14/08/2026
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*📖 लैव्यवस्था 19:12
“तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं।”*
1. “तुम मेरे नाम की…”
➡️ यहाँ परमेश्वर अपने पवित्र नाम की बात कर रहे हैं। परमेश्वर का नाम सत्य, पवित्रता और विश्वासयोग्यता को दर्शाता है।
2. “झूठी शपथ खाके…”
➡️ इसका अर्थ है—परमेश्वर का नाम लेकर किसी झूठी बात को सच साबित करने की कोशिश करना।
जैसे कोई व्यक्ति कहे, “मैं परमेश्वर की कसम खाकर कहता हूँ…”, जबकि वह जानता है कि वह बात झूठ है।
3. “अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना…”
➡️ झूठ बोलकर परमेश्वर का नाम लेना उनके नाम का अनादर करना है।
हमारे झूठ या गलत व्यवहार के कारण दूसरे लोगों के मन में परमेश्वर के प्रति गलत धारणा बन सकती है।
4. “मैं यहोवा हूं।”
➡️ परमेश्वर याद दिलाते हैं कि वह यहोवा हैं—सर्वशक्तिमान, पवित्र और सत्य परमेश्वर। इसलिए उनके नाम को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
🌿 इस वचन की मुख्य सीख
परमेश्वर चाहता है कि उसके लोग सत्य बोलें और उसके पवित्र नाम का सम्मान करें।
परमेश्वर के नाम को अपनी बात मनवाने, झूठ को सच साबित करने या दूसरों को धोखा देने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
👉 सीधी बात:
“जहाँ सत्य बोलने के लिए परमेश्वर की शपथ की जरूरत पड़ रही हो, वहाँ सबसे पहले अपने जीवन में ऐसा विश्वासयोग्य चरित्र बनाओ कि तुम्हारा साधारण ‘हाँ’ हाँ और ‘नहीं’ नहीं हो।”
यह शिक्षा यीशु की बात से भी मेल खाती है: “तुम्हारी बात हाँ की हाँ, या नहीं की नहीं हो।” (मत्ती 5:37)