01/05/2014
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। अक्षय तृतीया के दिन अक्षतयुक्त जल से स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु जी की मूर्ति पर अक्षत चढ़ाना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु जी की पुष्प, धूप और चन्दन आदि से पूजा करनी चाहिए। इस दिन गंगा जल से स्नान करने का भी विधान है। ऐसा करने से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
इस दिन सभी रस, अन्न, शहद, जल से भरे घड़े, फल, जूता, अन्न, गौ, भूमि आदि ब्राह्मणों को दान में देना चाहिए। आम धारणा के अनुसार इस दिन शादी और खरीदारी करना शुभ होता है।
मंगल कार्य जो किए जा सकते हैं : इस दिन समस्त शुभ कार्यों के अलावा प्रमुख रूप से शादी, स्वर्ण खरीदें, नया सामान,गृह प्रवेश, पदभार ग्रहण, वाहन क्रय, भूमि पूजन तथा नया व्यापार प्रारंभ कर सकते हैं।
क्यों है इस दिन का महत्व : भविष्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सतयुग एवं त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में भगवान परशुराम, नर-नारायण एवं हयग्रीव आदि तीन अवतार अक्षय तृतीया के दिन ही धरा पर आए। तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के पट भी अक्षय तृतीया को खुलते हैं। वृंदावन के बांके बिहारी के चरण दर्शन केवल अक्षय तृतीया को होते हैं। वर्ष में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त है, उसमें प्रमुख स्थान अक्षय तृतीया का है। ये हैं- चैत्र शुक्ल गुड़ी पड़वा, वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया सम्पूर्ण दिन, आश्विन शुक्ल विजयादशमी तथा दीपावली की पड़वा का आधा दिन।