श्री श्री 1008 श्री शिद्ध बाबा हीरा नाथ जी आश्रम अलवर

  • Home
  • India
  • Alwar
  • श्री श्री 1008 श्री शिद्ध बाबा हीरा नाथ जी आश्रम अलवर

श्री श्री 1008 श्री शिद्ध बाबा हीरा नाथ जी आश्रम अलवर गद्दीनसीन श्री महंत योगी Roop Nath जी कपलानी?

वैराग्य में कितना आनंद है ?इसे वही पुरुष जान सकता है, जिसके हृदय में प्रभु के  #पादपद्मों में प्रीति होने की इच्छा उत्पन...
28/01/2026

वैराग्य में कितना आनंद है ?

इसे वही पुरुष जान सकता है,
जिसके हृदय में प्रभु के #पादपद्मों में
प्रीति होने की इच्छा उत्पन्न हो गयी हो,

जिसे संसारी विषय-भोग काटने के लिये दौड़ते हों
, वही वैराग्य में महान सुख का अनुभव कर सकता है।
जिसकी इन्द्रियाँ सदा विषय-भोगों की ही इच्छा करती रहती हों, जिसका मन सदा संसारी पदार्थों का ही चिन्तन करता रहता हो,
वह भला वैराग्य के सुख को समझ ही क्या सकता है।

मन जब संसारी भोगों से विरक्त होकर
सदा महान त्याग के लिये तड़पता रहे,
जिसका वैराग्य पानी के बुद्बुदों के समान
क्षणिक न होकर स्थायी हो,

वही त्याग के असली सुख का अनुभव
करने का सर्वोत्तम अधिकारी है।
जो जोश में आकर क्षणिक वैराग्य के कारण
त्याग-पथ का अनुसरण करने लगते हैं,
उनका अन्त में पतन हो जाता है,

इसीलिये तो कहा है- ‘ #त्याग_वैराग्य_के_बिना_टिक_ही_नहीं_सकता।’
इसलिये जो वैराग्य-राग-रसिक नहीं बना
वह भगवत-राग-रस का पूर्ण रसिया
भक्तिनिष्‍ठ भागवत बन ही नहीं सकता।

हृदय त्याग के लिये इस प्रकार अकुलाता रहे,
जिस प्रकार जल में बहुत देर डूबकी लगाये रहने
पर प्राण श्‍वास लेने के लिये अकुलाने लगते हैं।
...........✨🕉️ आदेश आदेश संतो हरि हर ✨🕉️................

#फेसबुकदस्बातम

मनुष्य के जीवन की दिशा और घटनाएँ किसी के अनुमान में नहीं होतीं। आज जो स्थिर और सुरक्षित दिखता है, कल उसकी ज़मीन बदल भी स...
14/01/2026

मनुष्य के जीवन की दिशा और घटनाएँ किसी के अनुमान में नहीं होतीं। आज जो स्थिर और सुरक्षित दिखता है, कल उसकी ज़मीन बदल भी सकती है। समय हर किसी के हिस्से में अलग-अलग अनुभव रखता है, और यह रहस्य किसी बुद्धि या शक्ति से नहीं, केवल विधि की लेखनी से लिखा जाता है।

इसी अनिश्चितता के कारण किसी के बारे में कठोर निर्णय लेना आसान नहीं होना चाहिए। हम नहीं जानते कि सामने वाला किन संसुप्रभातघर्षों से गुज़र रहा है, या आने वाला पल उसके लिए क्या लेकर आएगा। इसलिए अहंकार से नहीं, करुणा से देखना ही मनुष्यता का पहला धर्म है।

जब हृदय में सबके लिए भलाई की भावना बस जाती है, तब व्यक्ति स्वयं हल्का हो जाता है। दूसरों के लिए मंगल कामना करना किसी उपकार से कम नहीं, यह भीतर के विष को शांत करता है और मन को निर्मल बनाता है।

क्योंकि जीवन की इस यात्रा में, जहाँ हर मोड़ पर एक अनजाना भय खड़ा है, वहीं सबसे सुरक्षित भाव वही होता है, कि हम किसी के लिए बुरा न सोचें। आज नहीं तो कल, विधि स्वयं सबका लेखा पूरा कर देती है; हमें तो बस अपने मन को शुद्ध और सद्भाव से भरा रखना है।

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏
#अलवर #नाथजी #गुरुजी #बाबा #बाबा_समर_नाथ_जी
#बाबा_संदोख_दास_जी 🙏🙏
#वायरल_पोस्ट
#कॉमेंट # baba @टॉप फ़ैन Balyogi Balak Nath Ji Yogi Dev Nath YogiRamnath Yogi Sonu Nath Yogi Devnath Baba Naresh Nath Nath RanGeela AlwaR Yogi Matsyendra Nath Swami Sumer Das Ji Sandeep Moun @

 #श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏 #श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏
04/01/2026

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏

जय नाथ जी की 🙏🙏
17/12/2025

जय नाथ जी की 🙏🙏

 #श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏 #श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏   #भक्ति  #बाबा      #फेसबुक
08/11/2025

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏
#भक्ति #बाबा #फेसबुक

 #चर्ण_कुण्ड_की_महिमाप्राचीन समय की बात है, कि एक चोर चोरी करके रात को बचता-बचाता हुआ एकांत और शान्ति का माहौल देख कर सि...
04/11/2025

#चर्ण_कुण्ड_की_महिमा

प्राचीन समय की बात है, कि एक चोर चोरी करके रात को बचता-बचाता हुआ एकांत और शान्ति का माहौल देख कर सिद्ध बाबा दूधाधारी के स्थान में गारे की मिट्टी से बने डुंगे कमरे में जा छिपा और कुछ देर तक वहां छिपा रहा, जब वह डेरे से बाहर गया तो अचानक उसकी आँखों की ज्योति का उजाला कम होता चला गया, उसने अपने नेत्रों की ज्योति को अंधेरेपन में पा कर खुद को अन्धा महसूस किया । धीरे-धीरे गिरता-गिराता किसी-ना-किसी तरह वह फिर सिद्धों के स्थान में पहुंच गया। जब वह अन्दर पहुंचा तो उसकी आँखों की ज्योति का उजाला वापिस आ गया और उसके नेत्रों में फिर से प्रकाश लौट आया। जब उसने अपने आप को ठीक पाया तो उसने फिर डेरे से बाहर जाने की कोशिश की परन्तु फिर उसके साथ वही हुआ। किसी-ना-किसी तरह वह फिर सिद्ध बाबा दूधाधारी के स्थान में जा पहुँचा और फिर दुबारा बिलकुल ठीक हो गया, उसे फिर से साफ दिखाई देने लगा, घबराया हुआ चोर वही छिप गया, कुछ देर बाद सुबह उजागर हुई और सिद्ध बाबा दूधाधारियों की आरती पूजा का समय हुआ और डेरे के साधु महात्मा सिद्ध दूधाधारियों की आरती पूजा करने लग गए, आरती पूजा के ध्यान में चोर के मन की गति स्थिर हुई, उधर दूसरी ओर गांव से चोरी की हलचल का पता चलता-चलता सिद्ध बाबा दूधाधारीयों के स्थान में आ पहुँचा, चोर ने उसी समय डेरे के महात्मा और नगर वासियों के सामने चोर होने का इजहार किया व अपना गुनाह कबूल किया और फिर सिद्ध बाबा दूधाधारियों की समाधियों के सामने चोर ने हाथ जोड़कर प्रार्थना-अर्चना की और कहा मैं गुनेहगार हूँ, सिद्ध पुरुषों मुझे क्षमा करो आगे से मैं यह दुष्ट कर्म नहीं करूंगा ।

फिर उसने सबके सामने महात्मा जी को अपनी कहानी सुनाने लगा, मैं पीछे से चोरी करके भागा हुआ था, बचता-बचाता एकांत माहौल देख कर सिद्ध बाबा दूधाधारी के स्थान में छिप गया, जब मैं डेरे से बाहर जाने लगा तो अचानक मुझे आगे कुछ दिखाई नहीं देता था, पर जब मैं गिरता-गिराता किसी-ना-किसी तरह वापिस डेरे के अन्दर आया तो मुझे फिर से साफ दिखाई देने लगा, ऐसा मेरे साथ दो बार हो चुका है, में बाहर जाते ही अन्धापन महसूस करता हूँ, डेरे के अन्दर आते ही मेरी आँखों की ज्योति जगमगाने लगती है।

इस का कोई उपाय बताओ फिर साधु महात्मा जी ने बताया कि जिस स्थान पर तँ आ कर छुप्पा है, वह स्थान नित्य सनातन, नवखण्ड ज्योत व चेतन समाधियों के सिद्ध बाबा दूधाधारी का है। सिद्ध बाबा दूधाधारी की समाध के आगे एक चरण कुन्ड है, जो जल से भरा रहता है, इस में सभी लोग माथा टेकने से पहले अपने पैरों को धोकर अन्दर माथा टेकने जाते है, जा सच्ची श्रद्धा से उस चरण कुण्ड जल के छिन्टे अपनी आँखों पर मार ले और अपना मुख भी थी ले। सिद्ध बाबा दूधाधारी बडे कृपालु, दीन दयालु, दया के सागर, नित्य शुद्धि-बुद्धि व भूले को क्षमा करने वाले श्री नाथ जी अति दयावान है, चोर ने सुनते ही उस चरण कुण्ड से जल लेकर अपनी आँखों पर छिन्टे मार लिए व उसने अपना मुख भी धौ लिया और सिद्ध पुरुषों ने चोर की भूल को माफ किया, उसी समय डेरे के महात्मा ने बताया कि अनजाने में भूल करने वाले को माफ किया जाता है, जान-बूझ कर भूल करने वाले को. माफ नहीं किया जाता इसने अब सत्य का रास्ता अपनाया है, इसलिए सब उसे माफ कर दो और उसने सिद्ध बाबा दूधाधारियों की समाधियों के आगे अपना शीश झुकाया ।

सिद्धों की दया दृष्टि व अपार कृपा से आज भी जब किसी की आँखें दुखनी आ जाती है, तो इस चरण कुण्ड के छिन्टे मारने से आँखें ठीक हो जाती है, कुछ लोग जो चरण कुण्ड जल के छिन्टे सारे शरीर पर मारते हैं। सिद्ध पुरुष बाबा दूधाधारी जी की आलौकिक व अपार कृपा आज भी अपने भक्तों पर सूर्य चांद की तरह सृष्टि में मंडराती है, श्री नाथ सिद्ध योगेश्वरों की सेवा स्मरण ध्यान ज्ञान व प्रचार का उच्चारण करने से हर भक्त पूर्ण ब्रह्म व मौक्ष को प्राप्त होता है।

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#गुरु

Vijay Nath
Lal Nath Mahant 🙏🙏

*✨ सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी की भानगढ़ किले (अलवर के समीप) की अद्भुत लीला ✨*☠️☠️☠️☠️☠️🔱🔱🔱🔱🔱🔱बहुत समय पहले की बात है।...
04/11/2025

*✨ सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी की भानगढ़ किले (अलवर के समीप) की अद्भुत लीला ✨*
☠️☠️☠️☠️☠️🔱🔱🔱🔱🔱🔱

बहुत समय पहले की बात है। राजस्थान के अलवर के समीप भानगढ़ का किला सदियों से रहस्यमय घटनाओं और अद्भुत घटनाओं के लिए प्रसिद्ध था। दिन में यह किला शांत और सुनसान दिखाई देता, लेकिन जैसे ही रात का अँधेरा छाया, वहाँ अजीब-सी आवाज़ें गूँजने लगतीं—कभी कराह, कभी चीखें, कभी अचानक परछाईं का दिखना।

गाँव वाले हमेशा डर के मारे कहते—
"उधर मत जाना, वहाँ भूत-प्रेतों का निवास है।"

*🙏 भक्तों का निवेदन*

एक दिन सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी महाराज अलवर के समीप भानगढ़ आए।
गाँव वालों ने उनके चरण छूकर प्रार्थना की—
"महाराज! भानगढ़ की यह भूमि भूतों और प्रेतों से भयभीत है। रात को कोई सुरक्षित नहीं रहता। कृपया इसे शांति दें।"

बाबा मुस्कुराए और बोले—
"आज रात मैं स्वयं वहाँ जाऊँगा और अंधकार पर प्रकाश डालूँगा।"

शिष्यों ने भयभीत स्वर में कहा—
"महाराज, वह जगह बहुत डरावनी है।"
बाबा ने मुस्कुराकर कहा—
"डर किसी साधु के सामने टिक नहीं पाता। सत्य और शक्ति की उपस्थिति सब पर भारी होती है।"

*🌌 किले का प्रवेश*

रात का अँधेरा घना था। चारों ओर सन्नाटा और ठंडी हवाएँ चल रही थीं।
बाबा शिष्यों के साथ भानगढ़ किले के विशाल गेट के पास पहुँचे।
ज्यों ही उन्होंने कदम रखा, हवा में अजीब कराहती आवाज़ें गूँजने लगीं।
दरवाज़े अपने आप चरमराने लगे।

शिष्यों ने काँपते हुए कहा—
"महाराज, यहाँ कुछ भी सामान्य नहीं है।"
बाबा ने शांत स्वर में कहा—
"सचमुच। लेकिन जो सत्य के साथ आता है, उसे भय का कोई असर नहीं।"

*👻💀☠️☠️☠️ अदृश्य शक्तियों का प्रकट होना*

*ज्यों ही बाबा किले के अंदर पहुँचे, चारों ओर टिमटिमाती परछाइयाँ नाचने लगीं।*
*कभी लंबा कद वाला प्रेत, कभी औरत की आकृति, कभी बिना सिर की भयानक छाया।*
वे चीखने लगे—
"यह हमारी भूमि है! कोई साधु यहाँ टिक नहीं सकता!"

किले की दीवारें कांप रही थीं। हवा में डरावनी गूँज फैल गई।
भयानक कराह और चीखें चारों ओर गूँज रही थीं।
लेकिन बाबा की दृष्टि इतनी प्रबल थी कि सभी भूत-प्रेत थर-थर काँपने लगे।

*🔮 बाबा की दिव्य शक्ति*

सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी ने जमीन पर कमंडल रखा और आसन जमाया।
उनकी जपमाला से मंत्रों की गूँज चारों ओर फैल गई।
क्षण भर में पूरा किला दिव्य ज्योति से जगमगा उठा।
भूत-प्रेत थर-थर काँपने लगे।

वे सभी बाबा के चरणों में गिर पड़े और बोले—
"महाराज! हम श्रापवश यहाँ बँधे थे। हमारी मुक्ति करें।"

*✨ अति दिव्य, अद्भुत और मुक्ति की लीला*

बाबा ने गंगाजल छिड़का और त्रिशूल उठाकर आकाश की ओर इशारा किया।
ज्यों ही दिव्य आभा प्रकट हुई, सभी परछाइयाँ दीपक की लौ की तरह लुप्त हो गईं।
किला शांत और सुगंधित हो गया।
पहली बार सदियों बाद वहाँ शांति और प्रकाश फैला।

बाबा ने कहा—
"अब यह भूमि किसी को डराएगी नहीं। जो भी सच्चे मन से आएगा, वह सुरक्षित रहेगा।"

-------------------------------------------
उस दिन से आज तक लोग मानते हैं कि अलवर के समीप भानगढ़ किले में सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी की छाया है।
जो भी बाबा का नाम लेकर वहाँ जाता है, उसे कोई अदृश्य शक्ति परेशान नहीं करती।

गाँव के बुज़ुर्ग अब भी बच्चों को सुनाते हैं—
*"भूत-प्रेत सब बाबा के वश में हैं। बाबा हीरानाथ जी वहाँ के राजा हैं।"*

*बोलिय सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी महाराज जी की जय*

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏
#बाबा #गुरूजी
🙏🙏🙏💐💐💐🌸🌸🌸

 #ॐ  #भु:  #भुर्वः  #स्वः  #सिद्ध  #बाबा  #दूधाधारी   #जी  #को  #आदेश "धर्म कोई भी है परन्तु धर्मो का अर्थ सिर्फ भारत है...
03/11/2025

#ॐ #भु: #भुर्वः #स्वः #सिद्ध #बाबा #दूधाधारी #जी #को #आदेश "
धर्म कोई भी है परन्तु धर्मो का अर्थ सिर्फ भारत है"

भारत वर्ष की भूमि देवी देवताओं की भूमि है। यहाँ देवी देवता स्वयः विराजमान हैं। विश्व भर में भारत ही एक ऐसा देश है, जो संस्कृति, मर्यादा और देवी देवताओं की पूजा, अर्चना व गुरु पीरों की वाणी से परिपूर्ण शिक्षित है। शिव स्वरुप श्री गुरु गोरक्ष नाथ जी की अपार कृपा से श्री नाथ सम्प्रदायं में युगों-युगों से सिंद्ध नाथों ने अवतार लिया। जिन में नाथ पंथ के चार नाथ जी सिद्ध महापुरुष दुधाधारी के नाम से ऊजागर हुए हैं। उस समय मुगल साम्राज्य की हकुमत का डंका बजता था । समाणा रियासत प्राचीन राज्यों की विरास्त थी। समाणे राज्य की सभ्यता उस समय की सभ्यता है। जब दूर-दूर तक कोई राज्य का नामोनिशान सुनने में नहीं आया करता था। समाणे की रियासत दूर-दूर तक फैली हुई थी ।

आज से कई सौ वर्ष पहले राज्य सिंहासन पर बैठे नवाब अंदली खान अपने तरीके से समाणे राज्य की सीमाएँ बांधते प्रसिद्ध हुए । उसी समय राँझे ने समाणा रियासत के नवाब अंदली खान की रहगुजारी में अपनी हीर के लिए इन्साफ मांगा था। नवाब अंदली एक शासक राजा कहलाया करता था। कभी कभार नवाब अपने नगर को छोड़ कर सुनसान वातावरण हरे-भरे जंगलों की ओर जब घुमा करते थे, तब अगर कोई चोर, जुआरी, डाकू या साधु मिल जाता था, तो उन्हें पकड़ कर अपने राज्य में काम-काज के लिये वगार जबरदस्ती का कार्य करवाते थे। चलती समय की धारा के अनुसार चार साधु महात्मा रम्मत करते हुए, समाणे राज्य की सीमा में सुनसान वातावरण हरे भरे जंगल में एक कॅलर स्थान देख कर धुना चेतायें अपने-अपने आसन लगाकर चोपड़ खेलने लगे । खेलते-खेलते उनकी चित्तवृति अन्त्र जगत के दृश्य को देख रही थी ।

नवाब गश्त करते-करते उस सुनसान वातावरण की दूसरी ओर से गुजर रहा था, तो अचानक उसकी नज़र सुनसान वातावरण में से निकलते धुएँ पर पड़ी। धुआं देखते ही नवाब ने रथ वहीं रुकवाया और अपने रथ चालक का हुक्म दिया "जा वहाँ देख कर आ, अगर कोई मिले तो उसे पकड़ कर ले आ" । रथ चालक ने सिर हिलाया, "और अच्छा महाराज अभी जाता है।

रथ चालक ने वहां जा कर देखा कि चार सिद्ध पुरुष धुना चेताएँ लंगोटियों में बैठे चोपड खेल रहे हैं। चारों सिद्ध नाथ जी अपने गोरक्ष धंधे में चित्त रमाई बैठे थे। सिद्ध महात्माओं को देख कर रथ चालक की आत्मा बदल गई और उसने नवाब के बारे में सिद्ध पुरुषों को सब बयान कर दिया। चारों सिद्ध पुरुषों ने रथ चालक की बात सुनी और कहा, "हमें इसके बारे में पहले से ही ज्ञान है।" तेरे भाग्य अच्छे है जो तुने हमें देख लिया ।" जा अपने नवाब से कहदे उन साधुओं को पकड़ने की बात तो दूर है, तुं तो उनके दर्शन भी नहीं कर सकता। इतनी बात सुनते ही रथ चालक वहां से भागा व नवाब को बुलाने चला, आगे देखता है कि नवाब पहले से ही आ रहा था।

सिद्ध पुरुषों को अंत्रध्यान में आत्म ज्योति की आवाज आई । सिद्धों कलयुग आ गया, चलो समा जाओ। जब नवाब वहां पहुंचा तो चारों सिंद्ध पुरुष ज्योति-ज्योत समां रहे थे, जब यह दृश्य स्वयं नवाब ने अपनी आँखों से देखा तो वह उसी समय चका चौंध घबरा उठा और उसी समय उसे अपने बुरे कर्मों की गुत्थी ध्यान आई । तत्तकाल ही सिद्धों की समाधियों के पास गिर पड़ा । नवाब अपने बुरे कर्मों को और नापाक गुनाहों को मानता हुआ सिंद्धों से अरज करता है, कि मुझे कोई सेवा भाव का मौका दीजिऐं, ताकि मैं अपने गुनाहों का पश्चाताप सेवा के द्वारा कर सकूँ । श्री नाथ जी की वाणी गुंजी, "श्री नाथ जी चुप और चेतन रुप में प्रकाशित है, नवाब ध्यान रहे कभी किसी साधु संत से दूर व्यवहार नहीं करना, तेरा राज पाट, तेरा कुटुम्ब धीरे-धीरे बिगड़ता रहेगा व एक दिन खत्म हो जायेगा, सिद्ध पुरुषों की वाणी सुनते ही नवाब ने अपने प्राणों की मुक्ति के लिए सिद्धों के आगे हाथ फैलाया। श्री नाथ जी की वाणी फिर दोहराई व कहा "जो चार सिंद्धनाथ जी यहां ज्योति-ज्योत समाये है, वे अन्नत्यागी, दुध रस्पान करने वाले चेतन समाधियों के सिंद्ध नाथ जी है। इनकी दया, कृपा से समयनुसार तेरे प्राणों की मुक्ति और तेरे कुटुम्बे की ज्योत कुछ समय तक सुरक्षित रह सकती है। नवाब अंदली खान वाणी सुनते ही चारों सिद्ध नाथों की प्राण प्रतिष्ठा करवा समाधियों को मंदिर रुप का आकार देकर स्वयः आप दूध चढाया और जोगिया समाध डेरा बाबा दुधाधारी के नाम से प्रचलित एवम प्रसारित किया और अपने मुँख से जै जैकार सिंद्ध बाबा दुधाधारी की लगाई ।

इन्हीं की दया दृष्टि से जहां सिद्ध अपना आसन लगाकर बैठे थे। वह एक कॅलर जगह थी और धीरे-धीरे वह एक नगर के रुप में गांव कॅलर भैणी स्थापित हुआ। इन सिद्ध पुरुषों की सेवा करते-करते कई साधु महात्मा सिद्ध हुए। दुधाधारी सिद्धों की सेवा व गुरु पालना करते-करते पीर भौर नाथ जी भी अत्यंत सिद्ध हुए। जिन्हों ने बारां बार ज्योति-ज्योत समाधियां ली । सिद्ध दुधाधारी डेरे की खास व एक प्राचीन परम्परा यह भी है, कि अगर कोई गांव वासी सिद्धों के स्थान की सीमा के बराबर अपने मकान का चुबारा सिद्धों के स्थान के बराबर नहीं बनवा सकता । इस लिये सिद्ध दुधाधारी का स्थान एक मंजिल ऊपर करके फिर अपने मकान का चुबारा बनवाते हैं, सिंद्ध दुधाधारी योगेश्वरों को दिन इतवार प्रातः काल दूध व मिष्ठान चढाया जाता है। नगर कॅलर भैणी आस-पास व दुर-२ सिंद्ध दुधाधारी की बड़ी मानता है। इन चेतन समाधियों की सेवा व पूजा से भ्रष्टाचार व शैतानी तत्व भी दूर भागते है। सिंद्धों की अपार कृपा से अश्विन महीने की इकादशी-द्वादशी पर धूमधाम से भारी मेला भरता है और पुरानी रीति के अनुसार नगर खेड़े की खुशहाली के लिये खेल कुश्ती, कबड्डी भी करवाये जाते हैं। सिंद्ध पुरुषों की आरती, पूजा, धूप-ध्यान, सेवा स्मरण व डेरे की बागडोर सम्भाले जो 22 सालों से नाथ मर्यादा के पालनहारी महंत श्री पुर्णनाथ जी प्रति किरिया करते हैं। जोगिया समाध डेरा बाबा दुधाधारी श्री नाथ सम्प्रदाय के सिंद्ध योगेश्वरों से प्रेरित हैं।

"इन सिद्ध पुरुषों के चरण कमलों को कोटि-कोटि नमन करता व इनकी प्रेरणा से शुभ प्रभात करता योगी विजय नाथ "

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏
#बाबा #गुरु #गुरूजी Vijay Nath Vijay Nath Lal Nath Mahant

03/11/2025

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏

#ट्रेंडिंग

*चमत्कारी कथा: बाबा हीरानाथ जी और अलवर के भूत-प्रेतों का संहार*☠️💀👿😈19वीं सदी के अंत में, 1880 के करीब का समय था, जब अलव...
03/11/2025

*चमत्कारी कथा: बाबा हीरानाथ जी और अलवर के भूत-प्रेतों का संहार*
☠️💀👿😈
19वीं सदी के अंत में, 1880 के करीब का समय था, जब अलवर शहर भूत-प्रेतों और जिन्दों के आतंक से भयभीत था।
रात होते ही पूरा नगर वीरान हो जाता, लोग अपने-अपने घरों में दुबक जाते।
शाम 6-7 बजे के बाद सन्नाटा और डर ही पसरा रहता था।
भूतहा आवाज़ें, छायाएँ और अजीब घटनाएँ आम बात थीं, जो लोगों को सताती थीं।

एक रात, जब एक नवविवाहित जोड़ा अपने परिवार के साथ अलवर रेलवे स्टेशन पहुँचा,
फतेह गुम्बज के पास पहुंचे ही नवविवाहित लड़की रहस्यमय रूप से गायब हो गई।
सभी लोग घबराकर काली मोरी की ओर भागे, जहाँ बाबा हीरानाथ का धूना जल रहा था।

तभी वहां अचानक एक दिव्य ज्योति फैली और एक गरिमामय स्वर गूंजा—
"बच्चो, अब घबराने की आवश्यकता नहीं, हम आ गए हैं।"

अचानक, सबका डर दूर हो गया और वे बाबा के पास आकर्षित हुए।
बाबा ने उस नवविवाहित के पति को अपने धूणे की भभूत दी और कहा—
"इसे फतेह गुम्बज के पास बुझी लालटेन लिय हुय सफेद दाढ़ी वाले वृद्ध को देना और कह देना, यदि वह अपना हित चाहता हो तो तुम्हारी पत्नी को शकुशल लौटादे वरना नाथजी का चिमटा ही बजेगा...
जींद बहुत पछताया, रोते हुए माफी मांगी, और जल्द ही बाबा के नवीन भक्त की पत्नी को लेकर वापस आया।
यह देखकर सभी के दिलों में बाबा हीरानाथ जी के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा जाग उठी।

उस दिन से अलवर में भूत-प्रेतों के आतंक की समाप्ती की सुरूवात हो गयी..
बाबा हीरानाथ जी की कृपा से लोगों के मन में खोया हुआ अभय शांति और विश्वास पुनः लौट आया...
*सिद्ध शिरोमणि बाबा हीरानाथ जी महाराज की!* 🙏🙏🙏🙏

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏

02/11/2025

िव_गोरख_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏

#बाबा RanGeela AlwaR Yogi Dev Nath YogiRamnath श्री श्री 1008 श्री शिद्ध बाबा हीरा नाथ जी आश्रम अलवर Yogi Sonu Nath Preeti Kumari Rk Thakur चौधरी विक्रम ग्रेवाल

*✨ कथा: जब मृत बालक जीवित हुआ — बाबा हीरानाथ जी की चमत्कारी कृपा✨*अलवर के पास एक गाँव मेएक निर्धन परिवार का इकलौता पुत्र...
02/11/2025

*✨ कथा: जब मृत बालक जीवित हुआ — बाबा हीरानाथ जी की चमत्कारी कृपा✨*

अलवर के पास एक गाँव मे
एक निर्धन परिवार का इकलौता पुत्र, जिसकी उम्र मात्र 11 वर्ष थी — अचानक सांप के काटने से मृत्यु को प्राप्त हो गया।
परिवार वालों ने डॉक्टरों, वैद्यों और ओझाओं को बुलाया — पर सबने साफ कह दिया:

*> "बालक अब नहीं रहा…"

माँ बेहोश हो गई, पिता व्याकुल। पूरे गाँव में शोक की लहर फैल गई।

उसी समय, गाँव में किसी ने कहा —

*> “बाबा हीरानाथ जी इस समय अलवर में कालीमौरी आश्रम में हैं।
वे साक्षात सिद्ध महापुरुष हैं — क्यों न हम उनके चरणों में अंतिम आस लेकर चलें?”

परिजन लड़के के शव को कपड़े में लपेटकर बाबा जी के आश्रम की ओर चल पड़े।
---

🌿 बाबा का संकेत:
*जब लोग शव लेकर आश्रम के पास पहुँचे, बाबा जी पहले से ही अपने धूणे पर बैठे थे —उनकी आँखें बंद थीं, पर चेहरे पर तेज था।*
बिना कुछ पूछे, बाबा ने धीरे से कहा:

*> “तुम सब विलंब से आए हो… लेकिन वो मेरा बालक है।
अभी उसे बुलाना पड़ेगा — क्योंकि माँ ने पूरी श्रद्धा से मुझे पुकारा है।”

सभी चौंक गए।

बाबा ने शव के पास बैठकर कुछ समय ध्यान किया।
फिर अपनी कमंडलु से कुछ जल लेकर उस बालक के मुख पर छिड़का और एक मंत्र फूँका —
(मंत्र को बाबा ने मौन में रखा, केवल उनके अधरों की गति दिखाई दी)

कुछ ही क्षण बाद…
उस बालक ने एक लंबी साँस ली और अपनी आँखें खोल दीं।
---

🙏 हाहाकार और फिर वंदन:

सभी उपस्थित लोग चकित रह गए!
जिसे मृत मानकर लाया गया था, वह लड़का अब उठकर बैठ चुका था।

उसकी माँ बाबा के चरणों में गिर पड़ी, रोते हुए बोली:

*“आप साक्षात शिव हैं... आपने मुझे मेरा प्राण लौटा दिया!”*

बाबा मुस्कराए और बोले:

*> “जिसका हृदय सच्चा होता है, उसके लिए मृत्यु भी रुक सकती है — यह मेरी नहीं, भोलेनाथ की लीला है।”*

#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_शिव_नाथ_जी 🙏🙏
#बाबा #नाथजी
#लाइक

Address

श्री श्री1008 बाबा हीरा नाथ जी आश्रम काली मोरी अलवर(अलवर)
Alwar

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when श्री श्री 1008 श्री शिद्ध बाबा हीरा नाथ जी आश्रम अलवर posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category