Sai Dham Temple - Ahmedabad

Sai Dham  Temple - Ahmedabad Sai Dham Temple Is located at lal darwaja ,ahmedabad.

Youtube channelSai Dham mandir Laldarwaja Ahmedabad
23/05/2026

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Sai Dham mandir Laldarwaja Ahmedabad

23/05/2026
23/05/2026

ऊँ हनुमंतय शनेश्चराय नमः
सिंदूरदानम आयू वर्धनम
तेल दानम रोग हरणम
ऊँ नमो हनुमतेय भयभांजनाये
सुखम कुरू कुरू फट स्वाहा

जलबांधू जंजाल बाधू बाधू जल की काई
अग्नि माता तुझको बाधू
हनुमान तेरी दुहाई

सुर्य पुत्र दीघॅ दीहो विशाला छा शिवप्रियः
मंदा चारः प्रसन्नात्मा पीडा हरतुं मे शनि ॥

ब्रहमा मुरारी त्रिपुरांत कारी भानू शशि भौम गुरु बुधशषा
गुरुर शुक्रा शनि राहु केतवा सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु ॥

जय शनी देव महाराजसाडे साती को अनेक नाम है जैसे-साडे साती,सनिचरी,मुसिबती,आफत आदी | प्रस्तुत सृष्टी पर जोतिष शास्त्र का प्रभाव है ज्योतिष शास्त्र मे ग्रह जीवन कार्य संपन्न करनेवालो साधणो का एक समूह है | हरेक ग्रह कि ओर विशिष्ट जिम्मेदारी सोपी जाती है | सुख दु:ख कि आखं मिचौनी मनुष्य जीवन में होती रहती है,| ग्रहमान में ''शनी ग्रह दु:ख प्रदान करनेवाला के रूप में अनेक ज्योतिष ग्रंथो में अभिव्यक्त है ''| अर्थात कुछेक मात्र में यह सही है | न्याय तथा नितीमत्ता को महत्व देणे वाला हि साढे साती निर्माण करता है | साढे साती याने सात वर्ष का कालावधी | शनी सभी १२ राशी घुमने के लिये तीस वर्ष लेता है | यांनी एक राशी मी शनी ढाई वर्ष रेहता है | ग्रह गोचारी से जब मुल ग्रहो का योग मिलता है तब शुभाशुभ परिणामो कि प्राप्ती होती है | शनी को ग्रहमाला में छायामार्तंड संबोधन है | छाया ग्रह यानी जो ग्रह जिस राशी में से भ्रमण करता हो, उस राशी कि, पिछली राशी के ग्रह तथा आगे कि राशी को त्रस्त करता है व्ह छाया ग्रह है | यही विचार साढेसती में है | जब शनी जन्म राशी के बारहवे से द्वितीया मे भ्रमण करता है तब परी पूर्ण काल साढे साती का माना जाता है | शनी हर राशी के ३ ग्रहों में भ्रमण करता है इस प्रकार तीन ग्रहों मे शनी के कुल निवास को (२ | | x ३ = ७ | | वर्ष) साढेसाती कहते है | यांनी ये साढे सात वर्ष काफी तकलिफ़, आफत और मुसिबतो का कहलाया जाता है उसे हि जन मानस मे साढेसाती कहा जाता है|स्मरण रखे साढेसाती का जब असर होने लगता है तब व्यक्ति ने मंत्र रुपी नैया का सहयोग लेकर

Sai Dham Temple Gadipati
81539 98899
Laldarwaja Ahmedabad 1

21/05/2026

ॐ श्री साईनाथ की अखंड धूप आरती

साँई जी हिन्दू कहे हम बडे मुसलमान कहे हम
साँईं जी एक मूंग की दो फाड है कोन ज्यादा कोन कम

साँई जी मंदिर हो बेशक लाखो का मुसलमान कभी ना जाये
साँई जी मस्जिद हीरे जडी हो फिरभी हिन्दू को ना भाये

साँई जी मंदिर मस्जिद के ये झगडे
कब निपटे निपटाये

इस्से तो साँई जी आपका द्वार अछ्छा
सबका मालिक एक तो कहेलाय साँई जी ॥

साँई जी आंख वाला तेरी जोबन का तमाशा देखे,
साँई जी आंखवाला तेरा जो बनके तमाशा देखे । 🌹 🌹 🌹

तेरा मुखारविंद दिव्य न कर दूँ तो कहना ॥

तु मुझे अपने घर में बिठाकर तो देख
तेरे धर को स्वर्ग ना बनादुँ तो कहेना

तु मेरे धाम में रहकर तो देख
तेरे धर को तीर्थ ना कर दुँ तो कहेना

तु मेरे कदम पर चलकर तो देख
तेरे आगे ना चालू तो कहेना ॥

तु मेरा प्रसाद ग्रहण कर के तो देख
तेरे विचार पवित्र ना कर दुँ तो कहेना

तु मेरे पास आकर तो देख
तेरे सवॅ दुःख दुर ना कर दुँ तो कहेना

तु मेरी उपासना करके तो देख
तुझे कमॅयोगी ना बनादुँ तो कहेना

तु मेरी आरती गाकर तो देख
तेरी जोबन मे सरस्वती न भर दुँ तो कहना

तु मेरे नाम से दुखियों की सेवा करके तो देख
तेरे जिवन मे सुख शांति ना भर दुँ तो कहना ॥

तु मुझे चंदन का तिलक करके तो देख,
तेरे भाग्य का उदय ना कर दूँ तो कहना ॥
Sai Dham mandir
Gadipati
8153 998899
Laldarwaja Ahmedabad 1

16/05/2026

ऊँ हनुमंतय शनेश्चराय नमः
सिंदूरदानम आयू वर्धनम
तेल दानम रोग हरणम
ऊँ नमो हनुमतेय भयभांजनाये
सुखम कुरू कुरू फट स्वाहा

जलबांधू जंजाल बाधू बाधू जल की काई
अग्नि माता तुझको बाधू
हनुमान तेरी दुहाई

सुर्य पुत्र दीघॅ दीहो विशाला छा शिवप्रियः
मंदा चारः प्रसन्नात्मा पीडा हरतुं मे शनि ॥

ब्रहमा मुरारी त्रिपुरांत कारी भानू शशि भौम गुरु बुधशषा
गुरुर शुक्रा शनि राहु केतवा सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु ॥

जय शनी देव महाराजसाडे साती को अनेक नाम है जैसे-साडे साती,सनिचरी,मुसिबती,आफत आदी | प्रस्तुत सृष्टी पर जोतिष शास्त्र का प्रभाव है ज्योतिष शास्त्र मे ग्रह जीवन कार्य संपन्न करनेवालो साधणो का एक समूह है | हरेक ग्रह कि ओर विशिष्ट जिम्मेदारी सोपी जाती है | सुख दु:ख कि आखं मिचौनी मनुष्य जीवन में होती रहती है,| ग्रहमान में ''शनी ग्रह दु:ख प्रदान करनेवाला के रूप में अनेक ज्योतिष ग्रंथो में अभिव्यक्त है ''| अर्थात कुछेक मात्र में यह सही है | न्याय तथा नितीमत्ता को महत्व देणे वाला हि साढे साती निर्माण करता है | साढे साती याने सात वर्ष का कालावधी | शनी सभी १२ राशी घुमने के लिये तीस वर्ष लेता है | यांनी एक राशी मी शनी ढाई वर्ष रेहता है | ग्रह गोचारी से जब मुल ग्रहो का योग मिलता है तब शुभाशुभ परिणामो कि प्राप्ती होती है | शनी को ग्रहमाला में छायामार्तंड संबोधन है | छाया ग्रह यानी जो ग्रह जिस राशी में से भ्रमण करता हो, उस राशी कि, पिछली राशी के ग्रह तथा आगे कि राशी को त्रस्त करता है व्ह छाया ग्रह है | यही विचार साढेसती में है | जब शनी जन्म राशी के बारहवे से द्वितीया मे भ्रमण करता है तब परी पूर्ण काल साढे साती का माना जाता है | शनी हर राशी के ३ ग्रहों में भ्रमण करता है इस प्रकार तीन ग्रहों मे शनी के कुल निवास को (२ | | x ३ = ७ | | वर्ष) साढेसाती कहते है | यांनी ये साढे सात वर्ष काफी तकलिफ़, आफत और मुसिबतो का कहलाया जाता है उसे हि जन मानस मे साढेसाती कहा जाता है|स्मरण रखे साढेसाती का जब असर होने लगता है तब व्यक्ति ने मंत्र रुपी नैया का सहयोग लेकर

Sai Dham Temple Gadipati
81539 98899
Laldarwaja Ahmedabad 1

14/05/2026

अन्नदान ही महादान है

तु मुझे तेरी फरियाद सुनाकर तो देख,
मै तेरी हर फरियाद का मार्ग ना दिखा दूँ तो कहना ॥

तू तेरी निर्मल आँखो से मेरा दर्शन करके तो देख,
मै तुझे हर धर्म का अनुरागी ना बनादुँ तो कहेना ॥

तु मुझे एक धूप सली मे मेरा दर्शन करके तो देख,
मै हर धूप में तुझे मेरा अस्तित्व याद ना करा दुँ तो कहेना ॥

तु मेरे हर साँईं मंदिर मेें मदद रुप
बनके तो देख,
मै तेरा हर धड़ी मददगार ना बनूँ तो कहेना ॥

तु मेरे सामने तेरे दो हाथ जोड़ के प्रणाम करके तो देख,
मै तेरे हाथों से तेरे पर आनेवाले हर विध्नों को रोक न दूँ तो कहना ॥

तु तेरे मे मेरा अंश समझ के तो देख,
मै तुझे मेरी पहचान न करा दूँ तो कहना ॥

तु मेरी पदयात्रा मे मेरे साथ -साथ चलकर तो देख,
मै तुझे मेरी हर पदयात्रा में न बुलाऊँ तो कहेना ॥

तू ममेर पदयात्रीयों सेवा करके तो देख,
मै तेरी हर सेवा मेें न रहू तो कहेना ॥

Sai Dham mandir
Gadipati
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