14/08/2025
“मैं, पंडित विद्या रत्तन सेवक, माता रानी मंदिर, जंडियाला गुरु, अपने परिवार सहित अपने गृह हिमाचल लौट आया हूँ। यह निर्णय मैंने अपनी बिगड़ती हुई स्वास्थ्य स्थिति के कारण लिया है, ताकि कुछ समय अपने परिवार के साथ विश्राम कर सकूँ और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकूँ।
मुझे लगभग 50 वर्षों तक माता रानी के दरबार में सेवा और पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी और गर्व का विषय है कि मुझे इतने लंबे समय तक नगरवासियों और भक्तों का प्रेम, विश्वास और सहयोग मिला।
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि इस विषय में माता रानी मंदिर की कमेटी, किसी भी पदाधिकारी या नगर के किसी भी व्यक्ति की कोई प्रतिकूल भूमिका नहीं रही है। बल्कि, कमेटी ने बड़े सद्भाव और सम्मान के साथ मुझे विदा किया है।
क्योंकि आप सभी का प्रेम और अपनापन मुझसे जुड़ा है, इसलिए ऐसे विचार मन में आना स्वाभाविक है। किंतु आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया किसी भी कमेटी सदस्य के प्रति कोई नकारात्मक बात न कहें। यह पूरी तरह मेरा और मेरे परिवार का स्वयं का निर्णय है, जो केवल मेरी सेहत और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मेरा आप सभी से निवेदन है कि आपस में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना बनाए रखें, कोई भी मतभेद या गलतफहमी न आने दें। माता रानी के दरबार में भक्ति, सेवा और श्रद्धा का वातावरण वैसे ही पवित्र बना रहे जैसे अब तक रहा है।
माता रानी की असीम कृपा आप सभी पर सदा बनी रहे, आपके घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। माता रानी यदि जीवन में फिर कभी अवसर देंगी, तो मैं अवश्य आकर पुनः सेवा का सौभाग्य प्राप्त करूंगा।
समय-समय पर मैं आप सभी से मिलने और माता रानी के चरणों में हाजिरी लगाने आता रहूँगा। आपके प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद के लिए मैं हृदय से कृतज्ञ हूँ।”