19/06/2026
*वेद पढ़ने वाले ब्रह्मचारियों एवं बटुक ब्राह्मणों को दीप (टार्च/बल्ब) दान का फल*-
शास्त्रों में "दीपदान" और "विद्यादान का महत्व अत्यधिक कहा गया है,ब्रह्मचारियों एवं बटुक ब्राह्मणों को दीपदान करना विद्यादान में सहायता" के अंतर्गत ही आता है।"तम नाशक प्रकाश दान" का उत्तम फल यही है।
*1- श्लोक प्रमाण- दीपदान के फल का-*
*स्कन्द पुराण-काशी खंड- 9/73 में वर्णित-*
दीपदो ज्ञानदः प्रोक्तो विद्यादानेन तत्समः।
ब्राह्मणे वेदपाठे च दीपं दत्त्वा दिवं व्रजेत्॥
*अर्थात्*- दीप देने वाला ज्ञान देने वाले के समान है। *ब्राह्मण जब वेदपाठ करे,उस समय दीप दान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है*।
*गरुड़ पुराण-प्रेत कल्प- 29/21-*
अन्धकारे तु यो दीपं ब्राह्मणाय प्रयच्छति।
स तेन कर्मणा विद्वान् तेजस्वी जायते नरः॥
*अर्थात्*- जो अंधेरे में ब्राह्मण को दीप देता है,वो मनुष्य उस कर्म से तेजस्वी और विद्वान होता है।
*2- बटुक ब्राह्मण एवं ब्रह्मचारी को दान का विशेष फल-*
*मनुस्मृति- 2/109-*
ब्रह्मचारिणे च यद् दत्तं विद्याधर्मार्थमेव च।
तदक्षय्यं भवेत् सर्वं दातुर्भवति शाश्वतम्॥
*अर्थात्*- ब्रह्मचारी को विद्या और धर्म के लिए जो दिया जाता है वो सब अक्षय हो जाता है। दाता को शाश्वत फल मिलता है।
*पराशर स्मृति- 12/52-*
वेदाभ्यासरतायाथ बटवे दीयते तु यत्।
गोसहस्रफलं तस्य विष्णुलोके महीयते॥
*अर्थात्*- जो वेदाभ्यास में लगे बटुक को दिया जाता है उसका फल हजार गोदान के बराबर है।दान दाता विष्णुलोक में पूजित होता है।
*3- आधुनिक काल में टार्च,बल्ब आदि के दान का फल?*
शास्त्र में "दीप" का अर्थ है *तम निवारक कोई भी प्रकाश*। तिल का तेल,घी,मणि,बिजली आदि,माध्यम बदला परन्तु फल वही।
*पद्म पुराण का सिद्धांत-*
दीपेन रहिते स्थाने यस्तु दीपं प्रयच्छति।
स याति परमं स्थानं यत्र देवो दिवाकरः॥
*अर्थात्*- बिना दीप के स्थान पर जो दीप देता है वो उस परम स्थान को जाता है जहाँ सूर्य देव रहते हैं।
*दीप- टार्च/बल्ब आदि देने का फल-*
1- *ज्ञान वृद्धि*- स्वयं की बुद्धि तेज होती है बच्चों को विद्या मिलती है।
2- *नेत्र दोष नाश*- अगला जन्म अंधा नहीं होता आँखें तेज होती हैं।
3- *पितृ दोष शांत*- पितरों को रास्ता दिखाने से उनका आशीर्वाद।
4- *अक्षय पुण्य*- बटुक जितने दिन उस टार्च से पढ़ेगा उतना पुण्य रोज मिलेगा।
*4- दान कैसे करें? विधि श्लोक सहित-*
*भविष्य पुराण-*
"तमसो मा ज्योतिर्गमय" इति मन्त्रेण दीपं दद्यात्।
ब्राह्मणाय विशेषेण वेदाभ्यासरताय च॥
*विधि-*
1- टार्च नई बैटरी लगी हो,बल्ब नया हो,
2- हाथ में जल लेकर संकल्प- "बटुक ब्राह्मणानां वेदाभ्यासार्थं प्रकाशदानं करिष्ये"
3- मंत्र बोलें- *ॐ तमसो मा ज्योतिर्गमय*
4- बटुक के हाथ में दें और पैर छुएं
5- कुछ दक्षिणा तथा मिश्री अवश्य दें
*5- सार-*
*"अन्धकारे तु यो दीपं ब्राह्मणाय प्रयच्छति,
स तेजस्वी भवेन्नित्यं विद्यावांश्च प्रजायते"*।
अंधेरे में ब्राह्मण को दीपदान अर्थात् प्रकाश प्रदान करने की वस्तुएं देने से तेज और विद्या दोनों मिलती है।
नोट- अपने संतान (पुत्र/पुत्री) के जीवन में प्रकाश,पितरों की प्रसन्नता तथा अपने जीवन में प्रकाश हेतु बटुक ब्राह्मणों एवं ब्रह्मचारियों को दीप (टार्च/बल्ब) दान अवश्य करें।
*सहयोग हेतु सम्पर्क*-
आचार्य धीरज द्विवेदी "याज्ञिक"
मोबाइल- 9956629515/8318757871
गूगल पे फोन पे- 099566 29515
UPI- dheerajdwivedi288@okaxis
श्री बज्रांग आश्रम देवली (फूलपुर) प्रतापपुर प्रयागराज।
*निवेदक*
आचार्य धीरज "याज्ञिक" जी महाराज
श्रीबज्रांग आश्रम आवासीय गुरुकुल देवली प्रतापपुर फूलपुर प्रयागराज
धीरज द्विवेदी