04/11/2025
#चर्ण_कुण्ड_की_महिमा
प्राचीन समय की बात है, कि एक चोर चोरी करके रात को बचता-बचाता हुआ एकांत और शान्ति का माहौल देख कर सिद्ध बाबा दूधाधारी के स्थान में गारे की मिट्टी से बने डुंगे कमरे में जा छिपा और कुछ देर तक वहां छिपा रहा, जब वह डेरे से बाहर गया तो अचानक उसकी आँखों की ज्योति का उजाला कम होता चला गया, उसने अपने नेत्रों की ज्योति को अंधेरेपन में पा कर खुद को अन्धा महसूस किया । धीरे-धीरे गिरता-गिराता किसी-ना-किसी तरह वह फिर सिद्धों के स्थान में पहुंच गया। जब वह अन्दर पहुंचा तो उसकी आँखों की ज्योति का उजाला वापिस आ गया और उसके नेत्रों में फिर से प्रकाश लौट आया। जब उसने अपने आप को ठीक पाया तो उसने फिर डेरे से बाहर जाने की कोशिश की परन्तु फिर उसके साथ वही हुआ। किसी-ना-किसी तरह वह फिर सिद्ध बाबा दूधाधारी के स्थान में जा पहुँचा और फिर दुबारा बिलकुल ठीक हो गया, उसे फिर से साफ दिखाई देने लगा, घबराया हुआ चोर वही छिप गया, कुछ देर बाद सुबह उजागर हुई और सिद्ध बाबा दूधाधारियों की आरती पूजा का समय हुआ और डेरे के साधु महात्मा सिद्ध दूधाधारियों की आरती पूजा करने लग गए, आरती पूजा के ध्यान में चोर के मन की गति स्थिर हुई, उधर दूसरी ओर गांव से चोरी की हलचल का पता चलता-चलता सिद्ध बाबा दूधाधारीयों के स्थान में आ पहुँचा, चोर ने उसी समय डेरे के महात्मा और नगर वासियों के सामने चोर होने का इजहार किया व अपना गुनाह कबूल किया और फिर सिद्ध बाबा दूधाधारियों की समाधियों के सामने चोर ने हाथ जोड़कर प्रार्थना-अर्चना की और कहा मैं गुनेहगार हूँ, सिद्ध पुरुषों मुझे क्षमा करो आगे से मैं यह दुष्ट कर्म नहीं करूंगा ।
फिर उसने सबके सामने महात्मा जी को अपनी कहानी सुनाने लगा, मैं पीछे से चोरी करके भागा हुआ था, बचता-बचाता एकांत माहौल देख कर सिद्ध बाबा दूधाधारी के स्थान में छिप गया, जब मैं डेरे से बाहर जाने लगा तो अचानक मुझे आगे कुछ दिखाई नहीं देता था, पर जब मैं गिरता-गिराता किसी-ना-किसी तरह वापिस डेरे के अन्दर आया तो मुझे फिर से साफ दिखाई देने लगा, ऐसा मेरे साथ दो बार हो चुका है, में बाहर जाते ही अन्धापन महसूस करता हूँ, डेरे के अन्दर आते ही मेरी आँखों की ज्योति जगमगाने लगती है।
इस का कोई उपाय बताओ फिर साधु महात्मा जी ने बताया कि जिस स्थान पर तँ आ कर छुप्पा है, वह स्थान नित्य सनातन, नवखण्ड ज्योत व चेतन समाधियों के सिद्ध बाबा दूधाधारी का है। सिद्ध बाबा दूधाधारी की समाध के आगे एक चरण कुन्ड है, जो जल से भरा रहता है, इस में सभी लोग माथा टेकने से पहले अपने पैरों को धोकर अन्दर माथा टेकने जाते है, जा सच्ची श्रद्धा से उस चरण कुण्ड जल के छिन्टे अपनी आँखों पर मार ले और अपना मुख भी थी ले। सिद्ध बाबा दूधाधारी बडे कृपालु, दीन दयालु, दया के सागर, नित्य शुद्धि-बुद्धि व भूले को क्षमा करने वाले श्री नाथ जी अति दयावान है, चोर ने सुनते ही उस चरण कुण्ड से जल लेकर अपनी आँखों पर छिन्टे मार लिए व उसने अपना मुख भी धौ लिया और सिद्ध पुरुषों ने चोर की भूल को माफ किया, उसी समय डेरे के महात्मा ने बताया कि अनजाने में भूल करने वाले को माफ किया जाता है, जान-बूझ कर भूल करने वाले को. माफ नहीं किया जाता इसने अब सत्य का रास्ता अपनाया है, इसलिए सब उसे माफ कर दो और उसने सिद्ध बाबा दूधाधारियों की समाधियों के आगे अपना शीश झुकाया ।
सिद्धों की दया दृष्टि व अपार कृपा से आज भी जब किसी की आँखें दुखनी आ जाती है, तो इस चरण कुण्ड के छिन्टे मारने से आँखें ठीक हो जाती है, कुछ लोग जो चरण कुण्ड जल के छिन्टे सारे शरीर पर मारते हैं। सिद्ध पुरुष बाबा दूधाधारी जी की आलौकिक व अपार कृपा आज भी अपने भक्तों पर सूर्य चांद की तरह सृष्टि में मंडराती है, श्री नाथ सिद्ध योगेश्वरों की सेवा स्मरण ध्यान ज्ञान व प्रचार का उच्चारण करने से हर भक्त पूर्ण ब्रह्म व मौक्ष को प्राप्त होता है।
#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#श्री_शिद्ध_बाबा_हीरा_नाथ_जी 🙏🙏
#गुरु
Vijay Nath
Lal Nath Mahant 🙏🙏