Kalikan Dham

Kalikan Dham ��जय माँ कालिका�� कालिकन धाम अमेठी,उ?
(1)

पेम अमिअ मंदरु बिरहु भरतु पयोधि गँभीर।मथि प्रगटेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुबीर॥   भावार्थ:-प्रेम अमृत है, विरह मंदराचल ...
29/04/2026

पेम अमिअ मंदरु बिरहु भरतु पयोधि गँभीर।
मथि प्रगटेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुबीर॥
भावार्थ:-प्रेम अमृत है, विरह मंदराचल पर्वत है, भरतजी गहरे समुद्र हैं। कृपा के समुद्र श्री रामचन्द्रजी ने देवता और साधुओं के हित के लिए स्वयं (इस भरत रूपी गहरे समुद्र को अपने विरह रूपी मंदराचल से) मथकर यह प्रेम रूपी अमृत प्रकट किया है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-29/04/2026[बुधवार]

निरखि सिद्ध साधक अनुरागे। सहज सनेहु सराहन लागे॥होत न भूतल भाउ भरत को। अचर सचर चर अचर करत को॥  भावार्थ:-भरत के प्रेम की इ...
28/04/2026

निरखि सिद्ध साधक अनुरागे।
सहज सनेहु सराहन लागे॥
होत न भूतल भाउ भरत को।
अचर सचर चर अचर करत को॥
भावार्थ:-भरत के प्रेम की इस स्थिति को देखकर सिद्ध और साधक लोग भी अनुराग से भर गए और उनके स्वाभाविक प्रेम की प्रशंसा करने लगे कि यदि इस पृथ्वी तल पर भरत का जन्म (अथवा प्रेम) न होता, तो जड़ को चेतन और चेतन को जड़ कौन करता?॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-28/04/2026[मंगलवार]

देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा॥सखहि सनेह बिबस मग भूला। कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला॥  भावार्थ:-भरतजी की ...
27/04/2026

देखि भरत गति अकथ अतीवा।
प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा॥
सखहि सनेह बिबस मग भूला।
कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला॥
भावार्थ:-भरतजी की अत्यन्त अनिर्वचनीय दशा देखकर वन के पशु, पक्षी और जड़ (वृक्षादि) जीव प्रेम में मग्न हो गए। प्रेम के विशेष वश होने से सखा निषादराज को भी रास्ता भूल गया। तब देवता सुंदर रास्ता बतलाकर फूल बरसाने लगे॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-27/04/2026[सोमवार ]

तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए॥बट छायाँ बेदिका बनाई। सियँ निज पानि सरोज सुहाई॥   भावार्थ:-वहाँ तु...
23/04/2026

तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए।
कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए॥
बट छायाँ बेदिका बनाई।
सियँ निज पानि सरोज सुहाई॥
भावार्थ:-वहाँ तुलसीजी के बहुत से सुंदर वृक्ष सुशोभित हैं, जो कहीं-कहीं सीताजी ने और कहीं लक्ष्मणजी ने लगाए हैं। इसी बड़ की छाया में सीताजी ने अपने करकमलों से सुंदर वेदी बनाई है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-23/04/2026[गुरुवार ]

मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी॥ए तरु सरित समीप गोसाँई। रघुबर परनकुटी जहँ छाई॥   भावार्थ:-मानो ब्रह...
22/04/2026

मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी।
बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी॥
ए तरु सरित समीप गोसाँई।
रघुबर परनकुटी जहँ छाई॥
भावार्थ:-मानो ब्रह्माजी ने परम शोभा को एकत्र करके अंधकार और लालिमामयी राशि सी रच दी है। हे गुसाईं! ये वृक्ष नदी के समीप हैं, जहाँ श्री राम की पर्णकुटी छाई है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-22/04/2026[बुधवार]

जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा॥नील सघन पल्लव फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला॥     भावार्थ:-जिन ...
21/04/2026

जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा।
मंजु बिसाल देखि मनु मोहा॥
नील सघन पल्लव फल लाला।
अबिरल छाहँ सुखद सब काला॥
भावार्थ:-जिन श्रेष्ठ वृक्षों के बीच में एक सुंदर विशाल बड़ का वृक्ष सुशोभित है, जिसको देखकर मन मोहित हो जाता है, उसके पत्ते नीले और सघन हैं और उसमें लाल फल लगे हैं। उसकी घनी छाया सब ऋतुओं में सुख देने वाली है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-21/04/2026[मंगलवार]

राम सैल सोभा निरखि भरत हृदयँ अति पेमु।तापस तप फलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु॥   भावार्थ:-श्री रामजी के पर्वत की शोभा देख...
20/04/2026

राम सैल सोभा निरखि भरत हृदयँ अति पेमु।
तापस तप फलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु॥
भावार्थ:-श्री रामजी के पर्वत की शोभा देखकर भरतजी के हृदय में अत्यंत प्रेम हुआ। जैसे तपस्वी नियम की समाप्ति होने पर तपस्या का फल पाकर सुखी होता है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-20/04/2026[सोमवार]

राम बास बन संपति भ्राजा। सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा॥सचिव बिरागु बिबेकु नरेसू। बिपिन सुहावन पावन देसू॥     भावार्थ:-श्री र...
14/04/2026

राम बास बन संपति भ्राजा।
सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा॥
सचिव बिरागु बिबेकु नरेसू।
बिपिन सुहावन पावन देसू॥
भावार्थ:-श्री रामचंद्रजी के निवास से वन की सम्पत्ति ऐसी सुशोभित है मानो अच्छे राजा को पाकर प्रजा सुखी हो। सुहावना वन ही पवित्र देश है। विवेक उसका राजा है और वैराग्य मंत्री है।
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-14/04/2026[मंगलवार]

ईति भीति जनु प्रजा दुखारी। त्रिबिध ताप पीड़ित ग्रह मारी॥जाइ सुराज सुदेस सुखारी। होहिं भरत गति तेहि अनुहारी॥  भावार्थ:-जैस...
13/04/2026

ईति भीति जनु प्रजा दुखारी।
त्रिबिध ताप पीड़ित ग्रह मारी॥
जाइ सुराज सुदेस सुखारी।
होहिं भरत गति तेहि अनुहारी॥
भावार्थ:-जैसे *ईति के भय से दुःखी हुई और तीनों तापों तथा क्रूर ग्रहों और महामारियों से पीड़ित प्रजा किसी उत्तम देश और उत्तम राज्य में जाकर सुखी हो जाए, भरतजी की गति (दशा) ठीक उसी प्रकार हो रही है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-13/04/2026[सोमवार]

सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने॥भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू॥    भावार्थ:-भरतजी ने सेव...
12/04/2026

सेवक बचन सत्य सब जाने।
आश्रम निकट जाइ निअराने॥
भरत दीख बन सैल समाजू।
मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू॥
भावार्थ:-भरतजी ने सेवक (गुह) के सब वचन सत्य जाने और वे आश्रम के समीप जा पहुँचे। वहाँ के वन और पर्वतों के समूह को देखा तो भरतजी इतने आनंदित हुए मानो कोई भूखा अच्छा अन्न पा गया हो॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-12/04/2026[रविवार]

देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू॥   भावार्थ:- भरतजी का सोच और प्रेम देखकर उस समय निषाद विदेह हो गया (दे...
11/04/2026

देखि भरत कर सोचु सनेहू।
भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू॥
भावार्थ:- भरतजी का सोच और प्रेम देखकर उस समय निषाद विदेह हो गया (देह की सुध-बुध भूल गया)॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-11/04/2026[शनिवार]
❤️

जब समुझत रघुनाथ सुभाऊ। तब पथ परत उताइल पाऊ॥   भावार्थ:- जब श्री रघुनाथजी के स्वभाव को समझते  हैं तब मार्ग में उनके पैर ज...
10/04/2026

जब समुझत रघुनाथ सुभाऊ।
तब पथ परत उताइल पाऊ॥
भावार्थ:- जब श्री रघुनाथजी के स्वभाव को समझते हैं तब मार्ग में उनके पैर जल्दी-जल्दी पड़ने लगते हैं॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-10/04/2026[शुक्रवार]

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