27/08/2026
✨ "यदि जीव विनम्र और दीन होकर ईश्वर के चरणों में रहे, तो किसी भी अपमान का असर उसके मन पर नहीं होता। अपमान का दुःख मनुष्य को केवल तभी लगता है, जब वह अभिमान (अहंकार) में होता है।" 🕊️
यह सुविचार हमें अहंकार से मुक्ति और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का मार्ग दिखाता है। जब हम अपना अहंकार त्यागकर स्वयं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तब संसारी मान-अपमान और निंदा का प्रभाव हमारे मन की शांति को भंग नहीं कर पाता।
इस पावन श्रावण मास में निष्कलंक महादेव और पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा से अपने भीतर नम्रता और भक्ति भाव जागृत करें।
🔱 भगवान निष्कलंक महादेव एवं भगवान श्री कल्कि नारायण का असीम आशीर्वाद आप सभी पर सदा बना रहे! 🔱
🚩 जय श्री कल्कि | जय गुरुदेव | सनातन सत्पंथ 🚩
KalkiTirthdhamPrernapith