Kalikan Dham

Kalikan Dham ��जय माँ कालिका�� कालिकन धाम अमेठी,उ?
(1)

मुनिगन निकट बिहग मृग जाहीं। बाधक बधिक बिलोकि पराहीं॥हित अनहित पसु पच्छिउ जाना। मानुष तनु गुन ग्यान निधाना॥  भावार्थ:-पक्...
22/08/2026

मुनिगन निकट बिहग मृग जाहीं।
बाधक बधिक बिलोकि पराहीं॥
हित अनहित पसु पच्छिउ जाना।
मानुष तनु गुन ग्यान निधाना॥
भावार्थ:-पक्षी और पशु मुनियों के पास (बेधड़क) चले जाते हैं, पर हिंसा करने वाले बधिकों को देखते ही भाग जाते हैं। मित्र और शत्रु को पशु-पक्षी भी पहचानते हैं। फिर मनुष्य शरीर तो गुण और ज्ञान का भंडार ही है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-22/08/2026[शनिवार]

कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी। भरत भूमि रह राउरि राखी॥तात कुतरक करहु जनि जाएँ। बैर पेम नहिं दुरइ दुराएँ॥  भावार्थ:-हे भरत! मै...
21/08/2026

कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी।
भरत भूमि रह राउरि राखी॥
तात कुतरक करहु जनि जाएँ।
बैर पेम नहिं दुरइ दुराएँ॥
भावार्थ:-हे भरत! मैं स्वभाव से ही सत्य कहता हूँ, शिवजी साक्षी हैं, यह पृथ्वी तुम्हारी ही रखी रह रही है। हे तात! तुम व्यर्थ कुतर्क न करो। वैर और प्रेम छिपाए नहीं छिपते॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-21/08/2026[शुक्रवार]

दोहा :*तासु दसा देखी सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।**कहु कारनु निज हरष कर पूछहिं सब मृदु बैन॥*भावार्थ:-सखियों ने उसकी दशा देखी...
20/08/2026

दोहा :

*तासु दसा देखी सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।*
*कहु कारनु निज हरष कर पूछहिं सब मृदु बैन॥*

भावार्थ:-
सखियों ने उसकी दशा देखी कि उसका शरीर पुलकित है और नेत्रों में जल भरा है। सब कोमल वाणी से पूछने लगीं कि अपनी प्रसन्नता का कारण बता॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:- 20/08/2026(बुधवार)

* उर आनत तुम्ह पर कुटिलाई* ।जाइ लोकु परलोकु नसाई॥दोसु देहिं जननिहि जड़ तेई। जिन्ह गुर साधु सभा नहिं सेई॥   भावार्थ:-हृदय...
19/08/2026

* उर आनत तुम्ह पर कुटिलाई
* ।जाइ लोकु परलोकु नसाई॥
दोसु देहिं जननिहि जड़ तेई।
जिन्ह गुर साधु सभा नहिं सेई॥
भावार्थ:-हृदय में भी तुम पर कुटिलता का आरोप करने से यह लोक (यहाँ के सुख, यश आदि) बिगड़ जाता है और परलोक भी नष्ट हो जाता है। माता कैकेयी को तो वे ही मूर्ख दोष देते हैं, जिन्होंने गुरु और साधुओं की सभा का सेवन नहीं किया है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-19/08/2026[बुधवार]

दोहा :*उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।**गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान॥*भावार्थ:-रात बीतने पर, मुर्ग...
17/08/2026

दोहा :

*उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।*
*गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान॥*

भावार्थ:-
रात बीतने पर, मुर्गे का शब्द कानों से सुनकर लक्ष्मणजी उठे। जगत के स्वामी सुजान श्री रामचन्द्रजी भी गुरु से पहले ही जाग गए॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:- 17/08/2026(सोमवार)

अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई॥जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी॥  भावार्थ:-अब य...
15/08/2026

अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई।
जिअत जीव जड़ सबइ सहाई॥
जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी।
तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी॥
भावार्थ:-अब यहाँ आकर सब आँखों देख लिया। यह जड़ जीव जीता रह कर सभी सहावेगा। जिनको देखकर रास्ते की साँपिनी और बीछी भी अपने भयानक विष और तीव्र क्रोध को त्याग देती हैं-॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-15/08/2026[शनिवार]

भूपति मरन प्रेम पनु राखी। जननी कुमति जगतु सबु साखी॥देखि न जाहिं बिकल महतारीं। जरहिं दुसह जर पुर नर नारीं॥  भावार्थ:-प्रे...
13/08/2026

भूपति मरन प्रेम पनु राखी।
जननी कुमति जगतु सबु साखी॥
देखि न जाहिं बिकल महतारीं।
जरहिं दुसह जर पुर नर नारीं॥
भावार्थ:-प्रेम के प्रण को निबाहकर महाराज का मरना और माता की कुबुद्धि, दोनों का सारा संसार साक्षी है। माताएँ व्याकुल हैं, वे देखी नहीं जातीं। अवधपुरी के नर-नारी दुःसह ताप से जल रहे हैं॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-13/08/2026[गुरुवार].

गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू। लागत मोहि नीक परिनामू॥  भावार्थ:- वह यह है कि गुरु महाराज सर्वसमर्थ हैं और श्री सीता-रामजी मे...
12/08/2026

गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू।
लागत मोहि नीक परिनामू॥
भावार्थ:- वह यह है कि गुरु महाराज सर्वसमर्थ हैं और श्री सीता-रामजी मेरे स्वामी हैं। इसी से परिणाम मुझे अच्छा जान पड़ता है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-12/08/2026[बुधवार]

हृदयँ हेरि हारेउँ सब ओरा। एकहि भाँति भलेहिं भल मोरा॥गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू। लागत मोहि नीक परिनामू॥  भावार्थ:-मैं अपने...
11/08/2026

हृदयँ हेरि हारेउँ सब ओरा।
एकहि भाँति भलेहिं भल मोरा॥
गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू।
लागत मोहि नीक परिनामू॥
भावार्थ:-मैं अपने हृदय में सब ओर खोज कर हार गया (मेरी भलाई का कोई साधन नहीं सूझता)। एक ही प्रकार भले ही (निश्चय ही) मेरा भला है। वह यह है कि गुरु महाराज सर्वसमर्थ हैं और श्री सीता-रामजी मेरे स्वामी हैं। इसी से परिणाम मुझे अच्छा जान पड़ता है॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-11/08/2026[मंगलवार]

* बिधि न सकेऊ सहि मोर दुलारा।* नीच बीचु जननी मिस पारा॥यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनीं समुझि साधु सुचि को भा॥भावार्थ:-परन्...
08/08/2026

* बिधि न सकेऊ सहि मोर दुलारा।
* नीच बीचु जननी मिस पारा॥
यहउ कहत मोहि आजु न सोभा।
अपनीं समुझि साधु सुचि को भा॥
भावार्थ:-परन्तु विधाता मेरा दुलार न सह सका। उसने नीच माता के बहाने (मेरे और स्वामी के बीच) अंतर डाल दिया। यह भी कहना आज मुझे शोभा नहीं देता, क्योंकि अपनी समझ से कौन साधु और पवित्र हुआ है? (जिसको दूसरे साधु और पवित्र मानें, वही साधु है)॥
🔱🚩जय माँ कालिका🚩🔱
आज का श्रृंगार दर्शन
कालिकन धाम,अमेठी,उत्तर प्रदेश
दिनांक:-08/08/2026[शनिवार]

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