The Great Guatam Buddha Vanshaj

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बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान गौतमबुद्ध के बारे में...... तथागत बुद्ध का जीवन चरित्र एवं उनका पारिवारिक परिचय..!१) परदादा - रा...
18/05/2022

बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान गौतमबुद्ध के बारे में......

तथागत बुद्ध का जीवन चरित्र एवं उनका पारिवारिक परिचय..!

१) परदादा - राजा जयसेन.
२) परदादी - राणी जयंती.
३) दादाजी - राजा सिंहहनू.
४) दादीजी - राणी कच्चायणा.

५) पिताजी - राजा शुद्धोधन.
६) माताजी - राणी महामाया.
७) मौसी - महाप्रजापति गौतमी.
८) चाचा - १) धौतोदन , २) शुक्लोदन , ३) शाक्योदन , ४) अभितोदन.
९) बुआ - १) अमिता , २) प्रतिमा
१०) चचेरा भाई - १) आनंद , २) महानाम , ३) अनिरूद्ध.

११) फुफेरा भाई - देवदत्त.
१२) सौतेला भाई - १) नंदा , २) रूपनंदा.
१३) पत्नी - यशोधरा. (इस. पूर्व ५४७ यशोधरा के साथ विवाह.)
(शाक्य संघ में प्रवेश.)
१४) पुत्र - राहुल.

१५) नगर - कपिलवस्तु.
१६) जन्मस्थली - लुंम्बिनी वन.
१७) वंश - शाक्य.
१८) गृहत्याग - आषाढ़ पूर्णिमा.
१९) इस. पुर्व ५२८ सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ , वह बुद्ध बने.
२०) इस. पुर्व ४८३ कुशीनगर में ८० साल की उम्र में वैशाख पूर्णिमा के दिन तथागत बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ.

तथागत बुद्ध का जीवन चरित्र उनका इतिहास एवं उनका संदेश समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए था , कल्याण के लिए है..! इसलिए जब तक यह सूर्य और चंद्रमा हैं / जब तक यह जीव-जंतु प्राणि और यह पृथ्वी (सृष्टि) हैं , तब तक उनका इतिहास , उनका आदर्श , तथा उनका मानव कल्याणकारी संदेश कभी खत्म नहीं होगा"।

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*सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी*
प्र.1- विश्व का सबसे वैज्ञानिक धर्म कौनसा है?
*उ.- बौद्ध धर्म*
प्र.2- बौद्ध धर्म की शुरुआत किसने की ?
*उ.- तथागत बुद्ध ने*
प्र.3- तथागत बुद्ध के माता-पिता का नाम क्या था ?
*उ.- महामाया और शुद्धोधन*
प्र.4- तथागत बुद्ध के बचपन का नाम क्या था ?
*उ.- सिद्धार्थ*
प्र.5. सिद्धार्थ किस राज्य के राजकुमार थे ?
*उ.- कपिलवस्तु*
प्र.6. सिद्धार्थ किस वंश से संबंधित थे ?
*उ.- शाक्य वंश*
प्र.7- तथागत बुद्ध का जन्म कब हुआ था ?
*उ.- 563 ई.पू.*
प्र.8- राजकुमार सिद्धार्थ का विवाह किससे हुआ ?
*उ.-यशोधरा से*
प्र.9- सिद्धार्थ-यशोधरा के पुत्र का नाम क्या था?
*उ.- राहुल*
प्र.10- सिद्धार्थ द्वारा गृहत्याग का मूल कारण क्या था ?
*उ.- शाक्य-कोलिय(निषाद) वंश के बीच युद्ध को टालना*
प्र.11- सिद्धार्थ द्वारा गृह त्याग के समय आयु कितनी थी ?
*उ.- 29 वर्ष*
प्र.12. सिद्धार्थ को राज्य सीमा से बाहर छोड़कर आने वाला नौकर का नाम क्या था ?
*उ.- छन्न*
प्र.13. गृह त्याग के बाद सिद्धार्थ ने क्या निश्चय किया ?
*उ.- ज्ञान प्राप्ति का*
प्र.14- सिद्धार्थ ने ब्राह्मण सन्यासियों का साथ क्यों छोड़ दिया ?
*उ.- क्योंकि उनका ज्ञान अपूर्ण* *काल्पनिक था*
प्र.-15- सिद्धार्थ द्वार शरीर को अत्यधिक कष्ट का क्या परिणाम निकला ?
*उ.- शरीर बेहद कमजोर हो गया*
प्र.16- पाँच सन्यासियों के नाम, जो सिद्धार्थ से नाराज होकर चले गये ?
*उ.- कौंडनय, भदिय, वज्ज, अस्सजि, महानाम*
प्र.17- जीर्ण शरीर लिए सिद्धार्थ को भोजन किसने खिलाया ?
*उ.- सुजाता ने*
प्र.18- अंत में सिद्धार्थ को कहाँ ज्ञान प्राप्त हुआ ?
*उ.- बोधि वृक्ष के नीचे*
प्र.19. ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ क्या कहलाये ?
*उ.- बुद्ध*
प्र.20- बुद्ध का अर्थ क्या है ?
*उ.-राग,द्वेष,मोह से ऊपर उठा पूर्ण ज्ञानी पुरूष*
प्र.21. बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति का उद्देश्य क्या था ?
*उ.- मनुष्य के दु:ख व अंधविश्वास दूर करना*
प्र.22. बुद्ध ने प्रथम उपदेश किसे दिया ?
*उ.- पाँच नाराज सन्यासियों को*
प्र.23- त्रिशरण क्या है?
*उ.- मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ, मैं धम्म की शरण में जाता हूँ, मैं संघ की शरण में जाता हूँ।*
प्र.24. पंचशील क्या है?
*उ.-प्राणी हिंसा न करना, चोरी न करना, व्यभिचार न करना, निंदा न करना, शराब व मादक पदार्थों का सेवन न करना।*
प्र.25. आष्टांगिक मार्ग क्या है ?
*उ.-सम्यक दृष्टि,सम्यक संकल्प,सम्यक वाणी,सम्यक कर्मान्त,सम्यक आजीविका, सम्यक व्यायाम,सम्यक स्मृति,सम्यक समाधि*
प्र.26- मगध के किस सम्राट ने बुद्ध के धम्म को स्वीकार किया ?
*उ.- बिम्बिसार*
प्र.27- भिक्षुणी संघ की प्रथम सदस्या कौन थी ?
*उ.- महाप्रजापति गौतमी*
प्र.-28- बुद्ध ने किस वर्ण के लोगों को दीक्षा दी ?
*उ.-बिना किसी भेदभाव के सभी को*
प्र.29. संघदान हेतु प्रसिद्ध व्यक्ति कौन था ?
*उ.- अनाथपिण्डक*
प्र.30- पारलौकिक तत्वों पर बुद्ध के क्या विचार थे?
*उ.- आत्मा-परमात्मा,स्वर्ग-नरक को नहीं माना*
प्र.31- बुद्ध का महापरिनिर्वाण किस आयु में हुआ ?
*उ.-80 वर्ष*
प्र.32- महापरिनिर्वाण किस स्थान पर हुआ?
*उ.- कुशीनगर*
प्र.33- बौद्ध धर्म का सर्वाधिक प्रसार किस सम्राट के काल में हुआ?
*उ.- अशोक महान के काल में*
प्र.34- कलिंग युद्ध के बाद किसने अशोक को तलवार फेंकने पर मजबूर कर दिया ?
*उ.- बौद्ध भिक्खु उपगुप्त ने*
प्र.35- अशोक ने अपने पुत्र-पुत्री को किस देश में धम्म प्रचार हेतु भेजा ?
*उ.- श्रीलंका*
प्र.36- भारत विश्व गुरु कब कहलाता था?
*उ.- मौर्यकाल में*
प्र.37. विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षक कौन थे ?
*उ.- बौद्ध भिक्खु*
प्र.38. 'अत्त दीपो भव:' का अर्थ क्या है ?
*उ.- अपना दीपक स्वयं बनो*
प्र.39- विश्व का सर्वश्रेष्ठ धम्म ग्रंथ कौन सा है ?
*उ.- बुद्ध और उनका धम्म*
प्र.40- त्रिपिटक क्या है ?
*उ.- सुत्तपिटक, धम्मपिटक, विनयपिटक*
प्र.41- वेदों को मरुभूमि समान बंजर किसने कहा?
*उ.- तथागत गौतम बुद्ध ने*
प्र.42- सर्वाधिक प्राचीन मूर्तियाँ किसकी मिली है?
*उ.- बुद्ध की*
प्र.43- सर्वाधिक प्राचीन अवशेष किस धर्म से संबंधित है?
*उ.- बौद्ध धर्म से*
प्र.44- बुद्ध के उपदेश की भाषा कौन सी थी?
*उ.- पाली*
प्र.45- विश्व के कितने देशों में बौद्ध धर्म है?
*उ.- लगभग 56 देशों में*
प्र.46- सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में बौद्धों का प्रतिशत है?
*उ - 0.07%*
प्र.47- हाल ही में विश्व धर्म संसद द्वारा दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धर्म किसे चुना गया?
*उ.- बौद्ध धर्म को*
प्र.48- बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांत क्या है ?
*उ.- सत्य, अहिंसा, स्वतंत्रता*
प्र.49- श्रीलंका के किस क्रिकेट खिलाड़ी ने बौद्ध धर्म अपनाया?
*उ.- सनथ जयसूर्या*
प्र.50- हिंदू राष्ट्र होने के बावजूद भी किस देश में बौद्धों की जनसंख्या तेजी से बढ रही है?
*उ.- नेपाल में*

मौर्य जातियों को मिला उनका नायक 🚩⚔️🇮🇳⚔️1908 ईस्वी के एक सर्वे में भी यह बात सामने आई थी कि कुम्हरार (पाटलिपुत्र), जहाँ म...
18/05/2022

मौर्य जातियों को मिला उनका नायक 🚩⚔️🇮🇳⚔️

1908 ईस्वी के एक सर्वे में भी यह बात सामने आई थी कि कुम्हरार (पाटलिपुत्र), जहाँ मौर्य साम्राज्य के राजप्रासाद थे, से सटे बड़े क्षेत्र में कुशवाहों के अनेक गाँव (यथा कुम्हरार खास, संदलपुर, तुलसीमंडी, रानीपुर आदि) हैं तथा इन गाँवों की 70 से 80 प्रतिशत जनसँख्या कुशवाहा है। प्राचीन काल में जिन स्थलों पर भी राजधानियाँ रहीं हैं, वहाँ इस जाति का जनसंख्या-घनत्व अधिक रहा है।।

16 दिसंबर, 2015 को बिहार कैबिनेट की बैठक में सम्राट् अशोक का जन्म दिवस मनाने और उस दिन सरकारी छुट्टी घोषित करने का फैसला किया गया। इस घोषणा के साथ ही सम्राट् अशोक की जन्मतिथि और जाति को लेकर विवाद और बहस शुरू हो गयी है। यह संयोग है कि इस साल अशोक जयंती 14 अप्रैल को है, जो डॉ आंबेडकर का जन्मदिन भी है। ऐसे में, बिहार सरकार ने फैसला किया है कि सरकारी कैलेंडरों में इस साल यह अवकाश ‘अशोक जयंती (अशोकाष्टमी) सह आंबेडकर जयंती’ के रूप दर्ज किया जाएगा। अशोकाष्टमी की तिथि की गणना चन्द्र कैलेंडर से होगी तथा हर साल बदलेगी।

सम्राट् अशोक की जन्मतिथि को लेकर उठे विवाद पर ‘अशोक इन एनसियेंट इंडिया’ के लेखक और दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर नयनजोत लाहिडी, बिहार सरकार की इस घोषणा को काल्पनिक और मनगढंत बताते है। लाहिडी कहते है कि हम नहीं जानते कि अशोक की जन्मतिथि क्या है।

बिहार सरकार की यह घोषणा सुनकर इतिहासकार डी.एन. झा को धक्का लगा है। झा कहते है कि वे नही जानते कि बिहार सरकार को यह सलाह किसने दी। इधर पटना विश्वविद्यालय में इतिहास के पूर्व प्रोफेसर राजेश्वर प्रसाद सिंह और ओपी जायसवाल भी बिहार सरकार के घोषणा से चकित हैं। उनका कहना है कि बिहार सरकार ने इतिहासकारों से बिना सलाह-मशविरा किए यह निर्णय लिया है।

बहरहाल, उत्तर भारत में कोई घटना घटे या सरकारी स्तर पर कोई निर्णय हो और उसको जाति की नजरिए से न देखा जाय, यह संभव नहीं। सम्राट् अशोक की जाति के प्रश्न पर झा कहते हैं कि अशोक को राजनीति का मुद्दा बनाकर जाति के दायरे तकं सीमित करने की कोशिश हो रही है। इसका एक मात्र उद्देश्य कुशवाहा वोटरों को आकर्षित करना है। उधर विधानपरिषद् सदस्य और इतिहास के प्रोफेसर सूरज नंदन कुशवाहा उक्त सभी जानेमाने विद्वानों के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि हमारे पास मूर्त और प्रत्यक्ष सबूत है कि सम्राट अशोक कुशवाहा वंश से संबंधित थे। राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष और केन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा भी दावे के साथ कहते हैैं कि सम्राट अशोक कुशवाहा वंश के थे।

राष्ट्रवादी कुशवाहा परिषद् का दावा है कि बिहार में निवास करने वाली कोयरी (कुशवाहा) आबादी मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य और विश्व विख्यात सम्राट अशोक की वंशज है। परिषद् ने इन्हीं प्रतीकों के माध्यम से कोयरी जाति को भाजपा से जोडऩे का अभियान चलाया था। बिहार में यादव और मुसलमान के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी कोयरियों की है, जो 7-10 प्रतिशत के आसपास बताई जाती है। राष्ट्रवादी कुशवाहा परिषद की पहल पर बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पूर्व पटना में आयोजित एक समारोह में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सम्राट् अशोक पर डाक टिकट जारी करते हुए कहा था कि यदि बिहार में भाजपा की सरकार बनेगी तो कुम्हरार में सम्राट् अशोक की विशाल प्रतिमा स्थापित होगी। इसी समारोह में जोर-शोर से बताया गया कि सम्राट् अशोक कुशवाहा वंश से संबंधित थे। हालांकि भाजपा और कुछ इतिहासकारों के दावों के वितरीत वास्तविकता यह है कि बिहार में मौर्यवंश व सम्राट अशोक सिर्फ कोईरी ही नहीं कुर्मी व कई अन्य हमपेशा जातियों के लिए एक उर्जावान प्रेरणाश्रोत रहे हैं। ये जातियां स्वयं को इनका वंशज मानती हैं। देश के अन्य हिस्सों में इस प्रेरणा श्रोत से जुड़ी कई अन्य हमपेशा जातियां भी हैं (सूची देखें)।

बहरहाल भाजपा की इस कवायद की चुनाव के बहुत पहले आलोचना शुरु हो गयी थी। ‘द टेलीग्राफ’ ने 9 दिसंबर 14 को और ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने अपने 14 सितम्बर 2015 के अंक में कहा कि मौर्य सम्राज्य के संस्थापकों को किसी जाति-विशेष से जोडऩा गलत है। इन टेलीग्राफ में इस विषय पर छपे लेख का खंडन करते हुए फारवर्ड प्रेस के अगस्त 2015 अंक में अरविंद कुमार का ‘मौर्यवंश और जाति अस्मिता का प्रश्न’ शीर्षक लेख प्रकाशित हुआ था। अरविंद कुमार ने इन अखबारों की आलोचना करते हुए उचित सवाल उठाया था कि भारत में इतिहास लेखन के लिए ब्राह्मण साहित्य को ही एकमात्र जाति क्यों माना जाता है??

अरविंद कुमार ने अपने लेख में कहा था कि ”कुशवाहा जाति के इस दावे को एक बारगी ख़ारिज नहीं किया जा सकता है। किसी भी परिकल्पना को सिद्ध करने की सटीक एवं वैज्ञानिक पद्धति है- क्षेत्र अध्ययन। यदि हम मौर्य साम्राज्य से जुड़े प्रमुख स्थलों या बुद्ध-काल के प्रमुख स्थलों का अवलोकन करते हैं तो पाते हैं कि इन क्षेत्रों में कुशवाहा जाति का जमाव सर्वाधिक है। 1908 ईस्वी के एक सर्वे में भी यह बात सामने आई थी कि कुम्हरार (पाटलिपुत्र), जहाँ मौर्य साम्राज्य के राजप्रासाद थे, से सटे बड़े क्षेत्र में कुशवाहों के अनेक गाँव (यथा कुम्हरार खास, संदलपुर, तुलसीमंडी, रानीपुर आदि) हैं तथा इन गाँवों की 70 से 80 प्रतिशत जनसँख्या कुशवाहा है। प्राचीन काल में जिन स्थलों पर भी राजधानियाँ रहीं हैं, वहाँ इस जाति का जनसंख्या-घनत्व अधिक रहा है, यथा उदन्तपुरी (वर्तमान बिहारशरीफ शहर एवं उससे सटे विभिन्न गाँव) में सर्वाधिक जनसंख्या इसी जाति की हैै। राजगीर के आसपास कई गाँव (यथा राजगीर खास, पिलकी महदेवा, सकरी, बरनौसा, लोदीपुर आदि) इस जाति से संबंधित हैं। प्राचीन वैशाली गणराज्य की परिसीमा में भी इस जाति की जनसंख्या अधिक हैै। बुद्ध से जुड़े स्थलों पर इस जाति की अधिकता है यथा कुशीनगर, बोधगया, सारनाथ आदि। नालंदा विश्वविद्यालय के खण्डहर के आसपास भी इस जाति के अनेक गाँव हैं यथा कपटिया, जुआफर, कपटसरी, बडगाँव, मोहन बिगहा आदि। उपर्युक्त उदाहरणों से यह प्रतीत होता है कि यह जाति प्राचीन काल में शासक वर्ग से संबंधित थी तथा नगरों में रहती थी। इनके खेत प्राय: नगरों के किनारे थे। अत: नगरीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु ये कालांतर में कृषि करने लगे। आज भी इस जाति का मुख्य पेशा कृषि ही माना जाता है।

बहरहाल, इतिहासकारों के दावों से इतर इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि मौर्यवंश के शासक कृषक जातियों से थे। कोई जरूरी नहीं कि वह जाति कुशवाहा ही हो। कालक्रम में अनेक जातियों ने यह कार्य किया होगा तथा उनका नामकरण भी अलग-अलग होता रहा होगा। वास्तव में इतिहासकार इस संबंध में कोई दावा कर भी नहीं रहे हैं। वे तो बस इतना कह रहे हैं कि उन्हें मौर्यवंश के संस्थापकों की न तो सामाजिक पृष्ठभूमि पता है न ही उनकी जन्मतिथियों की जानकारी है। अगर ऐसा है तो यह न सिर्फ उनकी अज्ञानता को प्रदर्शित करता है, बल्कि इतिहास की अध्ययन पद्धति पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है।

गौरतलब है कि अशोक जयंती का असर सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहेगा क्योंकि देश में विशुद्ध कृषक जातियों की एक बहुत बड़ी आबादी है, जो विभिन्न नामों से जानी जाती है। यह जयंती जल्दी ही देश के अन्य राज्यों में भी गैर सरकारी स्तर पर ही सही, मनायी जाने लगेगी तथा इन जातियों के राजनीतिक-सामाजिक एकीकरण का वाहक बनेगी। ये जातियां काफी समय से अपने सर्वमान्य नायक की तलाश में थीं। ऐसे में सम्राट अशोक से बेहतर नायक उनके लिए कौन होगा, जिसका एक सिरा महान बुद्ध से भी जुड़ता है। इस कारण यह जयंती इन जातियों को दलित आंदोलनों की प्रखरता के भी करीब लाएगी।।

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2016 अंक में प्रकाशित )

#कुशवाहा

18/05/2022
17/05/2022

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