Maa Mahamaya Devi Mandir Ambikapur

Maa Mahamaya Devi Mandir Ambikapur Jai Maa Mahamaya

This is a very old temple which was built by Maharaja of Sarguja. The presiding deity is Maa Mahamaya, an incarnation of Goddess Durga.

This is a very old temple which was built by Maharaja of Sarguja. The presiding deity is Maa Mahamaya, an incarnation of Goddess Durga or Ambika, is the kuldevi of the local erstwhile royal family, after whose name the town is named Ambikapur. Mahamaya Temple is an ancient temple of 2nd and 3rd century, belonging to the Kalchuri era. The architecture of the temple is very simple but it is famous a

s an extremely revered shrine among the devotees. Samleshwari Temple is another important temple situated near of Mahamaya Temple which is dedicated to Goddess Samlai.

माँ महामाया, सरगुजा और सरगुजा के पुरे विश्व में फैले प्रवासियों की अटूट आस्था की शक्तिपीठ केन्द्र, आदिशक्ति, महाशक्ति, प...
15/10/2023

माँ महामाया, सरगुजा और सरगुजा के पुरे विश्व में फैले प्रवासियों की अटूट आस्था की शक्तिपीठ केन्द्र, आदिशक्ति, महाशक्ति, प्रचण्ड चंडी, छिन्नमस्तक, उदार, ममतामयी वन देवी महामाया के साथ आदिकाल से एक साथ दो देवी प्रतिमा विराजमान थीं, जिन्हें "बड़ी समलाईं" और "छोटी समलाई" कहा जाता था. जनश्रुति अनुसार महाराजा को स्वप्न में महसूस हुआ की दोनों देवियों में एक साथ न रह सकने के स्तर तक झगड़ा या विवाद हो गया, या महाराजा द्वारा आस्था स्थल की संख्या बढ़ाने या आक्रांताओं की मूर्ति चोरी प्रयास से बचाव के उद्देश्य से दोनों देवियों को अलग-अलग स्थापित किया गया. जब बड़ी, छोटी दोनों समलाई माँ एक हीं स्थान पर थीं तब इनकी चमत्कारिक शक्तियों और तेज से अचंभित मराठे बार-बार पूरी मूर्तियां ढो कर अपहृत करनें में असमर्थ होने पर सिर काट कर ले गए, इसलिए प्रतिवर्ष शारदेय नवरात्र आरम्भ संधि रात्रि में एक कुम्हार परिवार द्वारा रात्रि में पीढ़ी दर पीढ़ी महामाया समलाया का नया सिर बनाया जाता है.
दुर्लभ देववृक्ष "अक्षयवट" की शीतल छाँव से आच्छादित बड़ी समलाया जिन्हें अब "महामाया" कहा जाता है, उनकी संगत के लिए बायीं ऒर मिर्जापुर से विन्ध्वासिनी देवी की काली रंग की प्रतिमा लाकर स्थापित की गईं वहीँ छोटी समलाया को मूल जगह से करीब पौन किलोमीटर शहर की ऒर पास में स्थापित किया गया. इस लिए मान्यता है कि दोनों देवी बहनों की एक साथ दर्शन किये बिना "महामाया दर्शन" बिल्कुल अपूर्ण या कम प्रभावी होता है. पहले दीदी "बड़ी समलाया" यानी "महामाया" फिर वापसी में बहन "छोटी समलाया" यानी "समलाया" का दर्शन किया जाना चाहिए.
महामाया द्वारा प्रसन्न हो दिया आशीर्वाद या मन्नत पर समलाया में मत्था टेकने के बाद मुहर लगनें पर प्रभावी या फलीभूत होती हैं, सरगुजा शक्ति का केंद्र रही है, रतनपुर, सम्बलपुर और डोंगरगढ़, झारसुगड़ा सहित कई जगहों पर सरगुजा की मूर्तियां या उनके अंगों के अंश ले जाने की जनश्रुति है.
~ #गोविन्द_शर्मा, (परिवर्धित-14.10.2016, fb
Govind Sharma & Surguja Sambhag Ek NaZar

माँ महामाया की कृपा से, एकलव्य जन कल्याण समिति के द्वारा अंबिकापुर में दो दिवसीय निशुल्क चिकित्सा व स्वास्थ्य परीक्षण शि...
27/02/2023

माँ महामाया की कृपा से, एकलव्य जन कल्याण समिति के द्वारा अंबिकापुर में दो दिवसीय निशुल्क चिकित्सा व स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा उपचार किया जाएगा। साथ ही अलग-अलग प्रकार की बीमारियों की जांच की जा सकेगी।

शिविर का शुभारंभ दिनांक 2 मार्च 2023 एवं समापन दिनांक 3 मार्च 2023 को होगा।

venue: Feel Anandam , Ambikapur
Date: (2nd - 3rd) March 2023
Contact: 9669627065, 9861131326

आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और हर्षोल्लास के साथ नवीन ऊर्जा का संचार हो। जगत-जननी, आदि-शक्ति माँ  #महामाया की कृपा सब...
17/10/2020

आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और हर्षोल्लास के साथ नवीन ऊर्जा का संचार हो। जगत-जननी, आदि-शक्ति माँ #महामाया की कृपा सब पर बनी रहे।
ाता_दी 🙏🙏🙏 #नवरात्रि

वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी नमक त्रासदी से दौर से गुजर रहा है।  महामाया माँ कोरोना को विश्व भर से मुक्...
02/04/2020

वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी नमक त्रासदी से दौर से गुजर रहा है। महामाया माँ कोरोना को विश्व भर से मुक्त कर सबके जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि दें। जय माता दी ! जय श्री राम!

 #अम्बिकापुर_महामाया_में_अक्षयवट                   Surguja State. अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ की  महामाया मन्दिर के सामने भी अना...
29/03/2020

#अम्बिकापुर_महामाया_में_अक्षयवट
Surguja State.
अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ की महामाया मन्दिर के सामने भी अनादिकाल से उपेक्षित पड़ा #अक्षयवट के कुछ विलुप्त होते अवशेष बचे हैं. पुरानी पीढ़ी के गुजर जाने के बाद ऐसे लोग नहीं बचे जो जान सकें कि इनकी महामाया के सम्मुख पारिजात, कामधेनु की तरह जादुई चमत्कारिक विलक्षण देववृक्ष है जिसके नीचे मन्नत माँगने से पूरी हो जाती है, आयु बढ़ जाती है. अम्बिकापुर महामाया के प्रांगण में विशाल पंडाल छतरी की तरह फैले "अक्षयवट" दर्शनार्थियों को शीतलता और आजीवन मदद करती हैं. इनके महत्व से अनजान दर्शनार्थी अनजाने में आशीर्वाद व मन्नत से वंचित रह जाते हैं. अभी इलाहाबाद कुम्भ (जनवरी 2019) की वजह से अक्षयवट फिर चर्चा और सुर्खियों में है.
लोगों के अत्यधिक मौजूदगी और आवागमन से अब नए हवाई जड़ स्पर्श, बच्चों के लटक-लटक झूलने से तथा हवाई जड़ नीचे भूमि सख्त होने और भूमि स्पर्श न होने से नए स्तम्भ विस्तार अवरुद्ध हो गए हैं जो इसके अस्तित्व के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और चिन्ताजनक है. आज से पचास वर्ष पूर्व तक यह विस्तृत क्षेत्रफल घेरे था, जो अब सिमट कर विलुप्ति की ओर है. यह अक्षयवट महामाया के साथ युगों से साथ रह रहे लेकिन इसके अक्षयवट होने की जानकारी न होने से दर्शनार्थी इसकी महिमा से वंचित हैं. महामाया सरगुज़ा राजपरिवार की कुलदेवी तथा सरगुज़ा वासियों की ईष्ट देवी हैं.
आप जब भी मुसीबत में हों, या कोई अपरिहार्य कामनां, मन्नत हो तो महामाया के सम्मुख ध्यानमग्न हो बिना स्पर्श किये #अक्षयवट से भी प्रार्थना कर सकते हैं,
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2153787087978035&id=865323036824453
~ #गोविन्दशर्मा Surguja Sambhag Ek NaZar
23.01.2019, 8.18 am

  wishes to all
21/02/2020

wishes to all

शुभ दीपावली
26/10/2019

शुभ दीपावली

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणता स्मरताम। ॥1॥ रौद्रायै नमो नित्ययै गौर्य धात्र्य...
28/09/2019

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणता स्मरताम। ॥1॥

रौद्रायै नमो नित्ययै गौर्य धात्र्यै नमो नमः।
ज्योत्यस्त्रायै चेन्दुरुपिण्यै सुखायै सततं नमः ॥2॥

कल्याण्यै प्रणतां वृद्धयै सिद्धयै कुर्मो नमो नमः।
नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः ॥3॥

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै।
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः ॥4॥

अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः।
नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै नमो नमः ॥5॥

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥6॥

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥7॥

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥8॥

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥9॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥10॥

या देवी सर्वभूतेषुच्छायारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥11॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥12॥

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥13॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥14॥

या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥15॥

या देवी सर्वभूतेषु लज्जारुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥16॥

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥17॥

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥18॥

या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥19॥

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥20॥

या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥21॥

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥22॥

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥23॥

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥24॥

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥25॥

या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥26॥

इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदैव्यै नमो नमः ॥27॥

चित्तिरूपेण या कृत्स्त्रमेतद्व्याप्त स्थिता जगत्‌।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥28॥

स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया -त्तथा सुरेन्द्रेणु दिनेषु सेविता॥
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्र्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥29॥

या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै -रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ॥30॥

॥ इति तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम्‌ सम्पूर्णम्‌ ॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥🙏
02/09/2019

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥🙏

आप सभी को चैत्र नवरात्रि एवं नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएंl आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और हर्षोल्लास के साथ नवीन ...
06/04/2019

आप सभी को चैत्र नवरात्रि एवं नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएंl आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और हर्षोल्लास के साथ नवीन ऊर्जा का संचार हो। जगत-जननी, आदि-शक्ति माँ महामाया की कृपा सब पर बनी रहे।

ाता_दी🚩🚩🔔🔔
#नवरात्रि

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