05/10/2025
उठो, देखो — भगवा बोल रहा है।
यह केवल ध्वज नहीं,
यह ऋषियों का प्रण है,
धरती का धर्म है,
और अग्नि का उद्घोष है।
यह उस परंपरा की श्वास है
जिसने वेदों में सत्य बोया,
जिसने तप में तेज गढ़ा,
और जिसने अंधकार में भी
प्रकाश का मार्ग दिखाया।
यह उन असंख्य यज्ञों की भस्म है
जो आज भी हवाओं में गूंजते हैं —
‘इदम् न मम’, त्याग का मंत्र लेकर।
यह भगवा हमें याद दिलाता है —
धर्म कोई वाद नहीं, साधना है।
यह शक्ति है, पर करुणा के साथ।
यह ज्वाला है, पर शीतलता के साथ।
जब यह आकाश में लहराता है,
तो हमारे भीतर का अग्नि–बीज
फिर से जाग उठता है।
यह कहता है —
“उठो, जागो, और धर्म को जीओ।”
क्योंकि जब भगवा बोलता है —
तो स्वयं ब्रह्म की वाणी गूंजती है।”