प्रभु यीशु के अनमोल वचन

प्रभु यीशु के अनमोल वचन 📖 हर दिन परमेश्वर के वचन | 🙏 विश्वास, प्रेम और आशा का संदेश | ❤️ प्रभु यीशु के अनमोल वचन और प्रेरणादायक कहानियाँ।

✝️🛐🙏🙏🙏 *📖 लैव्यवस्था 19:12“तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं।”* 1. “तुम...
14/08/2026

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*📖 लैव्यवस्था 19:12
“तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं।”*
1. “तुम मेरे नाम की…”
➡️ यहाँ परमेश्वर अपने पवित्र नाम की बात कर रहे हैं। परमेश्वर का नाम सत्य, पवित्रता और विश्वासयोग्यता को दर्शाता है।
2. “झूठी शपथ खाके…”
➡️ इसका अर्थ है—परमेश्वर का नाम लेकर किसी झूठी बात को सच साबित करने की कोशिश करना।
जैसे कोई व्यक्ति कहे, “मैं परमेश्वर की कसम खाकर कहता हूँ…”, जबकि वह जानता है कि वह बात झूठ है।
3. “अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना…”
➡️ झूठ बोलकर परमेश्वर का नाम लेना उनके नाम का अनादर करना है।
हमारे झूठ या गलत व्यवहार के कारण दूसरे लोगों के मन में परमेश्वर के प्रति गलत धारणा बन सकती है।
4. “मैं यहोवा हूं।”
➡️ परमेश्वर याद दिलाते हैं कि वह यहोवा हैं—सर्वशक्तिमान, पवित्र और सत्य परमेश्वर। इसलिए उनके नाम को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
🌿 इस वचन की मुख्य सीख
परमेश्वर चाहता है कि उसके लोग सत्य बोलें और उसके पवित्र नाम का सम्मान करें।
परमेश्वर के नाम को अपनी बात मनवाने, झूठ को सच साबित करने या दूसरों को धोखा देने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
👉 सीधी बात:
“जहाँ सत्य बोलने के लिए परमेश्वर की शपथ की जरूरत पड़ रही हो, वहाँ सबसे पहले अपने जीवन में ऐसा विश्वासयोग्य चरित्र बनाओ कि तुम्हारा साधारण ‘हाँ’ हाँ और ‘नहीं’ नहीं हो।”
यह शिक्षा यीशु की बात से भी मेल खाती है: “तुम्हारी बात हाँ की हाँ, या नहीं की नहीं हो।” (मत्ती 5:37)

✝️🛐🙏🙏🙏यह वचन लूका 6:47–48 हमें बताता है कि सच्चा विश्वास केवल यीशु की बातें सुनने में नहीं, बल्कि उन्हें मानकर जीवन में ...
13/08/2026

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यह वचन लूका 6:47–48 हमें बताता है कि सच्चा विश्वास केवल यीशु की बातें सुनने में नहीं, बल्कि उन्हें मानकर जीवन में उतारने में है।
📖 वचन का सरल और सही अर्थ
यीशु कहते हैं—जो व्यक्ति उनके पास आता है, उनकी बातें सुनता है और उनके अनुसार चलता है, वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान है जिसने अपना घर बनाने से पहले गहरी नींव खोदकर चट्टान पर नींव रखी।
यहाँ:
घर = हमारा जीवन
चट्टान = यीशु मसीह और उनका वचन
गहरी नींव = विश्वास, आज्ञाकारिता और परमेश्वर के वचन पर दृढ़ जीवन
बाढ़/धारा = जीवन की परीक्षाएँ, दुःख, संकट, विरोध और कठिन परिस्थितियाँ
ध्यान देने वाली बात यह है कि चट्टान पर बना घर भी बाढ़ से बचा नहीं रहा; बाढ़ उसके पास आई। इसका अर्थ है कि यीशु पर विश्वास करने वाले व्यक्ति के जीवन में भी समस्याएँ आ सकती हैं। लेकिन जब जीवन की नींव मसीह और उनके वचन पर होती है, तो परिस्थितियाँ उसे आसानी से हिला नहीं सकतीं।
❤️ सबसे बड़ा संदेश
यीशु केवल यह नहीं कहते कि “मेरी बातें सुनो”, बल्कि कहते हैं कि “सुनकर उन्हें मानो।”
इसलिए हमें केवल बाइबल पढ़ना या सुनना ही नहीं है, बल्कि:
क्षमा करना है → प्रेम करना है → सत्य बोलना है → पाप से दूर रहना है → प्रार्थना करना है → परमेश्वर की आज्ञा माननी है → कठिन समय में भी विश्वास बनाए रखना है।
यही मजबूत नींव है।
🔥 आज अपने आप से पूछें
क्या मेरा जीवन केवल यीशु की बातें सुनने पर बना है, या मैं उनकी बातों के अनुसार भी चलता हूँ?
क्योंकि मजबूत विश्वासी जीवन केवल सुनने से नहीं, बल्कि वचन को मानकर जीने से बनता है।
🙏 प्रार्थना:
“हे प्रभु यीशु, मेरे जीवन को अपनी चट्टान पर स्थापित कर। मुझे केवल आपका वचन सुनने वाला नहीं, बल्कि उसे मानने और अपने जीवन में उतारने वाला बना। जब मेरे जीवन में कठिनाइयों की बाढ़ आए, तब मेरा विश्वास न डगमगाए। मुझे आपकी आज्ञा में स्थिर रख और मेरे जीवन से आपकी महिमा हो। आमीन।”
याद रखें:
🪨 नींव जितनी गहरी, विश्वास उतना मजबूत।
✝️ जीवन की सबसे सुरक्षित नींव—यीशु मसीह और उनका वचन।

*पहीलौटा का अधिकार पिता को धोखा देकर आशीर्वाद का मतलब क्या है* ✝️🛐🙏🙏🙏इसका सरल अर्थ यह है:1. पहिलौठे का अधिकार (Birthrigh...
31/07/2026

*पहीलौटा का अधिकार पिता को धोखा देकर आशीर्वाद का मतलब क्या है*

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इसका सरल अर्थ यह है:
1. पहिलौठे का अधिकार (Birthright)
उस समय परिवार में पहले जन्मे पुत्र (पहिलौठे) को विशेष अधिकार मिलते थे:
पिता की संपत्ति में बड़ा हिस्सा मिलता था।
परिवार का अगुवा बनने का अधिकार मिलता था।
परिवार की विशेष आशीष और जिम्मेदारी उसी को मिलती थी।
एसाव पहला पुत्र था, इसलिए यह अधिकार उसी का था। लेकिन उसने अपनी भूख के कारण इसे एक कटोरे दाल के बदले याकूब को दे दिया (उत्पत्ति 25:29-34)।
2. पिता को धोखा देकर आशीर्वाद लेना
जब इसहाक बूढ़े हो गए और उनकी आँखों से दिखाई नहीं देता था, तब वे अपने बड़े बेटे एसाव को अंतिम आशीर्वाद🌚 देना चाहते थे।
लेकिन रिबका (याकूब की माँ) ने याकूब को सलाह दी कि वह एसाव के कपड़े पहन ले और बकरी की खाल अपने हाथों पर बाँध ले, ताकि उसके पिता उसे एसाव समझें। इस तरह इसहाक ने धोखे में याकूब को वह विशेष आशीर्वाद दे दिया जो वे एसाव को देना चाहते थे (उत्पत्ति 27:1-29)।
इससे क्या सीख मिलती है?
याकूब ने परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर धैर्य रखने के बजाय शुरुआत में धोखे का सहारा लिया, और उसके कारण उसे परिवार से दूर भागना पड़ा तथा कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाद में उसका जीवन बदल गया। उसने परमेश्वर पर भरोसा करना सीखा, संघर्ष किया, और अंततः परमेश्वर ने स्वयं उसे आशीष दी तथा उसका नाम इस्राएल रखा (उत्पत्ति 32:24-28)।
मुख्य शिक्षा:
परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाएँ पूरी करता है, लेकिन हमें उन्हें पाने के लिए धोखा, छल या बेईमानी का सहारा नहीं लेना चाहिए। हमें विश्वास, धैर्य और आज्ञाकारिता के साथ परमेश्वर की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

हालेलुयाह हालेलुयाह अमीन

*बंधनों से छुटकारा कैसे पाए* ✝️🛐🙏🙏🙏याकूब के जीवन से मिलने वाली सीख (बाइबल वचनों सहित)याकूब ने अपने जीवन की शुरुआत में आश...
31/07/2026

*बंधनों से छुटकारा कैसे पाए*

✝️🛐🙏🙏🙏

याकूब के जीवन से मिलने वाली सीख (बाइबल वचनों सहित)
याकूब ने अपने जीवन की शुरुआत में आशीष और सफलता पाने के लिए कई बार अपनी बुद्धि, छल और बेईमानी का सहारा लिया। उसने अपने भाई एसाव का पहिलौठेपन का अधिकार लिया और अपने पिता इसहाक को धोखा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया (उत्पत्ति 25:29-34; 27:1-29)। लेकिन बाद में उसे समझ आया कि धोखे से मिली सफलता सच्ची शांति और स्थायी आशीष नहीं देती।
जब याकूब ने परमेश्वर की ओर मन फिराया, तब उसके जीवन में परिवर्तन आया। उसने कठिन परिश्रम किया, धैर्य रखा, संघर्षों का सामना किया और परमेश्वर पर भरोसा करना सीखा। परमेश्वर के साथ उसकी कुश्ती के बाद उसका नाम याकूब से बदलकर इस्राएल रखा गया (उत्पत्ति 32:24-28)। इसके बाद परमेश्वर ने उसे बहुत आशीष दी और उसकी संतान, धन-सम्पत्ति और प्रभाव को बढ़ाया (उत्पत्ति 35:9-12)।
इससे हमें यह सीख मिलती है कि परमेश्वर की आशीष छल से नहीं, बल्कि विश्वास, ईमानदारी, परिश्रम और धैर्य से प्राप्त होती है।
संबंधित वचन:
"क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पच्छिम से, और न जंगल की ओर से आती है; परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है।"
— भजन संहिता 75:6-7
"अपने सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना, और अपनी समझ का सहारा न लेना।"
— नीतिवचन 3:5-6
"तू अपने काम यहोवा पर छोड़ दे, इससे तेरी कल्पनाएँ सिद्ध होंगी।"
— नीतिवचन 16:3
"यहोवा की आशीष धनवान बनाती है, और उसके साथ वह दुःख नहीं मिलाता।"
— नीतिवचन 10:22
संदेश:
सफलता पाने के लिए कभी छल या बेईमानी का मार्ग न चुनें। परमेश्वर पर विश्वास रखें, ईमानदारी से मेहनत करें और धैर्य रखें। परमेश्वर अपने समय पर ऐसी आशीष देगा जो स्थायी होगी और आपके जीवन से उसके नाम की महिमा होगी।

हालेलुयाह हालेलुयाह अमीन

✝️🛐🙏🙏🙏🙏"तू मुझ से प्रार्थना कर, और मैं तेरी सुनकर तुझे बड़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊँगा जिन्हें तू अब तक नहीं जानता।"— यि...
27/07/2026

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"तू मुझ से प्रार्थना कर, और मैं तेरी सुनकर तुझे बड़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊँगा जिन्हें तू अब तक नहीं जानता।"
— यिर्मयाह 33:3
सरल अर्थ
परमेश्वर अपने लोगों से कह रहे हैं:
"मुझसे प्रार्थना कर" — मेरे पास आओ और मुझ पर भरोसा रखो।
"मैं तेरी सुनूँगा" — मैं तुम्हारी प्रार्थना का उत्तर दूँगा।
"बड़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊँगा" — मैं अपनी इच्छा, अपनी योजना और वे बातें प्रकट करूँगा जिन्हें तुम अपनी बुद्धि से नहीं समझ सकते।
आज के लिए शिक्षा
यह वचन हमें प्रोत्साहित करता है कि जब हम किसी कठिन परिस्थिति, निर्णय या भविष्य को लेकर उलझन में हों, तो सबसे पहले परमेश्वर से प्रार्थना करें। वह अपनी इच्छा के अनुसार मार्गदर्शन, बुद्धि और समझ देता है।
प्रार्थना:
हे स्वर्गीय पिता, मैं आपके पास आता हूँ। अपने वचन के अनुसार मेरी प्रार्थना सुनिए। मुझे अपनी इच्छा समझने की बुद्धि दीजिए और उन बातों को प्रकट कीजिए जिन्हें मैं नहीं जानता। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

27/07/2026

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वचन:"परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना...
19/07/2026

वचन:
"परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।"
— 1 शमूएल 16:7
वचन का विस्तृत अर्थ
यह घटना उस समय की है जब परमेश्वर ने शमूएल को इस्राएल का नया राजा अभिषिक्त करने के लिए भेजा। शमूएल जब यिशै के घर पहुँचे, तो उन्होंने सबसे पहले उसके बड़े पुत्र एलियाब को देखा। वह लंबा, बलवान और देखने में आकर्षक था। शमूएल ने सोचा कि यही परमेश्वर का चुना हुआ राजा होगा।
लेकिन परमेश्वर ने शमूएल से कहा कि बाहरी रूप, सुंदरता, ऊँचा कद या व्यक्तित्व देखकर निर्णय मत करो। क्योंकि मनुष्य बाहर का रूप देखता है, लेकिन परमेश्वर मनुष्य के हृदय को देखता है।
अंत में परमेश्वर ने सबसे छोटे पुत्र दाऊद को चुना, जो उस समय भेड़ों की रखवाली कर रहा था। दाऊद दिखने में साधारण था, लेकिन उसका हृदय परमेश्वर के प्रति समर्पित, विश्वासयोग्य और नम्र था। इसलिए परमेश्वर ने उसे राजा बनाया।
इस वचन से हमें क्या सीख मिलती है?
परमेश्वर हमारे हृदय को देखता है।
लोग हमारे कपड़े, चेहरा, धन, पद या शिक्षा देखकर राय बनाते हैं, लेकिन परमेश्वर हमारे विचार, चरित्र, विश्वास और प्रेम को देखता है।
बाहरी रूप सफलता की गारंटी नहीं है।
अच्छा दिखना या प्रभावशाली व्यक्तित्व होना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ सच्चा संबंध रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
नम्र और आज्ञाकारी व्यक्ति परमेश्वर को प्रिय है।
परमेश्वर ऐसे लोगों का उपयोग करता है जो उसकी इच्छा पूरी करना चाहते हैं, चाहे दुनिया उन्हें साधारण ही क्यों न समझे।
किसी का मूल्य केवल उसके रूप से मत आँकिए।
हमें भी लोगों का सम्मान उनके हृदय, चरित्र और व्यवहार के आधार पर करना चाहिए, न कि उनके बाहरी रूप या सामाजिक स्थिति के आधार पर।
यदि लोग आपको कम आँकते हैं, तो निराश न हों।
हो सकता है दुनिया आपको महत्व न दे, लेकिन यदि आपका हृदय परमेश्वर के प्रति सच्चा है, तो वह आपको अपने समय पर ऊँचा उठाएगा।
आज के जीवन में इस वचन का संदेश
आज समाज में अक्सर सुंदरता, पैसा, ऊँचा पद और बाहरी व्यक्तित्व को अधिक महत्व दिया जाता है। लेकिन परमेश्वर हमें याद दिलाता है कि उसके सामने सबसे मूल्यवान चीज़ शुद्ध हृदय, सच्चा विश्वास, नम्रता और आज्ञाकारिता है। यदि हमारा मन परमेश्वर को प्रसन्न करने वाला है, तो वह हमें अपनी योजना के अनुसार उपयोग करेगा और आशीष देगा।
प्रार्थना
हे स्वर्गीय पिता, मुझे ऐसा हृदय दे जो तुझे प्रिय हो। मुझे बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चाई, नम्रता, प्रेम और विश्वास के साथ जीवन जीना सिखा। मेरा जीवन ऐसा हो कि लोग नहीं, बल्कि तू मुझसे प्रसन्न हो। यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करता हूँ। आमीन।

✝️🛐🙏🙏🙏इफिसियों 5:10–21 का बहुत सरल अर्थविषय: "प्रभु को प्रसन्न करने वाला जीवन कैसे जिएँ?"इफिसियों 5:10"और यह परखो, कि प्...
19/07/2026

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इफिसियों 5:10–21 का बहुत सरल अर्थ
विषय: "प्रभु को प्रसन्न करने वाला जीवन कैसे जिएँ?"
इफिसियों 5:10
"और यह परखो, कि प्रभु को क्या भाता है।"
सरल अर्थ: कोई भी काम करने से पहले सोचें—क्या इससे प्रभु यीशु प्रसन्न होंगे? यदि हाँ, तो वही काम करें।
इफिसियों 5:11
"अन्धकार के निष्फल कामों में सहभागी न हो..."
सरल अर्थ: पाप, झूठ, धोखा और बुरे कामों से दूर रहें। यदि कोई गलत कर रहा है, तो प्रेम से उसे सही रास्ता दिखाएँ।
इफिसियों 5:12
"उनके गुप्त कामों की चर्चा भी लाज की बात है।"
सरल अर्थ: जो काम छिपकर किए जाते हैं और परमेश्वर को पसंद नहीं हैं, वे शर्म की बात हैं।
इफिसियों 5:13
"ज्योति सब कुछ प्रगट करती है।"
सरल अर्थ: परमेश्वर का वचन और सत्य हमारे जीवन की गलतियों को दिखाता है ताकि हम बदल सकें।
इफिसियों 5:14
"हे सोने वाले, जाग..."
सरल अर्थ: यदि आप आत्मिक रूप से ठंडे या लापरवाह हो गए हैं, तो जागिए। प्रभु यीशु के पास आइए, वह आपके जीवन में प्रकाश भर देंगे।
इफिसियों 5:15
"बुद्धिमानों की नाईं चलो।"
सरल अर्थ: बिना सोचे-समझे जीवन मत जीओ। हर निर्णय समझदारी और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार लो।
इफिसियों 5:16
"अवसर को बहुमोल समझो।"
सरल अर्थ: समय बहुत कीमती है। हर दिन का उपयोग अच्छे कामों और परमेश्वर की महिमा के लिए करो।
इफिसियों 5:17
"प्रभु की इच्छा क्या है, समझो।"
सरल अर्थ: अपनी नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा जानने और उसे पूरा करने का प्रयास करो।
इफिसियों 5:18
"दाखरस से मतवाले न बनो... आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।"
सरल अर्थ: नशे से दूर रहो। इसके बजाय पवित्र आत्मा को अपने जीवन में काम करने दो।
इफिसियों 5:19
"भजन, स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।"
सरल अर्थ: परमेश्वर की आराधना करो, उसकी स्तुति करो और अपने मन में आनंद बनाए रखो।
इफिसियों 5:20
"हर बात के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करो।"
सरल अर्थ: सुख हो या दुःख, हर परिस्थिति में परमेश्वर का धन्यवाद करना सीखो।
इफिसियों 5:21
"मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।"
सरल अर्थ: नम्रता से एक-दूसरे का सम्मान करो, प्रेम करो और मिल-जुलकर जीवन बिताओ।
मुख्य संदेश
यदि हम प्रभु यीशु को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो हमें पाप से दूर रहना है, परमेश्वर की इच्छा को समझना है, समय का सही उपयोग करना है, पवित्र आत्मा से भरते जाना है, हर समय धन्यवाद करना है और प्रेम व नम्रता के साथ जीवन जीना है। यही जीवन परमेश्वर को प्रिय है।

भजन संहिता 128:2"तू अपनी कमाई को निश्चय खाने पाएगा; तू धन्य होगा, और तेरा भला ही होगा॥"इस वचन का अर्थ यह है कि जो व्यक्त...
09/07/2026

भजन संहिता 128:2
"तू अपनी कमाई को निश्चय खाने पाएगा; तू धन्य होगा, और तेरा भला ही होगा॥"
इस वचन का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति परमेश्वर का भय मानता है और उसके मार्गों पर चलता है, उसे परमेश्वर उसके परिश्रम का आशीषित फल देता है। उसे अपनी मेहनत का आनंद मिलता है और उसका जीवन परमेश्वर की भलाई से भर जाता है।
इस वचन से मिलने वाली मुख्य शिक्षाएँ:
मेहनत ईमानदारी से करो, परमेश्वर उसका फल देगा।
परमेश्वर चाहता है कि उसके बच्चे अपनी कमाई का आनंद लें।
सच्चा सुख और समृद्धि परमेश्वर की आशीष से आती है।
जो प्रभु पर भरोसा रखता है, उसका अंत भला होता है।
आज के लिए प्रार्थना:
हे स्वर्गीय पिता, मैं यीशु मसीह के नाम से आपके सामने आता हूँ। मेरी मेहनत को आशीष दें। मुझे ईमानदारी से काम करने की बुद्धि और सामर्थ्य दें। ऐसा करें कि मैं अपनी कमाई का आनंद ले सकूँ, किसी कर्ज, धोखे या बाधा के कारण उसका फल मुझसे न छिने। मेरे घर पर आपकी शांति, समृद्धि और भलाई बनी रहे। यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करता हूँ। आमीन।

2 तीमुथियुस 2:22 का अर्थ"जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास,...
09/07/2026

2 तीमुथियुस 2:22 का अर्थ
"जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।"
यह वचन 2 Timothy में Paul the Apostle द्वारा Timothy को दी गई शिक्षा है। इसका संदेश हर विश्वासी के लिए महत्वपूर्ण है।
इस वचन की मुख्य बातें:
"जवानी की अभिलाषाओं से भाग"
इसका अर्थ केवल शारीरिक पापों से बचना नहीं है, बल्कि क्रोध, घमंड, लालच, अहंकार, बुरी संगति और हर उस इच्छा से दूर रहना है जो हमें परमेश्वर से दूर ले जाए।
"धर्म का पीछा कर"
ऐसा जीवन जीने का प्रयास करें जो परमेश्वर को प्रसन्न करे—सच्चाई, ईमानदारी और पवित्रता के साथ।
"विश्वास का पीछा कर"
कठिन परिस्थितियों में भी प्रभु पर भरोसा बनाए रखें और उसके वचनों पर दृढ़ रहें।
"प्रेम का पीछा कर"
दूसरों से वैसा ही प्रेम करें जैसा मसीह ने हमसे किया। क्षमा और दया का जीवन अपनाएँ।
"मेल-मिलाप का पीछा कर"
झगड़े और विवाद से बचें। जहाँ तक संभव हो, सबके साथ शांति से रहें।
"जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उनके साथ"
अच्छी संगति आध्यात्मिक जीवन को मजबूत करती है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो आपको प्रभु के और निकट ले जाएँ।
जीवन में लागू करें:
पाप के अवसरों से दूर रहें।
प्रतिदिन बाइबल पढ़ें और प्रार्थना करें।
विश्वासियों की अच्छी संगति बनाए रखें।
हर दिन धर्म, विश्वास, प्रेम और शांति का अभ्यास करें।
प्रार्थना:
हे स्वर्गीय पिता, मुझे ऐसी सामर्थ्य दें कि मैं हर बुरी अभिलाषा से दूर भागूँ। मेरा मन शुद्ध रखें और मुझे धर्म, विश्वास, प्रेम और मेल-मिलाप के मार्ग पर चलाएँ। मुझे ऐसे विश्वासियों की संगति दें जो मुझे आपके और निकट ले जाएँ। यह प्रार्थना मैं प्रभु यीशु मसीह के नाम में माँगता हूँ। आमीन।

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Akbarpur
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