Shree Dwarkadhish Mandir Raipur Ahmedabad

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Bahuva Ni Pole, Raipur, Ahmedabad, Gujarat, India - 380001

"निकुञ्जे सुगुञ्जावनीये प्रियायाः निमील्याक्षिणी वेणुमुद्वादयन्तम्।व्रजानन्दकन्दं चतुर्बाहुरूपं भजे स्वामिनीवल्लभं द्वार...
19/03/2026

"निकुञ्जे सुगुञ्जावनीये प्रियायाः
निमील्याक्षिणी वेणुमुद्वादयन्तम्।
व्रजानन्दकन्दं चतुर्बाहुरूपं
भजे स्वामिनीवल्लभं द्वारकेशम्।।"
(तृ.गृ.गो.श्रीव्रजेशकुमारजी महाराजश्री कृत श्रीद्वारकेशाष्टकम् - श्लोक सं.4)

आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम)...।

व्रजमण्डल, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में ...आज से ...वि.सं.2083 का शुभारंभ हो रहा है...!!!

पुष्टिमार्गीय सेवा प्रकार में भी आज "संवत्सरोत्सव" मनाया जाता है...।

नूतन-वर्षारंभ की हार्दिक-मंगल बधाई...!!!

"आँखमिचौली लीला" के नायक-नायिका...हमारे श्रीस्वामिनीवल्लभ... एवं... श्रीस्वामिनीजी... सकल लीलापरिकर के साथ में... सदैव नित्य-नूतन रसमय-आनंदरूपा लीलाएं करते हुए...हमारी रंचक सेवा ... श्रीवल्लभ और श्रीव्रजवल्लभाओं की आड़ी से...प्रसन्नता से अंगीकार करके हमें कृतार्थ करे...यही विनती आजके मंगल अवसर पर श्रीयुगलसरकार के श्रीचरणों में...!!!

तृतीय गृहाधीश, कांकरोली नरेश, अर्वाचीन युग के "ब्रह्मर्षि", नि.ली. पू.पा.गो.108 श्रीव्रजेशकुमारजी महाराजश्री रचित... ये ...
09/03/2026

तृतीय गृहाधीश, कांकरोली नरेश, अर्वाचीन युग के "ब्रह्मर्षि", नि.ली. पू.पा.गो.108 श्रीव्रजेशकुमारजी महाराजश्री रचित... ये दो श्लोक ...अति सरल दिखते हुए भी ...कितने अर्थगंभीर हैं...!!!

वाक्पति श्रीवल्लभ की वाणी में सूत्रात्मकता की जो अनुभूति होती है...उसी सूत्रात्मक शैली में आपश्री ने भी... इन दो छोटे-छोटे श्लोकों में ...पुष्टिभक्ति की व्याख्या, उसके प्राणरुप भाव का स्वरूप और भगवत्कृपा की प्राप्ति का उपाय - इन तीनों मूलभूत तत्वों को निरूपित कर दिये हैं...!!!

आपश्री की कृपा से... आपश्री की दिव्य-अलौकिक वाणी के माध्यम से ...आपश्री के निगूढ़ स्वरूप को पहचानने की योग्यता हमें प्राप्त हो... यही विनती...
"श्रीवल्लभ-सुधाधारा-वाग्रसास्वादशाली" ऐसे आपश्री के पावन पादपद्मों में...!!!

-"झूलत डोल दोऊ अनुरागे। केसरि और गुलाल से भींजे चोवा लपटे बागे।।"-"डोल माई झूलत है नंदलाल। संग राजत वृषभाननंदिनी जोरी पर...
03/03/2026

-"झूलत डोल दोऊ अनुरागे।
केसरि और गुलाल से भींजे
चोवा लपटे बागे।।"

-"डोल माई झूलत है नंदलाल।
संग राजत वृषभाननंदिनी
जोरी परम रसाल।।"

-"आज ललना लाल
फाग खेलत बने
मिलि झूलत सखी नवरंग डोल।
झोटिका देत व्रजनारी आनंदभरी
छिरकत कुमकुमादि सौरभ अमोल।।"

दोलोत्सव की हार्दिक-रंगभरी-मंगल बधाई...!!!
सभी प्रकार के भाव-रुचि-अधिकारवाले भक्तों का जिसमें प्रवेश संभव है ...ऐसी इस रसमय-रंगारंग-अद्भुत लीला के तादृश दर्शन करानेवाले अलौकिक कीर्तनों के माध्यम से...

और ...252 वैष्णवों की वार्ता में समाविष्ट...कोकिलावन में अपनी हथेली की पटुली बना कर उसमें अपने सेव्य श्रीप्रभु को डोल झूला कर दोलोत्सव मनानेवाले उस विरक्त-निष्किंचन भगवदीय के भाव का भावन करते हुए ...

और...अपने सेव्य श्रीप्रभु के संग दोलोत्सव मनाने हेतु पटना से रातोंरात काशी पहुँचने का उद्यम करनेवाले परम भगवदीय श्रीहरिवंशजी पाठक की आड़ी से...

हम भी हमारे श्रीस्वामिनीवल्लभ को दोलोत्सव का सुख प्रदान कर सकें...यही विनती निःसाधनफलात्मा के चरणकमलों में...!!!

*विशेष-* पुष्टिमार्गीय पंचांग व्यवस्था अनुसार, तृतीय गृह में इस वर्ष होलिकाप्रदीपन भी आज ही सूर्योदय पूर्व होगा, और श्रीप्रभु के राजभोग अरोग लेने के पश्चात् दोलोत्सव मनाया जायेगा।

आज फाल्गुन शु.13...।तृतीय गृह सेवा-शृंगार प्रणाली अनुसार आजका दिन "बगीचा तेरस" के नाम से जाना जाता है...।कांकरोली में .....
01/03/2026

आज फाल्गुन शु.13...।

तृतीय गृह सेवा-शृंगार प्रणाली अनुसार आजका दिन "बगीचा तेरस" के नाम से जाना जाता है...।

कांकरोली में ... आज ... श्रीनिजमंदिर से लेकर... कमलचौक तक चोर्यासी कदलीस्थंभों का बगीचा बनाया जाता है... जिसे लता-पता और विविध पुष्पों से मनोहारी ढंग से
सजाया जाता है ...और... उसके मध्य में...रंगों के फव्वारे चलाये जाते हैं...!!!

इसी कारण इसे "चोर्यासी स्थंभ बगीचा" भी कहा जाता है...!!!

श्रीस्वामिनीवल्लभ श्रीद्वारकेश प्रभु...राजभोग आरोग कर... बगीचे में पधारते हैं ...और वहाँ उत्सवभोग अंगीकार कर...बड़ा भारी खेल होता है...!!!

आजके उत्सव की विशेषता यह है कि...आज ...श्रीद्वारकेश प्रभु ...जन्माष्टमी के दिन धरे गये वस्त्र... और... श्रीमस्तक पर मीनाकारी से सुशोभित सेहरा एवम् सुवर्ण के आभरण अंगीकार करते हैं...!!!

अपने सेव्य श्रीप्रभु को... प्रत्यक्ष रूप से बगीचे में पधरा कर लाड़ लड़ाने की अनुकूलता-सामर्थ्य हमें भले ही प्राप्त न हो, ... हमारे हृदयकमल के चौक में तत्सुखात्मक मनोरथों का बगीचा सजा कर हम हमारे श्रीस्वामिनीवल्लभ को प्रसन्नता का अनुभव करा सकें यही विनती "जनशिक्षाकृतेकृष्णभक्तिकृत्" हमारे श्रीवल्लभ के पादपद्म में...!!!

-"आज हरि कुंजन खेलत होरी। गृह-गृह तें आई युवतीजन, नवल विहँसि बनी गोरी।।"-"कुंज कुटीर मिल यमुना तीर, खेलत होरी रस भरे अही...
27/02/2026

-"आज हरि कुंजन खेलत होरी।
गृह-गृह तें आई युवतीजन,
नवल विहँसि बनी गोरी।।"

-"कुंज कुटीर मिल यमुना तीर,
खेलत होरी रस भरे अहीर।"

-"खेलत गिरिधर राधा
नव निकुंज मधि होरी।
जुरि आई व्रजवनिता
अद्भुत रूप किशोरी।।"

आज...
"कुंज एकादशी" (फाल्गुन शु.11) की... हार्दिक बधाई...!!!

तृतीय गृह सेवा प्रणाली अनुसार... आज से "दोलोत्सव" की बधाई का प्रारंभ...!!!

तदनुसार... आज से... खेल के समय "अष्टपदी" के स्थान पर "डोल" के पदों का गान किया जाता है...।

आज से लेकर... "होलिका प्रदीपन" तक...शयन दर्शन में... राल-गुलाल उडाये जाते हैं...।

आज... राजभोग दर्शन में... सोलह कदलीस्तंभ की सुंदर कुंज में विराज कर... श्रीद्वारकेश प्रभु...बड़े ठाट-बाट से "होरीखेल" का आनंद लेते हैं...।

प्रस्तुत चित्र में... मथुरा के श्रीराजाधिराज मंदिर में विराजमान श्रीद्वारकेश प्रभु ने... वही वस्त्र-शृंगार अंगीकार किये हुए हैं... जो तृतीय गृह शृंगार प्रणाली में आज के दिन के लिये निश्चित किये हुए हैं...।

इस आनंदलीला का भावन... कीर्तनों के द्वारा...हमारे हृदय में भी स्फुरित हो... यही विनती..."आनंद" श्रीवल्लभ के चरणकमलों में...!!!

बधाई... मंगल बधाई ... बधाई...!!!श्रीगोवर्धनधर श्रीनाथजी के पाटोत्सव की मंगल बधाई...!!!वैसे तो श्रीनाथजी के कई पाटोत्सव स...
08/02/2026

बधाई... मंगल बधाई ... बधाई...!!!

श्रीगोवर्धनधर श्रीनाथजी के पाटोत्सव की मंगल बधाई...!!!

वैसे तो श्रीनाथजी के कई पाटोत्सव संप्रदाय के इतिहास में अंकित हैं...किन्तु ...पूरे संप्रदाय में आपका पाटोत्सव...आज ही के दिन मनाया जाता है...और.... उसका एक विशेष कारण है।

वि.सं.1623 में ...आज ही के दिन अर्थात् माघ (व्रज-फाल्गुन) कृ.7 को...श्रीगुसांईजी के ज्येष्ठ पुत्र श्रीगिरिधरजी को आज्ञा देकर... आप रथारूढ होकर... मथुरा-स्थित श्रीगुसांईजी के निवासस्थान "सतघरा" पधारे...।

यहाँ ...दो मास और बाईस दिन तक विराजमान हो कर ...आपने श्रीगुसांईजी के पूरे परिवार की सेवा अंगीकार की...उनके साथ होरीखेल का भरपूर आनंद लिया ... और ...फगुवा में पूरे परिवार के सभी सदस्यों से मांग-मांग कर उनके सर्वस्व का अंगीकार किया...!!!

प्रस्तुत चित्रों में ...श्रीगिरिधरजी अपने कंधे पर उठा कर श्रीनाथजी को श्रीगिरिराजजी की तरहटी में स्थित रथ में विराजमान कर रहे हैं ... और...दूसरे चित्र में ..."सतघरा" में विराजमान अन्य भगवद्स्वरूपों के साथ श्रीनाथजी के दर्शन हो रहे हैं...!!!

मथुरा में आज भी विद्यमान "सतघरा" का यह स्थान... श्रीगुसांईजी के परिवार की सर्व-समर्पण की भावना... और ...श्रीनाथजी के इस परिवार के प्रति पक्षपात की अमर गाथा सुना रहा है...!!!

भूरिशः दंडवत् प्रणाम... पुष्टिपुरुषोत्तम की इस अनोखी-अनूठी पुष्टिलीला को...!!!

बधाई...!!! मंगल बधाई...!!!तृतीय गृह त्रयोदश तिलकायत नि.ली.गो.108 श्रीव्रजभूषणलालजी महाराजश्री (श्रीदादाजी) के प्राकट्योत...
03/02/2026

बधाई...!!! मंगल बधाई...!!!

तृतीय गृह त्रयोदश तिलकायत नि.ली.गो.108 श्रीव्रजभूषणलालजी महाराजश्री (श्रीदादाजी) के प्राकट्योत्सव की... अनेकानेक हार्दिक बधाई...!!!

आपश्री का प्राकट्य... आज ही के दिन (माघ/व्रज-फाल्गुन कृ.2)... वि.सं.1968 में... तृ.गृ.एकादश तिलकायत गो.श्रीबालकृष्णलालजी महाराजश्री के तृतीय पुत्ररत्न के रूप में... अहमदाबाद में हुआ...!!!

केवल पाँच वर्ष की बाल्यवय में... अपने पितृचरण का नित्यलीलाप्रवेश हो जाने पर... आप की मातृचरण श्रीसौंदर्यवती बहूजी (श्री 'पा'महाराज) के दीर्घदृष्टिपूर्ण कुशल आयोजन के फलस्वरूप... आप को उत्तमोत्तम शिक्षा प्राप्त हुई... और... न केवल संप्रदाय में... अपितु समस्त भारतवर्ष में... आप... सर्वमान्य विद्वान के रूप में ससम्मान प्रतिष्ठित हुए...!!!

वि.सं.2024 में... तृतीय गृह निधि श्रीद्वारकाधीश प्रभु को साथ पधरा कर... आप द्वारा की गई अभूतपूर्व व्रजयात्रा... आज भी... वैष्णव सृष्टि के मानसपटल पर अंकित है...!!!

श्रीसर्वोत्तम स्तोत्र में निरूपित प्रत्येक नाम की अर्थसंगति एवं लीला की प्रत्यक्ष अनुभूति करानेवाले अद्भुत चित्रों सहित... जो व्याख्या ग्रंथ आपने... वि.सं.2028 में प्रसिद्ध किया.. वह आज भी श्रीवल्लभ के नाम-गुण-लीला को समझने में... उसकी अनूठी उपकारकता के कारण... अद्वितीय है...!!!

पशु-पक्षी के रूप में भूतल पर अवतरित दैवी जीवों को पहचान कर... उन्हें पुनः श्रीप्रभु की सेवा में नियोजित करनेवाले... "कृपानिधि" श्रीवल्लभ के ही अवर स्वरूप आपश्री... हम पर भी ऐसी ही कृपावृष्टि करें यही विनती आज के पावन अवसर पर आपश्री के पदपंकजों में...!!!

*|| શ્રીદ્વારકેશો જયતિ ||* *🪷છપ્પનભોગ મહોત્સવ || અભિવાદન સમારોહ || રસિયા 🪷**🏵️ત્રિદિવસીય મહોત્સવ 🏵️* *🏵️અમદાવાદ, તા:૨૩-૨...
26/01/2026

*|| શ્રીદ્વારકેશો જયતિ ||*

*🪷છપ્પનભોગ મહોત્સવ || અભિવાદન સમારોહ || રસિયા 🪷*

*🏵️ત્રિદિવસીય મહોત્સવ 🏵️*

*🏵️અમદાવાદ, તા:૨૩-૨૫ જાન્યુઆરી ૨૦૨૬🏵️*

*તૃતીય ગૃહાધીશ કાંકરોલી નરેશ પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ ડૉ. શ્રીવાગીશકુમારજી મહારાજશ્રીના ષષ્ટિપૂર્તિ મહોત્સવના ઉપલક્ષ્યમાં ત્રિદિવસીય મહોત્સવનું ભવ્ય આયોજન કરવામાં આવ્યું.*

*આ અવસરે તૃતીય ગૃહાધીશ કાંકરોલી નરેશ પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ ડૉ. શ્રીવાગીશકુમારજી મહારાજશ્રી, પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ શ્રીવ્રજેશકુમારજી મહોદયશ્રી(કડી),પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ શ્રીરાજેશકુમારજી મહોદયશ્રી(કડી), પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ શ્રીતિલકકુમારજી મહોદયશ્રી(અસારવા),પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ શ્રીઆભરણકુમારજી મહોદયશ્રી(ગોસ્વામી હવેલી),કાંકરોલી યુવરાજ પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ શ્રીવેદાંતકુમારજી મહોદયશ્રી અને કાંકરોલી યુવરાજ પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ શ્રીસિદ્ધાંતકુમારજી મહોદયશ્રીની મંગલ ઉપસ્થિતિમાં વિવિધ મનોરથો સહિત કાર્યક્રમોનું આયોજન કરવામાં આવ્યું.*

*પૂજ્ય આચાર્યચરણો દ્વારા શ્રીપ્રભુના સુખાર્થે છપ્પનભોગ મનોરથ અંગીકાર કરાવી લાડ લડાવવામાં આવ્યા આ ઉપરાંત પૂજ્ય મહારાજશ્રીનું ષષ્ટિપૂર્તિ નિમિતે અભિવાદન તથા હોળી રસિયાનું આયોજન કરવામાં આવ્યું.*

*આ ત્રિદિવસીય મહોત્સવના અવસરે અમદાવાદ સહિત વિવિધ શહેરોના વૈષ્ણવોએ દર્શન, ચરણ સ્પર્શ ,રસિયા તથા વચનામૃતનું રસપાન કરી ધન્યતા અનુભવી હતી.*

"गावत चली वसंत बधायो नंदराय दरबार।बानिक बनि-ठनि चोख-मोख सों ब्रजजन सब इकसार।।"आज माघ शु.5..। अर्थात्... "वसंत पंचमी"...!...
23/01/2026

"गावत चली वसंत बधायो
नंदराय दरबार।
बानिक बनि-ठनि चोख-मोख सों
ब्रजजन सब इकसार।।"

आज माघ शु.5..। अर्थात्... "वसंत पंचमी"...!!!

हमारे शास्त्रों में दी गई ऋतुचक्र की व्यवस्था के अनुसार ... वसंतऋतु का प्रारंभ तो ...चैत्र मास से...अर्थात् ...गुजराती फाल्गुन कृ.1 से होता है..।
आज का दिन तो वसंत के आगमन की बधाई के रूप में मनाया जाता है..।

वसंत आगमन के कीर्तन भी इसी तथ्य की पुष्टि करते हैं..।

वसंत के आगमन के साथ... जिस प्रकार पतझड़ समाप्त हो कर...पेड़-पौधे नवपल्लवित होने लगते हैं... उसी प्रकार... आज से प्रारंभ हो रहे रसमय-सख्यभावसंपृक्त "होरीखेल" के इन चालीस दिनों में...हमारे हृदय भी ...अलौकिक भावों से नवपल्लवित हों... भगवत्सुख के मनोरथों से पुष्पित हों... और...फलात्मा श्रीप्रभु की कृपा से फलानुभव के योग्य बने... यही अभिलाषा-अभ्यर्थना श्रीवसंतविहारीलाल के चरणकमलों में...!!!

बधाई... मंगल बधाई... बधाई...!!!आज पोष (व्रज-माघ) कृष्ण चतुर्थी...।तृतीय गृह के इतिहास का आज अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है......
06/01/2026

बधाई... मंगल बधाई... बधाई...!!!

आज पोष (व्रज-माघ) कृष्ण चतुर्थी...।

तृतीय गृह के इतिहास का आज अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है...!!!

वि. सं.1638 में आजके दिन रविवार था, और...आज ही के दिन... श्रीगुसांईजी के आशीर्वाद से ...आपश्री के तृतीय पुत्ररत्न राजीवलोचन श्रीबालकृष्णलालजी को... अपने चिर-अभिलषित मनोरथ की सिद्धि के रूप में ...श्रीगुञ्जावन से श्रीद्वारिकाधीश प्रभु के श्रीस्वामिनीजी प्राप्त हुए...!!!

तब से लेकर अद्यापि पर्यंत...श्रीद्वारिकाधीश प्रभु श्रीस्वामिनीजी के संग विराज रहे हैं और तृतीय गृह की सकल सृष्टि को कृतार्थ कर रहे हैं...!!!

श्रीगुसांईजी एवम् स्वयं श्रीप्रभु की आज्ञानुसार... श्रीस्वामिनीजी का सेवा-प्रकार संपूर्णतः गुप्त रूप से चलता रहा है...।

और, आज ही के दिन... वि. सं.2070 में... तृतीय गृहाधीश गो. श्रीव्रजेशकुमारजी महाराजश्री के मनोरथ स्वरूप ...पंचम गृह निधि, रासरासेश्वर श्रीगोकुलचन्द्रमाजी... कांकरोली पधार कर श्रीद्वारिकाधीश प्रभु के संग विराजे थे...!!!

उभय अलौकिक उत्सवों के पावन स्मरण से... आइये... हमारे अंत:करण में आनंद की अनुभूति करते हुए ... श्रीस्वामिनीवल्लभ और श्रीवल्लभ के चरणकमलों में सदैन्य दंडवत् प्रणाम समर्पित करें...!!!

बधाई...!!! मंगल बधाई...!!! आज पौष शु.10...।              आज ही के दिन... वि.सं.1996 में... हमारे तृतीय गृहाधीश, कांकरोली...
30/12/2025

बधाई...!!! मंगल बधाई...!!!

आज पौष शु.10...।

आज ही के दिन... वि.सं.1996 में... हमारे तृतीय गृहाधीश, कांकरोलीनरेश, "ब्रह्मर्षि", नि.ली. पू.पा.गो.108 श्रीव्रजेशकुमारजी महाराजश्री "सरकारश्री" का... तृतीय गृह त्रयोदश तिलकायत गो.श्रीव्रजभूषणलालजी महाराजश्री के ...द्वितीय पुत्ररत्न के रूप में भूतल पर प्राकट्य हुआ...!!!

अद्वितीय विद्वान्...
सनातन वैदिक धर्म की सभी शाखाओं के तज्ज्ञ...
श्रीमदाचार्यचरण द्वारा प्रस्थापित संप्रदाय-परंपरा के निर्वाहक...
श्रीगोपीनाथजी प्रभुचरण कृत 'साधन दीपिका' ग्रंथ के एकमात्र व्याख्याता...
प्रवचनश्रेणियों के माध्यम से 'नवरत्न', 'जलभेद' जैसे ग्रंथों के हार्द को सरल रूप से समझानेवाले...
'श्रीद्वारकेशाष्टकम्' और ऐसे अन्य कई लालित्यसभर-भावपूर्ण-हृदयंगम-छंदोबद्ध स्तोत्रों के रचयिता...
अनेकविध तत्सुखात्मक मनोरथों द्वारा अपने प्राणप्रेष्ठ श्रीद्वारकाधीश प्रभु की 'सेव्यसंतोषजनिका' सेवा में सदैव तत्पर...
जीवमात्र प्रति करुणायुक्त...
और... निज अंगीकृत सृष्टि को प्रतिक्षण अविरत कृपावृष्टि द्वारा भगवद्रस से परिप्लावित करने में अत्यंत प्रवीण...
आपश्री के ... प्राकट्योत्सव के पावन अवसर पर...
आपश्री के परम पुनीत पादपद्मों में... अनेकशः दंडवत् प्रणाम...!!!

"यस्य कृपाकटाक्षेण
पुष्टिभाक् वै भवेज्जनः।
श्रीव्रजेशाभिधानं तं
सर्वदा प्रणमाम्यहम्।।"

|| શ્રીદ્વારકેશો જયતિ || અમદાવાદ,તા: ૨૩-૨૫ જાન્યુઆરી ૨૦૨૬શુદ્ધાદ્વૈત તૃતીય ગૃહાધીશ કાંકરોલી નરેશ પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ ડ...
24/12/2025

|| શ્રીદ્વારકેશો જયતિ ||

અમદાવાદ,તા: ૨૩-૨૫ જાન્યુઆરી ૨૦૨૬

શુદ્ધાદ્વૈત તૃતીય ગૃહાધીશ કાંકરોલી નરેશ પૂજ્યપાદ ગોસ્વામી ૧૦૮ ડો. શ્રી વાગીશકુમારજી મહારાજશ્રીના મંગલ ષષ્ટિ પૂર્તિ મહોત્સવના ઉપલક્ષ્યમાં વિવિધ મનોરથ.


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