26/05/2026
हमारे देश का एजुकेशन सिस्टम ऐसे रोबोट तैयार कर रहा है जो 99% नंबर लाकर एग्जाम तो टॉप कर सकते हैं, लेकिन ज़िंदगी की छोटी सी मुसीबत आते ही अंदर से पूरी तरह टूट जाते हैं! ❌⚖️
IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग, IIM बैंगलोर से एमबीए और फिर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास करके IAS बनने वाली अधिकारी दिव्या मित्तल का एक बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। उन्होंने किसी लाग-लपेट के बिना हमारे शिक्षा तंत्र की उस कमज़ोरी को उजागर किया है जिसे हम सब जानते हैं, पर बात करने से डरते हैं।
दिव्या मित्तल ने जो कहा, वो हर परिवार की आँखें खोलने के लिए काफी है:
सिर्फ़ रट्टाफिकेशन: स्कूलों में बच्चों को सिर्फ़ जवाब याद करवाए जाते हैं ताकि वे परीक्षा की कॉपियां भर सकें, लेकिन उन्हें 'सवाल पूछना' और लीक से हटकर सोचना कभी नहीं सिखाया जाता।
तनाव से निपटने में फेल: इतनी बड़ी-बड़ी संस्थाओं में पढ़ने के बावजूद उन्हें कभी यह नहीं सिखाया गया कि अकेलेपन, मानसिक तनाव और डिप्रेशन से कैसे निपटना है।
नंबरों की अंधी दौड़: हमारा सिस्टम बच्चों को कामयाब होना तो सिखाता है, लेकिन अगर वो कभी फेल हो जाएं, तो उस 'हार' को कैसे संभालना है, यह कोई नहीं बताता।
यही वजह है कि आज कोटा से लेकर देश के अलग-अलग कोनों से मासूम बच्चों के टूटने की खबरें आती हैं। माता-पिता बच्चों पर 'शर्मा जी के बेटे' जैसा बनने का दबाव डालते हैं, कोचिंग वाले उन्हें मशीन समझते हैं और स्कूल उन्हें सिर्फ़ एक 'रैंक' मानकर चलते हैं।
जब तक हमारी पढ़ाई में लाइफ स्किल्स, मानसिक स्वास्थ्य और खुश रहने के तरीके शामिल नहीं होंगे, तब तक डिग्रियां सिर्फ़ कागज़ का टुकड़ा बनकर रह जाएंगी। एक बड़े पद पर बैठकर इस कड़वे सच को दुनिया के सामने रखने के लिए IAS दिव्या मित्तल के इस साहस को हमारा सलाम! 🫡🇮🇳📚✨
"ईमानदारी से बताइए, क्या आपको भी लगता है कि हमारे स्कूलों में फाइनेंशियल लिटरेसी (पैसे का मैनेजमेंट) और मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) को एक ज़रूरी सब्जेक्ट बनाना चाहिए? अपनी बेबाक राय कमेंट्स में ज़रूर दें! 👇🔥⚖️🚩✨"