12/03/2026
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अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातुह
📢 तमाम मेम्बरान से निवेदन है कि इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें,
इसमें कोशिश की गई है कि ज़कात से जुड़ी पूरी जानकारी आसान भाषा में दी जा सके।
📖 ज़कात से जुड़ी अहम जानकारी 📖
👥 आम लोग, व्यापारी, किसान और पशुपालक – सभी के लिए,
💰 कुछ रकम और उनकी ज़कात (2.5% यानी 1/40 हिस्सा)
₹40,000 पर ₹1,000
₹80,000 पर ₹2,000
₹1,00,000 पर ₹2,500
₹2,00,000 पर ₹5,000
₹3,00,000 पर ₹7,500
₹4,00,000 पर ₹10,000
₹5,00,000 पर ₹12,500
₹10,00,000 पर ₹25,000
₹20,00,000 पर ₹50,000
₹30,00,000 पर ₹75,000
₹40,00,000 पर ₹1,00,000
₹50,00,000 पर ₹1,25,000
₹1 करोड़ पर ₹2,50,000
📝 किन चीज़ों पर ज़कात फ़र्ज़ है?
✅ सोना और चांदी
✅ सोने-चांदी के ज़ेवर (चाहे इस्तेमाल में हों)
✅ नकद पैसा
✅ व्यापार का माल
✅ मुनाफ़े के लिए खरीदा गया प्लॉट
✅ शेयर
✅ बीमा और प्राइज़ बॉन्ड की मूल रकम
✅ उधार दिया गया पैसा (अगर वापस मिलने की उम्मीद हो)
✅ कमेटी/चिट फंड में जमा रकम
✅ खेती की पैदावार (उश्र)
✅ चरने वाले जानवर
📝 किन चीज़ों पर ज़कात नहीं है?
➖ रहने का घर
➖ रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ें
➖ इस्तेमाल की गाड़ी
➖ पहनने के कपड़े
➖ बिजली-पानी के बिल
➖ कर्मचारियों की तनख्वाह
➖ जो सामान व्यापार के लिए न हो
⚠ ज़कात न देने का अंजाम
📌 ज़कात देने से इनकार करना बहुत बड़ा गुनाह है। (सूरह फुस्सिलत 6-7)
📌 ज़कात न देने वालों को सख़्त सज़ा का ज़िक्र है। (सूरह तौबा 34-35)
📌 ज़कात देने वाले क़यामत के दिन ग़म और डर से महफूज़ रहेंगे। (सूरह बक़रा 277)
📌 ज़कात गुनाहों की माफी और दर्जे की बुलंदी का ज़रिया है। (सूरह तौबा 103)
🔴 ज़कात किस पर फ़र्ज़ है?
हर समझदार, आक़िल, बालिग़, मालदार मुसलमान (मर्द या औरत) पर
👉 बशर्ते कि वह “साहिब-ए-निसाब” हो।
👑 सोने की ज़कात
लगभग 87–88 ग्राम (7.5 तोला) सोने पर ज़कात फ़र्ज़ है।
इस्तेमाल का सोना हो या बगैर इस्तेमाल शुदा हो।
दर: 2.5%
💍 चांदी की ज़कात
लगभग 612 ग्राम (52.5 तोला) चांदी पर ज़कात फ़र्ज़ है।
दर: 2.5%
🌾 खेती की पैदावार (उश्र)
बारिश या नदी के पानी से सींची गई ज़मीन → 10%
खुद पानी देकर सींची गई ज़मीन → 5%
🏠 किराये के मकान पर ज़कात
मकान पर ज़कात नहीं,
लेकिन अगर किराया जमा होकर निसाब तक पहुँच जाए और एक साल गुजर जाए, तो उस रकम पर 2.5% ज़कात होगी।
🚗 गाड़ी पर ज़कात
घरेलू गाड़ी पर ज़कात नहीं।
अगर किराये से कमाई हो और रकम जमा हो जाए, तो उस जमा रकम पर ज़कात होगी।
🏪 व्यापार के माल पर ज़कात
दुकान के पूरे माल की वर्तमान मार्केट कीमत लगाकर उसका 2.5% ज़कात देना फ़र्ज़ है (अगर निसाब पूरा हो और एक साल गुजर जाए)।
🏕 प्लॉट या ज़मीन
मुनाफ़े के लिए खरीदा गया प्लॉट → ज़कात फ़र्ज़
रहने के लिए खरीदा गया प्लॉट → ज़कात नहीं
📋 ज़कात किनको दी जा सकती है?
(सूरह तौबा 60 के मुताबिक)
ग़रीब
मिस्कीन
कर्ज़दार
मुसाफ़िर
ज़कात इकट्ठा करने वाले प्रतिनिधि
नए मुसलमान (अगर ज़रूरतमंद हों)
कैदी
अल्लाह की राह में जद्दोजहद करने वाले
📝ज़कात किन को नहीं दी जा सकती
❌ माता-पिता, दादा-दादी
❌ बेटा-बेटी, पोता-पोती
❌ पति-पत्नी एक-दूसरे को
❌ मालदार व्यक्ति
❌ सैयद (हाशमी)
⚠ अहम बातें
✔ ज़कात सिर्फ़ हलाल कमाई से दी जाए।
✔ सूद, रिश्वत या हराम कमाई की ज़कात नहीं होती।
✔ ज़कात सही होने के लिए “तमीलीक” ज़रूरी है (ग़रीब को मालिक बनाना)।
✔ अंग्रेजी नहीं, बल्कि हिजरी (चाँद के) साल का हिसाब होगा।
✔ मार्केट की मौजूदा कीमत से ज़कात निकाली जाएगी।
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Markaz Mujahid-E-Daoran Foundation Wa Ashraf-Us-Sufiya Academy
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