Mankameshwar Mandir Lalapur Bhatpura Allahabad

Mankameshwar Mandir  Lalapur Bhatpura Allahabad श्री केदार नाथ ज्योतिर्लिंग के उपशिव लिंग के रूप में विराज मान सबके मन की कामनाओं की पूर्ति करने वाले

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ॐ नमः शिवाय

29/01/2026

हर हर महादेव

28/01/2026

हर हर महादेव

*🍁 धन, पुत्र, वही जो परमार्थ में लगे 🍁*     एक सेठ बड़ा साधु सेवी था। जो भी सन्त महात्मा नगर में आते वह उन्हें अपने घर बु...
14/01/2026

*🍁 धन, पुत्र, वही जो परमार्थ में लगे 🍁*

एक सेठ बड़ा साधु सेवी था। जो भी सन्त महात्मा नगर में आते वह उन्हें अपने घर बुला कर उनकी सेवा करता। एक बार एक महात्मा जी सेठ के घर आये। सेठानी महात्मा जी को भोजन कराने लगी। सेठ जी उस समय किसी काम से बाज़ार चले गये।

भोजन करते करते महात्मा जी ने स्वाभाविक ही सेठानी से कुछ प्रश्न किये। पहला प्रश्न यह था कि तुम्हारा बच्चे कितने हैं ? सेठानी ने उत्तर दिया कि ईश्वर की कृपा से चार बच्चे हैं।
महात्मा जी ने दूसरा प्रश्न किया कि तुम्हारा धन कितना है? उत्तर मिला कि महाराज! ईश्वर की अति कृपा है लोग हमें लखपति कहते हैं।

महात्मा जी जब भोजन कर चुके तो सेठ जी भी बाज़ार से वापिस आ गये और सेठ जी महात्मा जी को विदा करने के लिये साथ चल दिये।

मार्ग में महात्मा जी ने वही प्रश्न सेठ से भी किये जो उन्होंने सेठानी से किये थे। पहला प्रश्न था कि तुम्हारे बच्चे कितने हैं? सेठ जी ने कहा महाराज! मेरा एक पुत्र है।

महात्मा जी दिल में सोचने लगे कि ऐसा लगता है सेठ जी झूठ बोल रहे हैं। इसकी पत्नी तो कहती थी कि हमारे चार बच्चे हैं और हमने स्वयं भी तीन-चार बच्चे आते-जाते देखे हैं और यह कहता है कि मेरा एक ही पुत्र है।

महात्मा जी ने दुबारा वही प्रश्न किया, सेठ जी तुम्हारा धन कितना है? सेठ जी ने उत्तर दिया कि मेरा धन पच्चीस हज़ार रूपया है। महात्मा जी फिर चकित हुए इसकी सेठानी कहती थी कि लोग हमें लखपति कहते हैं। इतने इनके कारखाने और कारोबार चल रहे हैं और यह कहता है मेरा धन पच्चीस हज़ार रुपये है।

महात्मा जी ने तीसरा प्रश्न किया कि सेठ जी! तुम्हारी आयु कितनी है? सेठ ने कहा-महाराज मेरी आयु चालीस वर्ष की है महात्मा जी यह उत्तर सुन कर हैरान हुए सफेद इसके बाल हैं, देखने में यह सत्तर-पचहत्तर वर्ष का वृद्ध प्रतीत होता है और यह अपनी आयु चालीस वर्ष बताता है।
सोचने लगे कि सेठ अपने बच्चों और धन को छुपाये परन्तु आयु को कैसे छुपा सकता है?

महात्मा जी रह न सके और बोले-सेठ जी! ऐसा लगता है कि तुम झूठ बोल रहे हो?
सेठ जी ने हाथ जोड़कर विनय की महाराज!
झूठ बोलना तो वैसे ही पाप है और विशेषकर सन्तोंं के साथ झूठ बोलना और भी बड़ा पाप है।

आपका पहला प्रश्न मेरे बच्चों के विषय में था। वस्तुतः मेरे चार पुत्र हैं किन्तु मेरा आज्ञाकारी पुत्र एक ही है। भक्ति भाव पूजा पाठ में लगा हुआ है मैं उसी एक को ही अपना पुत्र मानता हूँ। जो मेरी आज्ञा में नहीं रहते कुसंग के साथ रहते हैं वे मेरे पुत्र कैसे?

दूसरा प्रश्न आपका मेरा धन के विषय में था। महाराज! मैं उसी को अपना धन समझता हूँ जो परमार्थ की राह में लगे। मैने जीवन भर में पच्चीस हज़ार रुपये ही परमार्थ की राह में लगाये हैं वही मेरी असली पूँजी है। जो धन मेरे मरने के बाद मेरे पुत्र बन्धु-सम्बन्धी ले जावेंगे वह मेरा क्यों कर हुआ?

तीसरे प्रश्न में आपने मेरी आयु पूछी है। चालीस वर्ष पूर्व मेरा मिलाप एक संत जी से हुआ था। उनकी सेवा चरण-शरण ग्रहण करके गुरु धारण किए मैं तब से भजन-अभ्यास और साधु सेवा कर रहा हूँ। इसलिये मैं इसी चालीस वर्ष की अवधि को ही अपनी आयु समझता हूँ।

कबीर संगत साध की, साहिब आवे याद।
लेखे में सोई घड़ी, बाकी दे दिन बाद। ।
जब कभी सन्त महापुरुषों का मिलाप होता है-
उनकी संगति में जाकर मालिक की याद आती है,
वास्तव में वही घड़ी सफल है। शेष दिन जीवन के निरर्थक

*🌳 पान का बीड़ा 🌳*तीन साधु थे, यात्रा कर रहे थे यमुना किनारे उनमें तीसरा साधु जो था वो बुढा था, वृद्ध था, उसने कहा ''भाई...
01/09/2025

*🌳 पान का बीड़ा 🌳*

तीन साधु थे, यात्रा कर रहे थे यमुना किनारे उनमें तीसरा साधु जो था वो बुढा था, वृद्ध था, उसने कहा ''भाई हम इस गाँव के बाहर मन्दिर में आसन लगा के यहां रहेगे'' तुम तो जवान हो, तुम चलेे जाओ।
तो दो जवान साधु आगे गये
चलते-चलते संध्या हो गयी दोनों साधुओं ने सोचा अब बरसाना आ रहा है, राधा रानी जी का गाँव, क्या करेंगे ? मांगेगे कहाँ ?
बोले मांगना कहाँ हम तो राधारानी के मेहमान है, खिलाएगी तो खा लेंगे नहीं तो मन्दिर में आरती के समय कहीं कुछ प्रसाद मिलेगा वो खा के पानी पिलेगें..!

साधुओं ने मज़ाक-मज़ाक में ऐसा कहा, वो साधु पहुंच गये बरसाना और बरसाना में आरती हुई, मन्दिर में उत्सव भी हुआ था

साधु बाबा बोले मांगेगे तो नहीं राधारानी के मेहमान है, ऐसे कह कर साधु सो गये।

रात्रि में 11 बजे राधारानी जी के पुजारी को राधारानी जी ने ऐसा जगाया, राधा रानी बोली ''मेहमान हमारे भूखे हैं, तू सो रहा है।
''पुजारी जी ने पूछा मेहमान कौन है ?

राधा रानी जी ने कहा वह दो साधु...
पुजारी के तो होश-हवास उड़ गये, पुजारी उठे, सोये साधुओं को उठाया तुम, तुम राधारानी के मेहमान हो क्या ?
साधु बोले नहीं हम तो ऐसे ही

पुजारी बोले नहीं आप बैठो हाथ-पैर धोये पत्तले लायें और अच्छे से अच्छा जो मन्दिर का प्रसाद था, उत्सव का प्रसाद था, जो भी था, लड्डू, रसगुल्ले, खीर बस टनाटन पक्की रसोई जिमाई।

वो साधु थोड़ा टहल के बोले, राधा रानी जी हमने तो मज़ाक में कहा था तुमने सचमुच में हमको मेहमान बना लिया माँ, हे राधे मैया...

साधु राधारानी का चिन्तन करते-करते सो गये, दोनों साधुओं को एक जैसा सपना आया।

सपने में वो 12 साल की राधारानी बोलतीं है...
साधु बाबा भोजन तो कर लिया आपने, तृप्त तो हो गये, भूख तो मिट गयी ?
भोजन तो अच्छा रहा ? साधु बोले हाँ
भोजन, जल आपको सुखद लगे ?
साधु बोले हाँ
अब कोई और आवश्यकता है क्या ?
साधु बोले नहीं-नहीं मैया

राधारानी बोलीं देखो वो पुजारी डरा-डरा तुमको भोजन तो कराया लेकिन मेरा पान बीडे का प्रसाद देना भूल गया
लो ये मैं पान बीडा देती हूँ आपको, ऐसा कहकर उनके सिरहाने पर रखा दिया

सपने में देख रहे हैं के राधारानी जी सिरहाने पर पान बीडा रख रही है ऐसे ही उनकी आँख खुल गई।

देखा तो सचमुच में पान बीड़ा सिरहाने पर है दोनों साधुओं के!

मेरी राधा प्यारी की कृपा का क्या कहना..

ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव
17/08/2025

ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव

*🌳 बुद्धि का भ्रम 🌳*एक सज्जन का नियम था कि प्रतिदिन तीन निर्धन लोगों को भोजन कराने के पश्चात् ही स्वयं भोजन करते थे। एक ...
13/08/2025

*🌳 बुद्धि का भ्रम 🌳*

एक सज्जन का नियम था कि प्रतिदिन तीन निर्धन लोगों को भोजन कराने के पश्चात् ही स्वयं भोजन करते थे।

एक दिन बहुत खोजने पर भी कोई निर्धन नही मिला।

दोपहर हो गई। त्योहार निकट थी। दुकानों पर नाना प्रकार की मिठाइयाँ और चीनी के खिलौने सजे थे। एक हलवाई ने चीनी से व्यक्ति की आकृति बना रखे थे।

इन्होंने देखा तो सोचा, दूसरे निर्धन तो मिले नहीं, चीनी से बने इन निर्धनों को ही ले चलो। इन्हीं को भोग लगाकर भोजन कर लेंगे।

तीन चीनी के मिटाई नुमा व्यक्ति खरीदकर वे घर आए तो देखा कि वहाँ तीन वास्तविक निर्धन लोग खड़े हैं।

उसने उनका स्वागत करते हुए कहा- भाइयों ! मैं तो सुबह से आपको ही खोज रहा था। आएँ भोजन करें।

उसने तीनों निधनो को बैठाया और पत्नी से बोले- तुम शीघ्रता से भोजन बनाओ, मैं बाजार से दही ले आता हूँ।

वह बाजार चले गए, पत्नी भोजन बनाने लगी।

इतने में ही उनका पुत्र भीतर आया। उसने थैले में पड़े वे चीनी से बने मिठाई नुमा व्यक्ति देखे तो बोला- माँ! एक व्यक्ति तो मैं खाऊँगा।

साथ वाले कमरे में बैठे व्यक्तियों ने यह बात सुनी तो घबराए।

इतने में उस माँ की आवाज आई- इतना उतावला क्यों होता है? अभी तेरे पिताजी आएँगे। यहाँ व्यक्ति तीन हैं। एक तुम खाना, एक तेरे पिताजी खाएँगे, एक मैं खाऊँगी।

उन तीनों व्यक्तियों ने जब यह बात सुनी तो उनके होश उड़ गये कि आख़िर हम लोग कहाँ आकर फंस गए? ये लोग तो मनुष्यो तक को खाते हैं, मनुष्य नहीं राक्षस मालूम पड़ते हैं।

उसके बाद एक व्यक्ति लघुशंका के बहाने घर से बाहर हो गया। दूसरे ने भी ऐसा ही किया, तीसरे ने भी। तीनों ने अपने अपने जूते उठाए और लगे भागने।

सामने से वही सज्जन दही लेकर आ रहे थे। देखा तो पत्नी से पूछा- क्या हुआ?

वह बोली- मुझे तो पता नहीं, वे लघुशंका जाने की बात कह रहे थे। न जाने क्यों भाग रहे हैं?

वह सज्जन तो सुबह से ही भूखे थे। उन तीन व्यक्तियों के पीछे भागे, बोले- भाइयों ! कहाँ भागे जाते हो? हम लोग तो सुबह से भूखे हैं।

उन व्यक्तियों ने दौड़ते हुए कहा- आज तो ये दुष्ट हमें ही खाकर अपनी भूख मिटाएँगे।

अन्ततः वह सज्जन उन तीनों व्यक्तियों के पास पहुँचे। उनकी बात सुनी, उन्हें चीनी के मिटाई नुमा व्यक्तियों की बात बताई, तब उन तीनों की जान में जान आई और फ़िर उन सब ने भोजन किया।

इसलिए अगर पूरी बात मालूम न होने से अच्छी भली बुद्धि में भी भ्रम पैदा हो जाता है।

*पोस्ट जानकारी अच्छी लगे तो अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं और पुण्य कमाएं..*

हर हर महादेव

Address

भटपुरा लालापुर प्रयागराज उत्तर प्रदेश
Allahabad
212107

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