श्री हनुमान जी मंदिर बरगवां जिला अनूपपुर

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श्री हनुमान जी मंदिर बरगवां जिला अनूपपुर jai bajrangbali ji ki jai

राम भगति मनि उर बस जाकें। दु:ख लवलेस न सपनेहुँ ताकें॥अर्थ: जिसके हृदय में राम-भक्ति रूपी मणि बस जाती है, उसे स्वप्न में ...
19/05/2026

राम भगति मनि उर बस जाकें।
दु:ख लवलेस न सपनेहुँ ताकें॥

अर्थ: जिसके हृदय में राम-भक्ति रूपी मणि बस जाती है, उसे स्वप्न में भी लेशमात्र (छोटा सा भी) दुःख नहीं होता

भय प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
12/05/2026

भय प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥

कर्म प्रधान बिस्व रचि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥अर्थ: कर्म प्रधान विश्व की रचना की है, जो जैसा कर्म करता है, वह वैस...
05/05/2026

कर्म प्रधान बिस्व रचि राखा।
जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥

अर्थ: कर्म प्रधान विश्व की रचना की है, जो जैसा कर्म करता है, वह वैसा ही फल चखता है।

अब कछु नाथ न चाहिअ मोरें।दीन दयाल अनुग्रह तोरें॥फिरती बार मोहि जो देबा।सो प्रसादु मैं सिर धरि लेबा॥अर्थ : जब प्रभु श्री ...
28/04/2026

अब कछु नाथ न चाहिअ मोरें।
दीन दयाल अनुग्रह तोरें॥
फिरती बार मोहि जो देबा।
सो प्रसादु मैं सिर धरि लेबा॥

अर्थ : जब प्रभु श्री राम केवट को उतराई देते हैं तब केवट हाथ जोड़कर प्रभु से कहता है: हे नाथ, आज मैंने क्या नहीं पाया, आपकी कृपा से मेरे सारे दोष, दुख समाप्त हो गये। हे दीनदयाल, अब मुझे कुछ नहीं चाहिए, लौटते समय आप जो कुछ भी देंगे मैं उसे प्रसाद समझ सिर चढ़ा लूंगा।

"रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुं बरु बचनु न जाई॥"अर्थ: रघुकुल की यही परंपरा रही है कि प्राण भले ही चले जाएं, लेकिन व...
21/04/2026

"रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुं बरु बचनु न जाई॥"
अर्थ: रघुकुल की यही परंपरा रही है कि प्राण भले ही चले जाएं, लेकिन वचन नहीं टूटना चाहिए।

कहेहु तात अस मोर प्रनामा।सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥दीन दयाल बिरिदु संभारी।हरहु नाथ मम संकट भारी॥अर्थ : हे तात ! मेरा प्रण...
14/04/2026

कहेहु तात अस मोर प्रनामा।
सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥

अर्थ : हे तात ! मेरा प्रणाम और आपसे निवेदन है - हे प्रभु! यद्यपि आप सब प्रकार से पूर्ण काम हैं (आपको किसी प्रकार की कामना नहीं है), तथापि दीन-दुःखियों पर दया करना आपका विरद (प्रकृति) है, अतः हे नाथ ! आप मेरे भारी संकट को हर लीजिए (मेरे सारे कष्टों को दूर कीजिए)॥

मंगल वंदना (बालकाण्ड):मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अज़िर बिहारी॥(अर्थ: दशरथनंदन श्री राम जी मंगल करने वाले और अमंग...
07/04/2026

मंगल वंदना (बालकाण्ड):

मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सुदसरथ अज़िर बिहारी॥

(अर्थ: दशरथनंदन श्री राम जी मंगल करने वाले और अमंगल को हरने वाले हैं, वे मेरे आंगन में विराजमान होकर मुझ पर कृपा करें।)

आज भगवान की छठ का प्रसाद वितरण किया गया।
01/04/2026

आज भगवान की छठ का प्रसाद वितरण किया गया।

27/03/2026
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी॥
24/03/2026

दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥

"हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।"
17/03/2026

"हरि अनंत हरि कथा अनंता।
कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।"

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