26/01/2026
पिछले दिनों ओडिशा के ढेंकानाल जिले में पास्टर बिपिन बिहारी नायक को मरते दम तक मारने, गोबर खिलाने, चप्पलों का हार पहनाकर खंबे से बांध कर पीटने और नाली का पानी पिलाने की अमानवीय घटना की जितने कड़े शब्दों में निंदा की जाए वो कम है।
जिन असामाजिक तत्वों ने यह कृत किया है वो किसी भी धर्म के नही हो सकते। उनका धर्म केवल 'हिंसा' है और धर्म की जबरिया ठेकेदारी की आड़ में समाज में उपद्रव और अशांति फैलाना उनका पेशा ।
छत्तीसगढ़ में भी पिछले लगभग दो वर्षों से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।अल्पसंख्यक विवश हैं । झूठे आरोप लगाकर उन्हें डराया धमकाया जा रहा है । 'भारत' का संविधान सभी धर्मों, सभी वर्गों और सभी जातियों को समान देखता है।
किसी भी धर्म की आड़ लेकर गुंडागर्दी करना सरासर गलत है। ये मानसिक रूप से बीमार लोग हैं, जिन्हें न शांति का अर्थ पता है और न सौहार्द का ।
सबका साथ , सबका विकास और सबका विश्वास केवल “शब्दों का आभूषण” है । केवल चुनाव के समय चमकता है।
पहले अंग्रेजों ने देश को तोड़ा और अब ये लोग देश को विभाजित करना चाहते हैं। ये देश को पीछे ले जाना चाहते हैं।
अल्पसंख्यकों और दलितों के विरुद्ध अन्याय और अत्याचार बंद करो ! बंद करो !