Purshottam panda pilikothi prayag

Purshottam panda pilikothi prayag LATE PURSHOTTAM LAL SHARMA
(PILIKOTHI WALE)
MOB : 9415431119, 9335121046 MOB÷ 9335121046 , 9455407425

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31/10/2024

"आप चलने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, मुझे वह प्रकाश बनने दो जो आपके रास्ते को रोशन करता है। यह दीपावली आपके जीवन को भीतर और बिना प्रकाशमय करे।

प्यार और आशीर्वाद,

आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाईमाँ गंगा आप सभी का कल्याण करें
31/10/2024

आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
माँ गंगा आप सभी का कल्याण करें

पुरुषोत्तम लाल पीली कोठी प्रयागराज ( हरियाणा,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा के तीर्थ पुरोहित ) मोबाइल नंबर: 9415431119 : ...
20/08/2024

पुरुषोत्तम लाल पीली कोठी प्रयागराज ( हरियाणा,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा के तीर्थ पुरोहित )
मोबाइल नंबर: 9415431119 : 7007730227

हर हर शंभू ओम नमः शिवाय पुरुषोत्तम लाल पीली कोठी मोबाइल :  094154 31119 : 7007730227
20/08/2024

हर हर शंभू
ओम नमः शिवाय
पुरुषोत्तम लाल पीली कोठी
मोबाइल : 094154 31119 : 7007730227

17/04/2024
ओम नमः शिवाय
04/09/2020

ओम नमः शिवाय

04/09/2020

|•| जय सियाराम |•|

( श्रीमद्भागवत महापुराण )
प्रथम स्कन्ध
-: अथ द्वादशोध्याय: :-
अङ्गुष्ठमात्रममलं स्फुरत्पुरटमौलिनम ।
अपीच्यदर्शनं श्यामं तडिद्वाससमच्युतम।।८
// भावार्थ //
उत्तरा के गर्भ में परीक्षित ने देखा कि देखने में तो अंगूठे भर का है, परन्तु उसका स्वरुप बहुत निर्मल है, अत्यन्त सुन्दर श्याम शरीर है, बिजली के समान चमकता हुआ पीताम्बर धारण किये हुए हैं, सिरपर सोने का मुकुट झिलमिला रहा है। उस निर्विकार पुरुष के बड़ी ही सुन्दर लम्बी लम्बी चार भुजाएं हैं।

श्रीमद्दीर्घचतुर्बाहुं तप्तकान्चनकुण्डलम ।
क्षतजाक्षं गदापाणिमात्मन: सर्वतोदिशम ।
परिभ्रमन्तमुल्काभां भ्रामयन्तं गदां मुहु:।।९
// भावार्थ //
कानों में तपाये हुए स्वर्ण के सुन्दर कुण्डल हैं, आंखों में लालिमा है, हाथ में लूके के समान जलती हुई गदा लेकर उसे बार बार घुमाता जा रहा है। और स्वयं शिशु के चारों ओर घूम रहा है।

अस्त्रतेज: स्वगदया नीहारमिव गोपति: ।
विधमन्तं संनिकर्षे पर्यैक्षत क इत्यसौ।।१०
// भावार्थ //
जैसे सूर्य अपनी किरणों से कुहरे को भगा देते हैं, वैसे ही वह उस गदा के द्वारा ब्रह्मास्त्र के तेज को शांत करता रहा था। उस पुरुष को अपने समीप देखकर वह गर्भस्थ शिशु सोचने लगा कि यह कौन है।

विधूय तदमेयात्मा भगवान्धर्मगुब विभु: ।
मिषतो दशमास्यस्य तत्रैवान्तर्दधे हरि:।।११
// भावार्थ //
इस प्रकार उस दस मास के गर्भस्थ शिशु के सामने ही धर्म रक्षक अप्रमेय भगवान श्री कृष्ण ब्रह्मास्त्र के तेज को शान्त करके वहीं अन्तर्ध्यान हो गये।

तत: सर्वगुणोदर्के सानुकूलग्रहोदये ।
जज्ञे वंशधर: पाण्डोर्भूय: पाण्डुरिवौजसा।।१२
// भावार्थ //
तदनन्तर अनुकूल ग्रहों के उदय से युक्त समस्त सद्गुणों को विकसित करने वाले शुभ समय में पाण्डु के वंशधर परीक्षित का जन्म हुआ। जन्म के समय ही वह बालक इतना तेजस्वी दीख पड़ता था मानो स्वयं पाण्डु ने ही फिर से जन्म लिया हो।

तस्य प्रीतमना राजा विप्रैर्धौम्यकृपादिभि: ।
जातकं कारयामास वाचयित्वा च मङ्गलम।।१३
// भावार्थ //
पौत्र के जन्म की बात सुनकर राजा युधिष्ठिर मन में बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने धौम्य कृपाचार्य आदि ब्राह्मणों से मंगल वाचन और जातकर्म संस्कार करवाये।

हिरण्यं गां महीं ग्रामान हस्त्यश्वान्नृपतिर्वरान ।
प्रादात्स्वन्नं च विप्रेभ्य: प्रजातीर्थे स तीर्थवित।।१४
// भावार्थ //
महाराज युधिष्ठिर दान के योग्य समय को जानते थे, उन्होंने प्रजातीर्थ नामक काल में अर्थात नाल काटने के पहले ही ब्राह्मणों को सुवर्ण, गौएं, पृथ्वी, गांव, उत्तम जाति के हाथी घोड़े और उत्तम अन्न का दान दिया। शेष कल

04/09/2020

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