18/08/2026
प्रयागराज जैसी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी की आज बारिश के चलते जो दुर्दशा हो रही है, वह किसी भी संवेदनशील नागरिक को झकझोर देने के लिए काफी है। कुछ ही घंटों की बारिश में शहर का जलमग्न हो जाना, सड़कों का तालाब में बदलना और सीवर लाइनों का ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों में घुस जाना—यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और लचर व्यवस्था का जीवंत प्रमाण है।
सरकार और नगर निगम मंचों से 'स्मार्ट सिटी' और शहर के कायाकल्प के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकतीं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि थोड़ी सी बारिश भी इन दावों की पोल खोल देती है।
करोड़ों-अरबों रुपये के विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का पैसा आखिर कहां बह जाता है? जब शहर के मुख्य चौराहे और पॉश इलाके तक पानी में डूब जाते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि नीतियां सिर्फ कागजों पर और भ्रष्टाचार धरातल पर चल रहा है।
हर साल मानसून या बरसात से पहले नालों की सफाई और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करने के सरकारी दावे महज़ औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
समय पर नालों की डी-सिल्टिंग (सफाई) न होने और अवैध कब्जों के कारण पानी की निकासी के रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को घुटने-घुटने गंदे पानी और सीवर के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
आम जनता की अनदेखी और नरकीय जीवन
बारिश के इस मौसम में प्रयागवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
पानी में करंट उतरने का डर, जलजनित बीमारियों का खतरा और घरों में घुसा गंदा पानी—क्या यही वह 'सुशासन' है जिसका वादा जनता से किया गया था? जनता टैक्स भी भरे और फिर नरकीय जीवन भी जिए, यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
वीआईपी इलाकों या चुनिंदा महाकुंभ/विशेष आयोजनों वाले मार्गों को छोड़कर शहर के अधिकांश मोहल्लों और कॉलोनियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आम आदमी की बस्तियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
प्रयागराज की यह दुर्दशा प्रकृति की मार कम और प्रशासनिक कुप्रबंधन और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम ज़्यादा है। सिर्फ बयानबाजी करने या आपदा के समय औपचारिकता निभाने से काम नहीं चलेगा। सरकार और स्थानीय प्रशासन को अब अपनी विफलता स्वीकार करते हुए युद्धस्तर पर जल निकासी के स्थायी समाधान और भ्रष्ट तंत्र पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा जनता का आक्रोश इस सरकार को डुबोने के लिए काफी होगा।