22/01/2026
राजनीतिक दलों की दलाली करने वालों को संत कहना संत समाज का अपमान है।
चोले में छिपे ये कालनेमी न धर्म की बात करते हैं, न न्याय की, न परंपरा की।
इनका साध्य केवल सत्ता की चाटुकारिता और सुविधाओं का भोग है।
सच्चे संत सत्ता के नहीं, सत्य के साथ खड़े होते हैं।