Padila Mahadev Temple (पड़िला महादेव मंदिर,इलाहबाद)

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Padila Mahadev Temple (पड़िला महादेव मंदिर,इलाहबाद) The temple is dedicated to Lord Shiva. They stayed here for a night and on the advice of Rishi Bharadwaj they installed the Shivling here.

Location : Located at a distance of about 16 km from Allahabad on Allahabad-Pratapgarh Road (NH-96), in Paidila, district Allahabad, U.P., India

Timings/opening : 4am-9pm, opens on all days

In the Panch koshi Parikrama of Prayag, Paidila Mahadev has a very special place. It is believed that the temple is as old as Dwapar Period and this place was visited by Pandavas during their journey to Patli

putra. Hence, the temple is named Pandeshwar (Paidila Mahadev).Monday, Shivratri, Shravan month, & Purushottam month are considered auspicious; when the temple is visited by thousands of devotees and different kind of pujas are conducted by the devotees.

07/08/2017

रक्षाबंधन(7 अगस्त 2017)
#श्रावण_शुक्ल_पूर्णिमा
राखी का त्योहार भारत मे भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस बार रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण पड़ रहा है, सोमवार को पड़ने वाले चंद्रग्रहण को #चूणामणि_चंद्रग्रहण कहते है ।
चन्द्रग्रहण समय :
#आरम्भ - 7 अगस्त रात्रि 10:52 से ,
#समाप्ति - 8 अगस्त रात्रि 12:49 पर ।
सूतक : 7 अगस्त दोपहर 1:52 मिनट पर सूतक लगेेगा ।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त - सुबह 11:07 से दोपहर 1:52 तक ।

21/07/2017

#सावन_शिवरात्रि 21 जुलाई 2017
#श्रावण_कृष्ण_चतुर्दशी को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है । भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे योग्य माह का सबसे योग्य दिवस सावन शिवरात्रि कहा जाता है इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल से अभिषेक करने का विशेष महत्व है ।
तिथि आरम्भ: 21 जुलाई 21 बजकर 49 मिनट
तिथि समाप्त: 22 जुलाई को 6 बजकर 27 मिनट ।
श्रावण शिवरात्रि की सभी भक्तों को शुभ कामनाएं

05/06/2017

#निर्जला_एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी) 5 जून 2017, सोमवार
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं , इसे #भीम_एकादशी तथा #पांडव_एकादशी के नाम से भी जाना जाता है । यह साल की २४ एकादशियो में सबसे कठिन है इस दिन उपवास में भोजन और जल ग्रहण नहीं करते हैं ।

25/05/2017

#शनि_जयंती (25 मई 2017,गुरुवार)
ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि देव की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन महिलाएं वट सावित्री का वृत अपने पति की लंबी आयु की कामना हेतु रखती हैं ।
इस दिन गंगा स्नान और दान का भी महत्व है ।

30/11/2012

प्रसिद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल भयहरणनाथ धाम भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य के जनपद प्रतापगढ़ के मुख्यालय के दक्षिण लगभग ३० किलोमीटर तथा इलाहबाद मुख्यालय के उत्तर लगभग ३६ किलोमीटर पर स्थित है ग्राम पुरे वैष्णव व ग्रामसभा पुरे तोरई के अर्न्तगत आने वाला "भयहरण नाथ धाम" लगभग १० एकड़ के क्षेत्रफल में फैला है| इस धाम में मुख्य मंदिर के अलावा हनुमान, शिव-पार्वती, संतोषी माँ तथा राधा कृष्ण आदि का मंदिर है| अपनी प्राकृतिक एवं अनुपम छटा तथा बकुलाही नदी के तट पर स्थित होने के कारण यह स्थल आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यन्त जीवन्त है|यह धाम आसपास के क्षेत्रों के लाखो लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र है |

लोकमान्यता है कि महाभारत काल में द्युत क्रीडा में पराजित होने के बाद पाण्डवों को जब १२ वर्षो के लिए वनवास में जाना पड़ा था उसी दौरान उनके द्वारा इसी स्थल पर बकासुर नामक राक्षस का वध करके शिवलिंग की स्थापना की गयी थी | कहा जाता है कि पाण्डवों ने अपने आत्मविश्वास को पुनर्जागृत करने के लिए इस शिवलिंग को स्थापित किया था इसी नाते इसे "भयहरणनाथ" कि संज्ञा से संबोधित किया गया | इस क्षेत्र में महाभारत काल के और कई पौराणिक स्थल तथा भग्नावशेष आज भी मौजूद है, जिसमे ऊँचडीह गांव का टीला तथा उसकी खुदाई में प्राप्त मूर्तियाँ, स्वरूपपुर गांव का सूर्य मन्दिर तथा कमासिन में कामाख्या देवी का मन्दिर प्रमुख है | इस सब के सम्बन्ध तरह - तरह की लोक श्रुतियाँ, लोक मान्यतायें प्रचलित हैं |
इस प्राचीनतम धार्मिक स्थल पर महाशिवरात्रि के दिन सैकडो वर्षो से विशाल मेला लगता आ रहा है, जिसमे लाखों लोग शामिल होते है | साथ ही प्रत्येक मंगलवार को हजारों की संख्या में क्षेत्रीय जन समुदाय शिवलिंग पर जल तथा पताका चढाने हेतु मन्दिर परिसर में एकत्रित होता है | महाशिवरात्रि के पर्व पर ही वर्ष २००१ से चार दिवसीय महाकाल महोत्सव का आयोजन भव्य तरीके से किया जाता है | जिसमे विविध धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है |देश विदेश के प्रवुद्ध व विद्वान लो़ग जहां धाम में आकर महोत्सव तथा अन्य आयोजनों में शामिल होते है | वहीं क्षेत्रीय जन महोत्सव में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेकर आनन्द,देश विदेश के प्रवुद्ध व विद्वान लो़ग जहां धाम में आकर महोत्सव तथा अन्य आयोजनों में शामिल होते है | वहीं क्षेत्रीय जन महोत्सव में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेकर आनन्द, ज्ञान व उत्साह की प्राप्ति करते है | प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी वर्ष २००३ में धाम में आकर यहां के शिवलिंग की पूजा अर्चना के बाद इसे अदभुत बताया |
धाम के विकास हेतु क्षेत्रीय लोगो के द्वारा भयहरणनाथ धाम क्षेत्रीय विकास संस्थान का गठन किया गया है | यह संस्थान धाम के विकास के साथ साथ आस पास के ५० गांवों के विकास के लिया प्रयासरत है | धाम पर स्थित पंचपरमेश्वर ग्रामीण सचल पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र, सचल कृषि संस्थान, भयहरणनाथ धाम इरादा ज्ञान पीठ, चरक बाटिका आदि का अनवरत संचालन हो रहा है वहीं सत्तत सामयिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं|
www.bhayaharannathdham.com

11/10/2012

यह स्थान सोराँव तहसील में फाफामऊ कस्बे से ३ किमी उत्तर पूर्व में स्थित हैं। किंवदन्ती है कि श्री कृष्ण की सलाह पर यहाँ पाण्ड्वों ने भगवान शंकर के लिंग की स्थापना अपने वनवासकाल के दौरान किया था। यह मन्दिर पूर्ण रूप से पत्थरों से बना हुआ है। गजेटियर के अनुसार यहाँ शिवरात्रि व फाल्गुन कृष्ण १५ को मेला लगता है।

In the Panch koshi Parikrama of Prayag, Paidila Mahadev has a very special place. The temple is dedicated to Lord Shiva....
11/10/2012

In the Panch koshi Parikrama of Prayag, Paidila Mahadev has a very special place. The temple is dedicated to Lord Shiva. It is believed that the temple is as old as Dwapar Period and this place was visited by Pandavas during their journey to Patliputra. They stayed here for a night and on the advice of Rishi Bharadwaj they installed the Shivling here. Hence, the temple is named Pandeshwar (Paidila Mahadev).Monday, Shivratri, Shravan month, & Purushottam month are considered auspicious; when the temple is visited by thousands of devotees and different kind of pujas are conducted by the devotees.

Padila Mahadev Temple in Allahabad
11/10/2012

Padila Mahadev Temple in Allahabad

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