Sant Shri Asharamji Ashram

Sant Shri Asharamji Ashram Official page of Sant Shri Asharamji Ashram. 60 years of continual service to the society.
(341)

This Page is managed by "Shabd Brahm Mandir Private Limited".

ABOHAR (PUNJAB) :- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू से प्रेरित महिला उथान मंडल अबोहर द्वारा  बड़े उत्साह से किलकारी स्कूल मे...
28/08/2026

ABOHAR (PUNJAB) :- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू से प्रेरित महिला उथान मंडल अबोहर द्वारा बड़े उत्साह से किलकारी स्कूल मे रक्षा बंधन का त्योहार मनाया गया।

28/08/2026
सेवा की गतिविधियां देश के हर कोने से..आश्रम दर्पण
28/08/2026

सेवा की गतिविधियां देश के हर कोने से..
आश्रम दर्पण

🌷 Thought of the Day 🌷🌻  प्रकृति में घटने वाली घटनाओं में यदि तुम्हारी पूर्ण सम्मति नहीं होगी तो वे घटनाएँ तुम्हें परेशा...
28/08/2026

🌷 Thought of the Day 🌷

🌻 प्रकृति में घटने वाली घटनाओं में यदि तुम्हारी पूर्ण सम्मति नहीं होगी तो वे घटनाएँ तुम्हें परेशान कर देंगी।

🌻इस संसार में जीवात्मा को अकेले जाना पड़ेगा, उससे पहले अपने ईश्वरत्व का अनुभव कर ले तो कितना अच्छा होगा। कुटुम्बी अग्निदान कर दें, उससे पहले ब्रह्मविद्या का दान पा लें तो कितना अच्छा होगा। कान की सुनने की क्षमता क्षीण हो जाए, उससे पहले सुनने की आसक्ति मिट जाए तो कितना अच्छा होगा। नेत्रज्योति देखऩे से इन्कार करने लगे, उससे पहले देखने की आसक्ति मिटा दे तो कितना अच्छा होगा। पैर चलने से जबाव देने लग जाए, उससे पहले संसार में भटकने की इच्छा मिट जाए तो कितना अच्छा होगा।

🌻जो शिष्य गुरु के साथ एकता स्थापित करना चाहता हो उसे संसार की क्षणभंगुर चीजों के प्रति संपूर्ण वैराग्य का गुण विकसित करना चाहिए।

🙏- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू 🙏


रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। 💐💐 नारियली पूर्णिमा, रक्षाबंधन (श्रावणी पूर्णिमा पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्प...
27/08/2026

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। 💐💐

नारियली पूर्णिमा, रक्षाबंधन (श्रावणी पूर्णिमा पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है । इसे वर्ष में एक बार धारण करने से मनुष्य वर्षभर रक्षित हो जाता है । - भविष्य पुराण)

भारतीय संस्कृति का पावन पर्व : रक्षाबंधन
(रक्षाबंधन : 28 अगस्त)
भारतीय संस्कृति में श्रावणी पूर्णिमा को मनाया जानेवाला रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के पवित्र स्नेह का प्रतीक है । यह पर्व मात्र रक्षासूत्र के रूप में राखी बाँधकर रक्षा का वचन देने का ही नहीं, वरन् प्रेम, स्नेह, समर्पण, संस्कृति की रक्षा, निष्ठा के संकल्प के जरिये हृदयों को बाँधने का वचन देने का भी पर्व है ।
‘रक्षासूत्र' बाँधने की परम्परा तो वैदिक काल से रही है, जिसमें यज्ञ, युद्ध, आखेट, नये संकल्प और धार्मिक अनुष्ठान के आरम्भ में कलाई पर सूत का धागा (मौली) बाँधा जाता है । रक्षासूत्र को बोलचाल की भाषा में ‘राखी' कहा जाता है, जो वेद के संस्कृत शब्द ‘रक्षिका' का अपभ्रंश है ।
रक्षाबंधन का महत्त्व बतलाते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘‘रक्षाबंधन अर्थात् शुद्ध प्रेम का बंधन... पराक्रम और प्रेम के समन्वय, साहस और संयम के आपसी सहयोग एवं ऋषि-पूजन का दिवस... बहन का भाई के प्रति व साधक का सद्गुरु के प्रति स्नेह प्रकट करने तथा भाई का बहन के प्रति और सद्गुरु का साधक के प्रति सुरक्षा-संकल्प करने का दिवस । रक्षाबंधन का महापर्व यह सत्प्रेरणा देता है कि आप अपने दाहिने हाथ पर बहन या किसी हितैषी से सुरक्षा के भाव से भरी राखी बँधवा लेना और ऐसी भावना करना कि ‘मेरी विकारों से रक्षा हो, मेरी भक्ति बढ़े व भगवत्प्राप्ति की सन्मति मुझे प्राप्त हो ।'
इस दिन बहन भाई के मस्तक पर तिलक-अक्षत लगाते समय संकल्प करे कि ‘मेरे भाई का मन अक्षय ज्ञान में, अक्षय शांति में, अक्षय आनंद में प्रवेश पाये । मेरे भाई को अक्षय सुख मिले, उसे अक्षय उपलब्धि हो । वर्ष भर का प्रत्येक दिवस मेरे भाई के लिए सुमधुर हो । सफलता में अहंकार न हो, विफलता में विषाद न हो । सफलता, विफलता स्वप्नतुल्य लगे, उसे देखनेवाले अपने-आपको जाने, ब्रह्मज्ञान हो, आत्मज्ञान हो । जिस ज्ञान से बढ़कर कोई ज्ञान नहीं, जिस सुख से बढ़कर कोई सुख नहीं है, जिस लाभ से बढ़कर कोई लाभ नहीं है - ऐसा आत्मलाभ हो । मेरा भाई त्रिलोचन बने अर्थात् दो नेत्रों से जगत को देखकर साधारण जीव की तरह आयुष्य नष्ट न करे, अपितु परमात्मज्ञान सम्पन्न तीसरा नेत्र खोले ।' भाई बहन के शील, स्वास्थ्य और मनोभावों की रक्षा करने का संकल्प करे ।
कैसी दिव्य है भारतीय संस्कृति ! पड़ोस के भाई या बहन के प्रति मन में थोड़ा-सा विकारी भाव उत्पन्न हुआ तो यह ऋषि-परम्परा से चला आया, ऋषियों की प्रसादी ले आया, रक्षा के संकल्प से सम्पन्न नन्हा-सा, पतला-सा, दिव्य भावना से भरा राखी का धागा बहन ने भाई को बाँधा और भाव अच्छे हो गये ।
नजरें बदलीं तो नजारे बदले । किश्ती ने बदला रुख तो किनारे बदले ।।
राखी कितनी कीमती है इसका महत्त्व नहीं है, बाँधनेवाले का भाव व बँधवानेवाले की दृढ़ता जितनी अधिक है उतना ही अधिक फल होता है ।
आप अगर ईमानदारी से इस सुरक्षा के धागे का फायदा उठाते हैं तो आज का युवान जो पड़ोस की बहन को बहन कहने की योग्यता खो बैठा है, युवती पड़ोस के भाई को भाई कहने की योग्यता खो बैठी है वह योग्यता फिर से विकसित हो सकती है । इससे संयम बढ़ेगा, ब्रह्मचर्य एवं युवाधन की रक्षा होगी ।
आपके अंदर ब्रह्मचर्य, स्वास्थ्य और देश की रक्षा करने का ऋषि-ज्ञान नहीं है तो दूसरे लोग आपको क्या ऊपर उठायेंगे ! कोई भी आपको ऊपर नहीं उठायेगा; ऊपर तो आपको आपका आत्मा उठायेगा, आपकी संस्कृति, आपका ज्ञान उठायेगा । इसलिए आप अपनी दिव्य संस्कृति की प्रसादी को, ऋषियों के ज्ञान को जीवन में लायें और जीवन को उन्नत बनायें ।
आप इस दिन मन-ही-मन अपने इष्टदेव, गुरुदेव को राखी बाँधना और प्रार्थना करना कि ‘हे इष्टदेव ! हे गुरुदेव ! हम सांसारिक विकारों से सुरक्षित रहें, चिंताओं से बचे रहें ।' बाह्य पूजा की अपेक्षा मानसिक पूजा अंतरंग होने से विशेष लाभदायी होती है ।''
हिन्दू धर्म के कुछ सुसंस्कारों के लिए श्रावणी पूर्णिमा सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है :
उपाकर्म संस्कार : इस दिन गृहस्थ ब्राह्मण व ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गौ-मूत्र को मिलाकर पंचगव्य बनाते हैं और उसे शरीर पर छिड़कते, मर्दन करते व पान करते हैं, फिर जनेऊ बदलकर शास्त्रोक्त विधि से हवन करते हैं । इसे उपाकर्म कहा जाता है । इस दिन ऋषि उपाकर्म कराकर शिष्य को विद्याध्ययन कराना आरम्भ करते थे ।
उत्सर्जन क्रिया : श्रावणी पूर्णिमा को सूर्य को जल च‹ढाकर सूर्य की स्तुति तथा अरुंधतीसहित सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है और दही-सत्तू की आहुतियाँ दी जाती हैं । इस क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं ।
(लोक कल्याण सेतु : जुलाई २०११)

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞**⛅दिनांक - 28 अगस्त 2026**⛅दिन - शुक्रवार**⛅विक्रम संवत् - 2083**⛅अयन - दक्षिणायण**⛅ऋतु - शरद...
27/08/2026

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 28 अगस्त 2026*
*⛅दिन - शुक्रवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - दक्षिणायण*
*⛅ऋतु - शरद*
*⛅मास - श्रावण*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - पूर्णिमा सुबह 09:08 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा*
*⛅नक्षत्र -‌ शतभिषा प्रातः 03:13 अगस्त 29 तक तत्पश्चात् पूर्वभाद्रपद*
*⛅योग - अतिगण्ड सुबह 07:28 तक तत्पश्चात् सुकर्मा*
*⛅राहुकाल - सुबह 10:53 से दोपहर 12:28 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:08*
*⛅सूर्यास्त - 06:48 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:37 से प्रातः 05:22 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:51 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा, श्रावणी उपकर्म, संस्कृत दिवस, गायत्री जयंती, गायत्री जापम, वर लक्ष्मी व्रत*
*🌥️विशेष - पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

━━━━━━━━━━━ 🎥 ━━━━━━━━━━━

🌹*"समृद्धि कहाँ निवास करती है ? | Where does prosperity reside ?"*
https://youtube.com/shorts/IlZ2H19yELA?si=p8CiwsqyRn7awNYD

*🙏 स्वयं देखें एवं दूसरों को दिखाएं 🙏*

DURG (CG) :- कांवड़िया सेवा एवं विशाल भंडारा।🙏नंदिनी आश्रम(छ.ग.)🙏पूज्य संत श्री आशारामजीबापू  की पावन प्रेरणा से नंदिनी आ...
27/08/2026

DURG (CG) :- कांवड़िया सेवा एवं विशाल भंडारा।

🙏नंदिनी आश्रम(छ.ग.)

🙏पूज्य संत श्री आशारामजीबापू की पावन प्रेरणा से नंदिनी आश्रम (छ.ग.) के तत्वाधान में युवा सेवा संघ नंदिनी नगर के द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पवित्र श्रावण मास पर कांवड़िया सेवा एवं भक्तजनों में विशाल भंडारा का कार्यक्रम शिवधाम ग्राम-कोड़िया जिला-दुर्ग(छ.ग.) में सम्पन्न हुआ।

जिसकी कुछ प्रमुख झलकियां।..

27/08/2026

रक्षाबंधन 2026 | शुभमुहूर्त व भद्राकाल ? मंत्र कौन-सा और कब जपना है ? जरूरी अनसुनी बातें

me
SantShriAsharamjiBapu SantShriAsharamjiAshram

27/08/2026

Address

Sant Shri Asharamji Ashram, Motera, Sabarmati
Ahmedabad
380005

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sant Shri Asharamji Ashram posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Sant Shri Asharamji Ashram:

Shortcuts

Share