Ambaji golden temple shaktipith,gujrat

Ambaji golden temple shaktipith,gujrat achary Sri Dr swetang shastri

11/07/2023

*** भौमाश्विनी महा योग *** 11/7/2023

** ब्रह्मविद्या, अविद्यानाशिनी श्री देवी अथर्वशीष पाठ प्रयोग**
11-7-2023

**उपरोक्त विषय अनुसंधान मे आषाढ़ कृष्ण नवमी मंगलवार ,11-7-23 को भोमाश्विनी अमृतसिद्धि योग शाम 7.05 तक शुभ योग निर्माण हो रहा है। काम्य प्रयोग , सिद्धि प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ दिन हो रहा है।
मां आद्यशक्ति अंबा की उपासना, श्रद्धा,भक्ति, इस्ट मनोकामना पूर्ति के लिए श्री देवी अथर्वशीर्ष का पाठ करे या विद्वान् शास्त्री जी के पास कराए।
(इस देवी अथर्वशीर्ष का जो कोई पाठ करता हे उसे पांचों अथर्वशीर्ष के पाठ का फल प्राप्त होता है ।108 बार देवी अथर्वशीर्ष पाठ करना पुरस्चरण विधि मानी जाएगी।जो इसका 10 बार पाठ कराता है वह पापों से छुटकारा मिलता है। इस का पाठ करने से दुस्तर संकटों को पार करता है। यह पाठ सायंकाल में करने से दिन में किए हुए पापो को नाश करता है । प्रातः काल में पाठ करने से रात्रि में किए हुए पापो को नाश करता है ।
दोनो समय पाठ करने से पाठ करनेवाला निष्पापि होता है।
मध्यरात्रि (तुरीय संध्या) में अनुष्ठान करने से वाकसिद्धि प्राप्त होती है । भोमाश्विनि (अमृतसिद्धी) योग में महादेवी की सन्निधि में अनुष्ठान करने से महामृत्युसे तर जाता है। इसीको अविद्यानाशिनी ब्रह्मविद्या कहते हैं ,,,( दुर्गा शप्तशती) -)

१) 1 पाठ , -- देवी प्रीति प्राप्ति ।
२) 11 पाठ - ईष्ट मनोकामना पूर्ति ।
३) 108 पाठ -- आरोग्य वर्धक ।
४) 501पाठ - लक्ष्मी प्राप्ति ।
५) 1100 पाठ - ज्ञान प्राप्ति ।
६) 2100 पाठ - वंश वृद्धि प्राप्ति ।
७) 3100 पाठ - निष्पाप निवृति ।
८) 5100 पाठ - पुण्य प्राप्ति ।
९) 11000 पाठ - सर्व कल्याण प्राप्ति
१०) 100000 पाठ - राष्ट्र कल्याण , दरिद्रता निवारण हेतु ।

** इस प्रकार से विविध प्रकार से अनुष्ठान कर सकते है या कोई विद्वान शास्त्री के माध्यम से भी कर सकते है। जय अम्बे।

***** आचार्य श्री डॉ श्वेतांग शास्त्री(पी.एच.डी)
श्री अंबाजी ज्योतिष कार्यालय
यज्ञ विशेषज्ञ,धर्मशास्त्र(काशी),ज्योतिषाचार्य(h.n.g.u, पाटन & कृष्णमूर्ति इंस्टिट्यूट ऑफ कोलकाता,वेस्ट बंगाल),साहित्याचार्य,वास्तु, पे निर्देशक, (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टुरिजम एण्ड ट्रावेल मैनेजमेंट, गवर्मेंट ऑफ़ इंडिया) (श्री आ.अं.मा.दे.ट्र)&(गवर्मेंट ऑफ गुजरात)
ऑफिस :-48, शिव आर्केड, हिम्मतनगर रोड ,अंबाजी,गुजरात
ह्रदय शक्तिपीठ, सुवर्ण मंदिर
मो:-- 9824549398

achary Sri Dr swetang shastri

17/06/2023

🔯*** ह्रदय शक्तिपीठ,सुवर्ण मंदिर अंबाजी,गुजरात ***🔯
🔯**अषाढ़ी गुप्त नवरात्री मंगल प्रारंभ,19/6/23 से 27/6/ 23 आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा,सोमवार से आषाढ़ शुक्ल नवमी ,मंगलवार तक रहेगी ।

🔯** शुभ मनोकामना प्राप्ति हेतु मां अंबाजी के नवरात्री में विशिष्ठ अनुष्ठान प्रयोग की जानकारी **

🔯**मां के सभी भक्तों को अंबाजी शक्तिपीठ यज्ञशाला से आचार्य श्री एवम शास्त्री गण की और से जय अम्बे एवं गुप्त नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं ।

🔯**उपरोक्त विषय के अनुसंधान में आप सभी को नवरात्री पहले आप को मां के विशिष्ठ अनुष्ठान प्रयोग के बारे में हम आपको जानकारी उपलब्ध कराते हैं। किसी भक्त,देवी उपासक की अनुकूलता हो तो वह स्वयं भी कर सकते है या फिर शक्तिपीठ में वैदिक ज्ञाता से भी करवा सकते है ।

🔯*"मां की अनन्य भक्ति भाव प्राप्ति,शुभ लक्ष्मी प्राप्ति ,विजय प्राप्ति, यश,कीर्ति, सम्मान, शक्ति संचार , विद्या प्राप्ति जैसी बहुत सारी मनोकामनाएं पूर्णता प्राप्ति हेतु अनुष्ठान करे या वैदिक ज्ञाता के पास करवाए ।

🔯* नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व *🔯

🔯🚩** दुर्गा शप्तशती (चंडीपाठ) मां अंबा का वांग्मय स्वरूप है।**🚩🔯

🔯🚩**नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती के पाठ से कई गुणा फल अधिक मिलता है।**🚩🔯

🔯1-पारिवारिक संकट आने पर दुर्गा सप्तशती का तेरह बार पाठ करायें या करें।

🔯2-यदि घर में कोई तकलीफ पा रहा हो तो बारह दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

🔯3-यदि परिवार में कोई भय पैदा करने वाला संकट आया है तो बारह पाठ करें।

🔯4-परिवार की सुख समृद्धि के लिये नौ बार पाठ करें।

🔯5-लक्ष्मी प्राप्ति हेतु ग्यारह बारह पाठ करें।

🔯6-मनचाही वस्तु पाने के लिये बारह बार पाठ करें।

🔯7-घर में सुख शांति व श्री वृद्धि के लिये पन्द्रह बार पाठ करें।

🔯8-पुत्र-पौत्र, धन-धान्य व प्रतिष्ठा के लिये सोलह बार पाठ करें।

🔯9-यदि परिवार में किसी पर राजदंड, शुत्र का संकट या मुकदमें में फंस गये हो तो अठारह बार पाठ करें।
जेल से छुटकारा पाने के (अगर निदोष हैं) लिये पच्चीस बार पाठ करे।

🔯10-शरीर में कोई घाव-फोड़ा आदि हो गया हो या आपरेशन कराने की नौबत आ गयी हो तो तीस बार पाठ करे ।

🔯11-भयंकर संकट, असाध्य रोग, वंशनाश या धन नाश की नौबत आये तो सौ बार सत्पशती का पाठ करे। सौ बार पाठ को ही शतचण्डी पाठ कहते हैं।

🔯12-एक हजार पाठ सर्व मंगल मनोकामनाएं,भोग ,स्वर्ग प्राप्ति हेतु करे । इसे ही सहस्त्रचण्डी पूजा कहते हैं।

🔯**🚩अंबाजी मुख्य मंदिर पर ध्वज आरोहण करे *🚩🚩
🔯१) शतचंडी पाठ अनुष्ठान ।
🔯२) नवचंडी पाठ अनुष्ठान।
🔯३) ब्रह्म कवच पाठ अनुष्ठान।
🔯४) श्री सिद्ध कुंजिका पाठ अनुष्ठान।
🔯५) श्री दुर्गा द्वात्रिंशत पाठ अनुष्ठान।
🔯६) श्री नवार्ण मंत्र अनुष्ठान ।
🔯७) श्री अपराजिता मंत्र अनुष्ठान ।
🔯८) श्री महा प्रत्यंगिरा अनुष्ठान ।
🔯९) श्री यंत्र राज अनुष्ठान।
🔯१०) श्री कमला प्रयोग अनुष्ठान ।
🔯११) श्री चंडी पाठ अनुष्ठान।
🔯१२) श्री सहस्र चंडी पाठ अनुष्ठान।
🔯१३) श्री महा काली बीज मंत्र अनुष्ठान ।
🔯१४) श्री महा लक्ष्मी बीज मंत्र अनुष्ठान।
🔯१५) श्री महा सरस्वती बीज मंत्र अनुष्ठान।
🔯१६) श्री नक्षत्र बलिदान
इस विविध प्रकार से मां की कृपा प्राप्त हेतु अनुष्ठान कर सकते हैं या करवा सकते हैं।

🚩******* 🙏 जय अम्बे🙏 ***********🚩

** ** आचार्य श्री डॉ श्वेतांग शास्त्री
श्री अंबाजी ज्योतिष कार्यालय
यज्ञ विशेषज्ञ,धर्मशास्त्र,ज्योतिषाचार्य,साहित्याचार्य,वास्तु, पे निर्देशक, (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टुरिजम एण्ड ट्रावेल मैनेजमेंट, गवर्मेंट ऑफ़ इंडिया) ,(श्री आ.अं.मा.दे.ट्र)&(गवर्मेंट ऑफ गुजरात)
ऑफिस :-48, शिव आर्केड, हिम्मतनगर रोड ,अंबाजी,गुजरात
ह्रदय शक्तिपीठ, सुवर्ण मंदिर
मो:-- 9824549398

achary Sri Dr swetang shastri

चैत्र नवरात्रिप्रारंभ:-- 2-4-2022,शनिवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 10-4-2022,रविवार चैत्र शुक्ल नवमी तक रहेगी ।नवरात्र वह ...
24/03/2022

चैत्र नवरात्रि
प्रारंभ:-- 2-4-2022,शनिवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 10-4-2022,रविवार चैत्र शुक्ल नवमी तक रहेगी ।

नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं - चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है।
यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है। चैत्र नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है।
(पहला दिन)
प्रतिपदा - इस दिन पर "घटत्पन", "चंद्र दर्शन" और "शैलपुत्री पूजा" की जाती है।
(दूसरा दिन)
दिन पर "सिंधारा दौज" और "माता ब्रह्राचारिणी पूजा" की जाती है।
(तीसरा दिन)
यह दिन "गौरी तेज" या "सौजन्य तीज" के रूप में मनाया जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "चन्द्रघंटा की पूजा" है।
(चौथा दिन)
"वरद विनायक चौथ" के रूप में भी जाना जाता है, इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "कूष्मांडा की पूजा" है।
(पांचवा दिन)
इस दिन को "लक्ष्मी पंचमी" कहा जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "नाग पूजा" और "स्कंदमाता की पूजा" जाती है।
(छटा दिन)
इसे "यमुना छत" या "स्कंद सस्थी" के रूप में जाना जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "कात्यायनी की पूजा" है।
(सातवां दिन)
सप्तमी को "महा सप्तमी" के रूप में मनाया जाता है और देवी का आशीर्वाद मांगने के लिए “कालरात्रि की पूजा” की जाती है।
(आठवां दिन)
अष्टमी को "दुर्गा अष्टमी" के रूप में भी मनाया जाता है और इसे "अन्नपूर्णा अष्टमी" भी कहा जाता है। इस दिन "महागौरी की पूजा" और "संधि पूजा" की जाती है।
(नौंवा दिन)
"नवमी" नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन "राम नवमी" के रूप में मनाया जाता है और इस दिन "सिद्धिंदात्री की पूजा महाशय" की जाती है।
चैत्र नवरात्रि के दौरान अनुष्ठान -
बहुत भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं। भक्त अपना दिन देवी की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है। अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में से प्रत्येक के पूजा अनुष्ठान नीचे दिए गए हैं।
पूजा विधि -
घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, जो ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसे पवित्र स्थान पर रखा जाता है, घर की शुद्धि और खुशाली के लिए।
**अखण्ड ज्योति :
नवरात्रि ज्योति घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलतें हैं। यह आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है। **नव दिवस भोग (9 दिन के लिए प्रसाद) :
प्रत्येक दिन एक देवी का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रत्येक देवी को कुछ भेंट करने के साथ भोग चढ़ाया जाता है। सभी नौ दिन देवी के लिए 9 प्रकार भोग निम्न अनुसार हैं:
• 1 दिन: केले
• 2 दिन: देसी घी (गाय के दूध से बने)
• 3 दिन: नमकीन मक्खन
• 4 दिन: मिश्री
• 5 दिन: खीर या दूध
• 6 दिन: माल पोआ
• 7 दिन: शहद
• 8 दिन: गुड़ या नारियल
• 9 दिन: धान का हलवा
• ** दुर्गा सप्तशती :
दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को करना, सबसे अधिक शुभ कार्य माना जाता है।
**. नौ दिनों के लिए नौ रंग :
शुभकामना के लिए और प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ अलग-अलग रंग पहनते हैं:
• 1 दिन: हरा
• 2 दिन: नीला
• 3 दिन: लाल
• 4 दिन: नारंगी
• 5 दिन: पीला
• 6 दिन: नीला
• 7 दिन: बैंगनी रंग
• 8 दिन: गुलाबी
• 9 दिन: सुनहरा रंग
** कन्या पूजन :
कन्या पूजन माँ दुर्गा की प्रतिनिधियों (कन्या) की प्रशंसा करके, उन्हें विदा करने की विधि है। उन्हें फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करने की प्रथा है।
अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम :
बहुत सारे भक्त निचे दिए गए अनुष्ठानों का पालन करते हैं:
1. प्रार्थना और उपवास चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक है। त्योहार के आरंभ होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करते हैं।
2. सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। भूमि शयन करते हैं। सात्त्विक आहार करते हैं।
3. उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाते हैं।
4. नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने व्यवहार की निगरानी भी करते हैं, जैसे की
• अस्वास्थ्यकर खाना (Junk Food) नहीं खाते।
• सत्संग करते हैं।
• ज्ञान सूत्र से जुड़ते हैं।
• ध्यान करते हैं।
• चमड़े का प्रयोग नहीं करते हैं।
• क्रोध से बचे रहते हैं।
• कम से कम 2 घंटे का मौन रहते हैं।
• अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना का विधान है तथा विसर्जन करते हैं।
चैत्र नवरात्री का महत्व :
यह माना जाता है कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।
*** चैत्री नवरात्रि महोत्सव में शक्तिपीठ में अनुष्ठान ,जप यज्ञ,अर्चन पूजन,नवचंडी यज्ञ,शतचंडी महायज्ञ,दुर्गा पाठ,कराने के लिए संपर्क कराके बुक करवा सकते है ।संपूर्ण कार्य यज्ञशाला में संपन्न होगा ***

** आचार्य श्री डॉ श्वेतांग शास्त्री
श्री अंबाजी ज्योतिष कार्यालय
48, शिव आर्केड, हिम्मतनगर रोड ,अंबाजी
ता:- दांता ,जिला :- बनासकांठा, पीन 385110
शक्तिपीठ, स्वर्ण मंदिर,अंबाजी ,गुजरात
9824549398

*पौष नवरात्रि  शाकम्भरी नवरात्री विशेष*            *ॐ ह्रीं नमः*♦  पौष शुक्ल पक्ष अष्टमी (21-1-2021) से गुप्त नवरात्र शु...
20/01/2021

*पौष नवरात्रि शाकम्भरी नवरात्री विशेष*

*ॐ ह्रीं नमः*
♦ पौष शुक्ल पक्ष अष्टमी (21-1-2021) से गुप्त नवरात्र शुरू हो रहे है और पौष शुक्ल पूर्णिमा (28-1-2021) को शाकम्भरी नवरात्र पूर्ण होंगे
इस नवरात्री का साधना की दृष्टि से देखा जाए तो यह सर्वकार्य सिद्धि, व्यापार सिद्धि, वशीकरण, शत्रु विवाद, मुक़दमे से बचाव, आकर्षण, किया कराया, वैवाहिक सुख शांति आदि सभी कार्यों के लिए बहुत महत्व है ।
♦ इन दिनों में माँ भगवती के विभिन्न स्वरुपों का ध्यान, मन्त्रों के जाप कर साधना करने से सभी प्रकार के शुभ एवं उत्तम फलों की प्राप्ति होती है ।
साधक प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में शुद्ध होकर घट स्थापना और शुद्ध घी का दीप प्रज्वलित करके शुद्ध श्वेत या रक्त (सफेद या लाल) उन के आसन पर बैठकर विधिविधान से गुरु स्मरण पूजा, गणेश पूजा करके माँ के दिव्य स्वरुप का ध्यान करके गुरुमुख से प्राप्त हुऐ मन्त्र का जाप दस दिनों तक करना चाहिए।
♦ इन दस दिनों में दुर्गाशप्तशति (चंडीपाठ) का विधान बहुत ही उत्तमोत्तम फल प्रदान करता है, इसके अलावा साधक को नवार्ण मंत्र *(ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ॥ Aum Aim Hreem Kleem Chaamundayai Vichchhe.)* की नियमित कम से कम इक्कीस माला रोज सुबह और इक्कीस माला शाम को करनी चाहिए। दोनों समय न हो सके तो रात को अवश्य करें।
साथ ही दुर्गा सप्तश्लोकी एवं सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् के पाठ भी अपनी मनोकामना अनुसार संकल्प करके जैसे, *(वशीकरण, शत्रु बाधा, मुकदमें में विजय, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, विद्या अभ्यास, धन, व्यापार, किया कराया, भाग्य वृद्धि, आदि के लिए)* नौ पाठ सुबह नौ पाठ रात्रि को करें , कुंजिका स्तोत्रम् के यह मंत्र :-,

*"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ॐ गलौं हूँ क्लीं जूं सः ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे ज्वल हं सं ळं क्षं फट् स्वाहा ॥*

इस मन्त्र से रात्री में गुग्गल, सफेद तिल, धृताक्त केसर मिश्रित पायस (जैसे पानी में चावल पकाए जाते हैं उसी तरह पानी के बदले दूध में चावल पकाए उसमें एक चम्मच शुद्ध घी, एक चम्मच शक्कर (चीनी) और शुद्ध केसर मिश्रित करें), किशमिश, काजू, बादाम, पिस्ता, खुली हुइ अखरोट, कमलगट्टा यह सभी कुछ मिलाकर द्रव्य बना लें और बाद में इस हविर्द्वव्य से अग्नि में सहस्र या अष्टोत्तर शत (१००८ या १०८) आहुति दे, और कुंजिका स्तोत्रम् के,

*"नमस्ते रुद्ररूपिणीयै"* से लेकर *"मंत्र सिद्धिं कुरुष्व मे"*

तक के हर एक मंत्र की एक - एक आहुति केवल आज्य (घी) से दे, माँ भगवती आपकी हर एक मनोकामना अवश्य परिपूर्ण करेंगीं। आगे आपको कौन सी इच्छा पूरी करने के लिए कौन से मंत्र का जप करना चाहिए ये भी बताऊंगा।

*जगद्जननी माँ भगवती आप सभी सर्व मनोकामना पूर्ण करें यही भावना के साथ आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।*
आचार्य श्री डॉ श्वेतांग शास्त्री
यज्ञशाला ,शक्तिपीठ , अम्बाजी (गुजरात)
9824549398

*। शुभम भवतु ।*

🕉️      શ્રી ગણેશામ્બિકાભ્યાનમઃ   ✡️                આચાર્ય શ્રી શ્વેતાંગ શાસ્ત્રી (પી એચ ડી) જ્યોતિષાચાર્ય , શક્તિપીઠ અં...
06/11/2020

🕉️ શ્રી ગણેશામ્બિકાભ્યાનમઃ ✡️

આચાર્ય શ્રી શ્વેતાંગ શાસ્ત્રી (પી એચ ડી) જ્યોતિષાચાર્ય , શક્તિપીઠ અંબાજી, ગુજરાત ,9824549398
🕉️ દિપાવલી ના મુહૂર્તો 🔯
સંવત ૨૦૭૬-૭૭ સને ૨૦૨૦
🔯 (ચોપડા લાવવા ના મુહૂર્ત )🔯
આસો વદ -૬ શનિવાર તા ૦૭/૧૧/૨૦૨૦ (પુષ્ય નક્ષત્ર )
સમય સવાર :૦૮/૧૮ થી ૦૯/૪૧ (શુભ )
બપોરે :૧૨/૦૫ થી ૧૨/૪૯ (અભિજીત મુહૂર્ત )
બપોરે :૧૨/૨૭ થી ૦૪/૩૬ (ચલ, લાભ, અમૃત )
સાંજે :૦૫/૫૯ થી ૦૭/૩૬ (લાભ )
રાત્રે :૦૯/૧૩ થી ૧૦/૫૦ (શુભ )

આસો વદ -૭ રવિવાર તા ૦૮/૧૧/૨૦૨૦ (રવિપુષ્ય યોગ )નક્ષત્ર સવાર માં ૦૮/૪૪ સુધી છે
સમય સવાર :૦૮/૧૯ થી ૦૮/૪૪

🕉️ ધનતેરસ, ધનપૂજા, કુબેર પૂજા, ચોપડા લાવવા 🕉️
આસો વદ ૧૩ શુક્રવાર તા ૧૩/૧૧/૨૦
(સમય :સાંજે ૦૫/૫૮ સુધી છે ધનતેરસ )
સમય સવાર :૦૬/૫૯ થી ૧૧/૦૬ (ચલ, લાભ, અમૃત )
બપોર :૧૨/૦૬ થી ૧૨/૫૦ (અભિજીત મુહૂર્ત )
બપોર :૧૨/૨૮ થી ૦૧/૫૦ (શુભ )
:૦૪/૩૪ થી ૦૫/૫૬ (ચલ, પ્રદોષ વેલા)

🕉️ કાળી ચૌદશ, દશ મહાવિધા પૂજા, 🔯

🕉️ આસો વદ ૧૩/૧૪ શુક્રવાર તા ૧૩/૧૧/૨૦🔯
(કાળીચૌદશ નો પ્રારંભ સાંજે ૦૫/૫૯ મિનિટ થાય છે)
સમય રાત્રે :૦૯/૧૨ થી ૧૦/૫૦ (લાભ )
મોડી રાત્રે :૧૨/૨૮ થી ૦૫/૨૨ (શુભ, અમૃત, ચલ )
🕉️ આસો વદ ૧૪ શનિવાર તા ૧૪/૧૧/૨૦ 🔯
(સમય: બપોર ૦૨/૧૮ મિનિટ સુધી કાળી ચૌદશ છે )
સમય સવાર :૦૮/૨૨ થી ૦૯/૪૪ (શુભ )
બપોર:૧૨/૦૬ થી ૧૨/૫૦ (અભિજીત મુહૂર્ત )
બપોર :૧૨/૨૮ થી ૦૨/૧૭ (ચલ, લાભ )

🕉️ દિપાવલી -લક્ષ્મી પૂજન, શારદાપૂજન, ચોપડા પૂજન🔯
આસો વદ ૧૪/ 30 (અમાસ) શનિવાર તા ૧૪/૧૧/૨૦
(સ્વાતિ, વિશાખા યુક્ત )
( દિવાળી નો પ્રારંભ બપોરે ૦૨/૧૮ મિનિટ થી શરૂ થાય છે તેના પછી ચોપડા પૂજન, લક્ષ્મી પૂજન, શારદાપૂજન નો પ્રારંભ કરવો શ્રેષ્ઠ છે )
સમય બપોર :૦૨/૧૮ થી ૦૪/૩૪ (લાભ, અમૃત )
સાંજે :૦૫/૫૬ થી ૦૭/૩૪ (લાભ, શુક્ર, બુધ,ની હોરા
સાંજે :૦૫/૫૮ થી ૦૭/૫૫ (સ્થિર વૃષભ લગ્ન )
સાંજે :૦૫/૪૫ થી ૦૮/૨૪ (ગૌધુલીક પ્રદોષ વેલા રાત્રે :૦૯/૧૨ થી ૦૨/૦૬ (શુભ, અમૃત, ચલ, શુક્ર, બુધ ની હોરા )
મોડી રાત્રે :૧૨/૩૧ થી ૦૨/૪૩ (બળવાન સિંહ લગ્ન )
બ્રહ્મ મુહૂર્ત :૦૫/૨૨ થી ૦૭/૦૦ (લાભ )
🕉️ આસો વદ અમાસ રવિવાર તા ૧૫/૧૧/૨૦🔯
(સવાર સમય ૧૦/૩૬ સુધી )
સમય સવાર :૦૭/૫૫ થી ૧૦/૩૬ (શુક્ર, બુધ, ની હોરા ચલ, લાભ )
🕉️ નૂતન વર્ષ વિ. સં ૨૦૭૭ બેસતું વર્ષ 🔯(સવાર ૧૦/૩૭ થી પ્રારંભ )
કારતક સુદ ૧ રવિવાર તા ૧૫/૧૧/૨૦(દુકાન, પેઢી ખોલવા )
સમય સવાર :૧૦/૩૭ થી ૧૧/૫૫ (લાભ, અમૃત )
🕉️ લાભ પાંચમ 🔯
(સં, ૨૦૭૭ મા વેપાર, દુકાન, પેઢી, શરૂ કરવાના મુહૂર્ત )
કારતક સુદ- ૫ ગુરુવાર તા ૧૯/૧૧/૨૦
સમય સવાર :૦૭/૦૩ થી ૦૮/૨૫ (શુભ )
બપોર :૧૧/૦૭ થી ૦૩/૧૨ (ચલ, લાભ, અમૃત )

24/09/2019
23/09/2019

जय अम्बे...............
अरावली नी गिरिमाला मा बिराजमान राजराजेश्वरी ,हृदयशक्तिपीठ ,महाचंडीका अम्बा,साक्षात मातृशक्ति नी अनुभूति करावनार,तमाम सिद्धशक्ति नी परम शक्ति ,यंत्रमय स्थापित,समस्त ब्रह्मांड एवं समस्त भक्तो समस्त जीवों नु कल्याण तथा दरेक भक्तो नी शुभ मनोकामना पूर्ण करनार माँ अम्बा ना धाम अम्बाजी मा आप दरेक शक्ति उपासक भक्तो ने (यज्ञशाला ,हवन शाला,अम्बाजी) थी आचार्य श्री श्वेतांग भाई शास्त्री ना जय अम्बे ......
चचारचोक मा स्थित यज्ञ शाला (हवन शाला) मा भक्तो द्वारा इच्छानुसार शतचंडी यज्ञ,नवचंडी यज्ञ, लक्ष्मी यज्ञ, शांति यज्ञ, पूर्वे ना मानसिक संकल्प बाधा ना यज्ञ, राजीखुशी ना यज्ञ,चंडीपाठ,श्री सूक्त पाठ, प्रत्येक दैनिक चंडीपाठ,प्रत्येक मासिक यज्ञ, वार्षिक यज्ञ,ध्वज पूजन,नवार्ण मंत्र अनुष्ठान,मंत्र पुरश्चरण, वगैरे धार्मिक क्रिया जगदंबा नी कृपा प्राप्त करवा माटे आवे छे । जे कोई श्रद्धावान भक्तो ने ,आपना कोई स्नेही ,इस्ट मित्रो ,परिवार ,ने यज्ञ शाला (हवन शाला) मा उपरोक्त प्रमाणे यज्ञ, हवन ,पूजन,पाठ, अनुष्ठान वगेरे करवानी ईच्छा होय तो दरेक शक्ति उपासको भक्तो ने संतोष पूर्वक विद्वान शास्त्रीओ ना माध्यम थी आपनु धार्मिक मांगलिक कार्य करी आपवामा आवसे ।
यज्ञ शाला (हवन शाला ) मा मां अम्बा ना सानिध्य मा चचारचोक मा माताजी ना खोला मा बेसवानी अनुभूति जेवो लाहवो मेलववो भक्तो नी इच्छा तथा प्रयास रह्या छे । शुभ संकल्प,शुभ मनोकामना परिपूर्ण करवावाला आ यज्ञ (हवन )अनुष्ठान कराववानी इच्छा अनुसार आप आयोजन करी ने अचूक लाभ लई शको छो ।
***** वधु माहिती मेलववा शास्त्री जी श्वेतांग भाई जोशी नो संपर्क करवो । 9824549398
********* जय अम्बे ************
आचार्य श्री श्वेतांग भाई शास्त्री (p.h.d)
यज्ञविशारद,ज्योतिषाचार्य
9824549398
अम्बाजी( शक्तिपीठ,सुवर्ण मंदिर),गुजरात

16/09/2019

Address

Ambaji Tempal , Yagnshala
Ambajipeta
385110

Telephone

+919824549398

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ambaji golden temple shaktipith,gujrat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Ambaji golden temple shaktipith,gujrat:

Share

Category