15/06/2023
【कुछ दिन पहले "असुर" वेब सीरीज का मनीष शर्मा के द्वारा एक अलग नजरिया पेश किया गया था जो कि सही है, बिलकुल सही है लेकिन इसका एक और नजरिया है जिसे राहुल सिंह राठौड़ ने पेश किया है। इसे देखने, समझने की जरूरत है।】
कुछ दिनों पहले मैंने एक रील शेयर किया था। तब मुझे यह ज्ञात नहीं था कि यह रील "असुर" वेब सीरीज की है। उस रील पर राष्ट्रवादी भाइयों ने इसकी प्रशंसा की। उसके बाद से मेरे बहुत से पोस्ट पर बहुत से भाइयों ने इस वेब सीरीज की बहुत प्रशंसा की। मुझसे बार-बार पूछा जाने लगा कि मैंने इसे अभी तक देख है या नहीं देखा है। ऐसे कमेन्ट्स पढ़-पढ़कर मुझे यह अहसास होने लगा कि ऐसा दिव्य वेब सीरीज अभी तक न देखकर अवश्य ही मैंने कोई पाप कर दिया है, क्योंकि इसकी प्रशंसा हिन्दुत्व के योद्धा और बड़े-बड़े साधक कर रहे थें।
मैंने अपने पापों का प्रायश्चित करते हुए इस वेब सीरीज का पुराना "असुर" और अभी नया वाला "असुर 2" का सारा एपिसोड देख लिया। निस्संदेह, यह वेब सीरीज बहुत ही बेहतरीन है। आज हम जिस आधुनिक डिजिटल दुनिया में रह रहे हैं, यह हमारे लिए कितना खतरनाक हो सकता है, उसे इस वेब सीरीज में बहुत ही नजाकत के साथ दर्शाया गया है। हम सभी की प्राइवेसी कम्प्रोमाइज हो रही है और उसका दुरुपयोग करके हम सभी को तबाह किया जा सकता है। इस दिशा में जागरूकता फैलाने के पैमाने पर इस वेब सीरीज लाजवाब है।
इसने इन सब विषयों को हम सबके सामने लाने के लिए हिन्दू पौराणिक कथाओं, हिन्दू दर्शन और हिन्दू धर्मग्रंथों को अपना केन्द्र बिन्दु बनाया है। इसमें बनारस, धनिष्ठा नक्षत्र, अश्विनी नक्षत्र, ज्योतिष, अर्जुन, कृष्ण, भीष्म, अश्वत्थामा, कल्कि अवतार, श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का बार-बार प्रयोग किया गया है, जिसके कारण हिन्दू दर्शक लहालोट होने लगा।
यह वेब सीरीज बनारस में एक कर्मकाण्डी ब्राह्मण के घर उत्पन्न बालक पर केन्द्रित है। बनारस का एक ज्योतिषी अनुकूल ग्रहों के योग में अपने संतान को उत्पन्न करना चाहता है, जिससे कि उसकी संतान देवतुल्य हो सके। लेकिन उससे दो दिन पहले ही एक अशुभ योग में वह बालक उत्पन्न हो जाता है और उसकी माँ का देहांत हो जाता है। इस कारण उसका पिता उससे नफरत करता है। उसे राक्षस मानता है और उसे हमेशा प्रताड़ित करता रहता है। बालक बहुत ही प्रतिभाशाली है, लेकिन वह मानसिक रूप से बीमार भी है।
इस बच्चे ने सारे शास्त्रों का अध्ययन कर रखा है। हिन्दू दर्शन पर इसकी जबरदस्त पकड़ है। लेकिन मानसिक रूप से बीमार होने के कारण यह स्वयं को असुर मानने लगता है और यह अपनी प्रतिभा का प्रयोग तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को अनैतिक बनाने और उनकी हत्या करने में करने लगता है। इसकी शुरुआत ये स्वयं अपने पिता की हत्या करके करता है। यह कल्कि अवतार को यथाशीघ्र अवतार लेने के लिए यह सब कर रहा है। यह भगवान को चुनौती दे रहा है। यह हत्यायें और विध्वंस को क्रूरता से अंजाम देता है और उसे श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के पाठ से जस्टिफाई करता है।
इस वेब सीरीज के माध्यम से इतनी खूबसूरती से हमारे मस्तिष्क में "अल्लाह हो अकबर" बोलते हुए बम फोड़ने वाले को रिप्लेस करके श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों को पढ़कर हत्या करनेवाले एक बड़े हिन्दू खलनायक को घुसेड दिया गया है। यहाँ आपके भगवान राम, कृष्ण आदि किसी का अपमान भी नहीं हो रहा है कि आपको आभास हो सके कि यह आपके धर्म पर हमला है। यहाँ आपके अवचेतन मन में यह भरा जा रहा है कि किसी एक धर्म के किताब को पढ़कर लोग आतंकवादी नहीं बन रहे हैं। सभी धर्मग्रंथों में ऐसे कंटेंट हैं जिसका उपयोग कुछ भटके हुए लोग करके उस धर्म को बदनाम कर देते हैं।
हकीकत में ऐसा एक उदाहरण नहीं है जिसमें कोई आतंकवादी हिन्दू दर्शन और हिन्दू माइथोलॉजी से प्रेरित होकर यह सब करता हो, जबकि दूसरे मजहबों के लाखों उदाहरण उपलब्ध हैं जिससे यह साबित होता है कि उसका धर्मग्रंथ उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है। वेब सीरीज के एक काल्पनिक खलनायक पात्र "असुर" के द्वारा आपके बच्चे-बच्चे के दिमाग में यह इंजेक्ट कर दिया गया कि वह बच्चा अपने बाप से बहस कर सके कि "हमारा "अब्दुल" ऐसा नहीं है। यदि धर्म की बात है तो हिन्दुओं में भी असुर जैसे लोग हैं जो धर्म ग्रंथ का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसमें हिन्दू धर्म का दोष नहीं है। उसी प्रकार, कुछ लोगों के आतंकवादी हो जाने के कारण हम अब्दुल के धर्म बुरा नहीं कह सकते हैं। उसके धर्म में भी असुर जैसे सनकी लोग हैं जिसके कारण धर्म बदनाम हो रहा।"
इसमें शब्द सिर्फ हिन्दू माइथोलॉजी के लिये जा रहे हैं, लेकिन उसे अपने तरीके से अपने नैरेटिव को सूट करने की दृष्टि से तोड़मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। इसमें कलयुग को "कलि" नामक खलपात्र बना दिया गया है जो कल्कि अवतार को चुनौती दे रहा है। हिन्दू पौराणिक आख्यानों में ऐसा कहीं नहीं है। इसमें ऐसा बताया गया है कि कल्कि अवतार को उत्तराखण्ड के पहाड़ों में बसे गाँव संभल में होगा, जबकि यह स्थान उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में स्थित है। धनिष्ठा नक्षत्र में भीष्म पितामह का जन्म हुआ था और कल्कि विष्णु के दसवें अवतार जन्म लेने वाले हैं; इस पूरे वेब सीरीज में सिर्फ ये दो तथ्य हैं जो सत्य हैं, इसके अलावा हर तथ्य को अपने अजेंडे के अनुसार मैन्युपुलेट करके दिखाया गया है। इसमें पूरे हिन्दू-माइथोलॉजी की माँ-बहन कर दी गयी है।
इस वेब सीरीज में हिन्दू बच्चे "शुभ" को क्रूर, हिंसक, दूसरों की हत्या करके आनंदित होनेवाला दिखाया गया है और एक बौद्ध भिक्षु बालक "अनंत" को प्रेम, करुणा, जीवन देनेवाला दिखाया गया है। हर बार हिन्दू सिरफिरे की क्रूरता के एक दृश्य के तुरन्त बाद बौद्ध भिक्षु का मनमोहक दृश्य परोसा गया है। यह बार-बार हिन्दू और बौद्ध दर्शन की तुलना आपके अवचेतन मन में जानबूझकर इंजेक्ट किया गया है। यदि यह सब आपको अकारण लगता है तो आप भोले नहीं हैं, बल्कि कुछ और हैं।
आप एकबार यशपाल की कालजयी उपन्यास "दिव्या" को पढ़िए। वैसे तो यह कथानक बौद्धकालीन घटनाओं पर आधारित है, लेकिन लेखक इसमें अपने वामपंथी विचारधारा के अनुकूल मातुल को सर्वश्रेष्ठ नायक के रूप में परोसता है। मातुल चार्वाकों के नास्तिक मत को ही व्यवहारिक बनाकर बोलने में दक्ष है। शुभ के तर्क मातुल की तरह हैं। शुभ लोगों की हत्याओं में रुचि लेता है। यहाँ यह मातुल से अलग हो जाता है, अन्यथा उसके जीवन दर्शन भी इहलोकवादी और सुखवादी है। मातुल के वे विचार, जो इहलोकवादी और सुखवादी हैं, जिसमें नारी को भी समान रूप से सुखभोग का सहचरी माना गया है, दिव्या को बहुत आकर्षित करता है और दिव्या राजपरिवार को तिलांजलि देकर मातुल जैसे एक सामान्य शिल्पकार को वरण करती है।
वैसे तो शुभ इसी सुखवादी दर्शन का प्रतिनिधित्व करता है। वह चार्वाकों की तरह इस सुख की प्राप्ति के लिए अनैतिकता को भी स्वीकार्य मानता है। चूँकि इसे अब्दुल के धर्म को पाकसाफ दिखाने के लिए प्रयोग करना था, इसलिए इसे इतना अधिक हिंसक बना दिया गया है। लाखों "अब्दुल" को एक काल्पनिक पात्र "शुभ" के द्वारा, हर धर्म में बुरे लोग हो सकते हैं यह स्थापित कर, वर्तमान समय में अब्दुल के धर्म पर चारों तरफ से हो रहे हमलों से बचाने का प्रयास किया गया है।
यह वेब सीरीज यहीं नहीं रुकता है कि सभी धर्म को बराबर मान लिया जाए। वह इससे एक कदम आगे जाकर इसमें काल्पनिक हिन्दू पात्र "शुभ" की तुलना में काल्पनिक बौद्ध पात्र "अनंत" को महान दिखाया गया है। अनंत को देखकर आपको भी मन में आयेगा कि मेरा बेटा हो तो अनंत जैसा हो, शुभ जैसा न हो। यह तुलना सिर्फ शुभ और अनंत की नहीं है, बल्कि यह तुलना हिन्दू दर्शन और बौद्ध दर्शन की है। इस वेब सीरीज में अंत में बौद्ध दर्शन की श्रेष्ठता स्थापित की गयी है जब विद्वानों और शास्त्रार्थों की धरती बनारस में हिन्दू समाज और लोक वंदित साधुओं द्वारा बौद्ध भिक्षु अनंत के सामने समर्पण करते हुए उसे कल्कि अवतार घोषित करते हुए अपना भगवान मान लिया गया है।
- राहुल सिंह राठौड़