19/03/2026
"निकुञ्जे सुगुञ्जावनीये प्रियायाः
निमील्याक्षिणी वेणुमुद्वादयन्तम्।
व्रजानन्दकन्दं चतुर्बाहुरूपं
भजे स्वामिनीवल्लभं द्वारकेशम्।।"
(तृ.गृ.गो.श्रीव्रजेशकुमारजी महाराजश्री कृत श्रीद्वारकेशाष्टकम् - श्लोक सं.4)
आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम)...।
व्रजमण्डल, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में ...आज से ...वि.सं.2083 का शुभारंभ हो रहा है...!!!
पुष्टिमार्गीय सेवा प्रकार में भी आज "संवत्सरोत्सव" मनाया जाता है...।
नूतन-वर्षारंभ की हार्दिक-मंगल बधाई...!!!
"आँखमिचौली लीला" के नायक-नायिका...हमारे श्रीस्वामिनीवल्लभ... एवं... श्रीस्वामिनीजी... सकल लीलापरिकर के साथ में... सदैव नित्य-नूतन रसमय-आनंदरूपा लीलाएं करते हुए...हमारी रंचक सेवा ... श्रीवल्लभ और श्रीव्रजवल्लभाओं की आड़ी से...प्रसन्नता से अंगीकार करके हमें कृतार्थ करे...यही विनती आजके मंगल अवसर पर श्रीयुगलसरकार के श्रीचरणों में...!!!