माँ पीताम्बरा ज्योतिष सेवा संस्थान अलीगढ़

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10/03/2016
03/03/2016

महाशिवरात्रि साधक को आध्यात्मिक शिखर पर ले जा सकती है, अगर वह इस दिन प्र्रकृति से सही तादात्म्य बना ले। इस दिन साधक में सहज रूप से ही ऐसी ऊर्जा निर्मित होती है, जो उसे शिव के तीसरे नेत्र के समान एक नई आध्यात्मिक दृष्टि देने में सक्षम है।

द्रमास के कृष्णपक्ष का 14वां या अमावस्या से पहले वाला दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक पंचांग वर्ष की सभी बारह शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस रात पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में सहज रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढ़ती है। यह एक ऐसा दिन होता है, जब प्रकृति इनसान को उसके आध्यात्मिक शिखर की ओर ढकेल रही होती है। इस घटना का उपयोग करने हेतु हमारी परंपरा में यह खास त्योहार बनाया गया है। इसे पूरी रात मनाने का मूल उद्देश्य यह तय करना है कि ऊर्जा का यह प्राकृतिक चढ़ाव अपना रास्ता पा सके। महाशिवरात्रि की पूरी रात आपको अपना मेरुदंड सीधा रखना चाहिए और जगे रहना चाहिए।

जो अध्यात्म मार्ग पर हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण है। जो पारिवारिक जिंदगी जी रहे हैं, उनके लिए भी यह बहुत महत्वपूर्ण है। महत्वाकांक्षी इनसानों के लिए भी यह एक अहम दिन है। पारिवारिक जिंदगी जी रहे लोग महाशिवरात्रि को शिव की शादी की सालगिरह के रूप में मनाते हैं। शिव ने इस दिन अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी, सांसारिक महत्वाकांक्षा वाले लोग इसे उस रूप में मनाते हैं। लेकिन तपस्वियों के लिए यह वह दिन है, जब शिव कैलाश के साथ एक हो गए थे, जब वे पर्वत की तरह निश्चल और पूरी तरह शांत हो गए थे।

पूर्व के ऋषियों और मनीषियों ने इसे पहचाना, इसलिए उन्होंने इसका उपयोग एक साधना दिवस के रूप में किया। आध्यात्मिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए इसे परंपरा का एक हिस्सा बना दिया। इसके अलावा शिव का वर्णन हमेशा से त्रिअंबक के रूप में किया जाता है- जिनकी तीन आंखें हैं। तीसरी आंख वह आंख है, जिससे दर्शन होता है। आपकी दो आंखें हैं, ये मन को सभी तरह की अनर्गल चीजें पहुंचाती हैं। ये दो आंखें सत्य को देख नहीं पाती हैं, अत: एक तीसरी आंख, एक गहरी भेदन शक्ति वाली आंख को खोलना होगा।

आज के लिए नुस्खा यह है कि आप समानांतर या क्षैतिज अवस्थाओं में न लेटें, हमेशा मेरुदंड सीधा रखें। केवल सीधा रखना ही काफी नहीं है, हमें एक ऐसी अवस्था में रहना होगा जहां हम, हम नहीं रह जाते।
शिव का अर्थ है- 'वह जो नहीं है'। आज की रात इसे अपने साथ होने दें, स्वयं को खो दें। फिर जीवन में एक नई दृष्टि खुलने की संभावना पैदा होगी, जिससे आप जीवन को वैसे देख पाएंगे, जैसा यह है।

महादेव शिव की रात
अध्यात्म की राह पर चलने वाले साधकों की यात्रा बड़ी दुरूह मानी जाती है। अनजानी राह की भटकन, शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक सीमाएं, मुश्किल हालातों में मंसूबे का डगमगा जाना- राह में न जाने कितनी उलझनें आती हैं। पर अगर किसी सद्गुरु का मार्गदर्शन और कृपा का सान्निध्य मिल जाए तो यात्रा सुगम और सहज हो सकती है। परम प्राप्ति की चाह रखने वाला साधक हर उस कुदरती घटना को, हर उस अवसर को, अपनी यात्रा का सोपान बना लेता है, जो उसे आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करती है और परम के करीब ले जाती है। एक ऐसा ही अवसर है महाशिवरात्रि।
महाशिवरात्रि का सीधा संबंध शिव से है, जो न केवल आदि योगी हैं, बल्कि अलौकिक आनंद के आदि-स्रोत भी हैं। अगर महाशिवरात्रि के महत्व को समझना है तो शिव को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।

साल 2016 का पहला खग्रास सूर्यग्रहण 9 मार्च, बुधवार को होगा। ये ग्रहण भारत में कुछ देर के लिए दिखाई देगा।मेष राशिइस राशि ...
02/03/2016

साल 2016 का पहला खग्रास सूर्यग्रहण 9 मार्च, बुधवार को होगा। ये ग्रहण भारत में कुछ देर के लिए दिखाई देगा।मेष राशि
इस राशि के लिए यह ग्रहण शुभ फल देने वाला होगा। आय में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं एवं संतान से सुख प्राप्त होगा। कोई नया काम हाथ आ सकता है व योजनाएं सफल होंगी।वृषभ राशि
इस राशि के लिए भी यह ग्रहण अच्छा रहेगा। व्यापार में तरक्की एवं न्यायलाय में पक्ष मजबूत होगा। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी एवं वाहनादि खरीदने का मन बनेगा। योजनाएं सफल होने के योग बन रहे हैं।मिथुन राशि
इस राशि के लिए ये सूर्यग्रहण मध्यम फल देने वाला रहेगा। कुछ अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है साथ ही अटके हुए काम भी पूरे हो सकते हैं। संतान पक्ष की चिंता हो सकती है।
भारत में 9 मार्च की सुबह 5.43 बजे ग्रहण लगेगा, जो उत्तर पश्चिम एवं पश्चिम भाग को छोडकर शेष भारत में सुबह 6.47 तक दिखेगा। ये ग्रहण कुंभ राशि में होगा, अन्य राशियों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले 8 मार्च की शाम 5.43 बजे से लगेगा। जहां ग्रहण दिखाई नही देगा, वहां सूतक मान्य नही है।
ग्रहण में क्या करें-क्या नहीं
ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्ति को छूना, भोजन पकाना या खाना एवं पीना, सोना, मनोरंजन या कामुकता का त्याग करना चाहिए। भोजन व पानी में दूर्वा या तुलसी के पत्ते डाल कर रखें तो बेहतर रहेगा। ग्रहण के पश्चात पूरे घर की शुद्धि एवं स्नान कर दान देने का महत्व है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में अपने इष्टदेव का ध्यान, गुरु मंत्र का जप, धार्मिक कथाओं का श्रवण एवं मनन करना चाहिए। इनमें से कुछ न कर पाने की स्थिति में राम नाम का या अपने इष्टदेव के नाम का जप भी कर सकते हैं ।मेष राशि
इस राशि के लिए यह ग्रहण शुभ फल देने वाला होगा। आय में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं एवं संतान से सुख प्राप्त होगा। कोई नया काम हाथ आ सकता है व योजनाएं सफल होंगी।
वृषभ राशि
इस राशि के लिए भी यह ग्रहण अच्छा रहेगा। व्यापार में तरक्की एवं न्यायलाय में पक्ष मजबूत होगा। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी एवं वाहनादि खरीदने का मन बनेगा। योजनाएं सफल होने के योग बन रहे हैं।मिथुन राशि
इस राशि के लिए ये सूर्यग्रहण मध्यम फल देने वाला रहेगा। कुछ अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है साथ ही अटके हुए काम भी पूरे हो सकते हैं। संतान पक्ष की चिंता हो सकती है।कर्क राशि
कोई बनता काम बिगड़ सकता है या टल सकता है। वाहन प्रयोग में सावधानी रखें। यात्रा में तकलीफ हो सकती है। संतान की चिंता भी सताती रहेगी। किसी से विवाद होने की संभावना है।सिंह राशि
आपके लिए समय सामान्य रहेगा। रूके कामों में आशा की किरण नजर आ सकती है। पुराने रोग ठीक हो सकते हैं। नौकरी में बदलाव की योजना बन सकती है एवं कोर्ट केस में सफलता मिल सकती है।कन्या राशि
मुसीबतों से राहत मिलेगी। अगर कोई काम अटका है तो वो पूरा हो सकता है। अटका हुआ पैसा भी मिलने के योग बन रहे हैं। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी एवं खुशियों की प्राप्ति होगी।तुला राशि
आपके लिए समय मध्यम फलकारी है। परिवार में वैचारिक मतभेद हो सकता है। दूसरी चिंताएं भी होंगी किंतु समाधान भी प्राप्त होगा। संतान से सहयोग मिलेगा। आय सामान्य बनीं रहेगीवृश्चिक राशि
इस राशि के लिए ये सूर्यग्रहण शुभ नहीं है। पहले से चली आ रही परेशानियां और भी बढ़ सकती हैं। संभलकर रहने का समय है। जोखिम लेने से बचें एवं विवादों से दूर रहे तो अच्छा रहेगा।धनु राशि
इस राशि के लिए समय बेहतर रहेगा। प्रतिष्ठित लोगों से मुलाकात हो सकती है व धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। किसी धार्मिक काम में जाने का मौका भी मिल सकता है।मकर राशि
संतान सुख मिलेगा व यात्रा का योग भी बन सकता है। धन की आवक सामान्य बनी रहेगी। परिवार में किसी बात पर तनाव हो सकता है। खर्च अधिक होगा, पैसा कहीं अटक सकता है।कुंभ राशि
चूंकि सूर्यग्रहण इसी राशि में होगा, इसलिए इस राशि वालों को सबसे अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। वाहन संभलकर चलाएं। किसी विवाद में न पड़े और न ही कोई निवेश करें।मीन राशि
12वें भाव में ग्रहण होने से खर्च अधिक होगा। अगर आप नौकरी में हैं तो काम का बोझ अचानक ज्यादा हो सकता है। कोई सहायता नहीं करेगा, सभी समस्याओं का समाधान आपको ही करना है।

घर को वास्तु दोष से बचा सकती हैं बाथरूम से जुड़ी ये 6 बातें= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = आचार्य ...
23/02/2016

घर को वास्तु दोष से बचा सकती हैं बाथरूम से जुड़ी ये 6 बातें
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आचार्य अशोक वैदिक
वास्तु में बाथरूम घर के सबसे खास हिस्सों में से एक है। घर में हो रहे वास्तु दोषों का कारण आपके बाथरूम से जुड़े कुछ कारण हो सकते हैं। यदि बाथरूम में इस बातों का ध्यान न रखा जाए तो कई तरह की परेशानियां बनी रहती हैं।
जानिए बाथरूम से जुड़ी छोटी-छोटी बातें और बचें इनसे होने वाले वास्तु दोषों से-
1. खुला न रखे बाथरूम का दरवाजा
दिन में जितनी भी बार बाथरूम का प्रयोग करें, ध्यान रखे की उसका दरवाजा खुला न छूटे। बाथरूम का दरवाजा खुला रहना अच्छा नहीं माना जाता। अगर बेडरूम में भी बाथरूम है तो उसके दरवाजे पर पर्दा लगाना चाहिए। बाथरूम और बैडरूम में अलग-अलग तरह की ऊर्जाए होती है, जिनका संपर्क में आना अच्छा नहीं होता। ऐसा होने से घर के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
2. जरूर रखें नीले रंग की बाल्टी
नीला रंग खुशहाली और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वास्तु में नीले रंग को बहुत महत्व दिया जाता है। वास्तु के अनुसार बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी रखना बहुत शुभ माना जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि बाथरूम में रखी बाल्टी कभी खाली न रहें, बाल्टी को हमेशा साफ पानी से भरी रहना चाहिए। ऐसा करने पर घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
3. किस दिशा में हो बाथरूम में लगा आईना
यदि आपके बाथरूम में आईना लगा हुआ है तो इस बात का ध्यान रखें कि वह दरवाजे के ठीक सामने न हो। वास्तु के अनुसार जब-जब बाथरूम का दरवाजा खुलता है, तब-तब घर की नेगेटिव एनर्जी बाथरूम में प्रवेश करती है। ऐसे में अगर दरवाजे के ठीक सामने कांच होगा तो उससे टकराकर नेगेटिव एनर्जी फिर से घर में आ जाएगी।
4. पानी के दुरुपयोग से बचें
घर में हो रहा पानी का दुरुपयोग भी कई तरह के वास्तु दोषों का कारण हो सकता है। जो कई तरह की धन और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां ला सकता है। इसलिए, खासतौर पर इस बात का ध्यान रखें कि घर में किसी भी तरह से पानी का दुरुपयोग न हो। ध्यान रखें पानी की टंकी में दरारें न पड़ें, समय-समय पर टंकी की मरम्मत करवाते रहें। नियमित रूप से टंकी और बाथरूम की सफाई भी करते रहें। ऐसा करने से कई परेशानियों से बचा जा सकता है।।
5. बाथरूम को रखें हमेशा साफ
गंदगी घर के किसी भी हिस्से में हो, वह गलत ही मानी जाती है। वास्तु के अनुसार, घर में और खासतौर पर किचन और बाथरूम का हर समय साफ होना बहुत जरूरी होता है। इन ही दो जगहों से पूरे घर में पॉजिटिव या नेगेटिव एनर्जी फैलती है। इसलिए, बाथरूम को घर समय साफ और व्यवस्थित रखें। ध्यान रखें बाथरूम में रखे सामान भी इधर-उधर फेंकने की बजाय ठीक तरह से निश्चित जगह पर ही रखे हो।
6. न टपके नल से पानी
यदि किसी व्यक्ति के घर में बाथरूम का नल या किसी अन्य जगह का नल लगातार टपकते रहता है तो यह बहुत बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। टपकते नल घर में फालतू खर्च को बढ़ाते हैं। जिन घरों के नल लगातार टपकते रहते हैं, वहां पर धन कभी नहीं टिकता। ऐसे घर में हमेशा ही पैसों की कमी बनी रहती है। आर्थिक नुकसानों से बचने के लिए विशेष तौर पर इस बात का ध्यान रखें।

पूरे करना चाहते हैं रुके हुए काम तो घर में ध्यान रखें ये 6 बातें= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = =आ...
23/02/2016

पूरे करना चाहते हैं रुके हुए काम तो घर में ध्यान रखें ये 6 बातें
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आचार्य अशोक वैदिक
यदि आपके भी महत्वपूर्ण काम रुके हुए हैं या बार-बार घर के सदस्यों के बीच लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं, तो घर से जुड़ी इन 6 आसान बातों को विशेष रूप से ध्यान रखें।
बेडरूम में इस तरह न रखें आईना
बेडरूम में पलंग के सामने ड्रैसिंग टेबल या आईना न रखें। इससे पति-पत्नी में तनाव पैदा होता है और परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे बचने के लिए बेडरूम में कांच को इस तरह रखें कि उसमें पलंग न दिखाई दे।
अलमारियां खुली न रखें
खुली अलमारी घर में नेगेटिव एनर्जी पैदा करती है, जिसके कारण बीमारियों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, खास तौर पर ध्यान रखें कि काम न होने पर घर की कोई भी अलमारियां खुली न रखें।
बीम के नीचे पलंग न रखें
बीम के नीचे पलंग रखना वास्तु के अनुसार बिल्कुल गलत माना जाता है। ऐसा करने से मनुष्य थका-थका और तनावग्रस्त रहने लगता है। साथ ही बीम के नीचे रखे पलंग पर सोने वाले व्यक्ति को अपने कामों में कई तरह ही रुकावटें और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे छुटकारा पाने के लिए पलंग को बीम के नीचे से हटा दें।
तिजोरी को कभी खाली न रखें
कई लोग घर या दुकान में तिजोरी रखते हैं। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि तिजोरी कभी भी खाली न रहे। ऐसा होने से घर में दुर्भाग्य बढ़ता है और पैसों की कमी आती है। इससे बचने से लिए तिजोरी में चांदी का सिक्का रख दें, ताकी पैसे न होने पर भी तिजोरी पूरी तरह से खाली न रहे।
झाड़ू-पोंछा व डस्टबिन खुले में न रखें
झाड़ू-पोंछे या डस्टबिन को खुले में नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये घर में आने वाली पॉजिटिव एनर्जी को नष्ट कर देते हैं। साथ ही यह बात सफलता में रुकावट का कारण भी बन सकती है। याद रखें झाड़ू को कभी भी रसोई घर में न रखें क्योंकि ये आय और अन्न दोनों के लिए अच्छा नहीं माना जाता
उपयोग न होने पर बाथरूम को रखें बंद
अलमारी की तरह ही खुली बाथरूम घर में नेगेटिव एनर्जी लाती है। जब भी बाथरूम का उपयोग न हो तब उसका दरवाजा बंद रखें और इस बाद का भी विशेष रूप से ध्यान रखें कि बाथरूम हमेशा साफ हो। गंदा बाथरूम भी सफलता और कामों में रूकावट का कारण बन सकता है।

उधारी से छुटकारा दिला सकती हैं वास्तु की ये 8 आसान बातें= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = आचार्य अशो...
10/02/2016

उधारी से छुटकारा दिला सकती हैं वास्तु की ये 8 आसान बातें
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आचार्य अशोक वैदिक
घर को वास्तु के हिसाब से बनवाने और सजाने पर किसी भी तरह की नेगेटिव एनर्जी आपको या आपके परिवार को प्रभावित नहीं करती। घर में धन-धान्य बनाएं रखने और उधार से घुटकारा पाने के लिए वास्तु की इन 8 बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए...
1. कर्ज की पहले किस्त हमेशा मंगलवार को चुकानी चाहिए। ऐसा करने से कर्ज जल्दी उतर सकता है।
2. घर या दुकान में उत्तर-पूर्व दिशा में कांच लगाना चाहिए। ऐसा करना लाभदायक होता है। साथ ही कर्ज से भी छुटकारा मिलता है।
3. घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में टॉयलेट होने पर व्यक्ति पर कर्ज का बोझा बढ़ सकता है। इसलिए, घर में टॉयलेट दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने से बचना चाहिए।
4. कांच के फ्रेम का रंग लाल, सिन्दूरी या मैरून नहीं होना चाहिए। साथ ही कांच जितना हल्का तथा बड़े आकार का होगा उतना ही लाभदायक होगा
5. घर या दुकान में पानी की व्यवस्था उत्तर दिशा में रखी जाए तो कर्ज से घुटकारा पाने के लिए यह लाभदायक माना जाता है।
6. किचन में नीला रंग नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से घर के सदस्यों पर बुरा असर पड़ता है साथ ही स्वास्थ्य की नजर से भी यह ठीक नहीं माना जाता।
7. अगर आपके घर या दुकान की सीढ़ियां पश्चिम दिशा की ओर हैं या पश्चिम दिशा की तरफ से नीचे की ओर आती है तो परिवार को कर्ज का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, घर की सीढ़ियां पश्चिम दिशा की ओर नहीं होना चाहिए।
8. घर की उत्तर दिशा में भगवान कुबेर और देवी लक्ष्मी की स्थापना करके नियमित उनकी पूजा करें। ऐसा करने से धीरे-धीरे उधारी खत्म हो जाएगी और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।

कृष्ण को क्यों पसंद है बांसुरी, जाने कुछ ऐसे ही प्रश्नों के उत्तर= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = =...
10/02/2016

कृष्ण को क्यों पसंद है बांसुरी, जाने कुछ ऐसे ही प्रश्नों के उत्तर
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आचार्य अशोक वैदिक
कृष्ण और मुरली एक दूसरे के पर्याय रहे हैं। मुरली के बिना श्री कृष्ण की कल्पना भी नहीं की जा सकती।उनकी मुरली के नाद रूपी ब्रह्म ने सम्पूर्ण सृष्टि को आलोकित और सम्मोहित किया। दरअसल, कृष्ण की बांसुरी उनके स्वभाव की मधुरता का प्रतीक है। कृष्ण के हाथ में बांसुरी का मतलब जीवन में कै सी भी घड़ी आए हमें घबराना नहीं चाहिए। भीतर से शांति हो तो संगीत जीवन में उतरता है।
ऐसे ही अगर भक्ति पाना है तो अपने भीतर शांति कायम करने का प्रयास करें। साथ ही, शास्त्रों के अनुसार कृष्ण के बचपन के अलावा और कहीं उनके बांसुरी वादन का उल्लेख नहीं मिलता है। कृष्ण की बांसुरी प्रेम, कलात्मकता व रचनात्मकता का प्रतीक है। इसलिए कृष्ण का बांसुरी वादन इस तरफ भी इशारा करता है कि बचपन में बच्चों की कलात्मकता व रचनात्मकता पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इससे उनके मन में संवेदनाएं उत्पन्न होती है और उनका सर्वांगिण विकास होता है।
मोर से ब्रह्मचर्य की शिक्षा
मोर को चिर-ब्रह्मचर्य युक्त प्राणी समझा जाता है। इसलिए प्रेम में ब्रह्मचर्य की महान भावना को समाहित करने के प्रतीक रूप में कृष्ण मोर पंख धारण करते हैं। मोर मुकुट का गहरा रंग दुःख और कठिनाइयों, हल्का रंग सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
माखन व मिश्री से सीखें घुल मिल जाना
श्रीकृष्ण को माखन मिश्री बहुत ही प्रिय है। मिश्री का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि जब इसे माखन में मिलाया जाता है, तो उसकी मिठास माखन के कण-कण में घुल जाती है। उसके हर हिस्से में मिश्री की मिठास समा जाती है। मिश्री युक्त माखन जीवन और व्यवहार में प्रेम को अपनाने का संदेश देता है। यह बताता है कि प्रेम में किस तरह घुल- मिल जाना चाहिए।

वास्तु की ऐसी 8 बातें जो घर में बनाए रखती हैं सुख-शांति = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = आचार्य अशोक वै...
06/02/2016

वास्तु की ऐसी 8 बातें जो घर में बनाए रखती हैं सुख-शांति
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आचार्य अशोक वैदिक
अगर वास्तु के बताई गई कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो घर में हर समय सुख-शांति बनी रहती है। हर किसी को वास्तु से जुड़ी इन 8 आसान बातों का ध्यान विशेष तौर पर रखना ही चाहिए। ऐसा करने से घर की नेगेटिविटी कम करके पाजिटिविटी बढ़ाई जा सकती है।
1. घर में छत के उपर पानी की टंकी दक्षिण-पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी अन्य दिशा में बनाई गई पानी की टंकी अशुभ मानी जाती है।
2. घर की उत्तर-दक्षिण दिशा में धातु के सिक्कों से भरा कटोरा रखना चाहिए। यह दिशा घर के स्वामी के नेतृत्व की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में धातु के सिक्कों से भरा कटोरा रखने से घर के स्वामी को कई लाभ मिलते हैं।
3. किचन में अग्नि और पानी के बीच दूरी होनी चाहिए। अग्नि तत्व व पानी तत्व दोनों आपस में विरोधी होते हैं। इसलिए इन्हें एक-दूसरे के आस-पास रखना सही माना जाता है।
4. घर में साफ-सफाई करते समय पानी में थोड़ा सा नमक मिला लेना चाहिए। ऐसा करने से घर में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है।
5. घर में फैमिली फोटो लगाने के लिए की दक्षिण-पश्चिम दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में घर के सभी सदस्यों की फोटो लगाने से परिवार में प्यार और अपनापन बना रहता है।
6. घर के हर सदस्य को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे कमरे के गेट के सामने पैर करके न सोएं। यह बात वास्तु के अनुसार सही नहीं मानी जाती।
7. घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। घर में फैली धूल-मिट्टी या गंदगी घर में नेगेटिविटी का कारण बनती हैं।
8. घर के मंदिर में अन्य देवताओं के साथ वास्तु देव की भी एक तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर, उनकी नियमित पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से घर से जुड़े वास्तु दोष अपनेआप खत्म होने लगते हैं।

बिजनेस के अनुसार चुनें शॉप का कलर, मिल सकती है सक्सेस= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = =आचार्य अशोक ...
06/02/2016

बिजनेस के अनुसार चुनें शॉप का कलर, मिल सकती है सक्सेस
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आचार्य अशोक वैदिक
वास्तु शास्त्र में ऐसे अनेक उपाय बताए गए हैं, जिनके माध्यम से व्यवसाय में तरक्की हो सकती है। दुकान का रंग यदि व्यवसाय के अनुकूल हो तो बहुत ही जल्दी उन्नति होती है और सफलता की गाड़ी सरपट दौड़ने लगती है
1. यदि आपकी ज्वैलरी की दुकान है तो आपको अपनी दुकान में गुलाबी, सफेद या आसमानी कलर करवाना चाहिए। इससे आपको लाभ होगा।
2. अगर आपका किराना व्यवसाय है तो आपके लिए अपनी दुकान में हल्का गुलाबी, आसमानी तथा सफेद रंग करवाना शुभ रहेगा।
3. रेडिमेड गारमेंट या अन्य किसी प्रकार के वस्त्रों की दुकान में हरा, हल्का पीला या आसमानी रंग करवाना चाहिए।
4. अगर आपकी इलेक्ट्रिक या इलेक्ट्रॉनिक्स की शॉप है तो आपको अपनी शॉप में सफेद, गुलाबी, आसमानी या हल्का हरा रंग करवाना चाहिए।
5. लाइब्रेरी या स्टेशनरी शॉप में पीला, आसमानी अथवा गुलाबी कलर करवाना अच्छा रहेगा। इससे आपका व्यवसाय चल निकलेगा।
6. मेडिकल, क्लिनिक या अन्य कोई चिकित्सा से संबंधित संस्थान हो तो उसके लिए गुलाबी, आसमानी अथवा सफेद रंग शुभ रहता है।
7. अगर आपकी गिफ्ट शॉप या जनरल स्टोर है तो उसके लिए हल्का गुलाबी, सफेद, पीला या नीला रंग लकी रहेगा।
8. ब्यूटी पार्लर में सफेद अथवा आसमानी रंग करवाना शुभ रहता है।

प्रदोष के दिन २०१६प्रदोष पूजाप्रदोष पूजादक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है और इस व्रत को भगवा...
05/02/2016

प्रदोष के दिन २०१६

प्रदोष पूजा
प्रदोष पूजा
दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है और इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

प्रदोष व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है। कुछ लोग शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के प्रदोष के बीच फर्क बताते हैं।

प्रदोष का दिन जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं और जो प्रदोष शनिवार के दिन आता है उसे शनि प्रदोष कहते हैं।
२०१६

प्रदोष पूजा का समय
०७ जनवरी (बृहस्पतिवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १७:३५ से २०:२०
२१ जनवरी (बृहस्पतिवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १७:४६ से २०:२८
०६ फरवरी (शनिवार) शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण) १७:५९ से २०:३७
२० फरवरी (शनिवार) शनि प्रदोष व्रत (शुक्ल) १८:१० से २०:४४
०६ मार्च (रविवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १८:२० से २०:४९
२० मार्च (रविवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १८:२८ से २०:५२
०५ अप्रैल (मंगलवार) भौम प्रदोष व्रत (कृष्ण) १८:३७ से २०:५५
१९ अप्रैल (मंगलवार) भौम प्रदोष व्रत (शुक्ल) १८:४५ से २०:५९
०४ मई (बुधवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १८:५४ से २१:०३
१९ मई (बृहस्पतिवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १९:०३ से २१:०८
०२ जून (बृहस्पतिवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १९:१० से २१:१४
१७ जून (शुक्रवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १९:१६ से २१:१९
०२ जुलाई (शनिवार) शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण) १९:१८ से २१:२१
१७ जुलाई (रविवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १९:१५ से २१:२०
३१ जुलाई (रविवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १९:०८ से २१:१६
१५ अगस्त (सोमवार) सोम प्रदोष व्रत (शुक्ल) १८:५६ से २१:०७
२९ अगस्त (सोमवार) सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण) १८:४१ से २०:५७
१४ सितम्बर (बुधवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १८:२३ से २०:४४
२८ सितम्बर (बुधवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १८:०६ से २०:३२
१३ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १९:१५ से २०:२०
२७ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) प्रदोष व्रत (कृष्ण) १७:३५ से २०:११
१२ नवम्बर (शनिवार) शनि प्रदोष व्रत (शुक्ल) १७:२४ से २०:०५
२६ नवम्बर (शनिवार) शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण) १७:२० से २०:०३
११ दिसम्बर (रविवार) प्रदोष व्रत (शुक्ल) १७:२० से २०:०६
२६ दिसम्बर (सोमवार) सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण) १७:२७ से २०:१३
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सफलता पाने के लिए जरूरी है इन 7 बातों का ध्यान रखना= = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = = ==आचार्य अशोक वैदिकमह...
04/02/2016

सफलता पाने के लिए जरूरी है इन 7 बातों का ध्यान रखना
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आचार्य अशोक वैदिक
महाभारत के उद्योग पर्व में महात्मा विदुर ने महाराज धृतराष्ट्र को उन 7 कामों के बारे में बताया है, जिन्हें करने से साधारण व्यक्ति को भी सफलता मिल सकती है। ये 7 काम इस प्रकार हैं-

श्लोक
उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृति: स्मृति:।
समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तु।।

अर्थ- 1. उद्योग, 2. संयम, 3. दक्षता, 4. सावधानी, 5. धैर्य, 6. स्मृति और 7. सोच-विचार कर कार्य आरंभ करना– इन्हें उन्नति का मूल मंत्र समझना चाहिए।1. उद्योग यानी परिश्रम व प्रयास
किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए लगातार परिश्रम व प्रयास करते रहना जरूरी है। परिश्रम के अभाव में सफलता नहीं मिलती। कुछ लोग सफल होने के लिए शार्ट कट अपनाते हैं। भविष्य में इन्हें अपनी गलती का अहसास होता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। असल में सफलता के लिए संकल्प, कर्म के साथ उद्यम यानी परिश्रम की भावना के तय पैमानों को अपनाए बिना कामयाबी की मंजिल को छूना व उस पर कायम रहना मुश्किल है।
2. संयम
महात्मा विदुर के अनुसार, सफलता के लिए संयम भी बहुत जरूरी है। देखने में आता है कि छोटी सी सफलता मिलने पर ही लोग मन पर संयम नहीं रख पाते और बड़ी-बड़ी बातें करने लगते हैं। इस उतावलेपन में वह अपना ही नुकसान कर बैठते हैं। इसलिए यदि आप सफलता पाना चाहते हैं तो मन पर संयम रखना बहुत जरूरी है।
3. दक्षता
सफलता के लिए दक्षता यानी किसी भी काम में कुशलता होना बहुत जरूरी है। कुछ लोग जल्दी सफलता पाने के लिए दक्षता के बिना ही प्रयास शुरू कर देते हैं। परिणाम स्वरूप सफलता मिलना तो दूर वह लक्ष्य तक पहुंच ही नहीं पाते। अतः सफलता पाने के लिए किसी भी कार्य या कला में महारत होना बहुत ही जरूरी है।
4. सावधानी
सफलता पाने की जिद में हम ये बात भूल ही जाते हैं कि हमें किन बातों को नजरअंदाज करना है। यही सावधानी है। यदि हम सफलता पाने के मार्ग में सावधानियों को देखेंगे तो आगे जाकर यही गलतियां हमारे रास्ते का कांटा बन सकती हैं। अतः सफलता के मार्ग पर चलते हुए सावधानियों को भी ध्यान रखनी चाहिए।5. धैर्य
महात्मा विदुर के अनुसार, सफलता पाने के लिए मन में धैर्य भी होना चाहिए। जल्दबाजी में की गई आपकी एक छोटी सी गलती आपका सपना तोड़ सकती है। तमाम कोशिशों के बाद भी मनचाहे परिणाम न मिलने या अपेक्षा पूरा न होने पर लक्ष्य से न भटकें, न उसे छोड़ने का विचार करें। बल्कि मजबूत संकल्प और दोगुनी मेहनत के साथ उसे पाने में जुट जाएं।
6. स्मृति
स्मृति यानी याददाश्त। सफलता पाने के लिए स्मृति यानी याददाश्त का तेज होना भी जरूरी है। ये गुण भी सभी लोगों में नहीं होता। आपका दिमाग जितना तेज होगा, याददाश्त भी उतनी पैनी होगी।

04/02/2016

राशिफल- अगस्त 2017 तक राहु-केतु किसे देंगे धन लाभ
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अब राहु सिंह राशि में और केतु कुंभ राशि में अगस्त 2017 तक रहेगा। 29 जनवरी से इन ग्रहों ने राशि बदली थी। सिंह राहु के शत्रु सूर्य की राशि है। कुंभ केतु के मित्र शनि की राशि है। राहु और केतु लगभग 18 माह राशि में बदलते हैं। , ये दोनों ग्रह हमेशा वक्री रहते हैं और शून्य से 30 डिग्री तक नहीं, बल्कि 30 से शून्य डिग्री की ओर जाते हैं।
गुरु-राहु ने बनाया चाण्डाल योग
इस समय सिंह राशि में गुरु ग्रह भी स्थित है। इस कारण गुरु और राहु की युति से चाण्डाल योग भी बन रहा है। 11 अगस्त 2016 तक गुरु सिंह राशि में ही रहेगा, इसके बाद वह कन्या राशि में प्रवेश करेगा और चाण्डाल योग खत्म होगा।
इन योगों का असर सभी 12 राशियों पर होगा।

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