यदि प्रतिदिन साधना करने के बावजूद भी इस दिशा में कोई गति नहीं हो रही है, तो कारणों को जानने के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें। जब कोई साधक साधना शुरू करता है तो उसे बहुत से शारीरिक और मानसिक अनुभवों में से गुज़रना पड़ता है। यदि साधक साधना में होने वाले अनुभवों से अवगत होता है, तो उसके लिए आत्म ज्ञान की अवस्था प्राप्त करना बहुत आसान हो जाती है।
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आत्म ज्ञान
ख़ुद की खोज, Charanjit Singh Gorkhi. https://play.google.com/store/books/details?id=hhkxEAAAQBAJ
ब्रह्मज्ञानी की अवस्था को प्राप्त कर चुके मानुष के चित्त के भीतर स्वयं विचारों का चिंतन सदा के लिए रुक जाता है। मन के अंदर विचार रुकने के बाद ही सुरति आत्म तत्त्व में लीन हो सकती है। ब्रह्मज्ञानी अवस्था का अर्थ है, एक मनुष्य जिसकी सुरति भौतिक शरीर (ज्ञान इंद्रियों और करम इंद्रियों) से अलग हो गई है और सूक्ष्म शरीर से जुड़ गई है। इस अवस्था में मनुष्य सुख, दुःख, चिंताओं और परेशानियों के अनुभवों से परे चला जाता है। इससे आगे शब्दों की कोई दुनिया नहीं है। इस सर्वाेच्च शुद्ध चेतन अवस्था में आप स्वयं को अपने वास्तविक रूप में भी देखेंगे और आप उस तत्व को भी देख लेंगे जो तत्व दिखाई नहीं देता है। उस शुद्ध चेतन तत्व को देखने से मनुष्य को अपने कारण शरीर के भीतर एकत्रित हुए कर्मों के संस्कारों से सदा के लिए पूर्ण रूप से मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
इससे पहले कि हमें इस दुनिया को सदा के लिए छोड़ना पड़े, हमें जीते जी विचार मुक्त अवस्था में प्रवेश करना होगा । जब तक कोई इंसान जीते जी निर्विचार अवस्था में स्थिर नहीं हो जाता, उतनी देर तक जीवन और मृत्यु की क्रिया से मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती।
वह इंसान दरिद्र नहीं होता, जो निर्धन है। दरिद्र वह इंसान होता है जिसको इंसान के रूप में जन्म तो मिला, मगर इसके बावजूद भी वह उस परम जीवन को जाने बिना इस संसार से कूच कर गया।
इंसान को राग और द्वेष से तब तक मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती जब तक उसकी सुरती आत्म तत्व में लीन नहीं हो जाती।
मन की जड़ें चित्त में होती हैं और चित्त की जड़ें कारण शरीर में होती हैं इसीलिए हर एक इंसान अपने चित्त के अनुसार जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर होता है।
जीना और ज़िदा रहने में बहुत अंतर होता है । जीना एक कला है, अगर आप जीना सीखना चाहते हैं तो इस किताब में बहुत सी ऐसी ज्ञान की बातें बताई गई हैं जिनके अनुसार जीवन चलाने से आपका जीवन एकदम शांत हो जाएगा।
सहज समाधी की अवस्था को कैसे प्राप्त करना है । उस में आपको जो-जो शारीरिक और मानसिक अनुभव होंगे ,उन सबका बहुत ही विस्तार से इस किताब में वर्णन किया गया है३. इसलिए संपूर्ण साधना को जानने के लिए पुस्तक को अवष्य पढ़ें।
लेखक- चरणजीत सिंह गोरखी
किताब की कीमत 250 रुपे पोस्टल चार्ज के साथ
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