तिक का चिन्ह जरूर बनाया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क शब्दों से मिलकर बना है। 'सु' का अर्थ है अच्छा या शुभ, 'अस' का अर्थ है 'शक्ति' या 'अस्तित्व' और 'अ' का अर्थ है 'कर्ता' या कर्ता। इस प्रकार 'स्वस्तिक' शब्द किसी व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं है, बल्कि इसमें समस्त विश्व का कल्याण या 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना निहित है। स्वास्तिक का अर्थ है 'स्वास्तिक' कौशल या कल्याण का प्रतीक है। स्वास्तिक में एक दूसरे को काटने वाली दो सीधी रेखाएँ होती हैं, जो आगे चलकर मुड़ जाती हैं। इसके बाद भी ये रेखाएं उनके सिर पर थोड़ा आगे मुड़ जाती हैं। स्वास्तिक की यह आकृति दो प्रकार की हो सकती है। पहला स्वस्तिक, जिसमें रेखाएं आगे की ओर इशारा करते हुए हमारे दाहिनी ओर मुड़ जाती हैं। इसे 'स्वस्तिक' कहते हैं। यह शुभ संकेत है, जो हमारी प्रगति का संकेत देता है। ऋग्वेद की ऋचा में स्वस्तिक को सूर्य का प्रतीक माना गया है और उसकी चार भुजाओं को चार दिशाओं की उपमा दी गई है। सिद्धांतसार नामक ग्रन्थ में इन्हें जगत् जगत का प्रतीक माना गया है। उसके मध्य भाग को विष्णु की कमल नाभि और रेखाओं को ब्रह्माजी के चार मुख, चार हाथ और चार वेदों के रूप में वर्णित किया गया है। अन्य ग्रंथों में स्वस्तिक में चार वर्ण, चार आश्रम और धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, सामाजिक व्यवस्था और व्यक्तिगत मान्यताओं को जीवित रखने वाले लक्षण बताए गए हैं। स्वास्तिक की चार रेखाओं को जोड़ने के बाद बीच में बने बिंदु को भी अलग-अलग मान्यताओं से परिभाषित किया जाता है।ऐसा माना जाता है कि यदि स्वस्तिक की चार रेखाओं को भगवान ब्रह्मा के चार सिरों के बराबर माना जाता है, तो इसके परिणामस्वरूप मध्य में बिंदु भगवान विष्णु की नाभि है, जिससे भगवान ब्रह्मा प्रकट होते हैं।
स्वास्तिक में भगवान गणेश और नारद की शक्तियां समाहित हैं। स्वास्तिक को भगवान विष्णु और सूर्य का आसन माना गया है। स्वस्तिक का बायां भाग गणेश की शक्ति 'ग' बीज मंत्र का स्थान है...

जय सनातन धर्म, जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🕉️💖🙏

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