Jageshwar Dham Almora जागेश्वर अल्मोड़ा

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Jageshwar Dham Almora जागेश्वर अल्मोड़ा Jageshwar Dham is the 8th Jyotirlinga among the 12 &
is 2500 + Years Old. Worlds Oldest Hindu Temple
(307)

JAGESHWAR | JAGESHWAR DHAM | JAGESHWAR TEMPLE UTTARAKHAND

Jageshwar is located at an altitude of 1870 meters. Jageshwar is the 8th Jyotirling among the Twelve and has great religious value. Jageshwar Shiv temple is one of the oldest shiva temple in India. Jageshwar is a Hindu pilgrimage town in Almora District, dedicated to Lord Shiva, located 36 km northeast of Almora and around 101 Kms away fro

m Nainital in Kumaon Region of Uttarakhand Uttranchal. TEMPLES IN JAGESHWAR | TEMPLES INSIDE JAGESHWAR DHAM |

The temple city of Jageshwar comprises a cluster of 124 large and small stone temples, dating 9th to 13th century AD, with many preserved by the Archaeological Survey of India (ASI), which include Dandeshwar Temple, Chandi-ka-Temple, Jageshwar Temple, Kuber Temple, Mritunjaya Temple, Nanda Devi or Nau Durga, Nava-grah Temple, a Pyramidal shrine, and Surya Temple amongst which the oldest shrine is the 'Mrityunjaya Temple' and the biggest shrine is the 'Dandeshwar Temple'. Once the centre of Lakulish Shaivism, in the Jataganga river valley near a Deodar forest (Cedrus deodara) starting from Artola village on Almora–Pithoragarh highway, where two streams Nandini and Surabhi flow down the hills in the narrow valley and meet near the sacred spot. The townfolk believe that Jageshwar is the place of Nagesh among the forest of Deodar, 8th among the Dwadasa Jyotirlingas: the twelve resplendent lingas of Lord Shiva established by Lord Vishnu. The ' Jageshwar Monsoon Festival ', held between 15 July to 15 August takes place at Jageshwar during the Hindu calendar month of Shravan, and the annual 'Maha Shivratri Mela' (Shivratri festival), which takes place during spring has an important place in the calendar of the entire Kumaon region. History of Jageshwar

The ancient treatise Prasadmandanam describe Jageshwar as an Abode of Lord Shiva. There is no definite dating of the construction of Jageshwar group of temples but according to the ASI, they belong to the post-Gupta and pre-medieval eras and are estimated to be about 2500 years old and one of the oldest temple in India. These temples range in the period from the 8th century (early Katyuri Dynasty to the 18th century (Chand Dynasty). The temples were renovated during the reign of Katyuri King Shalivahandev. There is an inscription of Malla Kings on the main temple premises indicating their devotion to Jageshwar. The Katyuri Kings also donated villages to the temple priests for it’s maintenance. The Chand Kings of Kumaon were also patrons of the Jageshwar temple.

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ाजागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे य...
05/06/2023

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।
हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ाजागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे य...
06/12/2022

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।
हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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05/07/2022

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा
जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।
हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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12/10/2020

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।

हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ाजागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे य...
28/09/2020

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।

हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ाजागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे य...
05/09/2020

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा
जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।

हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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आप सभी को पवित्र श्रावण मास की मंगलकामनाएँ।हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ाजागेश्वर भगवान सदाश...
31/07/2020

आप सभी को पवित्र श्रावण मास की मंगलकामनाएँ।

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।

हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनं ।उर्वारुक्मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥आप सभी को पवित्र श्रावण मास के...
06/07/2020

ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनं ।
उर्वारुक्मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

आप सभी को पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार की मंगलकामनाएँ।

हर हर महादेव - ॐ नमः शिवायः - ज्योतिलिंग जागेश्वर अल्मोड़ा

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है। इसे योगेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है।

देवदार के घने जंगलों के बीच जागेश्वर तीर्थ कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। अल्मोड़ा शहर से इसकी दूरी लगभग 34 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राजमार्ग ही एकमात्र रास्ता है। खाने, पीने व रहने की अच्छी व्यवस्था है। कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का एक गेस्ट हाउस भी यहां बना है।

हर वर्ष श्रावण मास में पूरे महीने यहां का पर्व चलता है। पूरे देश से श्रद्धालु यहां आते है | कर्मकांड, जप, पार्थिव पूजन आदि चलता है। यहां विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहां कुल 165 मंदिर हैं। जिनमें हिन्दुओं के सभी बड़े देवी-देवताओं के मंदिर हैं। दो मंदिर विशेष हैं। एक शिव और दूसरा शिव के महामृत्युंजय रूप का। महामृत्युंजय में जप आदि करने से मृत्यु तुल्य कष्ट भी टल जाता है।

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