Bah Bateshwar

Bah Bateshwar Bateshwar 101 Temple Complex, Chambal Safari and Animal Fair, Visit our Webpage : http//bateshwar.blogspot.in
Bateshwar, Bah, Agra, Uttar Pradesh, India.

बटेश्वर के मंदिर सुबह के सूरज की रौशनी में यमुना में पड़ते अपने प्रतिबिम्ब से एक मोहक चित्रमाला प्रस्तुत करते है ऐसा आइना तो पास ही स्थित विश्व आश्चर्य ताजमहल के पास भी नहीं है पूरा परिदृश्य बेहद सुन्दर और शांतिपूर्ण है।

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16/02/2026

बिजौली गांव सुर्खियों में ! #सुनीलशेट्टी

🕯️ 30 जनवरी - बलिदान दिवस 🇮🇳🙏 महात्मा गाँधी को शत-शत नमन !भदावर के किसान-कवि श्री उल्फत सिंह ‘निर्भय’ के लोकगीत अपनी अलग...
30/01/2026

🕯️ 30 जनवरी - बलिदान दिवस 🇮🇳
🙏 महात्मा गाँधी को शत-शत नमन !

भदावर के किसान-कवि श्री उल्फत सिंह ‘निर्भय’ के लोकगीत अपनी अलग पहचान रखते हैं। उनका यह राष्ट्रीय रसिया सन १६३० के स्वतन्त्रता सम्राम के दिनो में लिखा गया था 🎶 वाह, #फतेहाबाद, #किरावली से लेकर फतेहपुर सीकरी तक इनके गीतों की धूम रही थी। लोकमन में #स्वतंत्रता की चेतना जगाने वाले ये शब्द :-

तेरे पापनु कौ अब पापी, काहु दिन भंडा फूटैगो।
रावन करि-करि पाप सिरानौ, मिटि गयौ कंस कौ नाम-निसानौ।
राजा बेन की सी गति है जई, कर्मनु फूटैगौ ॥ तेरो…

खून सरदनु कौ रग लावै, तेरी हस्तिएं खाक मिलावै।
खरा खोज जब तक न मिटै, तेरो पिंड न छूटैगौ ॥ तेरो…

बम चलाई चाह गोली चलाई लै, वे अपराधिनु फाँसी चढ़ाई लै।
चाहै कितनिहुँ जेल भरौ, नहिं ताँतौ टूटैगौ ॥ तेरो…

कैसेहुँ करि ले आज धधाके, आखिर जाइ जैसे सींग गधा के।
तू तौ पापी जाइगौ ही, जस ‘निरभै’ लूटैगौ॥ तेरो…

आज़ादी के बाद उनके लोकप्रिय “लाँगुरिया” की पुरानी किन्तु प्रभावशाली घुन पर रचा गया यह गीत पूरे #भदावर अंचल में फिर गूँज उठा था।

गाँधी बाबा ने बचाय लई मोरे वारे लाँगुरिया।
अपने बापू ने बचाय लई मोरे वारे लाँगुरिया॥
अंग्रेजन की सत्ता भारी, रहे न एकहुँ लत्ता सारी,
गोरी फौजें सब भगाय दइ मोरे वारे लाँगुरिया।
गाँधी बाबा ने बचाय लई मोरे वारे लाँगुरिया॥

🌾 यह गीत केवल लोकधुन नहीं, बल्कि गाँव-गाँव में पहुँची आज़ादी की आवाज़ था।

🕊️ स्वाधीनता संग्राम के समस्त ज्ञात-अज्ञात क्रांतिकारियों को सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।

जय शहीद दिवस ✨
जय हिन्द 🇮🇳

श्री भगीरथ प्रसाद दीक्षित (1884–1976)भदावर और बटेश्वर की माटी के एक महान विद्वान, शिक्षक, लेखक और उच्चकोटि के हिन्दी समी...
29/01/2026

श्री भगीरथ प्रसाद दीक्षित (1884–1976)

भदावर और बटेश्वर की माटी के एक महान विद्वान, शिक्षक, लेखक और उच्चकोटि के हिन्दी समीक्षक। आपका जन्म ग्राम मई, बटेश्वर में हुआ, आपका हिन्दी साहित्य, शोध और समीक्षा में आपका योगदान अमूल्य है। बटेश्वर का वर्णन, महाकवि भूषण तथा रीति-कालीन काव्य पर आपके शोधपूर्ण लेख हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।

प्रयाग में शिक्षादीक्षा प्राप्त कर आपने कोटा (राजस्थान), लखनऊ और काशी जैसे विद्या-केन्द्रों में प्रधानाध्यापक, शिक्षक, प्रोफेसर तथा शोधकर्ता के रूप में हिन्दी की सेवा की। नागरी प्रचारिणी सभा, हिन्दी साहित्य सम्मेलन और अनेक प्रतिष्ठित विद्यालयों से आपका सक्रिय संबंध रहा।

हिन्दी साहित्य के उच्चकोटि के समीक्षक, शोधकर्ता और लेखक के रूप में महाकवि भूषण, बटेश्वर का वर्णन तथा रीति-कालीन काव्य पर आपका कार्य विशेष रूप से स्मरणीय है। आपकी कृतियाँ और शोधपूर्ण लेख हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।

आप सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी श्री गेंदालाल दीक्षित के छोटे भाई थे। अपने भाई के अनुरूप क्रान्तिकारी प्रवृत्तियों में भाग लेने, संकटों से जूझने और बाधाओं से टकराने का आपका स्वभाव बन गया था। आपने विद्वत्ता के साथ-साथ वैचारिक साहस और राष्ट्रीय चेतना को भी जीवनभर आगे बढ़ाया। आपका निधन 8 जनवरी 1976 को लखनऊ में हुआ।

भदावर और बटेश्वर को आप पर गर्व है। नमन🙏

#भदवारगौरव

बसंत पंचमी के आते ही जब भदावर में फागोत्सव की आहट सुनाई देती है, तो स्मृतियों में सबसे पहले जिनका स्वर गूँजता है, वे हैं...
23/01/2026

बसंत पंचमी के आते ही जब भदावर में फागोत्सव की आहट सुनाई देती है, तो स्मृतियों में सबसे पहले जिनका स्वर गूँजता है, वे हैं भदावरी फाग के अमर लोकगायक **सुखई (सुखलाल)**। ग्राम **शुकलपुरा** (अटेर के पास) में जन्मे और जीवन की अंतिम साँस **खेड़ा मालौनी** (खेड़ा राठौर के पास) में लेने वाले सुखई केवल गायक नहीं थे, वे अपने समय, समाज और जनता की चेतना के संवाहक थे। कायस्थ समुदाय से आए सुखई की पैतृक आजीविका पटवारीगीरी थी - दिन में राजस्व अभिलेखों की ज़िम्मेदारी और रात में फाग–होली का सुर - यही उनकी दिनचर्या थी। कहा जाता है कि कभी-कभी सरकारी काग़ज़ों पर भी होली की पंक्तियाँ उतर आती थीं; यही कलानिष्ठा और आत्मसम्मान उन्हें अंततः पटवारीगीरी छोड़ लोकगायन को समर्पित कर गया।

सुखई ने अपने जीवनकाल में हज़ारों होलियाँ रचींअधिकांश मौखिक परंपरा में, बिना किसी मुद्रित संकलन के। उनकी होलियों में एक ओर महाभारत के चक्रव्यूह, सुभद्रा–अभिमन्यु संवाद जैसे पौराणिक आख्यान हैं, तो दूसरी ओर महँगाई, किसान-दुर्दशा, भूकम्प जैसी आपदाएँ और स्वदेशी आंदोलन व चरखे से जुड़ी राष्ट्रीय चेतना। श्रृंगार और विरह का विप्रलम्भ भी है, और साथ ही ऐसी भविष्यद्रष्टा संकेतात्मक पंक्तियाँ भी, जिनमें द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व की आहट तक सुनाई देती है। वे भदावर के लोकजीवन की धड़कन थे - खेत-खलिहानों से चौपाल तक जिनकी होलियाँ गूँजती थीं।

**1944 ई.** में उनके देहावसान की तिथि उनके शिष्यों द्वारा गाई गई विलाप-होली से स्पष्ट होती है। दुर्भाग्य यह कि मौखिक परंपरा के कारण उनकी अमूल्य रचनाएँ आज विस्मृति की ओर हैं। फिर भी, सुखई भदावरी होली के शिखर लोकगायक के रूप में - युगधर्मी, जनपक्षधर और भविष्यद्रष्टा कलाकार - आज भी फाग के हर सुर में जीवित हैं। 🌸🎶

भदावर क्षेत्र के समृद्ध और विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक मानचित्र का विस्तृत वर्णन
10/01/2026

भदावर क्षेत्र के समृद्ध और विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक मानचित्र का विस्तृत वर्णन

स्वतंत्रता सेनानी शोभाराम चंद्रवंशी आपका जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद की बाह तहसील के बटेश्वर ग्राम में हुआ था। आप एक ...
08/01/2026

स्वतंत्रता सेनानी शोभाराम चंद्रवंशी

आपका जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद की बाह तहसील के बटेश्वर ग्राम में हुआ था। आप एक ऐसी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए थे जहाँ ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध विद्रोह की भावना प्रबल थी। प्रारंभिक संघर्ष - आपने 1930 के नमक सत्याग्रह में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके कारण आपको पहली बार गिरफ्तार किया गया और कठोर कारावास व अर्थदंड की सजा दी गई,। बटेश्वर की क्रांति में आपके जीवन की सबसे ऐतिहासिक घटना 1943 में बटेश्वर स्थित जंगलात कोठी पर तिरंगा फहराना था। ब्रिटिश सत्ता के प्रतीक पर यह हमला एक साहसिक कृत्य था, जिसे प्रशासन ने 'सशस्त्र विद्रोह' के समान माना और आपको सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में मृत्यु-दंड में बदल दिया गया। इतना ही नहीं, ब्रिटिश सरकार ने आपकी संपूर्ण संपत्ति जब्त कर ली, जिससे आपका आश्रित परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया। आप 1947 में देश के स्वतंत्र होने पर रिहा तो हुए, लेकिन आपको खोया हुआ सम्मान और जब्त संपत्ति वापस नहीं मिली। आपने अपना शेष जीवन गुमनामी और साधारण परिस्थितियों में व्यतीत किया।

ऐसे महान क्रांतिकारी का निधन 8 जनवरी 2000 को हुआ। एक सादे उदाहरण से समझें तो, शोभाराम चंद्रवंशी उस नींव के पत्थर की तरह थे, जो जमीन के नीचे दबकर पूरे भवन (स्वतंत्र भारत) का भार तो उठाता है, लेकिन ऊपर से दिखाई नहीं देता। उन्होंने अपना सब कुछ खोकर देश की आजादी की नींव को मजबूत किया। उनकी स्वतंत्रता की गाथा पूर्ण व न्यायपूर्ण बन सके इस आशा के साथ पुण्यतिथि पर भावभीन श्रद्धांजलि व कोटि कोटि नमन।

क्रांतिकारी नमन।

नव वर्ष की शुभकामनाएँ !
01/01/2026

नव वर्ष की शुभकामनाएँ !

25/12/2025
जय बटेश्वरनाथ महादेव
18/12/2025

जय बटेश्वरनाथ महादेव

Jai Bateshwar Nath.
18/12/2025

Jai Bateshwar Nath.

🔥 भोगाँव और मैनपुरी की धरती फिर सुर्खियों में...!आज के अख़बार में खबर है - भोगाँव (मैनपुरी) में तैनात डीएसपी ऋषिकांत शुक...
05/11/2025

🔥 भोगाँव और मैनपुरी की धरती फिर सुर्खियों में...!

आज के अख़बार में खबर है - भोगाँव (मैनपुरी) में तैनात डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला को ₹100 करोड़ की संपत्ति के मामले में निलंबित किया गया है। कहा जा रहा है, ये मामला कानपुर के एक बड़े उगाही रैकेट से जुड़ा है।

24/10/2025

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