श्रीबज्रांग आश्रम आवासीय गुरुकुल देवली प्रतापपुर फूलपुर प्रयागराज

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श्रीबज्रांग आश्रम आवासीय गुरुकुल देवली प्रतापपुर फूलपुर प्रयागराज गुरुकुल संचालक

*वेद पढ़ने वाले ब्रह्मचारियों एवं बटुक ब्राह्मणों को दीप (टार्च/बल्ब) दान का फल*-शास्त्रों में "दीपदान" और "विद्यादान का...
19/06/2026

*वेद पढ़ने वाले ब्रह्मचारियों एवं बटुक ब्राह्मणों को दीप (टार्च/बल्ब) दान का फल*-
शास्त्रों में "दीपदान" और "विद्यादान का महत्व अत्यधिक कहा गया है,ब्रह्मचारियों एवं बटुक ब्राह्मणों को दीपदान करना विद्यादान में सहायता" के अंतर्गत ही आता है।"तम नाशक प्रकाश दान" का उत्तम फल यही है।

*1- श्लोक प्रमाण- दीपदान के फल का-*

*स्कन्द पुराण-काशी खंड- 9/73 में वर्णित-*
दीपदो ज्ञानदः प्रोक्तो विद्यादानेन तत्समः।
ब्राह्मणे वेदपाठे च दीपं दत्त्वा दिवं व्रजेत्॥
*अर्थात्*- दीप देने वाला ज्ञान देने वाले के समान है। *ब्राह्मण जब वेदपाठ करे,उस समय दीप दान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है*।

*गरुड़ पुराण-प्रेत कल्प- 29/21-*
अन्धकारे तु यो दीपं ब्राह्मणाय प्रयच्छति।
स तेन कर्मणा विद्वान् तेजस्वी जायते नरः॥
*अर्थात्*- जो अंधेरे में ब्राह्मण को दीप देता है,वो मनुष्य उस कर्म से तेजस्वी और विद्वान होता है।

*2- बटुक ब्राह्मण एवं ब्रह्मचारी को दान का विशेष फल-*

*मनुस्मृति- 2/109-*
ब्रह्मचारिणे च यद् दत्तं विद्याधर्मार्थमेव च।
तदक्षय्यं भवेत् सर्वं दातुर्भवति शाश्वतम्॥
*अर्थात्*- ब्रह्मचारी को विद्या और धर्म के लिए जो दिया जाता है वो सब अक्षय हो जाता है। दाता को शाश्वत फल मिलता है।

*पराशर स्मृति- 12/52-*
वेदाभ्यासरतायाथ बटवे दीयते तु यत्।
गोसहस्रफलं तस्य विष्णुलोके महीयते॥
*अर्थात्*- जो वेदाभ्यास में लगे बटुक को दिया जाता है उसका फल हजार गोदान के बराबर है।दान दाता विष्णुलोक में पूजित होता है।

*3- आधुनिक काल में टार्च,बल्ब आदि के दान का फल?*

शास्त्र में "दीप" का अर्थ है *तम निवारक कोई भी प्रकाश*। तिल का तेल,घी,मणि,बिजली आदि,माध्यम बदला परन्तु फल वही।

*पद्म पुराण का सिद्धांत-*
दीपेन रहिते स्थाने यस्तु दीपं प्रयच्छति।
स याति परमं स्थानं यत्र देवो दिवाकरः॥
*अर्थात्*- बिना दीप के स्थान पर जो दीप देता है वो उस परम स्थान को जाता है जहाँ सूर्य देव रहते हैं।

*दीप- टार्च/बल्ब आदि देने का फल-*
1- *ज्ञान वृद्धि*- स्वयं की बुद्धि तेज होती है बच्चों को विद्या मिलती है।
2- *नेत्र दोष नाश*- अगला जन्म अंधा नहीं होता आँखें तेज होती हैं।
3- *पितृ दोष शांत*- पितरों को रास्ता दिखाने से उनका आशीर्वाद।
4- *अक्षय पुण्य*- बटुक जितने दिन उस टार्च से पढ़ेगा उतना पुण्य रोज मिलेगा।

*4- दान कैसे करें? विधि श्लोक सहित-*

*भविष्य पुराण-*
"तमसो मा ज्योतिर्गमय" इति मन्त्रेण दीपं दद्यात्।
ब्राह्मणाय विशेषेण वेदाभ्यासरताय च॥
*विधि-*
1- टार्च नई बैटरी लगी हो,बल्ब नया हो,
2- हाथ में जल लेकर संकल्प- "बटुक ब्राह्मणानां वेदाभ्यासार्थं प्रकाशदानं करिष्ये"
3- मंत्र बोलें- *ॐ तमसो मा ज्योतिर्गमय*
4- बटुक के हाथ में दें और पैर छुएं
5- कुछ दक्षिणा तथा मिश्री अवश्य दें

*5- सार-*
*"अन्धकारे तु यो दीपं ब्राह्मणाय प्रयच्छति,
स तेजस्वी भवेन्नित्यं विद्यावांश्च प्रजायते"*।
अंधेरे में ब्राह्मण को दीपदान अर्थात् प्रकाश प्रदान करने की वस्तुएं देने से तेज और विद्या दोनों मिलती है।
नोट- अपने संतान (पुत्र/पुत्री) के जीवन में प्रकाश,पितरों की प्रसन्नता तथा अपने जीवन में प्रकाश हेतु बटुक ब्राह्मणों एवं ब्रह्मचारियों को दीप (टार्च/बल्ब) दान अवश्य करें।

*सहयोग हेतु सम्पर्क*-
आचार्य धीरज द्विवेदी "याज्ञिक"
मोबाइल- 9956629515/8318757871
गूगल पे फोन पे- 099566 29515
UPI- dheerajdwivedi288@okaxis
श्री बज्रांग आश्रम देवली (फूलपुर) प्रतापपुर प्रयागराज।

*निवेदक*
आचार्य धीरज "याज्ञिक" जी महाराज
श्रीबज्रांग आश्रम आवासीय गुरुकुल देवली प्रतापपुर फूलपुर प्रयागराज
धीरज द्विवेदी

*वेद-दान हेतु सूचना-पत्र**॥ वेद-विद्या दान — महापुण्य ॥*प्रिय धर्मप्रेमी बंधुओं,बटुक ब्राह्मणों के अध्ययन हेतु *शुक्ल यज...
14/06/2026

*वेद-दान हेतु सूचना-पत्र*

*॥ वेद-विद्या दान — महापुण्य ॥*

प्रिय धर्मप्रेमी बंधुओं,

बटुक ब्राह्मणों के अध्ययन हेतु *शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनि शाखा* के सम्पूर्ण ग्रंथ-संग्रह की आवश्यकता है। इसमें लगभग *35 ग्रंथ* सम्मिलित हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग *₹25,000/-* है।

*शास्त्र-प्रमाण*:
विद्यादानं महादानं सर्वदानेषु चोत्तमम्।
अन्नदानात् परं दानं विद्यादानं प्रकीर्तितम्॥
अर्थात्- विद्या दान महादान है,सभी दानों में विद्या दान उत्तम दान कहा गया है,अन्न दान और विद्या दान अवश्य करना चाहिए।

एक बटुक को वेद-पुस्तक दान करने से निम्न लाभ होता है-
1. *पितरों को अक्षय तृप्ति* प्राप्त होती है
2. *भगवान नारायण की विशेष कृपा* प्राप्त होती है
3. *वेद-परम्परा अक्षुण्ण* रहती है

आप से करबद्ध प्रार्थना है कि अपने *सामर्थ्य अनुसार सहयोग* प्रदान कर इस पुण्य-यज्ञ में भागीदार बनें। ₹251, ₹501, ₹1100 या यथाशक्ति जो भी सहयोग करेंगे, वह वेद-भगवान की सेवा में लगेगा।

*सहयोग हेतु सम्पर्क*-
आचार्य धीरज द्विवेदी "याज्ञिक"
मोबाइल- 9956629515
UPI- dheerajdwivedi288@okaxis
श्री बज्रांग आश्रम देवली प्रतापपुर प्रयागराज।

यस्य दानेन सन्तुष्टा वेदमाता सरस्वती।
तस्य वंशे सदा वासो लक्ष्म्या नारायणेन च॥
अर्थात्- इस वेद के दान से वेदमाता सरस्वती संतुष्ट होती हैं और दानदाता के वंश में सदा लक्ष्मीनारायण के सहित वास करती हैं।

*निवेदक*
आचार्य धीरज याज्ञिक जी महाराज
श्री बज्रांग आश्रम देवली प्रतापपुर प्रयागराज।

वेद-रक्षा में आपका सहयोग अमूल्य है। जय श्रीराम 🙏
आचार्य धीरज "याज्ञिक" जी महाराज
धीरज द्विवेदी

वेद-दान हेतु सूचना-पत्र॥ वेद-विद्या दान-महापुण्य ॥प्रिय धर्मप्रेमी बंधुओं,बटुक ब्राह्मणों के अध्ययन हेतु *शुक्ल यजुर्वेद...
03/05/2026

वेद-दान हेतु सूचना-पत्र

॥ वेद-विद्या दान-महापुण्य ॥

प्रिय धर्मप्रेमी बंधुओं,
बटुक ब्राह्मणों के अध्ययन हेतु *शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनि शाखा* के सम्पूर्ण ग्रंथ-संग्रह की आवश्यकता है। इसमें लगभग 35 ग्रंथ सम्मिलित हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹25,000/- है।

शास्त्र-प्रमाण-
विद्यादानं महादानं सर्वदानेषु चोत्तमम्।
अन्नदानात् परं दानं विद्यादानं प्रकीर्तितम्॥
अर्थात्- विद्या दान महादान है,सभी दानों में विद्या दान उत्तम दान कहा गया है,अन्न दान और विद्या दान अवश्य करना चाहिए।

बटुकों को वेद-पुस्तक दान करने से निम्न लाभ होता है-
1. पितरों को अक्षय तृप्ति प्राप्त होती है
2. भगवान नारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है
3. वेद-परम्परा अक्षुण्ण रहती है

आप से करबद्ध प्रार्थना है कि अपने सामर्थ्य अनुसार सहयोग प्रदान कर इस पुण्य-यज्ञ में भागीदार बनें। ₹251, ₹501, ₹1100 या यथाशक्ति जो भी सहयोग करेंगे, वह वेद-भगवान की सेवा में लगेगा।

सहयोग हेतु सम्पर्क-
आचार्य धीरज द्विवेदी "याज्ञिक"
मोबाइल- 9956629515
UPI- dheerajdwivedi288@okaxis
श्री बज्रांग आश्रम देवली प्रतापपुर प्रयागराज।

यस्य दानेन सन्तुष्टा वेदमाता सरस्वती।
तस्य वंशे सदा वासो लक्ष्म्या नारायणेन च॥
अर्थात्- इस वेद के दान से वेदमाता सरस्वती संतुष्ट होती हैं और दानदाता के वंश में सदा लक्ष्मीनारायण के सहित वास करती हैं।

निवेदक-
आचार्य धीरज "याज्ञिक" जी महाराज
श्रीबज्रांग आश्रम आवासीय गुरुकुल देवली प्रतापपुर फूलपुर प्रयागराज
वेद-रक्षा में आपका सहयोग अमूल्य है। जय श्रीराम 🙏
धीरज द्विवेदी

30/03/2026

गुरुकुलों को पुनः स्थापित करने एवं संरक्षण,संवर्धन हेतु
हमसे जुड़ने के लिए अपना समग्र विवरण टिप्पणी के माध्यम से उद्धृत करें।

यज्ञोपवीत संस्कार में तन,मन,धन से सहयोग करने के फल के विषय में शास्त्रों में कहा गया है कि यह पुण्य,धन तथा मोक्ष की प्रा...
10/02/2026

यज्ञोपवीत संस्कार में तन,मन,धन से सहयोग करने के फल के विषय में शास्त्रों में कहा गया है कि यह पुण्य,धन तथा मोक्ष की प्राप्ति का कारण बनता है। यहाँ कुछ शास्त्र प्रमाण दिए गए हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं-
गरुड़ पुराण में यज्ञोपवीत संस्कार में धन देने के फल के विषय में कहा गया है-
"यज्ञोपवीतद्रव्यदाता धनवान्भवति सर्वदा।
पुत्रवान्कीर्तिमांश्चैव लभते च शुभां गतिम्।।"
(गरुड़ पुराण 2.36.16)
अर्थात्-जो पुरुष यज्ञोपवीत संस्कार के लिए धन देता है,वह सदा धनवान रहता है,पुत्रवान और कीर्तिमान होता है तथा उसे शुभ गति प्राप्त होती है।
मत्स्य पुराण में भी यज्ञोपवीत संस्कार में धन देने के फल के विषय में कहा गया है-
"यज्ञोपवीतार्थे द्रव्यं यः प्रयच्छति मानवः।
स तु पुण्यफलं भुक्त्वा स्वर्गलोके महीयते।।"
(मत्स्य पुराण 42.13)
अर्थात्-जो पुरुष यज्ञोपवीत संस्कार के लिए धन देता है वह पुण्य का फल भोगकर स्वर्गलोक में सम्मानित होता है।
स्कंद पुराण में यज्ञोपवीत संस्कार में मन और वाणी से सहयोग करने के फल के विषय में कहा गया है-
"यज्ञोपवीते यः कुर्यात्सहाय्यं मनसा गिरा।
सर्वपापविनिर्मुक्तः स लभते शुभां गतिम्।।"
(स्कंद पुराण 2.1.13)
अर्थात्-जो पुरुष यज्ञोपवीत संस्कार में मन और वाणी से सहयोग करता है वह समस्त पापों से मुक्त होकर शुभ गति प्राप्त करता है।
इन शास्त्र प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि यज्ञोपवीत संस्कार में तन,मन एवं धन से सहयोग करने वाला व्यक्ति पुण्य,धन,और मोक्ष की प्राप्ति करता है,जो उसके जीवन को सार्थक और सफल बनाता है।
अतः आप भी अपना सहयोग प्रदान कर पुण्य के भागी बनें।
गूगल पे फोन पे नंबर- 9956629515

04/02/2026

आमंत्रण-
आदरणीय समस्त धर्मज्ञ महानुभाव जी-
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी आश्रम में नवागन्तुक बटुक विद्यार्थियों के यज्ञोपवीत संस्कार के उपलक्ष में श्रीहनुमत् रुद्र महायज्ञ एवं श्रीरामकथा तथा विशाल संत-समागम का आयोजन किया गया है जिससे आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं।
कार्यक्रम निम्नलिखित हैं-
श्री हनुमत् रुद्र महायज्ञ एवं श्रीरामकथा प्रारंभ दि.-15/02/26 दिन रविवार से।
पूजन का समय प्रातः 6 बजे से 12 बजे तक (प्रतिदिन)।
कथा का समय 2 बजे से 5 बजे तक (प्रतिदिन)
यज्ञोपवीत संस्कार - 20/02/26 दिन शुक्रवार प्रातः 6 बजे से 12 बजे तक
संत-समागम - 2 बजे से से 5 बजे तक
तत्पश्चात प्रसाद वितरण
निवेदक-
आचार्य धीरज याज्ञिक
श्री बज्रांग आश्रम देवली प्रतापपुर प्रयागराज
9956629515
8318757871
नोट - यज्ञोपवीत संस्कार निःशुल्क कराया जाएगा।जो महानुभाव अपने पुत्र का यज्ञोपवीत संस्कार कराना चाहते हैं संपर्क करें।

18/12/2025

पूज्य #जगद्गुरु #शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज का #स्वागत करते #विद्यार्थी, #स्वदेशी प्रतिभा खोज #प्रतियोगिता एवं स्वदेशी #मेला के शुभारंभ के अवसर पर,उत्तर मध्य क्षेत्र #सांस्कृतिक केन्द्र #प्रयागराज में।

श्री बज्रांग आश्रम देवली द्वारा असहाय वृद्धों को किया गया कंबल वितरितप्रतापपुर - क्षेत्र के देवली ग्राम में स्थित श्री ब...
18/12/2025

श्री बज्रांग आश्रम देवली द्वारा असहाय वृद्धों को किया गया कंबल वितरित

प्रतापपुर - क्षेत्र के देवली ग्राम में स्थित श्री बज्रांग आश्रम द्वारा निर्धन एवं असहाय वृद्धों को कंबल वितरित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ आभा त्रिपाठी लेक्चरर कुलभास्कर डिग्री कालेज प्रयागराज ने मंदिर में स्थित श्री हनुमान जी महाराज एवं श्री पंचानन महादेव जी का पूजन कर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आश्रम के द्वारा किया जा रहा यह कार्य सराहनीय है प्राचीनकाल से ही आश्रमों द्वारा समाज की सेवा और उत्थान का कार्य होता आया है आश्रम के संचालक आचार्य धीरज द्विवेदी "याज्ञिक" ने बताया कि आश्रम के लिए दान दाताओं द्वारा प्राप्त सामग्री कंबल वस्त्र आदि जो विद्यार्थियों के उपयोग से बढ़ जाता है वह सामग्री आश्रम के आस-पास रह रहे दीन दुखियों जरूरतमंदों तथा अन्यत्र भी जहां जिसको आवश्यकता होती है उनको प्रदान कर दिया जाता है आज इसी क्रम में निर्धन असहाय वृद्धों को कंबल वितरित किया गया। आचार्य धीरज ने कहा कि ठंडी में ऊंनी वस्त्रों का दान कल्याणकारी एवं शुभदायक होता है।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रबंधक वंदना मिश्रा,विहिप प्रतापपुर प्रखंड उपाध्यक्ष कंचन मिश्रा,समाजसेवी शशिकला दुबे,उमा शुक्ला,मीना पाण्डेय,प्राचार्य डॉ त्रयंबकनाथ उपाध्याय,कौशलेंद्र मिश्र,अखिलेश मौर्य,रोहित शर्मा,कृष्णकांत ओझा,अजय शुक्ल,श्यामसुंदर पाण्डेय,ज्ञानेश कुमार दुबे सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में कंबल लेने वाले उपस्थित रहे।
श्रीबज्रांग आश्रम आवासीय गुरुकुल देवली प्रतापपुर फूलपुर प्रयागराज
Shri Rajendra das ji Maharaj Malook Peeth Vrindavan
Narendra Modi
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MyGovIndia Jagadguru Rambhadracharya Ji
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आचार्य धीरज "याज्ञिक" जी महाराज
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