नारायण पथ

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हरि ॐ
सद्गृहस्त संत
आचार्य श्री सच्चिदानंद जी महाराज
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13/02/2026

रुक्मिणी मंगल।

14/01/2026
अरावली: खड़े-खड़े अपराधी हो गई!अरावली पहाड़ सदियों से खड़े थे।न चुनाव लड़े, न भाषण दिए—बस चुपचाप रेगिस्तान को रोकते रहे,...
21/12/2025

अरावली: खड़े-खड़े अपराधी हो गई!
अरावली पहाड़ सदियों से खड़े थे।
न चुनाव लड़े, न भाषण दिए—
बस चुपचाप रेगिस्तान को रोकते रहे,
पानी को थामे रखा,
हवा को साँस लेने लायक बनाए रखा।
यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी।
आज के भारत में जो चुप रहता है,
वह या तो दोषी मान लिया जाता है
या फिर परिभाषा के बाहर कर दिया जाता है।
अब हमें समझाया जा रहा है कि
हर ऊँचाई पहाड़ नहीं होती।
100 मीटर से कम?
तो आप पहाड़ नहीं—
यह सिर्फ आपकी गलतफ़हमी है।
अरावली अब “भूगोल” नहीं रही,
अब वह एक कानूनी तकनीकी गड़बड़ी बन चुकी है।
जिसे देखकर सिस्टम ने कहा—
“अरे! ये तो हमसे बच गई थी।”
अब सवाल यह नहीं है कि
अरावली क्यों कट रही है,
असल सवाल यह है कि
इतने साल ये बच कैसे गई?
अगर अरावली नहीं रही तो क्या होगा?
कुछ खास नहीं—
• दिल्ली को रेगिस्तान का एक्सटेंशन मिल जाएगा
• पानी की जगह टैंकर संस्कृति फलती-फूलती रहेगी
• और हम हर गर्मी कहेंगे—
“इस साल तो गर्मी कुछ ज़्यादा ही है, है ना?”
लेकिन चिंता मत कीजिए।
हम समाधान-प्रिय देश हैं।
पहाड़ कटेंगे तो वेबिनार बढ़ेंगे।
जंगल जाएंगे तो कॉन्फ्रेंस आएंगी।
और रिपोर्टों में लिखा जाएगा—
“पर्यावरण पर गंभीर चर्चा हुई।”
अरावली आज भी खड़ी है।
बस अब वह पहाड़ नहीं मानी जाती।
और जब किसी चीज़ को
मानना बंद कर दिया जाए,
तो उसे बचाने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती।
क्योंकि आज के दौर में
“विकास” वही है
जहाँ प्रकृति मौजूद हो—
बस काग़ज़ों में।
अरावली पर्वतमाला को बचाओ।

अगर आज आपके साथ कोई दुर्व्यवहार करता है या आप किसी के साथ दुर्व्यवहार करते है और सुबह जगने के बाद भी इस दुर्व्यवहार को य...
20/12/2025

अगर आज आपके साथ कोई दुर्व्यवहार करता है या आप किसी के साथ दुर्व्यवहार करते है और सुबह जगने के बाद भी इस दुर्व्यवहार को याद रखते हुए दूसरे दिन का व्यवहार वहीं से शुरू करते हो जहां कल छोड़ा था। तो समझ लीजिए आप ज्ञान के मार्ग से बहुत दूर हो, अभी अपरिपक्व हो।

इसीलिए, प्रतिदिन जैसे सूर्य नई उमंग साथ उदय होता है वैसे ही प्रत्येक दिन हमें भी एक नयापन और सकारात्मकता के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए।

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