Sri Bhagirathi Vishwa Shanti Charitable Trust

Sri Bhagirathi Vishwa Shanti Charitable Trust श्रीमद् भागवत कथा , श्रीरामकथा, श्री भक्तमाल कथा, ज्योतिष व एक्यूप्रेशर.

संस्था के मुख्य उद्देश्य:-

1. न्यास को दान अथवा अन्य संसाधनों से प्राप्त राशि एवं संपत्ति का उपयोग केवल ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा ।
2. भारत भर में विशेषकर समीवर्ती क्षेत्र में वेद विद्या एवं योग विद्या, भागवत, रामकथा व भक्तमाल कथा का प्रचार-प्रसार करना तथा इसके लिए गुरूकुलों के संचालक में सहयोग करना।
3. युवाओं की शारीरिक, आत्मिक एवं सामाजिक उन्नति हेतु शिविर लगाना व वीरांग

ना दल की शाखाओं का संचालन करना ।
4. वृद्धों, असहायों , विशेषकर आर्य समाज के वयोवृद्ध एवं अशक्त विद्वानों, संतों एवं पंडितों के लिए वृद्धाश्रम हेतु यथासंभव सहयोग प्रदान करना ह।
5. भागवत, राम कथा व भक्तमाल कथा लड़के व लड़कियों को सिखाना व प्रमाण-पत्र देना ।
6. भागवत, रामकथा, संतों , महात्माओं के व्याख्यानों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं जनसामान्य में विश्व बंधुत्व, देशप्रेम, नैतिकता एवं राष्ट्रीयता की भावना को बढा़वा देना ।
7. महापुरूषों एवं शहीदों से संबंधित विशेष अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित करना ।
8. पशु-पक्षियों के प्रति लोगों में प्रचलित अंधविश्वासों एवं गलत धारणाओं का निराकरण करना । अशक्त एवं घायल पशु -पक्षियों की चिकित्सा में सहयोग देना एवं उन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कानूनी सहयोग प्राप्त करना । जीव दया को प्रोत्साहित करना ।
9. इलेक्ट्राॅनिक एवं प्रिन्ट मीडिया, कार्यशालाओं, गोष्ठियों आदि के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों के प्रति जागृति लाना तथा इसके लिए न्यास की पत्रिका/भित्त-पत्रिका (वाॅल मैगजीन) शुरू करना
10. दहेज प्रथा, बाल विवाह, बंधुआ मजदूरी, धूम्रपान , नशाखोरी जैसी कुरीतियों के प्रति जागृति लाना तथा इन्हें रोकने के लिए कानूनी सहायता प्राप्त करना।
11. युवाओं के कल्याण हेतु राष्ट्रीय एकता शिविर , खेल शिविर, मनोरंजन, रोजगार मार्गदर्शन, कोचिंग आदि का संचालन करना।
12. आर्य समाज के प्रचार-प्रसार एवं उपर्युक्त उद्देश्यों के पूर्ति हेतु समान उद्देश्यों वाली संस्थाओं से सहयोग लेना एवं देना ।
13. धमार्थ आयुर्वेदिक चिकित्सालयों, अन्य चिकित्सा-पद्धितियों, चिकित्सा-विद्यालयों, धर्मार्थ सैनिटोरियमों, नर्सिगं संस्थाओं, प्रसूति-ग्रहों, शिशुकल्याण-केन्द्रों, चलते-फिरते चिकित्सालयों, प्राथमिक चिकित्सा-केन्द्रों, औषध निमार्णशालाओं एवं रसायनशालाओं का निमार्ण, संचालन एवं सहयोग करना। समय-समय पर चिकित्सा शिविरो का आयोजन करना -करवाना तथा ऐसे कार्यों में सहयोग करना । स्वस्थ जीवन जीने के प्रयासों में यथा सम्भव योगदान देना ।
14. धर्मार्थ शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना, जिनके अन्तर्गत विद्यालय , वैदिक गुरूकुल , आध्यात्मिक एवं योग विद्यालय , छात्रावास तथा व्यायामशाला आदि का निर्माण, संचालन एवं सहयोग करना। इनके माध्यम से नैतिक एवं मानव मूल्यों की स्थापना में यथासम्भव योगदान देना।
15. धमार्थ शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना, जिनके अन्तर्गत विद्यालय , वैदिक गुरूकुल , आध्यात्मिक एवं योग विद्यालय , छात्रावास तथा व्यायामशाला आदि का निर्माण, संचालन एवं सहयोग करना। इनके माध्यम से नैतिक एवं मानव मूल्यों की स्थापना में यथासम्भव योगदान देना।
16. स्माज के कमजोर , निर्धन, अपंग, असहाय एवं बेसहारा लोगों के लिए:-

1. स्वास्थ्य शिविर लगाना
2. स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना
3. चैरिटेबल डिस्पेन्सरी/नर्सिंग होम खुलवाना
4. विद्यालय एवं काॅलेजों की स्थापना करना
5. निर्धन परिवारों के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करना

17. सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुँचाना तथा सरकारी भागीदारी योजना के अन्तर्गत सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करना ।
18. नशामुक्ति केन्द्र की स्थापना करना तथा समाज को नशामुक्त बनाने का प्रयास करना । समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करना। बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय की नीति अपनाकर समाज को निर्भय एवं आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना ।
19. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना तथा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना ।
20. आम जनता के उपयोग के लिए कम्युनिटी हाॅल, बारातघर , वृद्धाश्रम , महिलाश्रम, हैल्थकेयर संेटर, संगीतालय, नृत्यालय, अनाथालय, बालवाड़ी , आंगनवाड़ी , शिशुगृह (जच्चा-बच्चा केन्द्र) वाचनालय , पुस्तकालय , डिस्पेंसरी , हाॅस्टिल , स्टेडियम तथा रैनबसेरों का संचालन करना ।
21. संस्था के सदस्यों एवं आम जनता के हितों एवं अधिकारों की रक्षा के लिए सम्बन्धित विभागों से पत्र व्यवहार करना एवं आवश्यकतानुसार न्यायालय तथा संबंधित अधिकारियों से सहयोग प्राप्त करना ।
22. सरकारी स्वास्थ्य संवाओं का प्रचार-प्रसार करना । क्षयरोग, कैंसर , एड्स , आदि बीमारियों के बारे में सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी देना एवं चिकित्सा सुविधा हेतु सही मार्गदर्शन करना। समय - समय पर रक्तदान शिविर आदि का आयोजन करना ।
23. जनसामान्य के नैतिक, बौद्धिक, मानसिक , शैक्षिक , शारीरिक, चारित्रिक, अध्यात्मिक , संास्कृतिक एवं आर्थिक विकास हेतु कार्यक्रम संचालित करना ।
24. प्राकृतिक आपदाओं जैसे-बाढ़ , सूखा , भूकम्प या तूफान आदि के समय पीड़ितों की चिकित्सा , भोजन, आवास , यातायात व अन्य सामग्री मुहैया कराना और हरसंभव सहायता प्रदान करना ।
25. समाज केा मानवाधिकारों की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराना एवं भारतीय संविधान में वर्णित मानवाधिकारों का ज्ञान कराना ।
26. विकलांगों के सेवार्थ विभिन्न योजनाएं बनाना, संचालन करना एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुचाना ।
27. टंकण टाईपिंग, शाॅर्ट हैंड , कंप्यूटर कला, क्राफ्ट , पेन्टिंग , माॅडलिंग, संगीत , नृत्य, शारीरिक शिक्षा एवं योग आदि की शिक्षा देने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करना एवं इन प्रशिक्षण केन्द्रों को आर्थिक मद्द देना एवं सुचारू रूप से उनका संचालन करना ।
28. शैक्षिक, संास्कृतिक एवं अन्य सामाजिक गतिविधियां के विकास के लिए विभिन्न कार्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों को चलाना जैसें - प्रौढ़शिक्षा, प्रतियोगताएं, प्रर्दशनी , समारोह , सेमिनार , सांस्कृतिक कार्यक्रम , प्रेस कांन्फ्रेन्स , मेला, हाट , आदि खेल कूद , सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोंजन करना ।
29. स्ंगीत , नाटक , खेल , परम्परागत वाद्य यंत्र , आधुनिक यंत्रों का प्रशिक्षण प्रदान करना एवं संचालन करना ।
30. म्हिलाओं एवं बच्चों के लिए सरकारी , गैर सरकारी संस्थाओं एवं अन्य संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं द्वारा सहायता के लिए आवेदन करना । और सहायता प्राप्त करना ।
31. प्रौढ शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम को संचालित करना।
32. जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण , ध्वनि प्रदूषण से होने वाले परिणामों से जनता को अवगत कराना एवं उनसे निदान/छुटकारा दिलाने हेतु उपाय सुझाना। धुंआ रहित चूल्हा , शौंचालयों का निर्माण व अनुरक्षण, गैर परम्परागत ऊर्जा कार्यक्रमों का विस्तार करना ।
33. पर्यावरण सुधार हेतु वनीकरण एवं वृक्षारोपण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लागू करना।
34. गरीब परिवार की कन्याओं की शादियाँ करवाना और उनकी आर्थिक सहायता करना।
35. जन सामान्य के उपयोग के लिए धर्मशाला, पुस्तकालय, वाचनालय , अनाथालय , प्याऊ गौशाला एवं वृद्धाश्रम का संचालन करना ।
36. चल-अचल सम्पत्ति खरीदने हेतु दान-चन्दा उपहार या अन्य साधनों से धन जुटाना। प्राप्त धन केवल न्यास के उद्देश्यों को बढाने हेतु लगाना और खर्चों से अधिक प्राप्त धन आयकर अधिनियम 1961 की धारा 11 (5 )2(15)80 जी के अन्तर्गत जमा करना । इन धाराओं के तहत परिवर्तन भी किया जा सकता है।

(क) न्यासियो के कर्तव्य एवं अधिकार

1. अब से संस्था के पूरे कार्यभार की जिम्मेदारी संस्थापक एवं ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की होगी। सभी को इनका फैसला मान्य होगा।
2. किसी भी समस्या का समाधान संस्थापक व ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की सहमति के द्वारा होगा।
3. न्यास अथवा न्यास की सम्पत्ति एवं कोष के प्रबन्ध रक्षण/रखरखाव/ और संचालन हेतु सभी आवश्यक कार्य करना । कोष संबंधी लेखा-जोखा रखना ।
4. न्यास का वार्षिक आय-व्यय 1 अपै्रल से 31 मार्च तक होगा। न्यास का लेखाजोखा निरीक्षण से करवाया जाएगा ।
5. संरक्षक एवं न्यासियों के निर्णयानुसार आयकर अधिनियम के अन्तर्गत न्यास निधि को मान्यता प्राप्त संस्थाओं , सरकारी संस्थओं, डाकघरों अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों में स्थिर निधि, चालू एवं बचत खाता खोलकर रखा जा सकता है।
6. प्रधान, मंत्री एवं कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो को ही बैंक , डाकघर, कंपनी या अन्य किसी भी संस्था सहित न्यास आदि स ेचल-अचल संपत्ति के रूप् से सहयोग प्राप्त करना ।
7. न्यास के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु किसी भी व्यक्ति, परिवार, फर्म , संस्था (सरकारी अनुदान संस्था सहित ) न्यास आदि स ेचल-अचल संपत्ति के रूप् में सहयोग प्राप्त करना ।
8. न्यास के कोष की आय अथवा संग्रहित धनराशि को पूर्ण या आंशिक रूप् से न्यास के किसी भी उद्देश्य के लिए पृथक रखना ।
9. थ्कसी व्यक्ति, संस्था आदि से दान, चंदा , किराया एवं किसी भी प्रकार की बकाया धनराशि को बसूल करने हेतु न्यास की ओर से प्रतिनिधि या कर्मचारी नियुक्त किया जा सकता है।
10. न्यास की सभा में प्रस्ताव पारित करके प्रधान, मंत्री अथवा कोषाध्यक्ष को न्यास के प्रतिनिधि के रूप में बैंक आदि में चालू , बचत सावधि जमा आदि खाता खोलने एवं संचालित करने का अधिकार दिया जाएगा।
11. न्यास के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु किसी न्यासी द्वारा अपने अधिकार के अनुरूप् व्यय की गई उचित धनराशि का न्यास द्वारा भुगतान किया जा सकता है।
12. न्यासी सदस्य के हाथ में जो भी धनराशि अथवा कोष की राशि आएगी, वह उसका लेखाजोखा रखेगा।
13. कोई भी न्यासी से कमिशन, वेतन आदि लेने का अधिकारी नहीं होगा , परन्तु संरक्षक सहित न्यासी उचित समझेगें तो किसी भी न्यासी को परिश्रमिक अथवा भरणपोषण के रूप में धनराशि या वस्तुएं दे सकेंगें।
14. संस्थापक तथा न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपने विवेकाधिकार के अन्तर्गत किसी भी समयावधि एवं शर्तों पर न्यास की चल-अचल संपत्ति का विक्रय कर सकते हैं , किराये पर दे सकते हेैं , धरोहर रख सकते हैं। अथवा अन्य रूप से असका निपटान कर सकते हैं।
15. न्यास तत्सम प्रवत , प्ररिवर्तित, संशोधित , विधियों, एवं विनियमों के अधीन रहते हुए कार्यरत होगा। एवं समय - समय पर प्रदत्त प्रत्येक लाभ एवं छूट आदि का अधिकारी होगा।


(ख) संचालन संबंधी अधिकार एवं कर्तव्य

1. इस न्यास के संस्थापक न्यासी आजीवन न्यासी होंगे और न्यास की ओर से हर जगह हस्ताक्षर करने तथा न्यास के प्रबन्ध में विभिन्न अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत होंगे। न्यास को पंजीकरण कार्यालय में पंजीकृत कराने, आयकर कार्यालय में पंजीकृत कराने अथवा अन्य कानूनी कार्यवाई करने के लिए भी संस्थापक न्यासी ही हस्ताक्षर कर सकेंगें।
2. संस्थापक न्यासी की अनुपस्थिति यथा-प्रवास, रूग्णता आदि की अवस्था में उनके द्वारा लिखित में निर्धारित न्यासी उनके कार्यों को करने के लिए विशेष अवधि हेतु होंगें।
3. संस्थापक न्यासकर्ता अपने जीवनकाल में अगले संस्थापक की नियुक्ति कर देंगे। वह नियुक्ति संस्थापक अपने से अगले संस्थापक की नियुक्ति अपने जीवनकाल में कर देगे। यह परम्परा सदा चलती रहेगी। प्रत्येक संस्थापक आजीवन संस्थापक होगें। संस्थापक का किसी दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो जाए तो उत्तराधिकारी की अनियुक्ति की स्थिति में न्यास के कार्यवाहक संस्थापक पद को अधिकृत करेंगे। इस संस्थापक के भी वे ही अधिकार होंगे। जो नियुक्ति संस्थापक के होते हैं। तदुपरान्त न्यासी बहुसम्मति से संस्थापक की नियुक्ति करेंगे।

बोलो राधे राधे, जय श्रीकृष्ण.
25/08/2016

बोलो राधे राधे, जय श्रीकृष्ण.

श्रीमद् भागवत कथा , श्रीरामकथा, श्री भक्तमाल कथा
25/08/2016

श्रीमद् भागवत कथा , श्रीरामकथा, श्री भक्तमाल कथा

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Street No. 3, Sangam Bihar Colony
Aligarh

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