जयगुरूदेव संगत आगरा

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जयगुरूदेव संगत आगरा बाबा जी का कहना है ।
शाकाहारी रहना है ।?

जयगुरुदेव नाम प्रभु का🙏🏽जयगुरुदेव 🙏🏽रज्जब का गजब"संत रज्जब मुसलमान थे। पठान थे। किसी युवती के प्रेम में थे। विवाह का दिन...
30/05/2017

जयगुरुदेव नाम प्रभु का
🙏🏽जयगुरुदेव 🙏🏽

रज्जब का गजब"

संत रज्जब मुसलमान थे। पठान थे। किसी युवती के प्रेम में थे। विवाह का दिन आ गया। बारात सजी। बारात चली। रज्जब घोड़े पर सवार। मौर बाँधा हुआ सिर पर। बाराती साथ है, बैंड बाजा है इत्र का छिड़काव है, फूलों की मालाएँ है। और बीच बाजार में अपनी ससुराल के करीब पहुंचने को ही थे। दस पाँच कदम शेष रह गये थे। प्रेयसी से मिलने जा रहे था। प्रेम तो तैयार था, जरा सा रूख बदलने भर की बात थी।

यह मौका ठीक मौका है। लोहा जब गर्म हो तब चोट करनी चाहिए। एक तरह से देखो तो यह मौका एक दम ठीक था। कि अचानक घोड़े के पास एक आदमी आया उसका पहनाव बड़ा अजीब था। कोई फक्कड़ दिखाई दे रहा था। बारात के सामने आ कर खड़ा हो गया। और उसने गौर से रज्जब को देखा। आँख से आँख मिली। वे चार आंखें संयुक्त हो गयी। उस क्षण में क्रांति घटी। वह आदमी रज्जब के होने वाला गुरु थे—दादू दयाल जी। और जो कहा दादू दयाल जी ने वे शब्द बड़े अद्भुत है। उन छोटे से शब्दों में सारी क्रांति छिपी है। दादू दयाल ने भर आँख रज्जब की तरफ देखा, आँख मिली ओर

दादू जी ने कहा—
"रज्जब तैं गज्जब किया, सिर पर बांधा मौर
आया था हरी भजन कुं, करे नरक की ठौर"

बस इतनी सी बात। देर न लगी, रज्जब घोड़े से नीचे कूद पड़ा, मौर उतार कर फेंक दिया, दादू के पैर पकड़ लिए। और कहा कि चेता दिया समय पर चेता दिया.... और सदा के लिए दादू के हो गये छाया की तरह दादू दयाल के साथ रहे रज्जब, उनकी सेवा में !!वे चरण उसके लिए सब कुछ हो गये। उन चरणों में उसने सब पा लिया। अद्भुत प्रेमी रज्जब।

जब दादू दयाल अंतर्धान हो गये।जब उन्होंने शरीर छोड़ा,तो तुम चकित हो जाओगे…..
शिष्य हो तो ऐसा हो।
रज्जब ने आँख बंद कर लीं। तो फिर कभी आँख नहीं खोली।कई वर्षों तक रज्जब जिंदा
रहे , दादू दयाल के मरने के बाद। लेकिन कभी आँख नहीं खोली।लोगों ने लाख समझाया ये बात ठीक नहीं है।लोग कहते कि आंखे क्यों नहीं खोलते ?तो रज्जब कहते देखने योग्य जो था उसे देख लिया, अब देखने को क्या है ? जो दर्शनीय था, उसका दर्शन कर लिया। उन आंखें में पूर्णता का सौंदर्य देख लिया। अब देखने योग्य क्या है इस संसार में !
🙏🏽जयगुरुदेव 🙏🏽

एक गुरू का दास रोज गुरू के द्वार पर जा कर रोज गुरू को पुकारा करता था लेकिन गुरू के दर्शन नहीं कर पाता था इसलिए वह हमेशा ...
02/05/2017

एक गुरू का दास रोज गुरू के द्वार पर जा कर रोज गुरू को पुकारा करता था लेकिन गुरू के दर्शन नहीं कर पाता था इसलिए वह हमेशा यही सोच कर चला जाता था कि शायद मेरी भक्ति भाव में कुछ कमी है इसलिए वो हर रोज बहुत ही प्रेम भाव से प्रभु के नाम का जाप करता और गुरू के दीदार किये बिना ही चला जाता था बहुत दिनों तक यह चलता रहा ,,,
एक दिन गुरू के दास से रहा नहीं गया उसने गुरू जी से पूछा कि गुरू जी ये आपके दर्शनों के लिए रोज सच्चे मन से आता है और आपको पता भी होता है तो आप इसको अपने दर्शनों से निहाल क्यों नहीं करते तो गुरू महाराज कहते हैं कि उससे ज्यादा तड़फ मुझे है मिलने की लेकिन जिस प्रेम भाव से वो प्रभु का नाम लेता है मैं छुप कर उसकी अरदास को सुनता रहता हूँ सिर्फ इसी डर से कहीं मेरे दर्शनों के बाद वो नहीं आया तो ऐसी प्रेम भरी अरदास कौन सुनाएगा मुझे इसकी अरदास बहुत अच्छी लगती है इसलिए मैं छुप कर सुनता रहता हूँ ये जरूरी नहीं कि हम रोज गुरू के चरणों में अरदास करते हैं तो गुरू हमारी सुनते नहीं हो सकता है कि गुरू को हमारी अरदास पसंद हो इसलिए बार बार सुनना चाहते हैं सतगुरू जी हमारी हर मोड़ पर संभाल करते हैं इसलिए हर हाल में जैसा भी वक्त हो हमें हर पल शुक्रराना करना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए ।
🙏

🙏जयगुरुदेव 🙏        जब चारो तरफ कोईरास्ता नजर  न आये, तब सच्चे मनसे  अपने  गुरु को याद  करो  ओरएक अंधे व्यक्ति की तरह अप...
17/04/2017

🙏जयगुरुदेव 🙏

जब चारो तरफ कोई
रास्ता नजर न आये, तब सच्चे मन
से अपने गुरु को याद करो ओर
एक अंधे व्यक्ति की तरह अपने आप
को गुरू के हवाले कर दो और, फरियाद करो ऐ मालिक ,अब में आपकी शरण मे हु जैसे चाहे वैसे
रख ,मालिक अपने आप सब करता
है, पर जरूरत है विश्वास ओर धीरज की..🍃🌸

🙏जयगुरुदेव 🙏

बाबा फरीद जी के बहुत सारे मुर्रीद थे।और अक्सर उनके मुर्रीद सत्संग सुनने बाबा जी के पास आया करते थे।एक बार हज़रत सत्संग कर...
12/04/2017

बाबा फरीद जी के बहुत सारे मुर्रीद थे।और अक्सर उनके मुर्रीद सत्संग सुनने बाबा जी के पास आया करते थे।एक बार हज़रत सत्संग कर रहे थे। तभी एक शिष्य ने उठ कर बाबा जी से प्रशन किया के बाबा जी मैंने आपके कई सत्संगों में सुना है।के जब सच्चे फ़क़ीरों को तानाशाहो द्वारा अलग अलग तरह की यातनायें दी गयी तब उनकी हालत इसके बिल्कुल विपरीत थी। जैसे प्रभु यीशु के हाथों में जब कील गाड़ दी गयी।उनके सिर पर कांटो का ताज पहना कर पुरे गाँव का चक्कर लगवाया गया तब प्रभु यीशु के मुंह से ये वचन कैसे निकले के “”हे परमपिता यह सब लोग सच्चाई से अनजान है।इन्हें नहीं पता के यह क्या कर रहे है इनको माफ़ कर देना।और फिर आपने एक सत्संग में मनसूर का वाकया भी सुनाया था।के मन्सूर को जब सूली पर चढ़ा रहे थे।तो उन्होंने जल्लाद को देख कर कहा था।के ऐ अल्लाह मैंने तुमको पहचान लिया है।आज तू इस जल्लाद के रूप में आया है।मुर्रीद ने कहा के ऐ मेरे मुर्शद मेरा सवाल यह है के ऐसी अवस्था में इंसान या तो गुस्से से भर जायेगा या डर जायेगा।मगर इनकी हालत तो कुछ और ही है। इस पर बाबा फरीद जी ने उस मुर्रीद को एक कच्चा नारियल देकर कहा की इसको फोड़ दो मगर ध्यान रहे के इसके अंदर का हिस्सा (गिरी) नहीं टूटनी चाहिए।इस पर मुर्रीद ने कहा हज़रत नारियल कच्चा है।अगर चोट मारूँगा तो अवश्य अंदर का हिस्सा टूट जायेगा।फिर बाबा जी ने कहा कोई बात नहीं तुम पका हुआ नारियल ले आओ।बाबा फरीद जी ने कहा के अब तो अंदर का हिस्सा बच जायेगा ना।मुर्रीद ने कहा जी बिल्कुल पके नारियल को फोड़ने से अंदर का हिस्सा बच जायेगा।सत्संग में बैठे हुए सब लोग ये देख रहे थे।जब वोह मुर्रीद उस नारियल को तोड़ने लगा तो बाबा जी ने कहा रुक जाओ कुछ नहीं तोडना है।बाबा जी ने कहा के मैंने जो कुछ कहा क्या काफी नहीं था।क्या समझ में नहीं आया।मुर्रीद ने कहा हज़रत मैं तो मूर्ख हु आप दया करो।।बाबा जी ने कहा के देखो बेटा जब नारियल कच्चा होता है तो नारियल का खोल अंदर के हिस्से से चिपका होता है।कुछ समय बाद गिरी और खोल धीरे धीरे अलग हो जाते है।और फिर खोल पर की गयी चोट गिरी तक नहीं पहुंचती। ऐसे ही आत्मा गिरी है तो शरीर उसका खोल है।संत,, महात्मा,,पीर पैगम्बर,,अपने जीवन में अभ्यास करके इस शरीर के खोल को आत्मा से अलग कर लेते है। और फिर धर्मराज के द्वारा भेजा हुआ यम रूपी हथौड़ा शरीर पर तो मार करता है।पर आत्मा को स्पर्श नहीं कर पाता।जिससे आत्मा निर्भय हो जाती है।और मौत का डर खत्म हो जाता है।और अभ्यास से परमात्मा का इश्क़ आत्मा में उतर जाता है।और द्वैत खत्म हो जाती है।जिससे हर प्राणी में परमात्मा नज़र आता है।और अगर हर प्राणी में परमात्मा है तो फिर कोई उनसे नफरत क्यों करेगा।इसीलए संत हमेशा परमात्मा से संसार के लिए माफ़ी और दया मांगते है। आए हम भी बाबा फरीद जी की इस सीख से फायदा उठाये।और अपने संत सतगुरु के दिए हुए सिमरन का अभ्यास करके हम भी इस खोल को गिरी से अलग करें।ताकि हमारे अंदर मौत के डर और मौत के समय होने वाली पीड़ा से बच जाये। कबीरा। जब हम आये जगत में जग हँसे हम रोये। ऐसी करनी कर चलें।हम हँसे जग रोये।।
सभी सतसंगी भाई बहनों को हाथ जोड़ कर जयगुरुदेव जी..!!

🙏जयगुरुदेव🙏बाबा जी का कहना है ।शाकाहारी रहना है ।।🌞🌞एक परिवार मे 4 सदस्य थे ।पति-पत्नी दो बच्चे थे। सभी एक साथ बाजार गए।...
09/02/2017

🙏जयगुरुदेव🙏
बाबा जी का कहना है ।
शाकाहारी रहना है ।।

🌞🌞एक परिवार मे 4 सदस्य थे ।
पति-पत्नी दो बच्चे थे। सभी एक साथ बाजार गए। बाजार खत्म करने के बाद वापसी के समय जिस रास्ते से आ रहे उसी रास्ते से कुछ लोग मृत शरीर (लाश) ले के जा रहे थे ।

बच्चे थोड़े चंचल थे । रास्ते मे आने जाने वाले साधनो मे हाथ लगा देते । इसी बीच अचानक उनका हाथ मृत शरीर ले जाते लोगों मे लग गया ।
माँ ने देख लिया और तुरंत थप्पड़ लगाते हुए बोली वो लोग अशुध्द है मृत शरीर लेके श्मशान जा रहे अब तुम्हें नहाना पड़ेगा। थोड़ा ठंडी ही थी उसे नहलाया गया ।

कुछ दिनों बाद , पिता के साथ वो लड़का बाजार गया । पिता जी उस बच्चे के सामने मांस खरीदे । लड़का सब देख रहा था। मांस लेकर घर पहुंचे। घर मे सब बन के तैयार हुआ और डाईनिंग टेबल पर खाने के लिए बैठे।
माँ मीठी आवाज मे बोली बेटा खाओ। हम नहीं खाएगे बेटे ने जवाब दिया ।
माँ ने पूछा क्यों ?
लड़के का जवाब सुनते ही माता पिता अपना सर झुका लिए।
लड़के का जवाब :- माँ मै उस दिन केवल अन्जाने मे मृत शरीर से मेरा हाथ लग गया तो आपने मुझे मारा और अशुध्द बोलकर नहलाया, और आज पैसे देकर किसी मजबूर बकरे को कटवा कर लाए । और आपने उसे घर मे बनाया । और फिर आप खुद खा भी रही हो और हमें भी खिला रही हो। दोनो तो मृत शरीर ही हैं फिर ऐसा क्यूँ? क्या हमारा पेट श्मशान है?
माँ ने sorry बोला और सब खाना कचरे में फेंक दिया।

भावार्थ :- मांस एक तामसी वस्तु है जिसे केवल राक्षस (शैतान लोग) खाते थे। सभी जानते हुए भी खाते हैं। बहुत लोग तो Faishion बोल के खाते हैं। कभी किसी सद्ग्रन्थ में कही इसका समर्थन करते हुए देखा है या सुना है।अगर ये अच्छी चीज होती तो नवरात्रि या अन्य पवित्र अवसरों पर क्यों नही खाते हैं।
कहा भी जाता है -
जैसा अन्न , वैसा मन
कभी ये नही सोचें कि केवल बड़े लोग ही सीखने योग्य बाते कह सकते है । हम अगर सीखना चाहे तो किसी बच्चे से भी सीख सकते है ।
🙏🙏🙏🙏
शाकाहारी अपनाये बिमारी भगाये।

परम् पूज्य महाराज जी के नव वर्श 2017 में होने वाले कार्यक्रमों की सूचीजयगुरुदेवपरम् पूज्य महाराज जी के नव वर्श 2017 में ...
08/01/2017

परम् पूज्य महाराज जी के नव वर्श 2017 में होने वाले कार्यक्रमों की सूची
जयगुरुदेव
परम् पूज्य महाराज जी के नव वर्श 2017 में होने वाले कार्यक्रमों की सूची

दिनांक 1 जनवरी 2017
रामलीला मैदान, सारसोले बस डिपो के पीछे, सैक्टर 12,
नेरूल पश्चिम, नेरूल रेलवे स्टेशन के पास, नवी मुम्बई
सत्संग का समय - सायं 5 बजे

दिनांक - 3 जनवरी 2017
यवरडा निकट पूना, महाराश्ट्र प्रातः 11 बजे

दिनांक - 6 जनवरी 2017
आस्का, पल्ली छक, सरकारी हाॅस्पिटल के सामने,
पटनायक चैराहा, जिला गन्जाम (उड़ीसा)
दोपहर: 12 बजे

दिनांक - 8 जनवरी 2017
लोइंग महापल्ली बटमूल काॅलेज के सामने, खेल मैदान
जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
सम्पर्क: 9329224301, 9893724326 प्रातः 11 बजे

दिनांक - 9 जनवरी 2017
भाले राय खेल मैदान के पास, चांपा- जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
सम्पर्क:9755902250, 8435278843 प्रातः 11 बजे

दिनांक - 10 जनवरी 2017
गायत्री मंदिर के पास, तिल्दा नेवरा, जिला रायपुर छत्तीसगढ़
सम्पर्क: 9826189303, 9425525578 प्रातः 11 बजे

दिनांक - 11 जनवरी 2017
बलदेवपुर तह. खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
सम्पर्क: 9165956619 प्रातः 11 बजे

दिनांक - 12 जनवरी 2017
पैण्ड्री आश्रम तह. धमधा जिला दुर्ग छत्तीसगढ़
सम्पर्क: 9009950242, 8827277588 प्रातः 11 बजे

जयगुरुदेव नाम प्रभु का आजादी चाहिए तो मरना सीखो,,,,,,,,,,,एक समय की बात है किसी गाँव में एक आदमी अपने प्रिय तोते के साथ ...
08/12/2016

जयगुरुदेव नाम प्रभु का

आजादी चाहिए तो मरना सीखो,,,,,,,,,,,

एक समय की बात है किसी गाँव में एक आदमी अपने प्रिय तोते के साथ रहता था।एक बार वोह आदमी किसी काम के लिए साथ वाले गाँव जा रहा था।तभी उसके तोते ने कहा के मालिक आप जिस गाँव में जा रहें है।वहां मेरा गुरु तोता रहता है।आप मेरा एक सन्देश मेरे गुरु तोते तक पहुंचा देंगे।उस आदमी ने कहा "हाँ हाँ क्युं नहीं बताओ क्या कहना है।तोते ने कहा की आप मेरे गुरु तोते से कहना की""आजाद हवाओं में सांस लेने वालो को,,बंदी तोते का सलाम। जब आदमी दूसरे गाँव पहुंचा तो वोह अपने प्यारे तोते के गुरु तोते से भी मिला और उसने तोते का सन्देश गुरुतोते को सुनाया।मगर जैसे ही उसने तोते का सन्देश सुनाया।गुरुतोता तड़पने लगा तड़पते तड़पते क्षण भर में गुरुतोते ने अपने प्राण त्याग दिए।यह देख कर वोह आदमी बड़ा हैरान हुआ। जब वोह आदमी अपने घर वापिस आया तो तोते ने पूछा आपने मेरा सन्देश मेरे गुरुतोते को दिया तो इस पर उस आदमी ने सारा क़िस्सा सुना दिया।यह किस्सा सुनते ही वोह तोता भी तड़पने लगा और तड़पते तड़पते वोह भी मर गया।आदमी बड़ा हताश हुआ।और उसने तोते का अंतिम संस्कार करने के लिए उसको पिंजरे से बाहर निकाला।जब आदमी का ध्यान तोते से हट गया।तोता मौके का फायदा उठा कर उड़ गया।उस तोते ने जाते जाते उस आदमी को बताया के मेरे गुरुतोते ने मेरे लिए यह सन्देश भेजा था।के अगर आजादी चाहते हो तो मरना सीखो।।।।।।

यह कहानी बड़ी छोटी है मगर इसमें बड़ी गहरी बात छिपी है। जैसे उस तोते को गुरुतोते ने सन्देश भेजा। वैसे ही हमें भी हमारे गुरु ने यह सन्देश दिया है। और दे रहे है ।के अगर जीवन के दुःख तकलीफो से आवागवन के चक्कर से धर्मराज के हिसाब से जमो की मार से आजादी चाहते हो तो।सूरत शबद योग का अभ्यास करके जीते जी मरना सीखो।

एक बार कुछ जिज्ञासु सतगुरु अर्जुन देव जी महाराज के पास गए और उनके पास जाकर उन्होंने कहा के महाराज श्री गुरु ग्रन्थ साहिब...
10/01/2016

एक बार कुछ जिज्ञासु सतगुरु अर्जुन देव जी महाराज के पास गए और उनके पास जाकर उन्होंने कहा के महाराज श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में बार बार जिक्र आता है।के ऐ जीव "जागो" यह जागने का अवसर है।महाराज इस बात को कृप्या सिंध ज़रा खोल कर समझाएं,,,,जिज्ञासुओं की यह बात सुन कर सतगुरु अर्जुन देव जी महाराज ने फरमाया,,,,,,

।। नैनों नींद पर दृष्ट विकार।।
।। रसना सोयी लोभ मीठे स्वाद।।
।। कर्ण सोये पर निंद विचार ।।
।। मन सोया माया बिस्माथ ।।

गुरु अर्जुन देव जी महाराज ने बाणी के संदर्भ से समझाया के ऐ जीव जब तुम माता के गर्भ में था।तब तुम्हारी अंदर की आँखें जाग रही थी।वहां पर यह प्रकाश सवरूप परमात्मा को देखता है।और अमृत को पीता है।और उस प्रकाश में यह देखता है अपना पुराना इतिहास और उस इतिहास में यह देखता है ।के मैं लाखो लाखो जन्मों से माता के गर्भ में लटकता रहा हूँ।और अब यहाँ क्यों लटकाया गया हूँ।इसका इसको पूरा पता होता है।ज्ञान होता है।और फिर यह सोचता है।के प्यार के लायक एक यह चीज़ है भक्ति के लायक एक यह चीज़ है। और वहां यह जीव हाथ जोड़ कर उस प्रकाश सवरूप परमात्मा से प्रार्थना करता है के हे कृपालु मुझे इस कुम्भी नरक से निकालिये। मैं बाहर जाकर आपको श्वास श्वास सिमरुंगा।उस प्रकाश ने इस जीव को सिमरन करने के लिए पूर्व जन्म के कर्मो को भोगने के लिए।कर्मो के इस चक्कर को ख़त्म करने के लिए इसको बाहर निकालता है।।
बाहर आकर इसने माँ को देखा बाप को देखा कुछ बड़ा हुआ तो यारो दोस्तों के साथ चला विषय विकारो को भोगा।जो आँखें अंदर प्रकाश को देख रही थी।वोह दुनिया के रंग तमाशे देख कर सो गयी।
जो जीब अंदर अमृत को चख रही थी वोह बाहर आकर दुनिया में खट्टे मीठे स्वादों में लग गयी और नाम के अमृत की तरफ सो गयी
जो कान अंदर शबद को सुन रहे थे नाद को कीर्तन को सुन रहे थे।दुनिया में आकर उसमे निंदा चुगली और उस्तत की मोम पड़ गयी।और कान भी शबद की तरफ सो गए।,
गुरु साहिब ने समझाया के ऐ जीव यह जो तेरा मन है जो तेरी सब इन्द्रियों का शिरोमणि है।वोह इस दुनिया में माया के जादू में खो गया है।और ऐ जीव तेरी सब इंद्रिया भी सो गयी है

और आखिर में गुरु साहिब ने फ़रमाया के

जनम जनम का सोया मनुआ
सतगुरु शबद सुन जागे

ऐ जीव यह जो तेरा मन जनम जनम से शबद की तरफ प्रकाश की तरफ सोया पड़ा है। अब तुमको अवसर मिला है।अब तुमको पूरा संत सतगुरु मिला है।तू शबद सवरूप सतगुरु से नाम का ज्ञान लेकर उसका अभ्यास करने से जाग सकता है।और तू अपने घर वापिस जा सकता है

जयगुरुदेवतू भी शम्स,,मैं भी शम्स,,,,,,,,,,शम्स तबरेज़ का पूरा नाम हज़रत मुहम्मद बिन मुलक्कब-ब-शेख शम्सुद्दीन तबरेज़ि था।शम्...
02/01/2016

जयगुरुदेव

तू भी शम्स,,मैं भी शम्स,,,,,,,,,,

शम्स तबरेज़ का पूरा नाम हज़रत मुहम्मद बिन मुलक्कब-ब-शेख शम्सुद्दीन तबरेज़ि था।
शम्स तबरेज़ एक घुमक्कड़ फ़कीर थे।एक शहर से दूसरे शहर और सराय में बैठ कर ध्यान और सिमरन किया करते थे।एक दिन शम्स तबरेज़ घूमते घूमते मुल्तान आ निकले।मुल्तान गर्मी, गर्द,कब्रिस्तान और फकीरों का शहर था।वहां पर फ़कीरों में बुहाबुलहक्क् बहुत मशहूर थे।उनको खुदा दोस्त के नाम से भी जाना जाता था।जैसे ही इन्होंने शम्स को देखा उनको पता चल गया के यह तो फकीरों का फ़कीर है।अगर यह यहाँ रहा तो हमें कौन पूछेगा।खुदा दोस्त ने एक दूध का प्याला ऊपर तक भर कर एक मुर्रीद के हाथो शम्स को भिजवाया इसका यह मतलब था के मुल्तान पहले ही आलम फ़ाज़िल फकीरो से भरा पड़ा है। यहाँ तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं।आगे से शम्स तबरेज़ ने कुछ गुलाब की पंखुड़िया दूध में डाल कर वापिस भेज दी।इसका यह मतलब था।मैं भी इन पंखुड़ियों की तरह यहाँ रह लूंगा।शम्स तबरेज़ का खुदा दोस्त से रूहानियत पर काफी मतभेद था।कुछ दिनों तक खुदा दोस्त ने शम्स को बर्दाश्त किया।मगर शम्स तबरेज़ का ""वोह ही सब कुछ है""का मतलब फकीरो की समझ में नहीं आया।और उन्हें काफिर ठहरा दिया।लोगो ने उन्हें खाना देना बंद कर दिया।मुल्ला भड़क उठे थे।की यह अपने को खुदा से बड़ कर कहता है।
इसकी खाल खींच लेनी चाहिए।शम्स तबरेज़ ने खुद अपने हाथों से अपनी खाल निकालनी शुरू कर दी।
सब लोग इनका रूप देखकर डरने लगे।एक दिन शम्स तबरेज़ किसी आदमी के घर के आगे से निकल रहे थे तो उसको फकीर पर दया आ गयी।मगर उसको मुल्लाओ का फ़तवा भी याद था तो उसने कुछ कच्चे दानेे ज़मीन पर गिरा दिए।ताकि फ़कीर को खाने को भी कुछ मिल जाये और फतवे से भी बच जाये।शम्स तबरेज़ ने वोह चने इकट्ठे किये और सब दरवाजो पर जाकर आवाज लगाई के कोई मेरे कच्चे चने भून कर देगा।मगर किसी ने दरवाजा नहीं खोला। जब किसी ने भी शम्स तबरेज़ के चने नहीं भुने तो शम्स तबरेज़ ने सूरज की तरफ देखा और कहा तू भी शम्स और मैं भी शम्स आ और मेरे चने भून दे।इतना कहना था के सूरज नीचे आना शुरू हो गया मुल्तान में इतनी तपिश बड़ गयी के लोगो ने चीखना चिलाना शुरू कर दिया।गर्मी से बचने के लिए लोगो ने चनाब में छलांगे लगानी शुरू कर दी। सब लोगो ने मिल कर शम्स से अपने किये की माफ़ी मांगी। शम्स ने सबको माफ़ कर दिया। और शम्स ने सब ठीक कर दिया।

शम्स तबरेज़ खुदा को अपने अंदर ढूंढते थे।
वोह कहते थे के वोह कैसा मजनू था जो लैला पर आशिक़ हो गया था।मैं भी कितना अज़ीब हूँ जो खुद पर आशिक़ हो गया हूँ।
मेरा न कहीं मकाँ है। मेरा न कहीं निशाँ है। मैं न तन हूँ नाही जान हूँ।
मैं उसी से हूँ।वोह मुझसे है।
मैं कैसा पक्षी हूँ।जो अंडे के अंदर उड़ने लगा हूँ।। "" हूँ""ही आधी है।। "हूँ " ही अंत है। अगर मैंने कोई भी सांस उसके बिना ली है तो मैं अपनी जिंदगी से शर्मिंदा हूँ।
मगर ऐ शम्स तबरेज़ तू फिर भी मस्त है।इस पानी और मिटटी की काया में।।क्योंकि मुझमे प्रेम ही प्रेम जो भरा है।

31/12/2015

🙏🏻🙏🏻 जय गुरुदेव प्रेमियों🙏🏻🙏🏻
जयपुर के सत्संग में हुजूर ने स्वयं फरमाया- कि दिल्ली का कार्यक्रम हो जाने दो उसके बाद परिवर्तन नजर आयेगा , नया नजारा उसके बाद देखने को मिलेगा , तबाही का मंजर देखने को मिलेगा
।। जयगुरुदेव।।

30/12/2015

॥जयगुरुदेव नाम प्रभु का॥युग परिवर्तक परम संतबाबा जयगुरुदेव जीमहाराजजी के अमोलकअमृत वचन :-1 - प्रेमियों , जो काम रूहानी तरक्कीका बताया गया है। करते रहो, लगे रहो।पार तो आप सब जीवों को लगाना ही है।2 - मांस, मछली, अण्डा व शराब कीदुकानें आपको भविष्य में देखने को नहींमिलेगी।3 - मुझे तुम अच्छी तरह देख लो।जब तुम नामदान लेकर साधना करोगे और इस शरीर से अलग हो करस्वर्ग में, बैकुण्ठ में या और ऊपर केलोकों की सैर करोगे तो यही चेहरातुमको उधर भी मिलेगा। फिर तुम्हें धोखा किस बात का ? करोगे तो पावोगे, नहींकरोगे तो नहीं पावोगे।4 - मेरे झोले में बहुत सारे जीव - जन्तु पड़े हैं, तुम मेंढ़क की तरह कितनीछलांग लगाओ पर आकर गिरोगे उसी में। कहीं भीम भाग कर चले जावो, किन्तु घेरकर यहीं लाकर पटक दिए जावोगे। तुम्हारा कहीं और ठिकाना लगने वालानहीं है।5 - संत किसी से डरते नहीं और उनकेमुरीदों को भी किसी से डरना नहीं चाहिए। गुरुहर वक्त मददगार है।6 - हमारे दिमाग में बहुत से नियम हैं, अगर सब बता दूँ तो सब लोगनक़ल करने लग जाएंगे।7 - मैं हजारों में कहूँ , लाखों में कहूँ या अकेले में कहूँ किसी से कुछ भी कहूँ, मुझे सब बातें याद रहती हैं। कोई बात भूलता नहीं हूँ।8 - मैं इन प्रेमियों को कितना प्रेम दे रहा हूँ, यह आपको समय बतलाएगा। जिस तरह राम नें हनुमान को प्रेम किया और राम एक ही हनुमान बना पाए। ठीकउसी प्रकार से मैं इन प्रेमियों को प्रेम दूँगा और आपको समय बतलाएगा की मेरे पास कितने- कितने हनुमाननिकलेंगे। [ 27 दिसम्बर 1977 ]9 - बिना तोडफोड व हड़ताल केभारत में गाय का काटना बंद करदिया जाएगा।10 - भारत में नया विधान बनेगा,इसमे दो राय नहीं। भारतकी राजधानी दिल्ली से हटकर50 से 100 मील दूर चलीजाएगी और उस भूमि पर बड़ी -बड़ी महान आत्माओं द्वारा मुहूर्त होगा। महात्मा उस भूमि का शोधन करेंगें। वहां पर बैठ कर काम का संचालन होगा।11 - भजनानंदियों का भोजन एकवक्त होना चाहिए। पेट हल्कारहेगा, तभी मन और सूरत का सिमटाव ऊपर की तरफ रहेगा।12 - मैं अगर तुमको याद न करूँ तो तुम मुझको याद नहीं कर सकते। पहले मैं याद करता हूँ तब तुम मुझे याद करते हो।13 - चींटी की तरह बन जावो।चींटी छोटी होती है, दीन रहती है और महलों में चली जाती है। कभीभी अहंकार मत करना। दीनता मालिक को प्यारी है।14 - इस दुनिया में जिसे तुम समझते हो कि मेरा अजीज है तो समझ लो वह तुम्हारा अजीज ही तुमको बहुत रुलाएगा।

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