Vipin Kumar Gupta

Vipin Kumar Gupta नेतृत्व करने के लिए उम्र नही साहस और क्षमता चाहिए... बजरंग दल प्रान्त सुरक्षा प्रमुख
काशी प्रान्त लखनऊ क्षेत्र पूर्वी उत्तरप्रदेश
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प्रयागराज जैसी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी की आज बारिश के चलते जो दुर्दशा हो रही है, वह किसी भी संवेदनशील नागरि...
18/08/2026

प्रयागराज जैसी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी की आज बारिश के चलते जो दुर्दशा हो रही है, वह किसी भी संवेदनशील नागरिक को झकझोर देने के लिए काफी है। कुछ ही घंटों की बारिश में शहर का जलमग्न हो जाना, सड़कों का तालाब में बदलना और सीवर लाइनों का ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों में घुस जाना—यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और लचर व्यवस्था का जीवंत प्रमाण है।
सरकार और नगर निगम मंचों से 'स्मार्ट सिटी' और शहर के कायाकल्प के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकतीं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि थोड़ी सी बारिश भी इन दावों की पोल खोल देती है।
करोड़ों-अरबों रुपये के विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का पैसा आखिर कहां बह जाता है? जब शहर के मुख्य चौराहे और पॉश इलाके तक पानी में डूब जाते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि नीतियां सिर्फ कागजों पर और भ्रष्टाचार धरातल पर चल रहा है।
हर साल मानसून या बरसात से पहले नालों की सफाई और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करने के सरकारी दावे महज़ औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
समय पर नालों की डी-सिल्टिंग (सफाई) न होने और अवैध कब्जों के कारण पानी की निकासी के रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को घुटने-घुटने गंदे पानी और सीवर के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
आम जनता की अनदेखी और नरकीय जीवन
बारिश के इस मौसम में प्रयागवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
पानी में करंट उतरने का डर, जलजनित बीमारियों का खतरा और घरों में घुसा गंदा पानी—क्या यही वह 'सुशासन' है जिसका वादा जनता से किया गया था? जनता टैक्स भी भरे और फिर नरकीय जीवन भी जिए, यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
वीआईपी इलाकों या चुनिंदा महाकुंभ/विशेष आयोजनों वाले मार्गों को छोड़कर शहर के अधिकांश मोहल्लों और कॉलोनियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आम आदमी की बस्तियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

प्रयागराज की यह दुर्दशा प्रकृति की मार कम और प्रशासनिक कुप्रबंधन और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम ज़्यादा है। सिर्फ बयानबाजी करने या आपदा के समय औपचारिकता निभाने से काम नहीं चलेगा। सरकार और स्थानीय प्रशासन को अब अपनी विफलता स्वीकार करते हुए युद्धस्तर पर जल निकासी के स्थायी समाधान और भ्रष्ट तंत्र पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा जनता का आक्रोश इस सरकार को डुबोने के लिए काफी होगा।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष और असंख...
15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳

15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष और असंख्य वीरों के बलिदान की अमर गाथा है। जिन वीर सपूतों ने मातृभूमि की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उनके त्याग को नमन करने का यह पावन अवसर है।
“आइए इस स्वतंत्रता दिवस पर एक नया संकल्प लें जात-पात की दीवारों को ढहाकर, भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाकर और तानाशाही सोच को हराकार, एक सच्चे और स्वतंत्र भारत का निर्माण करें।”

डरना नहीं किसी के भी पैरो के नाप से,आखिर में पुण्य जीत ही जायेगा पाप से,,गीता में श्री कृष्ण ने कहा अर्जुन से बस यहीपहले...
09/08/2026

डरना नहीं किसी के भी पैरो के नाप से,
आखिर में पुण्य जीत ही जायेगा पाप से,,
गीता में श्री कृष्ण ने कहा अर्जुन से बस यही
पहले लड़ाई जितनी है अपने आप से

करो या मरो ​भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्...
08/08/2026

करो या मरो

​भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ था। इसे 'अगस्त क्रांति' (August Kranti) के नाम से भी जाना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बंबई सत्र में महात्मा गांधी द्वारा यह आंदोलन शुरू किया गया था। यह ब्रिटिश शासन को भारत से पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए छेड़ा गया अंतिम और सबसे बड़ा जन-आंदोलन था।
8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) में अपने ऐतिहासिक भाषण में महात्मा गांधी ने देशवासियों को "करो या मरो" (Do or Die) का ओजस्वी मंत्र दिया। गांधीजी ने स्पष्ट किया:
"हम या तो भारत को स्वतंत्र कराएंगे या इस प्रयास में अपनी जान दे देंगे; अपनी गुलामी को देखने के लिए हम जीवित नहीं रहेंगे।"
9 अगस्त 1942 की सुबह ब्रिटिश सरकार ने 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं—महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना आजाद आदि—को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर नजरबंद कर दिया।
शीर्ष नेतृत्व के अचानक गिरफ्तार हो जाने के बावजूद यह आंदोलन थमा नहीं, बल्कि इसने एक अभूतपूर्व और उग्र जन-आंदोलन का रूप ले लिया।
ब्रिटिश सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए दमन की सभी सीमाएं लांघ दीं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, गोलीबारी और हवाई हमलों का सहारा लिया गया।
हजारों लोगों को बिना मुकदमे के जेलों में ठूंस दिया गया और संपत्ति जब्त कर ली गई।
हालांकि इन तमाम बर्बरतापूर्ण कार्रवाइयों के बावजूद अंग्रेजों के लिए इस जन-ज्वार को दबा पाना बेहद कठिन हो गया था।
भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह स्वर्णिम अध्याय था जिसने आम नागरिकों के भीतर छिपी हुई असीम शक्ति और स्वतंत्रता की लालसा को पूरी दुनिया के सामने ला खड़ा किया। 'करो या मरो' का यह संकल्प देश की आजादी की मंजिल तक पहुंचने का सबसे बड़ा उत्प्रेरक साबित हुआ।

सागर की अपनी क्षमता हैपर माँझी भी कब थकता हैजब तक साँसों में स्पन्दन हैउसका हाथ नहीं रुकता हैइसके ही बल पर कर डालेसातों ...
02/08/2026

सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।।

श्रावण की पावन शुरुआत पर हार्दिक शुभकामनाएँ ....भक्ति, आस्था और प्रकृति के सुंदर बदलाव का प्रतीक सावन का पवित्र महीना शु...
30/07/2026

श्रावण की पावन शुरुआत पर हार्दिक शुभकामनाएँ ....

भक्ति, आस्था और प्रकृति के सुंदर बदलाव का प्रतीक सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। रिमझिम बारिश की बूंदें, चारों तरफ बिखरी हरियाली और वातावरण में गूंजती भोलेनाथ की भक्ति यह सब मन को एक अनोखी शांति और उमंग से भर देते हैं।
सावन का यह पावन समय केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि मन और प्रकृति के नवसृजन का भी समय है। यह महीना हमें सिखाता है कि कैसे पुरानी चीजों को त्यागकर जीवन में नई ताजगी और सकारात्मकता को अपनाया जाए।

"देवों के देव महादेव और माता पार्वती की कृपा आप और आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे। आपके जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति का वास हो।"

आप सभी को सावन के इस पावन पर्व की अनंत शुभकामनाएँ! हर-हर महादेव! 🕉️

आप सभी को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏"
29/07/2026

आप सभी को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏"

किसी भी जीवंत लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और  देश के प्रति निष्ठा के बीच के अंतर को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर राज...
24/07/2026

किसी भी जीवंत लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और देश के प्रति निष्ठा के बीच के अंतर को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर राजनीतिक बहस में ये दो बातें आपस में उलझ जाती हैं, जिससे संवाद बंद हो जाता है और तार्किक सोच पीछे छूट जाती है।
सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन देश हमेशा रहता है।
सरकार की आलोचना देश को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाती है। जब नागरिक सवाल पूछना बंद कर देते हैं, तो व्यवस्था में जवाबदेही खत्म हो जाती है। इसलिए, देशहित में सवाल पूछना किसी भी सच्चे नागरिक का प्राथमिक अधिकार और कर्तव्य है।

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