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रज़ा यूनिटी फाउंडेशन Raza Unity Foundation मुल्क व मिल्लत की तरक्की व तहफ्फुज के लिए युवा आगे आएं

12/08/2026

माशाअल्लाह रज़ा यूनिटी फाउंडेशन अम्बिकापुर मे कराने जा रहा है सामूहिक विवाह

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उर्स-ए-आला हज़रत के मौक़े पर रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन के दफ़्तर में प्रोग्राम मुनअक़िददिनांक: 09 अगस्त 2026 | मुक़ाम: अम्बि...
09/08/2026

उर्स-ए-आला हज़रत के मौक़े पर रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन के दफ़्तर में प्रोग्राम मुनअक़िद

दिनांक: 09 अगस्त 2026 | मुक़ाम: अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़

अम्बिकापुर में रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन के दफ़्तर में उर्स-ए-आला हज़रत के मौक़े पर एक पुरनूर प्रोग्राम मुनअक़िद किया गया, जिसमें फ़ाउंडेशन के मेंबरान एवं ज़िम्मेदारान ने शिरकत की।

प्रोग्राम का आग़ाज़ शादाब आलम रज़वी ने तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-पाक से फ़रमाया। इसके बाद उन्होंने आला हज़रत के दस निकाती प्रोग्राम के हवाले से बयान करते हुए आला हज़रत की बुनियादी तालीमात, दीनी ख़िदमात और समाजी इस्लाह के पहलुओं पर रोशनी डाली। उन्होंने ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ को इंसानी और समाजी ज़िम्मेदारी बताते हुए ज़रूरतमंदों की मदद, कमज़ोर तबक़े की हिमायत और समाज की बेहतरी के लिए अमली तौर पर काम करने पर ज़ोर दिया।

इसके बाद ताहिर हुसैन ने नात-ए-पाक पेश करने की सआदत हासिल की।

नात-ए-पाक के बाद एडवोकेट नौशाद सिद्दीकी साहब ने मौजूदा हालात और बुज़ुर्गाने दीन की तालीमात के हवाले से इज़हार-ए-ख़याल किया। उन्होंने मौजूद मेंबरान को मुख़ातिब करते हुए समाजी ख़िदमात में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने, समाज में पाई जाने वाली बुराइयों की रोकथाम के लिए पुरअसर इक़दामात करने तथा दीनी और समाजी ख़िदमत को अपनी ज़िम्मेदारी समझकर अंजाम देने की नसीहत की।

उन्होंने कहा कि समाज की इस्लाह सिर्फ़ तक़रीर और मशवरे तक महदूद नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अमल, इत्तेहाद, ख़िदमत और अख़लाक़ के ज़रिए समाज में सकारात्मक तब्दीली लाने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने फ़ाउंडेशन के मेंबरान से दीनी, समाजी और इंसानी ख़िदमात में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

इसके बाद सलात-ओ-सलाम पेश किया गया। नासिरउद्दीन साहब ने दुआ-ए-ख़ैर फ़रमाई। दुआ के बाद प्रोग्राम का इख़्तिताम हुआ।

प्रोग्राम के ज़रिए इस बात का अहद किया गया कि रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन इल्म, इस्लाह, इत्तेहाद, इंसाफ़ और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के मैदान में अपनी समाजी और दीनी ज़िम्मेदारियों को पूरी संजीदगी के साथ अदा करता रहेगा।

ज़रूर पढ़िए 👇रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन का गंभीर संदेशछत्तीसगढ़ के नए धर्म-स्वतंत्रता नियमों के संदर्भ में मुस्लिम समाज, उलेमा,...
08/08/2026

ज़रूर पढ़िए 👇

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन का गंभीर संदेश

छत्तीसगढ़ के नए धर्म-स्वतंत्रता नियमों के संदर्भ में मुस्लिम समाज, उलेमा, मसाजिद कमेटियों एवं सामाजिक संस्थाओं के नाम अपील

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 : मुस्लिम समाज अब जागे, कानून को समझे और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे

छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू हो चुका है। विधानसभा ने इसे मार्च 2026 में पारित किया था और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे 10 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी किए जाने की रिपोर्ट है। सरकार का घोषित उद्देश्य बल, दबाव, प्रलोभन, धोखाधड़ी, गलत प्रस्तुतीकरण तथा अन्य अवैध तरीकों से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।

सरकार का कहना है कि पुराने कानून की तुलना में नया कानून अधिक व्यापक और कठोर बनाया गया है। इसमें धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया, पूर्व सूचना, जांच तथा अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार ने डिजिटल माध्यमों से होने वाले कथित अवैध धर्म परिवर्तन को भी कानून के दायरे में रखा है।

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन का सवाल यह नहीं है कि जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन होना चाहिए या नहीं।

हमारा स्पष्ट मत है—

**जबरदस्ती गलत है।

धोखा गलत है।
धमकी गलत है।
प्रलोभन देकर किसी की धार्मिक आस्था बदलवाना गलत है।**

लेकिन इसके साथ एक दूसरा और उतना ही महत्वपूर्ण सवाल है—

क्या इस कानून का इस्तेमाल किसी बालिग नागरिक की स्वतंत्र धार्मिक पसंद, अंतरात्मा की स्वतंत्रता, अंतरधार्मिक विवाह या किसी सामाजिक/धार्मिक संस्था की वैध गतिविधियों को संदेह के घेरे में लाने के लिए किया जा सकता है?

यही वह प्रश्न है जिस पर मुस्लिम समाज को गंभीरता से जागरूक होना होगा।

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सरकार का असल प्लान क्या है?

सरकार द्वारा रखे गए कानून का मूल ढांचा यह है कि किसी व्यक्ति को बल, दबाव, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराने पर कार्रवाई की जा सके।

विधेयक में डिजिटल माध्यम, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक संचार से जुड़े कथित अवैध धर्म परिवर्तन को भी दायरे में लाने की बात सामने आई थी। “प्रलोभन” की अवधारणा में आर्थिक लाभ, उपहार, रोजगार, मुफ्त शिक्षा या चिकित्सा सुविधा तथा बेहतर जीवन का वादा जैसी चीजों को शामिल किए जाने की रिपोर्ट है। “Coercion” में मानसिक दबाव, शारीरिक बल, धमकी और सामाजिक बहिष्कार जैसे तत्व भी बताए गए हैं।

यानी आने वाले समय में केवल किसी धार्मिक कार्यक्रम को देखकर नहीं, बल्कि शिकायत, बयान, डिजिटल बातचीत, विवाह और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े तथ्यों के आधार पर भी जांच की स्थिति पैदा हो सकती है।

इसीलिए मुस्लिम समाज को इस कानून को केवल “धर्मांतरण विरोधी कानून” समझकर छोड़ना नहीं चाहिए।

इसे पढ़ना, समझना और इसके व्यावहारिक प्रभाव को समझना जरूरी है।

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धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति के लिए क्या प्रक्रिया है?

कानून के अनुसार धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन/घोषणा देने की प्रक्रिया का सामना करना होगा। रिपोर्टों के अनुसार जिला स्तर के सक्षम अधिकारी के समक्ष औपचारिक आवेदन की व्यवस्था की गई है।

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि आवेदन के बाद जांच तथा सार्वजनिक आपत्ति/दावा की प्रक्रिया हो सकती है।

यहीं से एक महत्वपूर्ण चिंता पैदा होती है—

क्या किसी बालिग व्यक्ति की निजी धार्मिक पसंद भी सार्वजनिक जांच और सामाजिक दबाव के दायरे में आ जाएगी?

यदि कोई व्यक्ति बिना किसी दबाव के अपनी अंतरात्मा और व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसकी निजता, स्वतंत्र इच्छा और सुरक्षा की गारंटी कैसे सुनिश्चित होगी?

यह प्रश्न केवल मुस्लिम समाज का नहीं, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा प्रश्न है।

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सबसे बड़ी चिंता : कानून का दुरुपयोग

किसी भी कानून की सफलता केवल उसकी कठोर सजा से नहीं, बल्कि उसके निष्पक्ष और समान इस्तेमाल से होती है।

मुस्लिम समाज की चिंता यह होनी चाहिए कि—

कहीं “प्रलोभन” की परिभाषा इतनी व्यापक न हो जाए कि सामान्य सामाजिक सेवा भी संदेह के घेरे में आ जाए।

उदाहरण के लिए—

गरीब की मदद करना,
बीमार व्यक्ति का इलाज कराना,
बच्चे की पढ़ाई में सहायता करना,
किसी जरूरतमंद को आर्थिक मदद देना,
किसी को नौकरी के लिए सहायता देना—

यदि इन गतिविधियों को किसी व्यक्ति के धार्मिक निर्णय से जोड़कर देखा जाए तो झूठी शिकायत या गलत व्याख्या की संभावना पैदा हो सकती है।

इसलिए हमारा सवाल है—

सेवा और प्रलोभन में अंतर कौन तय करेगा?

स्वतंत्र इच्छा और दबाव में अंतर कौन तय करेगा?

धार्मिक प्रचार और अवैध धर्मांतरण में अंतर कौन तय करेगा?

सहमति और कथित प्रभाव में अंतर कैसे तय होगा?

इन प्रश्नों पर स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया आवश्यक है।

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सज़ा कितनी कठोर है?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सामान्य अवैध धर्म परिवर्तन के मामले में:

7 से 10 वर्ष तक की जेल

और

कम से कम ₹5 लाख जुर्माना

का प्रावधान बताया गया है।

यदि कथित पीड़ित महिला, नाबालिग, SC, ST या OBC वर्ग से संबंधित हो तो:

10 से 20 वर्ष तक की सजा

और

कम से कम ₹10 लाख जुर्माना

का प्रावधान रिपोर्ट किया गया है।

वहीं सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में:

10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक

और

कम से कम ₹25 लाख जुर्माना

का प्रावधान बताया गया है।

इन अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।

इसका मतलब है कि मामला दर्ज होने के बाद स्थिति गंभीर हो सकती है और संबंधित व्यक्ति को शुरुआत से ही योग्य कानूनी सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

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मुस्लिम समाज को नुकसान कहाँ हो सकता है?

हम किसी कानून के बारे में बिना प्रमाण यह नहीं कह रहे कि उसका निश्चित रूप से दुरुपयोग होगा।

लेकिन जहाँ कानून में कठोर दंड, पुलिस जांच और व्यापक परिभाषाएँ हों, वहाँ दुरुपयोग की संभावना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होती है।

मुस्लिम समाज के लिए संभावित जोखिम ये हो सकते हैं—

1. अंतरधार्मिक विवाह पर शिकायत का खतरा

यदि दो बालिग अपनी इच्छा से विवाह करते हैं और बाद में किसी पक्ष द्वारा धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया जाता है, तो मामला कानूनी जांच में जा सकता है।

2. धार्मिक शिक्षा और मार्गदर्शन पर गलत आरोप

किसी व्यक्ति को इस्लाम के बारे में जानकारी देना और किसी को दबाव/धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर करना दो अलग बातें हैं।

इन दोनों को एक नहीं बनाया जाना चाहिए।

3. सोशल मीडिया का दुरुपयोग

WhatsApp चैट, Facebook पोस्ट, Instagram संदेश, वीडियो या अन्य डिजिटल सामग्री को शिकायत के आधार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावना को देखते हुए धार्मिक संस्थाओं और युवाओं को डिजिटल सावधानी बरतनी होगी।

4. गरीबों की मदद को गलत तरीके से पेश किए जाने का खतरा

मुस्लिम संस्थाएँ शिक्षा, चिकित्सा, राशन, छात्रवृत्ति और राहत कार्य करती हैं।

ऐसे कार्यों का रिकॉर्ड पारदर्शी रखना जरूरी है ताकि किसी सहायता को बाद में गलत तरीके से “प्रलोभन” के रूप में प्रस्तुत न किया जा सके।

5. मस्जिद-मदरसा कमेटियों पर जिम्मेदारी बढ़ेगी

धार्मिक संस्थाओं को अपने कार्यक्रमों, सेवा गतिविधियों और प्रशासनिक रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने होंगे।

6. झूठी शिकायत की स्थिति में गिरफ्तारी और मुकदमे का खतरा

क्योंकि अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाए जाने की रिपोर्ट है, इसलिए केवल “देख लेंगे” वाली मानसिकता से काम नहीं चलेगा।

7. सामाजिक दबाव का खतरा

किसी बालिग व्यक्ति की निजी धार्मिक पसंद को लेकर परिवार, समाज या बाहरी समूह दबाव बनाएँ तो मामला और गंभीर हो सकता है।

इसलिए व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा और उसकी सुरक्षा दोनों की रक्षा जरूरी है।

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उलेमा-ए-किराम के लिए विशेष संदेश

उलेमा-ए-किराम से रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन की अपील है कि इस विषय को केवल राजनीतिक भाषण न बनाया जाए।

हर मस्जिद में लोगों को समझाया जाए:

कानून पढ़ो।
कानून समझो।
अपने अधिकार जानो।
अफवाह से बचो।
किसी मामले में भीड़ न बनो।

इमाम और उलेमा को विशेष रूप से निकाह, धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले अधिवक्ताओं से समन्वय करना चाहिए।

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मसाजिद और जमात कमेटियों के लिए जरूरी कदम

हर जिला/शहर स्तर पर:

“Legal & Constitutional Awareness Committee”

बनाई जाए।

इसमें:

अधिवक्ता

सामाजिक कार्यकर्ता

उलेमा

महिला प्रतिनिधि

युवा प्रतिनिधि

दस्तावेज एवं प्रशासनिक कार्य जानने वाले लोग

शामिल किए जाएँ।

हर कमेटी के पास कम से कम एक योग्य अधिवक्ता का संपर्क होना चाहिए।

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मदरसा प्रबंधन के लिए संदेश

मदरसे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ अपने प्रशासनिक रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखें।

छात्रों की:

Admission Records
Guardian Details
Consent/Permission Records
Scholarship Records
Fee Records
Hostel Records

आदि दस्तावेज व्यवस्थित रखें।

किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।

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मुस्लिम सामाजिक संस्थाओं के लिए संदेश

जो संस्थाएँ:

शिक्षा, छात्रवृत्ति, चिकित्सा, राशन, राहत, रोजगार सहायता या गरीब परिवारों की मदद

करती हैं, वे अपनी सेवा गतिविधियों का पारदर्शी रिकॉर्ड रखें।

मदद करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि सहायता मानवीय/सामाजिक सेवा है और किसी धार्मिक परिवर्तन से उसका कोई अनिवार्य संबंध नहीं है।

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मुस्लिम युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश

युवाओं से अपील है—

किसी भी लड़की या लड़के के निजी मामले को लेकर WhatsApp पर पोस्ट न बनाएं।

किसी की निजी चैट वायरल न करें।

किसी पर “धर्मांतरण”, “गैंग”, “लव जिहाद” जैसे आरोप बिना प्रमाण न लगाएँ।

किसी के घर पर भीड़ न ले जाएँ।

किसी को धमकी न दें।

और सबसे महत्वपूर्ण—

कानून को हाथ में न लें।

अगर अपराध हुआ है तो FIR, शिकायत, अधिवक्ता और न्यायालय का रास्ता अपनाएँ।

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सरकार से रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन के सवाल

हम सरकार से स्पष्ट जवाब चाहते हैं—

क्या बालिग व्यक्ति की स्वतंत्र धार्मिक पसंद पूरी तरह सुरक्षित रहेगी?

क्या धार्मिक प्रचार और अवैध धर्मांतरण के बीच स्पष्ट कानूनी सीमा होगी?

क्या सामाजिक सेवा को “प्रलोभन” मानने से रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होंगे?

क्या झूठी शिकायतों से निर्दोष लोगों की रक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था होगी?

क्या पुलिस और प्रशासन को समान एवं निष्पक्ष जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा?

क्या इस कानून का इस्तेमाल किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाएगा?

क्या शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा होगी?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब जनता को मिलना चाहिए।

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हमारा विरोध स्पष्ट है

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने के सिद्धांत का विरोध नहीं करता।

लेकिन हम किसी भी ऐसे कानून, नियम या उसके क्रियान्वयन का विरोध करेंगे जो:

धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करे,

बालिग व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा पर अनुचित हस्तक्षेप करे,

सामाजिक सेवा को संदेह के घेरे में लाए,

झूठी शिकायतों को बढ़ावा दे,

किसी धर्म या समुदाय को सामूहिक रूप से संदेह की नजर से देखे,

या पुलिस/प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग का रास्ता खोले।

हमारा विरोध कानूनी, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होगा।

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मुस्लिम समाज अब क्या करे?

अब केवल भाषण देने का समय नहीं है।

हर जिले में कानून पढ़ा जाए।

हर जमात में कानूनी समिति बने।

हर मस्जिद में जागरूकता कार्यक्रम हो।

हर मदरसे में संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी जाए।

हर सामाजिक संस्था अपना रिकॉर्ड व्यवस्थित करे।

हर परिवार अपने बच्चों को कानून और संविधान की बुनियादी जानकारी दे।

हर युवा सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करे।

हर विवाद में पहले अधिवक्ता से सलाह ली जाए।

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अंतिम संदेश

मुस्लिम समाज को डरने की नहीं, जागने की जरूरत है।

हमें किसी से टकराना नहीं है।

हमें किसी के खिलाफ नफरत नहीं फैलानी है।

हमें कानून तोड़ना नहीं है।

लेकिन हमें अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी के बिना भी नहीं रहना है।

हमारा रास्ता साफ है—

कानून पढ़ेंगे।
संविधान समझेंगे।
अपने अधिकार जानेंगे।
अपने दस्तावेज सुरक्षित रखेंगे।
झूठी अफवाहों से बचेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों से जुड़ेंगे।
और जहाँ अधिकारों का उल्लंघन होगा, वहाँ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज़ उठाएँगे।

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन का संदेश

“जबरन धर्मांतरण का विरोध—हाँ।
धार्मिक स्वतंत्रता पर अनुचित पहरा—नहीं।
कानून का सम्मान—हाँ।
कानून का दुरुपयोग—नहीं।
नफरत और भीड़ की राजनीति—नहीं।
संविधान और इंसाफ़ के लिए संघर्ष—हाँ।”

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन

इत्तेहाद • इंसाफ़ • ख़िदमत

मुस्लिम समाज—जागरूक बनो, संगठित रहो और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करो।

शादाब आलम रज़वी
सामाजिक कार्यकर्ता
रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन
📱9171345434
कार्यालय:
रज़ा मस्जिद, आलम बाग रोड,
नवागढ़, अम्बिकापुर, ज़िला सरगुजा, छत्तीसगढ़ – 497001

01/08/2026

आप किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व क्यों नहीं करते?

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर एवं संरक्षक आली जनाब मोहम्मद वसीम साहब ने संगठन के ज़िला कोरबा अध्यक्ष आली जनाब सैय्य...
30/07/2026

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर एवं संरक्षक आली जनाब मोहम्मद वसीम साहब ने संगठन के ज़िला कोरबा अध्यक्ष आली जनाब सैय्यद माशूक अली साहब एवं ज़िला इकाई के अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों से सौहार्दपूर्ण एवं संगठनात्मक मुलाकात की।

इस अवसर पर संगठन को मज़बूत एवं सक्रिय बनाने, सदस्यता अभियान को गति देने, सामाजिक सेवा, शिक्षा, विधिक जागरूकता तथा जनहित के कार्यक्रमों को ज़िला स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित करने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही आगामी संगठनात्मक गतिविधियों एवं भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

28/07/2026

UCC बिल का विरोध अब्दुल्लाह फारुकी प्रभारी रज़ा यूनिटी फाउंडेशन खंडवा मध्यप्रदेश Abdullah Farooqui

दिनाँक 27/07/2026/ को रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन, ज़िला इकाई रायपुर की मासिक बैठक रायपुर में सफलतापूर्वक आयोजित हुई। बैठक में...
27/07/2026

दिनाँक 27/07/2026/ को रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन, ज़िला इकाई रायपुर की मासिक बैठक रायपुर में सफलतापूर्वक आयोजित हुई। बैठक में संगठन के विस्तार एवं आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया तथा आपसी सलाह-मशविरा से निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए—

1. जश्ने ईद मिलादुन्नबी 2026 के अवसर पर "रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन चैंबर ऑफ कॉमर्स" का राज्य स्तर पर शुभारंभ करने का निर्णय लिया गया।

2. ईद मिलादुन्नबी के जुलूस-ए-मोहम्मदी के इस्तकबाल तथा रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन चैंबर ऑफ कॉमर्स के पंजीयन अभियान हेतु विशेष मंच स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

3. देश में वर्तमान महत्वपूर्ण एवं जनहित के मुद्दों पर नियमित मंथन कर, आवश्यकतानुसार रणनीति बनाकर संबंधित प्रशासनिक एवं संवैधानिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया।

4. सभी जिम्मेदार साथियों की सर्वसम्मति एवं सलाह-मशविरा से जनाब अफ़ज़ल रज़ा साहब को रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन, रायपुर शहर अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए उन्हें हार्दिक मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ।

दुआ है कि अल्लाह तआला संगठन को दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की अता फरमाए और हम सभी को समाज एवं मुल्क की बेहतर ख़िदमत की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

रज़ा यूनिटी फ़ाउंडेशन
ज़िला इकाई – रायपुर

27/07/2026

भिलाई, दुर्ग। भिलाई-3 के स्टोर पारा निवासी आसिफ (पिता: अज्जूदीन) पर हुए कथित जानलेवा हमले का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार के अनुसार, घटना 17 जुलाई 2026 को हुई, और रात्रि लगभग 1:00 बजे आसिफ गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। इसके बाद परिजनों ने तत्काल उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। वर्तमान में उसका इलाज स्पर्श मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, राम नगर, भिलाई में जारी है।

26/07/2026

अल्हम्दुलिल्लाह 🤲
आदिल सिद्दीकी, निवासी दर्रीघाट, जो गुमशुदा था, अल्लाह के करम से सकुशल मिल गया है।

24/07/2026

Address

Ambikapur
497001

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