Kaila Devi Temple Agra

Kaila Devi Temple Agra जय माँ राज राजेश्वरी कैला - चामुण्डा मॉं

जय मां राज राजेश्वरी कैला चामुंडा देवी जी
14/03/2026

जय मां राज राजेश्वरी कैला चामुंडा देवी जी

✦ कैला देवी मेले के लिए आगरा से चलेंगी 140 बसें✦ यूपी और राजस्थान रोडवेज की बैठक में तय हुई व्यवस्थाएं✦ आगरा से कैला देव...
11/03/2026

✦ कैला देवी मेले के लिए आगरा से चलेंगी 140 बसें

✦ यूपी और राजस्थान रोडवेज की बैठक में तय हुई व्यवस्थाएं

✦ आगरा से कैला देवी तक बस का किराया 270 रुपये निर्धारित

✦ 14 मार्च से शुरू होगा कैला देवी मेला, 3 अप्रैल तक चलेगा पर्व

✦ 20 से 29 मार्च तक रहेगी मेले की मुख्य भीड़

✦ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दोनों राज्यों की संयुक्त व्यवस्था

✦ ऊंचा नगला और गंगापुर सिटी मोड़ पर बनाए जाएंगे चेक पोस्ट

✦ मेले के लिए यूपी रोडवेज और राजस्थान रोडवेज ने किया समन्वय

24/11/2025
माता कैला देवी, करौली  राजस्थान यहाँ डकैत भी आकर करते है माँ काली की साधना – कैला देवी मंदिर सवाई माधोपुर के निकट राजस्थ...
23/09/2025

माता कैला देवी, करौली राजस्थान

यहाँ डकैत भी आकर करते है माँ काली की साधना – कैला देवी मंदिर सवाई माधोपुर के निकट राजस्थान के करौली जिले में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। कैला देवी मंदिर में चांदी की चौकी पर स्वर्ण छतरियों के नीचे दो प्रतिमाएं हैं। इनमें एक बाईं ओर उसका मुंह कुछ टेढ़ा है, वो ही कैला मइया है। दाहिनी ओर दूसरी माता चामुंडा देवी की प्रतिमा है। कैला देवी की आठ भुजाएं हैं। मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में ख्याति प्राप्त है।

उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में ख्याति प्राप्त कैला देवी मंदिर देवी भक्तों के लिए पूजनीय है, यहाँ आने वालों को सांसारिक भागमभाग से अलग अनोखा सुकून मिलता है। त्रिकूट मंदिर की मनोरम पहाड़ियों की तलहटी में स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा भोमपाल ने 1600 ई. में करवाया था। इस मंदिर से जुड़ी अनेक कथाएं यहाँ प्रचलित है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण के पिता वासुदेव और देवकी को जेल में डालकर जिस कन्या योगमाया का वध कंस ने करना चाहा था, वह योगमाया कैला देवी के रूप में इस मंदिर में विराजमान है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार पुरातन काल में त्रिकूट पर्वत के आसपास का इलाका घने वन से घिरा हुआ था। इस इलाके में नरकासुर नामक आतातायी राक्षस रहता था। नरकासुर ने आसपास के इलाके में काफ़ी आतंक कायम कर रखा था। उसके अत्याचारों से आम जनता दु:खी थी। परेशान जनता ने तब माँ दुर्गा की पूजा की और उन्हें यहाँ अवतरित होकर उनकी रक्षा करने की गुहार की। बताया जाता है कि आम जनता के दुःख निवारण हेतु माँ कैला देवी ने इस स्थान पर अवतरित होकर नरकासुर का वध किया और अपने भक्तों को भयमुक्त किया। तभी से भक्तगण उन्हें माँ दुर्गा का अवतार मानकर उनकी पूजा करते हुए आ रहे हैं। कैला देवी का मंदिर सफ़ेद संगमरमर और लाल पत्थरों से निर्मित है, जो स्थापत्य कला का बेमिसाल नमूना है।

माना जाता है कि मंदिर में स्थापित मूर्ति पूर्व में नगरकोट में स्थापित थी। विधर्मी शासकों के मूर्ति तोड़ो अभियान से आशंकित उस मंदिर के पुजारी योगिराज मूर्ति को मुकुंददास खींची के यहां ले आए। केदार गिरि बाबा की गुफा के निकट रात्रि हो जाने से उन्होंने मूर्ति बैलगाड़ी से उतारकर नीचे रख दी और बाबा से मिलने चले गए। दूसरे दिन सुबह जब योगिराज ने मूर्ति उठाने की चेष्टा की तो वह उस मूर्ति हिला भी नहीं सके। इसे माता भगवती की इच्छा समझ योगिराज ने मूर्ति को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया और मूर्ति की सेवा करने की जिम्मेदारी बाबा केदारगिरी को सौंप कर वापस नगरकोट चले गए।

माता कैला देवी का एक भक्त दर्शन करने के बाद यह बोलते हुए मंदिर से बाहर गया था कि जल्दी ही लौटकर फिर वापस आउंगा। कहा जाता है कि वह आज तक नहीं आया है। ऐसी मान्यता है कि उसके इंतजार में माता आज भी उधर की ही ओर देख रहीं है जिधर वो गया।

करौली में स्तिथ माँ कैला देवी के इस मंदिर में फिल्मी स्टाइल में वेश बदलकर डकैत आते हैं और मां कैला देवी की आराधना करते हैं। वे अपने लक्ष्य की साधना के लिए मां से मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरा होने पर फिर आते हैं। मां की कई घंटों साधना कर विजय घंटा चढ़ाते हैं और निकल जाते हैं।

करौली में कैला देवी मंदिर के बाहर और अंदर पुलिस का कड़ा पहरा रहता है। पुलिस को भनक भी लग जाती है कि डकैत आने वाले हैं, लेकिन बावजूद इसके डकैत आते हैं और पूजा कर निकल जाते हैं। भरपूर कोशिश के बावजूद डकैतों को रोक पाना पुलिस के बस में नहीं रहता। जैसे फिल्मों में पुलिस और डकैतों के बीच चोर-सिपाही का खेल प्रतिष्ठा का सवाल होता है, वैसे ही यहां की भी स्थिति रहती रही है।

मंदिर के बाहर प्रसाद की दुकान लगाने वालों ने बताया कि अब डकैत कम हो गए या सरेंडर कर चुके हैं, लेकिन क्षेत्र के कुख्यात डकैत भी यहां आते रहे हैं। इनमें करौली का राम सिंह डकैत, जगन गूर्जर, धौलपुर के बीहड़ों में अड्डा बनाने वाला औतारी और करौली के जंगलों का सूरज माली डकैत नियमित रूप से कैला देवी आते रहे हैं।

पुलिस भी उन्हें पकड़ने की हिम्मत कभी नहीं जुटा पाई। हालांकि, साधना के समय आने वाले डकैतों ने श्रद्धालुओं को कभी हानि नहीं पहुंचाई।

02/09/2025

कृपया चंद पैसों के लिए यात्रियों की जान से खिलवाड़ नहीं करें !
सभी टूर -ऑपरेटर आपकी जिम्मेदारी बनती है कि यात्रियों को रास्ते की सही स्थिति बताये , ना की चंद रुपयो के लिए यात्रियों को आपदा ग्रस्त रास्तो पर जबरदस्ती ले जाये !
यात्रीगण भी विशेष ध्यान दे यात्रा शुरु करने से पहले स्थानीय प्रशासन या पुलिस से अवश्य जानकारी लें !
https://uttaranchaltourism.org

28/03/2025

रेल प्रशासन द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि कैला देवी मेला मे यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करने हेतु गाड़ी संख्या - 01961/01962 आगरा छावनी-गंगापुर सिटी मेला विशेष गाड़ी का संचालन किया जा रहा है। जिसका विवरण निम्नवत हैं –

गाड़ी संख्या-01961/01962 आगरा छावनी - गंगापुर सिटी मेला विशेष गाड़ी (प्रतिदिन) -
आगरा छावनी से – 01961, दिनांक – 29.03.2025 से 12.04.2025 तक = 15 फेरे
गंगापुर सिटी से – 01962, दिनांक – 29.03.2025 से 12.04.2025 तक = 15 फेरे
संरचना – सामान्य-(04), शयनयान-(04) , एस एल आर डी –(02) = 10 डिब्बे
संचालन समय व ठहराव –
01961 आगरा छावनी -गंगापुर सिटी स्टेशन 01962 गंगापुर सिटी- आगरा छावनी
आगमन प्रस्थान आगमन प्रस्थान
-- 1645 आगरा छावनी 0330 --
1700 17.01 पथौली 0220 0225
1709 1710 मिढ़ाकुर 0155 0200
1718 1719 किरावली 0141 0146
1726 1727 सिंगारपुर हाल्ट 0133 0134
1734 1736 फतेहपुर सिकरी 0121 0126
1742 1743 औलेंडा हाल्ट 0114 0115
1750 1751 रूपबास 0102 0107
1759 1800 धनाखेड़ी हाल्ट 0053 0054
1807 1808 बंसी पहाड़पुर 0041 0046
1815 1816 नगलातुला हाल्ट 0033 0034
1823 1824 बंद बरेठा 0024 0026
1830 1831 बिरमबाद हाल्ट 0017 0018
1915 1918 बयाना 0008 0010
1928 1929 डुमरिया 2329 2330
1939 1940 फतेहसिंहपुरा 2312 2313
1955 2000 हिंडौन सिटी 2255 2300
2010 2012 श्री महाबीर जी 2240 2242
2029 2030 पिलोदा 2227 2228
2044 2045 छोटी उदई 2217 2218
2115 -- गंगापुर सिटी -- 2205

माँ राज राजेश्वरी कैला-चामुण्डा देवी जी के दिव्य दर्शन। शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर श्रीमति ज्योति जी पत्नी श्री धीरज...
16/10/2023

माँ राज राजेश्वरी कैला-चामुण्डा देवी जी के दिव्य दर्शन।

शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर श्रीमति ज्योति जी पत्नी श्री धीरज जी राजामण्डी आगरा के द्वारा मातारानी को पोशाक धारण करवाई गयी।

महामायी अपना आशीर्वाद पूरे परिवार पर बनाऐ रखे।

Address

Kalia Devi Temple ( Gupteshwar Nath Mahadev Mandir ) Behind Agarwal Dharmshala, Rajamandi Bazaar
Agra

Opening Hours

Monday 7am - 12pm
4pm - 9pm
Tuesday 7am - 12pm
Wednesday 7am - 12pm
Thursday 7am - 5pm
Friday 9am - 12pm
Saturday 7am - 12pm
Sunday 7am - 12pm

Website

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